कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट ने खालिस्तानी उग्रवाद, विदेशी हस्तक्षेप और कनाडा की आंतरिक सुरक्षा को लेकर कई गंभीर चेतावनियां दी हैं। यह रिपोर्ट कनाडाई संसद में पेश की गई, जिसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कनाडा में सक्रिय खालिस्तान समर्थक तत्व अब भी हिंसक विचारधारा और गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं, जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं।
खालिस्तानी नेटवर्क पर CSIS की सख्त टिप्पणी
रिपोर्ट में “कनाडा-बेस्ड खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट” (CBKE) का जिक्र करते हुए कहा गया है कि ये समूह कनाडा में सक्रिय हैं और अपने नेटवर्क के जरिए:
जैसी गतिविधियों में लगे हुए हैं।
CSIS का मानना है कि इन संगठनों के कुछ सदस्य कनाडाई नागरिक भी हैं, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे और संस्थाओं का इस्तेमाल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भले ही हाल के वर्षों में कोई बड़ा आतंकी हमला सामने नहीं आया हो, लेकिन इन संगठनों की विचारधारा और नेटवर्किंग क्षमता भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।
एयर इंडिया फ्लाइट 182 विस्फोट की 40वीं बरसी का जिक्र
रिपोर्ट में एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम विस्फोट का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।
CSIS ने इस घटना को याद दिलाते हुए चेतावनी दी कि ऐसी विचारधाराएं अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
विदेशी हस्तक्षेप: भारत समेत कई देशों पर आरोप
रिपोर्ट का एक अहम हिस्सा विदेशी हस्तक्षेप से जुड़ा है। इसमें भारत, चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान को प्रमुख रूप से चिन्हित किया गया है।
भारत को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि:
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन गतिविधियों का उद्देश्य भारत सरकार के आलोचकों को चुप कराना और समुदाय में डर का माहौल बनाना हो सकता है।
हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि बदलती वैश्विक राजनीति में कई देश इस तरह के प्रभाव विस्तार के प्रयास करते हैं, और यह केवल एक देश तक सीमित नहीं है।
बदले राजनीतिक हालात और नए संकेत
यह रिपोर्ट 2025 के खुफिया आकलन पर आधारित है, लेकिन इसके बाद कनाडा की राजनीति में बदलाव आया है।
नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कार्यभार संभालने के बाद अधिकारियों के सुर कुछ बदले हुए नजर आए हैं।
कनाडाई एजेंसियों ने हाल में कहा है कि:
रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के अधिकारियों ने भी इस बात को दोहराया है कि जांच के निष्कर्ष समय के साथ बदल सकते हैं।
निज्जर हत्याकांड के बाद बढ़ा तनाव
भारत और कनाडा के संबंध पहले से ही संवेदनशील रहे हैं, खासकर हरदीप सिंह निज्जर की 2023 में हुई हत्या के बाद।
खालिस्तान मुद्दा: अलग-अलग नजरिया
रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आती है कि:
यही अंतर दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद की बड़ी वजह है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
चंडीगढ़, एजेंसियां। हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के लाडवा उपमंडल से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक कैंसर पीड़ित युवक ने पुलिसकर्मियों पर थाने के अंदर मारपीट और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया है। इस घटना के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पीड़ित युवक, जो निजी बैंक में कार्यरत है और वर्तमान में एलएनजेपी अस्पताल में इलाजरत है, ने अपने बयान में आरोप लगाया कि 17 जून की रात वह ड्यूटी से घर लौट रहा था। इसी दौरान इंद्री नाके पर तैनात एक होमगार्ड ने उसे रोककर जांच की। विरोध करने पर डायल-112 पर मौजूद दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और उसे पुलिस वाहन में बैठाकर लाडवा थाने ले जाया गया। युवक का आरोप युवक का आरोप है कि थाने में उसे कुछ समय तक एक कमरे में बंद रखा गया और बाद में दो सहायक उप निरीक्षक (ASI) तथा एक होमगार्ड ने उसके साथ मारपीट की तथा शारीरिक उत्पीड़न किया। पीड़ित ने यह भी दावा किया कि वह गंभीर रूप से बीमार है और कैंसर का मरीज होने के कारण कीमोथेरेपी ले रहा है। घटना के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने पुलिस को सूचना दी। अस्पताल प्रशासन ने पीड़ित का बयान दर्ज कर लिया है। पुलिस विभाग में भारी