नई दिल्ली: अगर आप 12वीं के बाद कॉरपोरेट सेक्टर में एक प्रोफेशनल करियर बनाना चाहते हैं, तो Company Secretary यानी CS एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह सिर्फ कॉमर्स स्टूडेंट्स तक सीमित करियर नहीं है। मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास करने वाले विद्यार्थी इस प्रोफेशनल कोर्स की ओर आगे बढ़ सकते हैं। कंपनी सेक्रेटरी की भूमिका किसी कंपनी में कॉरपोरेट लॉ, कानूनी अनुपालन, कॉरपोरेट गवर्नेंस, बोर्ड मीटिंग और रेगुलेटरी मामलों से जुड़ी होती है। यह कोर्स Institute of Company Secretaries of India (ICSI) द्वारा संचालित किया जाता है। अगर आप भी CS बनने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले इसके पूरे रास्ते, योग्यता, परीक्षा और ट्रेनिंग को समझना जरूरी है। CS बनने के लिए कौन-कौन से चरण पूरे करने होते हैं? 12वीं के बाद CS की पढ़ाई शुरू करने वाले विद्यार्थियों को सामान्य तौर पर इन चरणों से गुजरना होता है: CSEET (Company Secretary Executive Entrance Test) CS Executive Programme प्रैक्टिकल ट्रेनिंग CS Professional Programme इन सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद विद्यार्थी कंपनी सेक्रेटरी के रूप में करियर की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। CSEET क्या है? पहले CS कोर्स के शुरुआती स्तर को Foundation Programme के नाम से जाना जाता था, लेकिन ICSI ने अब इसकी जगह CSEET लागू किया है। 12वीं के बाद CS की पढ़ाई शुरू करने वाले विद्यार्थियों को निर्धारित पात्रता पूरी करने के बाद CSEET के रास्ते आगे बढ़ना होता है। वहीं, ग्रेजुएशन के बाद CS की पढ़ाई शुरू करने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रवेश का रास्ता अलग हो सकता है और उन्हें शुरुआती स्तर की परीक्षा से छूट मिलने के प्रावधान लागू हो सकते हैं। CS Executive में क्या पढ़ना होता है? CSEET के बाद अगला चरण CS Executive Programme है। यह CS की पढ़ाई का महत्वपूर्ण स्तर है, जिसमें विद्यार्थियों को कंपनी कानून, कॉरपोरेट से जुड़े नियमों और अन्य प्रोफेशनल विषयों की जानकारी दी जाती है। इस स्तर पर विद्यार्थियों को निर्धारित मॉड्यूल और विषयों की परीक्षा पास करनी होती है। परीक्षा की तैयारी में कॉन्सेप्ट समझने के साथ-साथ कानून और नियमों को नियमित रूप से पढ़ना महत्वपूर्ण होता है। CS Professional है अंतिम स्तर CS Professional Programme CS कोर्स का अंतिम शैक्षणिक चरण है। इस स्तर पर विद्यार्थियों को कॉरपोरेट और प्रोफेशनल क्षेत्र से जुड़े उन्नत विषयों की पढ़ाई करनी होती है। Professional Programme के निर्धारित मॉड्यूल और पेपर सफलतापूर्वक पास करने के बाद विद्यार्थी ट्रेनिंग और अन्य जरूरी प्रोफेशनल औपचारिकताओं को पूरा करके CS के रूप में करियर आगे बढ़ा सकते हैं। करीब 21 महीने की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग CS कोर्स में सिर्फ किताबों और परीक्षाओं की पढ़ाई ही नहीं होती। विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी करनी होती है, जिसमें उन्हें वास्तविक कॉरपोरेट वातावरण में काम से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी और कौशल सीखने का मौका मिलता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ट्रेनिंग