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किरण राव ने सोनम वांगचुक के आंदोलन को दिया समर्थन, सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील

anjali kumari जुलाई 18, 2026 0
Sonam Wangchuk Movement
Sonam Wangchuk Movement

नई दिल्ली, एजेंसियां। फिल्म निर्माता किरण राव ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में खुलकर आवाज उठाई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का समर्थन किया और केंद्र सरकार से आंदोलनकारियों के साथ जल्द संवाद शुरू करने की अपील की। किरण राव की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब सोनम वांगचुक का आंदोलन देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

 

'देश आपका ऋणी है'

 

किरण राव ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि "हमारा देश आपका ऋणी है, क्योंकि आपने हमें हमारी उदासीनता से बाहर निकाला है।" उन्होंने कहा कि लगातार कई दिनों से जारी भूख हड़ताल के बावजूद इस मुद्दे पर बनी चुप्पी बेहद दुखद है।

 

सरकार से की बातचीत की अपील

 

किरण राव ने सरकार से आग्रह किया कि वह आंदोलनकारियों के साथ बातचीत कर उनकी चिंताओं को सुने और जल्द समाधान निकाले। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सुनी जानी चाहिए और संवाद ही किसी भी गतिरोध का सबसे बेहतर रास्ता है।

 

आमिर खान के बयान के बाद आई प्रतिक्रिया

 

किरण राव का यह समर्थन अभिनेता आमिर खान के बयान के बाद सामने आया। आमिर ने स्पष्ट किया था कि फिल्म '3 Idiots' का किरदार 'रैंचो' सीधे तौर पर सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं था, लेकिन उन्होंने वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताते हुए उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की थी। इसके कुछ ही समय बाद किरण राव ने भी सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन किया।

 

बढ़ रहा है जनसमर्थन

 

सोनम वांगचुक के आंदोलन को कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और फिल्म जगत की हस्तियों का समर्थन मिल रहा है। किरण राव के समर्थन के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में है और सरकार से वार्ता शुरू करने की मांग और तेज हो गई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

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सोनम वांगचुक अस्पताल पहुंचे तो आंदोलन ने पकड़ी नई रफ्तार, अभिजीत दिपके अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे

नई दिल्ली, एजेंसियां। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य बिगड़ने पर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद उनका आंदोलन और तेज हो गया है। उनके सहयोगी और Coackroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शनिवार को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि वांगचुक को अस्पताल ले जाने से आंदोलन खत्म नहीं होगा और उनकी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा।   'आंदोलन नहीं रुकेगा'   भूख हड़ताल शुरू करने के बाद अभिजीत दिपके ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और नागरिकों की आवाज़ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।   जंतर-मंतर पर बढ़ा तनाव   शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को बिगड़ती सेहत के चलते जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर तनाव की स्थिति बन गई। दिपके ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की गई और शांतिपूर्ण आंदोलन को बाधित करने की कोशिश हुई।   20 जुलाई का 'चलो संसद' मार्च रहेगा जारी   अभिजीत दिपके ने कहा कि सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च अपने तय कार्यक्रम के अनुसार निकाला जाएगा। उन्होंने समर्थकों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की।   सरकार से बातचीत की मांग   आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर सरकार को जल्द संवाद शुरू करना चाहिए। वहीं प्रशासन का कहना है कि सोनम वांगचुक को केवल चिकित्सकीय सलाह और अदालत के निर्देश के आधार पर अस्पताल ले जाया गया है। फिलहाल सभी की निगाहें आंदोलन के अगले चरण और सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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'मतदाता सूची से नाम हटने का मतलब नागरिकता खत्म नहीं', सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हट जाने मात्र से उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त नहीं होती। अदालत ने कहा कि मतदाता सूची और नागरिकता दो अलग-अलग कानूनी विषय हैं तथा नागरिकता पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के पास है, न कि चुनाव आयोग के पास। यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई।   चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं कर सकता   मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची तैयार करने और संशोधित करने का संवैधानिक अधिकार है। यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह हो तो आयोग उसका नाम मतदाता सूची से हटा सकता है, लेकिन यह फैसला उसकी नागरिकता का अंतिम निर्धारण नहीं माना जाएगा। नागरिकता का फैसला केवल नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत केंद्र सरकार करेगी।   याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब तलब   सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद कथित रूप से सरकारी योजनाओं के लाभ रोके जाने संबंधी जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटने के आधार पर किसी व्यक्ति के अन्य कानूनी अधिकार स्वतः समाप्त नहीं किए जा सकते।   पहले के फैसले का किया उल्लेख   पीठ ने अपने मई 2026 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि चुनाव आयोग को किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह हो, तो उसे मामला केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी को भेजना होगा। जब तक उस प्राधिकारी का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, केवल मतदाता सूची से नाम हटने के आधार पर किसी व्यक्ति को गैर-नागरिक नहीं माना जा सकता।   नागरिकता और मतदान अधिकार में अंतर   अदालत ने कहा कि मतदान का अधिकार और नागरिकता आपस में जुड़े जरूर हैं, लेकिन दोनों समान नहीं हैं। मतदाता सूची से नाम हटने का असर चुनाव में मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है, लेकिन इससे किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त नहीं होती। इस टिप्पणी से मतदाता सूची संशोधन को लेकर फैले भ्रम को दूर करने की कोशिश की गई है।

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अमरनाथ यात्रा के दौरान हादसा, डंपर से टकराई श्रद्धालुओं की कार; 4 घायल

जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के दौरान शनिवार को एक सड़क हादसा हो गया। उधमपुर जिले में बालटाल जा रही श्रद्धालुओं की कार सड़क किनारे खड़े एक डंपर से टकरा गई। हादसे में कम से कम चार श्रद्धालु घायल हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, यह दुर्घटना जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर संगूर चौक के पास हुई। बालटाल की ओर जा रही टोयोटा इनोवा सड़क किनारे खड़े डंपर से पीछे से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी हादसे के बाद स्थानीय पुलिस और राहत टीम ने तुरंत बचाव अभियान चलाया। सभी चार घायल श्रद्धालुओं को उधमपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। फिलहाल सभी घायलों की स्थिति पर डॉक्टरों की निगरानी रखी जा रही है। हादसे की जांच में जुटी पुलिस पुलिस ने घटना का मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, कार सड़क किनारे खड़े डंपर से पीछे से टकराई, हालांकि हादसे की सटीक वजह का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन लगातार सतर्क है। इस हादसे के बाद भी अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से सावधानीपूर्वक वाहन चलाने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की है।  

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