हलचल है मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भारी हलचल है। संबंधित पुलिसकर्मियों और होमगार्ड के खिलाफ गंभीर आरोपों को देखते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामला चर्चा में है और प्रशासन पर पारदर्शी जांच का दबाव बढ़ गया है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिवालय नबन्ना के वीआईपी सुरक्षा क्षेत्र में एक संदिग्ध युवक के पहुंच जाने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। युवक कथित तौर पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के काफिले की तस्वीरें अपने मोबाइल फोन से ले रहा था। सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ जवानों ने उसकी गतिविधियों पर तुरंत संदेह जताया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई। जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम मुख्यमंत्री नबन्ना से रवाना होने वाले थे। उनका काफिला पार्किंग जोन से वीआईपी लिफ्ट की ओर बढ़ रहा था, तभी एक युवक सुरक्षा घेरे के पास पहुंच गया और मोबाइल फोन से काफिले की तस्वीरें लेने लगा। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उसे रोक लिया और नबन्ना के सुरक्षा निदेशक को इसकी जानकारी दी। इसके बाद युवक को पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, हिरासत में लिए गए युवक की पहचान पंकज कुमार के रूप में हुई है। शुरुआती पूछताछ के बाद उसे हावड़ा पुलिस आयुक्त कार्यालय ले जाया गया, जहां से मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के हवाले कर दिया गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि युवक का उद्देश्य क्या था और वह वीआईपी क्षेत्र तक कैसे पहुंचा।फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि युवक मुख्यमंत्री के काफिले की रेकी कर रहा था या केवल उत्सुकतावश तस्वीरें ले रहा था। सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की चूक हुई है या नहीं, इसकी भी समीक्षा की जा रही है। पहले भी ऐसा एक बार हो चूका है गौरतलब है कि वर्ष 2024 में भी नबन्ना परिसर के बाहर एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया गया था। ताजा घटना के बाद एक बार फिर राज्य सचिवालय की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने पूरे मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
लेह, एजेंसियां। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शुक्रवार को तीन दिवसीय दौरे पर केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख पहुंचे। उनका स्वागत लेह स्थित कुशोक बकुला रिनपोछे एयरपोर्ट पर लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने किया। इस अवसर पर लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC) कारगिल के मुख्य कार्यकारी पार्षद डॉ. मोहम्मद जाफर अखून, लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में करेंगे शिरकत दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से जुड़े प्रमुख कार्यक्रमों में भाग लेंगे। योग दिवस के आयोजन में बड़ी संख्या में युवा, सशस्त्र बलों के जवान, स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय नागरिक शामिल होंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य योग के माध्यम से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का संदेश देना है। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम "स्वस्थ उम्र बढ़ाने के लिए योग" रखी गई है। सीमावर्ती गांवों का भी करेंगे दौरा उपराष्ट्रपति 20 जून को सीमावर्ती गांव लुकुंग का दौरा करेंगे। यहां वे स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से संवाद करेंगे और केंद्र सरकार की 'वाइब्रेंट विलेजेज' योजना के तहत चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा वे युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगे। एलजी ने जताया स्वागत और विश्वास लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उपराष्ट्रपति के दौरे का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी मौजूदगी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन को नई ऊर्जा देगी। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति का मार्गदर्शन लोगों को स्वस्थ, संतुलित और सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार ने देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल होने की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि योग के प्रति जागरूकता और जनभागीदारी को बढ़ावा मिल सके।