की अवधि करीब 21 महीने हो सकती है। हालांकि ट्रेनिंग और अन्य प्रोफेशनल आवश्यकताओं के मौजूदा नियम ICSI के अनुसार जांचना जरूरी है। CS Course के लिए क्या है योग्यता? CS की पढ़ाई के लिए विद्यार्थी का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना जरूरी है। केवल कॉमर्स स्ट्रीम के विद्यार्थियों तक यह कोर्स सीमित नहीं है। हालांकि कॉमर्स बैकग्राउंड वाले विद्यार्थियों को अकाउंटिंग, बिजनेस और कॉमर्स से जुड़े कुछ कॉन्सेप्ट पहले से परिचित हो सकते हैं, लेकिन साइंस और आर्ट्स स्ट्रीम के विद्यार्थी भी पात्रता पूरी करने पर CS की पढ़ाई कर सकते हैं। इस करियर में सफलता के लिए नियमित अध्ययन, कानून और नियमों को समझने की क्षमता, धैर्य और निरंतर तैयारी महत्वपूर्ण है। CS के बाद कहां मिल सकता है करियर का मौका? कंपनी सेक्रेटरी बनने के बाद कॉरपोरेट सेक्टर में कई तरह की भूमिकाओं के अवसर मिल सकते हैं। CS प्रोफेशनल्स कंपनी के कॉरपोरेट लॉ, कानूनी अनुपालन, कॉरपोरेट गवर्नेंस, बोर्ड मीटिंग, रेगुलेटरी अफेयर्स और कंपनी से जुड़े वैधानिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बड़ी कंपनियों और प्रोफेशनल सर्विस फर्मों में भी CS से जुड़े अवसर मिल सकते हैं। कॉरपोरेट सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में Deloitte, PwC, EY और KPMG जैसी बड़ी प्रोफेशनल सर्विस फर्मों में संबंधित भूमिकाओं के अवसर तलाशे जा सकते हैं। CS कोर्स पूरा करने में कितना समय लगता है? 12वीं के बाद CS की पढ़ाई शुरू करने पर इसे पूरा करने में लगभग चार साल या उससे अधिक समय लग सकता है। वास्तविक अवधि विद्यार्थी की परीक्षा पास करने की गति, ट्रेनिंग और लागू प्रोफेशनल आवश्यकताओं पर निर्भर करती है। CS की परीक्षाएं आम तौर पर जून और दिसंबर के सत्रों में आयोजित की जाती हैं। किसी स्तर पर परीक्षा पास नहीं होने की स्थिति में कोर्स पूरा करने में अतिरिक्त समय लग सकता है। CS किस तरह के विद्यार्थियों के लिए बेहतर विकल्प है? अगर आपको कंपनी कानून, कॉरपोरेट गवर्नेंस, नियम-कायदे, कानूनी अनुपालन और बिजनेस से जुड़े मामलों में रुचि है, तो CS आपके लिए एक उपयोगी करियर विकल्प हो सकता है। हालांकि सिर्फ डिग्री हासिल करने के उद्देश्य से इस कोर्स में प्रवेश लेने के बजाय इसकी पढ़ाई और प्रोफेशनल जिम्मेदारियों को समझना जरूरी है। लगातार पढ़ाई और अपडेटेड कानूनों व नियमों की जानकारी इस क्षेत्र में लंबे समय तक आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण है।
Best Trending Courses After 12th: 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आगे कौन-सा कोर्स चुना जाए, जिससे अच्छी नौकरी, बेहतर सैलरी और भविष्य में ग्रोथ की मजबूत संभावनाएं मिलें। आज के डिजिटल दौर में केवल पारंपरिक करियर विकल्पों तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। टेक्नोलॉजी, इंटरनेट और डिजिटल इकोनॉमी के तेजी से बढ़ने के साथ कई ऐसे प्रोफेशन सामने आए हैं, जिनकी मांग भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में लगातार बढ़ रही है। अगर आप 12वीं के बाद ऐसा करियर चुनना चाहते हैं जिसमें फुल-टाइम नौकरी के साथ-साथ फ्रीलांस काम करने का भी मौका मिले, तो ये पांच कोर्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। 1. डिजिटल मार्केटिंग (Digital Marketing) डिजिटल मार्केटिंग आज सबसे तेजी से बढ़ते करियर सेक्टरों में से एक है। लगभग हर कंपनी अपने बिजनेस को ऑनलाइन बढ़ाने के लिए SEO एक्सपर्ट, सोशल मीडिया मैनेजर, कंटेंट मार्केटर और परफॉर्मेंस मार्केटिंग प्रोफेशनल्स की तलाश कर रही है। क्या काम करना होता है? SEO के जरिए वेबसाइट की Google रैंकिंग बढ़ाना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मैनेज करना Google Ads और Meta Ads चलाना ईमेल मार्केटिंग और ऑनलाइन ब्रांडिंग करना कंटेंट और डिजिटल कैंपेन तैयार करना फ्रीलांस कहां करें? Upwork Fiverr Freelancer PeoplePerHour LinkedIn Contra Toptal (अनुभवी प्रोफेशनल्स के लिए) कमाई फुल-टाइम: ₹3 लाख से ₹18 लाख+ प्रति वर्ष (अनुभव और स्किल के अनुसार) पार्ट-टाइम/फ्रीलांस: लगभग ₹15,000 से ₹2 लाख+ प्रति माह 2. जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) यदि आपको न्यूज़, वीडियो, कैमरा, लेखन या डिजिटल कंटेंट में रुचि है, तो BJMC एक शानदार विकल्प हो सकता है। डिजिटल मीडिया के विस्तार के साथ कंटेंट क्रिएटर्स, रिपोर्टर्स, वीडियो एडिटर्स और कॉपीराइटर्स की मांग लगातार बढ़ रही है। क्या काम करना होता है? न्यूज़ रिपोर्टिंग वीडियो एडिटिंग एंकरिंग डिजिटल कंटेंट क्रिएशन कॉपीराइटिंग पब्लिक रिलेशंस (PR) फ्रीलांस कहां करें? Upwork Fiverr LinkedIn Contra Medium Substack YouTube (स्वतंत्र कंटेंट क्रिएशन) कमाई फुल-टाइम: ₹2.5 लाख से ₹12 लाख+ प्रति वर्ष पार्ट-टाइम/फ्रीलांस: ₹10,000 से ₹1.5 लाख+ प्रति माह 3. डेटा साइंस और डेटा एनालिटिक्स अगर आपकी रुचि गणित, लॉजिक और डेटा एनालिसिस में है, तो यह वर्तमान समय के सबसे हाई-डिमांड करियर में से एक है। लगभग हर बड़ी कंपनी डेटा के आधार पर बिजनेस निर्णय ले रही है। क्या काम करना होता है? डेटा का विश्लेषण करना रिपोर्ट और डैशबोर्ड तैयार करना बिजनेस ट्रेंड पहचानना मशीन लर्निंग और प्रेडिक्टिव एनालिसिस में सहायता करना फ्रीलांस कहां करें? Upwork Toptal Freelancer Kaggle LinkedIn कमाई फुल-टाइम: ₹6 लाख से ₹35 लाख+ प्रति वर्ष पार्ट-टाइम/फ्रीलांस: ₹30,000 से ₹4 लाख+ प्रति माह 4. UI/UX और ग्राफिक डिजाइनिंग यदि आप क्रिएटिव हैं और डिजाइनिंग में रुचि रखते हैं, तो UI/UX और ग्राफिक डिजाइनिंग आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। वेबसाइट, मोबाइल ऐप और डिजिटल ब्रांडिंग में इन प्रोफेशनल्स की भारी मांग है। क्या काम करना होता है? वेबसाइट और ऐप इंटरफेस डिजाइन करना लोगो डिजाइन सोशल मीडिया क्रिएटिव बनाना ब्रांडिंग और विजुअल आइडेंटिटी तैयार करना फ्रीलांस कहां करें? Fiverr Upwork 99designs Dribbble Behance Contra कमाई फुल-टाइम: ₹4 लाख से ₹20 लाख+ प्रति वर्ष पार्ट-टाइम/फ्रीलांस: ₹20,000 से ₹3 लाख+ प्रति माह 5. साइबर सिक्योरिटी डिजिटल दुनिया के विस्तार के साथ साइबर हमलों और डेटा चोरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों की मांग सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है। क्या काम करना होता है? नेटवर्क सिक्योरिटी एथिकल हैकिंग सिक्योरिटी ऑडिट सर्वर और वेबसाइट सुरक्षा साइबर अटैक रोकना फ्रीलांस कहां करें? HackerOne Bugcrowd Synack Upwork Freelancer कमाई फुल-टाइम: ₹5 लाख से ₹40 लाख+ प्रति वर्ष पार्ट-टाइम/फ्रीलांस: ₹30,000 से ₹5 लाख+ प्रति माह (स्किल और प्रोजेक्ट के आधार पर) क्या ये कोर्स पार्ट-टाइम भी किए जा सकते हैं? इन पांचों क्षेत्रों में ऑनलाइन सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स उपलब्ध हैं। पढ़ाई के दौरान ही इंटर्नशिप, पार्ट-टाइम जॉब और फ्रीलांस प्रोजेक्ट लेकर अनुभव और कमाई दोनों शुरू की जा सकती है। करियर चुनने से पहले रखें इन बातों का ध्यान अपनी रुचि और स्किल के अनुसार कोर्स चुनें। केवल सैलरी देखकर निर्णय न लें। लगातार नई टेक्नोलॉजी और टूल्स सीखते रहें। मजबूत पोर्टफोलियो और LinkedIn प्रोफाइल तैयार करें। इंटर्नशिप और लाइव प्रोजेक्ट्स पर जरूर काम करें। आज के समय में सही स्किल, निरंतर सीखने की इच्छा और व्यावहारिक अनुभव आपको भारत ही नहीं, बल्कि ग्लोबल मार्केट में भी बेहतरीन करियर दिला सकते हैं। यदि आप 12वीं के बाद भविष्य सुरक्षित करने वाला करियर तलाश रहे हैं, तो ये पांचों विकल्प आने वाले वर्षों में सबसे अधिक अवसर देने वाले क्षेत्रों में शामिल माने जा रहे हैं।
नई दिल्ली: 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिकांश छात्रों और उनके अभिभावकों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि आगे कौन-सा कोर्स चुना जाए, जिससे बेहतर करियर और अच्छी नौकरी के अवसर मिल सकें। पहले जहां अधिकांश छात्र इंजीनियरिंग, मेडिकल या सामान्य ग्रेजुएशन को ही प्राथमिकता देते थे, वहीं अब बदलते समय के साथ रोजगार का बाजार भी तेजी से बदल रहा है। बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में हेल्थकेयर, आईटी, कृषि, हॉस्पिटैलिटी और स्किल-बेस्ड इंडस्ट्री का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में कई ऐसे प्रोफेशनल कोर्स सामने आए हैं, जिनकी मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इनमें रोजगार की संभावनाएं भी मजबूत मानी जा रही हैं। अगर आपने 12वीं पास कर ली है और अपने भविष्य को लेकर सही फैसला लेना चाहते हैं, तो ये कोर्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। 1. पैरामेडिकल कोर्स: हेल्थ सेक्टर में बढ़ रही मांग देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ प्रशिक्षित पैरामेडिकल प्रोफेशनल्स की जरूरत लगातार बढ़ रही है। बिहार और झारखंड में भी नए अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और डायग्नोस्टिक सेंटर खुलने से इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। 12वीं (साइंस) के बाद छात्र इन कोर्सों का चयन कर सकते हैं— DMLT (डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी) एक्स-रे टेक्नोलॉजी रेडियोलॉजी ऑपरेशन थिएटर टेक्निशियन फिजियोथेरेपी इन कोर्सों के बाद सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों, लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों में नौकरी के अच्छे अवसर मिलते हैं। 2. आईटी और कंप्यूटर कोर्स: डिजिटल दुनिया में बढ़ रहे अवसर डिजिटल इंडिया, ऑनलाइन सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के कारण आईटी सेक्टर लगातार विस्तार कर रहा है। अगर आपकी रुचि कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी में है, तो ये कोर्स आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं— BCA डेटा एनालिटिक्स साइबर सिक्योरिटी वेब डेवलपमेंट सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट क्लाउड कंप्यूटिंग इन क्षेत्रों में देश के साथ-साथ विदेशों में भी रोजगार के अवसर मौजूद हैं। इसके अलावा फ्रीलांसिंग और वर्क फ्रॉम होम जैसी संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। 3. एग्रीकल्चर और फूड टेक्नोलॉजी: कृषि आधारित राज्यों में बेहतर भविष्य बिहार और झारखंड मुख्य रूप से कृषि प्रधान राज्य हैं। ऐसे में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इस क्षेत्र में छात्र निम्नलिखित कोर्स कर सकते हैं— B.Sc Agriculture फूड टेक्नोलॉजी डेयरी टेक्नोलॉजी हॉर्टिकल्चर इन कोर्सों के बाद सरकारी विभागों, कृषि अनुसंधान संस्थानों, फूड प्रोसेसिंग कंपनियों और एग्री-बिजनेस सेक्टर में करियर बनाया जा सकता है। 4. होटल मैनेजमेंट और टूरिज्म: सर्विस सेक्टर में बढ़ते अवसर पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी उद्योग लगातार विकसित हो रहा है। होटल, एयरलाइन, ट्रैवल एजेंसी, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में प्रशिक्षित युवाओं की मांग बनी रहती है। 12वीं के बाद छात्र इन क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं— होटल मैनेजमेंट ट्रैवल एंड टूरिज्म फूड प्रोडक्शन हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट इस क्षेत्र में देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। 5. नर्सिंग और हेल्थकेयर: हमेशा बनी रहती है डिमांड हेल्थकेयर ऐसा क्षेत्र है जहां प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता कभी कम नहीं होती। छात्र इन कोर्सों का चयन कर सकते हैं— B.Sc Nursing GNM ANM बिहार और झारखंड में नए मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के खुलने से प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार की अच्छी संभावनाएं उपलब्ध हैं। 6. स्किल-बेस्ड और वोकेशनल कोर्स: कम समय में रोजगार की तैयारी हर छात्र लंबी अवधि की पढ़ाई नहीं करना चाहता। ऐसे छात्रों के लिए स्किल-बेस्ड और वोकेशनल कोर्स बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं— इलेक्ट्रिशियन फिटर वेल्डर ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग सोलर टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रॉनिक्स आईटीआई और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के ये कोर्स कम समय में रोजगार योग्य कौशल प्रदान करते हैं और उद्योगों में इनकी अच्छी मांग रहती है। कोर्स चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान? विशेषज्ञों के अनुसार केवल ट्रेंड देखकर कोर्स का चयन नहीं करना चाहिए। छात्रों को अपनी रुचि, योग्यता, भविष्य में रोजगार की संभावनाएं, कोर्स की गुणवत्ता और संस्थान की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए। सही कोर्स का चुनाव न केवल बेहतर नौकरी दिला सकता है, बल्कि लंबे समय में सफल करियर की मजबूत नींव भी बन सकता है।
12वीं के बाद करियर चुनना किसी भी छात्र के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला होता है। खासकर साइंस स्ट्रीम के छात्रों के सामने कई आकर्षक विकल्प होते हैं। इनमें फार्मेसी और बायोटेक्नोलॉजी दो ऐसे क्षेत्र हैं, जो पिछले कुछ वर्षों में तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। दोनों ही फील्ड्स हेल्थकेयर, मेडिकल साइंस और टेक्नोलॉजी से जुड़ी हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका, करियर अवसर और भविष्य की दिशा अलग-अलग है। ऐसे में सही चुनाव आपके रुचि क्षेत्र, स्किल्स और भविष्य के लक्ष्य पर निर्भर करता है। फार्मेसी और बायोटेक्नोलॉजी में क्या है अंतर? फार्मेसी क्या है? Pharmacy दवाइयों के निर्माण, परीक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और उनके सुरक्षित उपयोग से जुड़ा विज्ञान है। इस क्षेत्र में यह सिखाया जाता है कि दवाएं कैसे बनाई जाती हैं, उनका शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है और उन्हें मरीजों तक कैसे पहुंचाया जाता है। फार्मेसी का मुख्य फोकस दवा उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं पर होता है। बायोटेक्नोलॉजी क्या है? Biotechnology जीव विज्ञान और तकनीक का संयोजन है। इसमें जीवित कोशिकाओं, सूक्ष्मजीवों, डीएनए और जेनेटिक तकनीकों का उपयोग करके नए उत्पाद और समाधान विकसित किए जाते हैं। वैक्सीन निर्माण, जीन एडिटिंग, डीएनए परीक्षण, कृषि सुधार और कैंसर रिसर्च जैसे क्षेत्र बायोटेक्नोलॉजी का हिस्सा हैं। फार्मेसी क्यों चुनें? 1. जल्दी नौकरी के अवसर बी.फार्मा (B.Pharm) या डी.फार्मा (D.Pharm) करने के बाद छात्र अस्पतालों, दवा कंपनियों और हेल्थकेयर संस्थानों में नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। 2. खुद का व्यवसाय शुरू करने का मौका फार्मेसी की पढ़ाई पूरी करने के बाद मेडिकल स्टोर या दवा वितरण व्यवसाय शुरू करने का अवसर भी मिलता है, जो इसे अन्य कई कोर्सों से अलग बनाता है। 3. सरकारी नौकरी के विकल्प इस क्षेत्र में ड्रग इंस्पेक्टर, सरकारी फार्मासिस्ट, क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर और रेगुलेटरी अफेयर्स विशेषज्ञ जैसी नौकरियों के अवसर उपलब्ध हैं। 4. स्थिर करियर दवाइयों की मांग हमेशा बनी रहती है, इसलिए फार्मेसी को अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर करियर विकल्प माना जाता है। बायोटेक्नोलॉजी क्यों चुनें? 1. भविष्य की तकनीकों से जुड़ा क्षेत्र जीनोमिक्स, पर्सनलाइज्ड मेडिसिन, बायोफार्मास्यूटिकल्स और कैंसर रिसर्च जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है, जिससे बायोटेक्नोलॉजी की मांग लगातार बढ़ रही है। 2. अंतरराष्ट्रीय अवसर अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन और अन्य विकसित देशों में बायोटेक्नोलॉजी विशेषज्ञों की भारी मांग है। रिसर्च और इनोवेशन आधारित करियर बनाने वालों के लिए यह क्षेत्र बेहतरीन माना जाता है। 3. कई उद्योगों में रोजगार बायोटेक्नोलॉजी केवल हेल्थकेयर तक सीमित नहीं है। इसमें कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यावरण संरक्षण, कॉस्मेटिक्स और बायोफ्यूल जैसे क्षेत्रों में भी अवसर मौजूद हैं। 4. रिसर्च में करियर यदि आपको प्रयोगशाला में काम करना, नई खोज करना और वैज्ञानिक अनुसंधान में रुचि है, तो यह क्षेत्र आपके लिए उपयुक्त हो सकता है। सैलरी और करियर ग्रोथ फार्मेसी में शुरुआती नौकरी अपेक्षाकृत जल्दी मिल सकती है और आय स्थिर रहती है। वहीं बायोटेक्नोलॉजी में शुरुआत में कुछ पदों पर वेतन कम हो सकता है, लेकिन उच्च शिक्षा और रिसर्च अनुभव के साथ कमाई की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। आपके लिए कौन-सा विकल्प बेहतर है? फार्मेसी चुनें यदि: आपको केमिस्ट्री और मेडिसिन में रुचि है। पढ़ाई के बाद जल्दी नौकरी चाहते हैं। खुद का मेडिकल स्टोर या बिजनेस शुरू करना चाहते हैं। स्थिर और सुरक्षित करियर की तलाश में हैं। बायोटेक्नोलॉजी चुनें यदि: आपको रिसर्च और लैब वर्क पसंद है। नई तकनीकों और वैज्ञानिक खोजों में रुचि है। आगे एमटेक, एमएस या पीएचडी करना चाहते हैं। विदेश में करियर बनाने का सपना देखते हैं।
आज के समय में करियर सिर्फ पारंपरिक डिग्री तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आपके स्किल, इंटरेस्ट और बदलते ट्रेंड्स पर निर्भर करता है। 12वीं के बाद सही कोर्स चुनना छात्रों के लिए सबसे अहम निर्णय होता है, और अब कई ऐसे यूनिक और ट्रेंडिंग विकल्प मौजूद हैं जो आपको भीड़ से अलग पहचान दिला सकते हैं। अगर आप भी कुछ हटकर करना चाहते हैं, तो ये 10 कोर्स आपके लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। फूड टेस्टिंग एंड सेंशरी साइंस Food Science से जुड़ा यह कोर्स खाने के स्वाद, टेक्सचर और क्वालिटी का वैज्ञानिक विश्लेषण सिखाता है। FMCG कंपनियों में इसकी अच्छी मांग है और शुरुआती सैलरी 2.5 से 3.5 लाख रुपये सालाना हो सकती है। गेम डिजाइन एंड डेवलपमेंट Game Design युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस क्षेत्र में शुरुआत में 3-7 लाख और अनुभव के साथ 15-30 लाख रुपये तक की कमाई संभव है। एविएशन मैनेजमेंट एयरलाइन और एयरपोर्ट ऑपरेशंस में रुचि रखने वालों के लिए यह बेहतरीन विकल्प है। इस कोर्स में मैनेजमेंट, सिक्योरिटी और कस्टमर सर्विस की ट्रेनिंग दी जाती है। न्यूरोसाइंस Neuroscience एक चुनौतीपूर्ण लेकिन बेहद संभावनाओं से भरा फील्ड है। इसमें करियर बनाने के लिए मेडिकल बैकग्राउंड (MBBS) के बाद स्पेशलाइजेशन जरूरी होता है। डिजिटल मार्केटिंग और UI/UX डिजाइन Digital Marketing और User Experience Design आज के डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते करियर ऑप्शन हैं। कम समय में स्किल सीखकर अच्छी कमाई की जा सकती है। जेनेटिक इंजीनियरिंग Genetic Engineering एक 4 साल का बीटेक कोर्स है। इसमें रिसर्च और हेल्थ सेक्टर में शानदार करियर के अवसर मिलते हैं। चॉकलेट मेकिंग एंड कंफेक्शनरी Confectionery में शॉर्ट टर्म कोर्स करके आप खुद का बिजनेस शुरू कर सकते हैं या बड़े ब्रांड्स के साथ काम कर सकते हैं। पर्यावरण विज्ञान Environmental Science में करियर बनाने वालों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई अवसर मिलते हैं। यह फील्ड तेजी से उभर रहा है। फोटोग्राफी Photography एक क्रिएटिव करियर है, जहां मीडिया, एडवरटाइजिंग और फ्रीलांसिंग से अच्छी कमाई संभव है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) Artificial Intelligence आज के समय का सबसे तेजी से बढ़ता सेक्टर है। भारत ही नहीं, विदेशों में भी AI एक्सपर्ट की भारी मांग है। बदलते दौर में करियर की नई सोच इन सभी कोर्स से साफ है कि आज का करियर विकल्प सिर्फ डॉक्टर-इंजीनियर तक सीमित नहीं है। अगर आप अपने इंटरेस्ट और स्किल के अनुसार सही दिशा चुनते हैं, तो ये यूनिक कोर्स आपके भविष्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।
आज के दौर में तेजी से बढ़ती Hospitality Industry ने युवाओं के लिए करियर के नए दरवाजे खोल दिए हैं। अगर आपको लोगों से मिलना-जुलना पसंद है, नई जगहों पर काम करने का शौक है और एक ग्लैमरस करियर की तलाश है, तो होटल मैनेजमेंट आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। कम फीस में शुरू होने वाला यह कोर्स आपको देश ही नहीं, विदेशों में भी शानदार नौकरी और मोटी सैलरी का मौका दे सकता है। क्या है होटल मैनेजमेंट? होटल मैनेजमेंट एक प्रोफेशनल कोर्स है, जिसमें होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट और अन्य हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़े हर पहलू की ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें कस्टमर सर्विस से लेकर फूड प्रोडक्शन, हाउसकीपिंग और फ्रंट ऑफिस मैनेजमेंट तक की बारीकियां सिखाई जाती हैं। यह कोर्स न केवल स्किल डेवलपमेंट पर फोकस करता है, बल्कि आपको एक ऐसा प्रोफेशनल बनाता है जो किसी भी परिस्थिति में ग्राहकों को बेहतरीन अनुभव दे सके। क्यों बढ़ रही है इस फील्ड की डिमांड? भारत में टूरिज्म और होटल इंडस्ट्री तेजी से विस्तार कर रही है। छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज तक नए होटल, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट्स खुल रहे हैं। ऐसे में प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि होटल मैनेजमेंट आज युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय करियर विकल्प बन चुका है। इस कोर्स के बड़े फायदे जल्दी जॉब मिलने की संभावना देश-विदेश में काम करने के अवसर ग्लैमरस और इंटरैक्टिव वर्क एनवायरनमेंट खुद का होटल या रेस्टोरेंट शुरू करने का मौका कौन-कौन से कोर्स कर सकते हैं? होटल मैनेजमेंट में आपकी योग्यता और रुचि के अनुसार कई विकल्प मौजूद हैं: डिप्लोमा इन होटल मैनेजमेंट बैचलर डिग्री (BHM / BSc Hospitality) मास्टर डिग्री (MHM / MBA Hospitality) सर्टिफिकेट कोर्स (6 महीने से 1 साल) क्या-क्या सीखते हैं छात्र? इस कोर्स की पढ़ाई काफी प्रैक्टिकल होती है, जिससे छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी बनाया जाता है। इसमें सिखाया जाता है: कुकिंग और फूड प्रोडक्शन कस्टमर हैंडलिंग और सर्विस होटल ऑपरेशन मैनेजमेंट कम्युनिकेशन स्किल टीमवर्क और लीडरशिप करियर के शानदार अवसर होटल मैनेजमेंट करने के बाद आपके सामने कई करियर ऑप्शन खुल जाते हैं: होटल मैनेजर Chef फ्रंट ऑफिस एग्जीक्यूटिव एयरलाइन कैटरिंग इवेंट मैनेजमेंट क्रूज लाइन जॉब यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां अनुभव के साथ आपकी ग्रोथ लगातार होती रहती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मौके मिलते हैं। सैलरी कितनी मिलती है? शुरुआत में होटल मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स को 15,000 से 25,000 रुपये प्रति महीने तक सैलरी मिल सकती है। हालांकि, अनुभव बढ़ने के साथ यह सैलरी तेजी से बढ़ती है। बड़े होटल ब्रांड्स या विदेश में काम करने पर आप लाखों रुपये प्रति महीने तक कमा सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।