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बिहार, एमपी और गुजरात में उपचुनाव का बिगुल, चुनाव आयोग ने जारी किया शेड्यूल

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Election Commission
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नई दिल्ली ,एजेंसियां। चुनाव आयोग ने बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन रिक्त विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने की घोषणा कर दी है। आयोग के अनुसार, 30 जुलाई 2026 को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त 2026 को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे। इन सीटों पर आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

 

इन तीन सीटों पर होगा उपचुनाव

 

उपचुनाव बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर कराया जाएगा। तीनों सीटें अलग-अलग कारणों से रिक्त हुई थीं।

 

क्यों खाली हुईं ये सीटें?

 

बिहार की बांकीपुर सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई। मध्य प्रदेश की दतिया सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की धोखाधड़ी मामले में दोषसिद्धि के बाद सदस्यता समाप्त होने से रिक्त हुई, जबकि गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा विधायक योगेशभाई नारनदास पटेल के निधन के कारण खाली हुई।

 

जानिए पूरा चुनाव कार्यक्रम

 

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, 6 जुलाई को अधिसूचना जारी होगी। 13 जुलाई नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि होगी, 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 16 जुलाई तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 30 जुलाई को होगा और 3 अगस्त को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे।

 

राजनीतिक दलों ने शुरू की तैयारियां

 

उपचुनाव की घोषणा के साथ ही तीनों राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रमुख दल उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। इन उपचुनावों को आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

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आईएनएस त्रिकंद ने अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती की कोशिश नाकाम की, व्यापारी जहाज को सुरक्षित बचाया

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस त्रिकंद ने अदन की खाड़ी में एक व्यापारी जहाज पर समुद्री डकैती (पाइरेसी) की कोशिश को विफल कर दिया। नौसेना की त्वरित कार्रवाई के चलते जहाज और उस पर सवार चालक दल को सुरक्षित बचा लिया गया। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है।   संकट संदेश मिलते ही शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन   भारतीय नौसेना के अनुसार, व्यापारी जहाज से संकट का संदेश मिलने के तुरंत बाद आईएनएस त्रिकंद को मौके पर भेजा गया। युद्धपोत के पहुंचते ही संदिग्ध नौकाएं क्षेत्र से भाग निकलीं और समुद्री डकैती की कोशिश विफल हो गई।   चालक दल पूरी तरह सुरक्षित   नौसेना ने बताया कि समय पर की गई कार्रवाई से जहाज पर मौजूद सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं। किसी भी व्यक्ति के घायल होने या जहाज को गंभीर नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं है।   समुद्री सुरक्षा के लिए भारत की सक्रिय निगरानी   भारतीय नौसेना लगातार अदन की खाड़ी, अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए निगरानी अभियान चला रही है। हाल के महीनों में कई व्यापारी जहाजों को सुरक्षित एस्कॉर्ट भी प्रदान किया गया है।   व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर   नौसेना ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भारत की प्राथमिकता है। समुद्री डकैती और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय नौसेना मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ समन्वय बनाकर लगातार अभियान चला रही है।

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नई दिल्ली: भारत-जापान की 16वीं वार्षिक शिखर बैठक के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi को अपनी "छोटी बहन" कहकर संबोधित किया। प्रधानमंत्री के इस संबोधन ने सभी का ध्यान आकर्षित किया और इसके पीछे की वजह जानने की उत्सुकता बढ़ गई। यह संबोधन किसी भावुक क्षण का परिणाम नहीं था, बल्कि दोनों नेताओं के बीच हुई एक निजी बातचीत से जुड़ा था। हैदराबाद हाउस में हुई थी निजी बातचीत मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिखर वार्ता के दौरान हैदराबाद हाउस में हुई निजी बातचीत में प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि जापान के दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री Shinzo Abe उनके लिए बड़े भाई समान थे और वह उनका बेहद सम्मान करती थीं। उन्होंने यह भी कहा कि शिंजो आबे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच गहरा व्यक्तिगत संबंध था। इसी कारण वह अब प्रधानमंत्री मोदी को भी अपने बड़े भाई की तरह मानती हैं। इस बातचीत के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने सानाए ताकाइची को अपनी "छोटी बहन" कहकर संबोधित किया। शिंजो आबे से था प्रधानमंत्री मोदी का विशेष संबंध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे के बीच केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी गहरे संबंध थे। आबे के कार्यकाल में भारत और जापान के रिश्तों को नई मजबूती मिली और दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग में उल्लेखनीय विस्तार हुआ। 8 जुलाई 2022 को जापान के नारा शहर में चुनाव प्रचार के दौरान शिंजो आबे की हत्या कर दी गई थी। उनके निधन के बाद प्रधानमंत्री मोदी 27 सितंबर 2022 को टोक्यो पहुंचे थे और राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। इस दौरान उन्होंने आबे की पत्नी Akie Abe से भी मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की थी। ताकाइची ने भी स्वीकार किया भाई-बहन का रिश्ता रिपोर्टों के मुताबिक, जब प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक मंच से उन्हें "छोटी बहन" कहा, तो सानाए ताकाइची ने भी इस संबोधन का स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें इस रिश्ते को स्वीकार करने में खुशी है। भारत-जापान संबंधों का प्रतीक बना संबोधन विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन केवल व्यक्तिगत आत्मीयता का संकेत नहीं था, बल्कि भारत और जापान के बीच विकसित हुए भरोसे, मित्रता और रणनीतिक साझेदारी का भी प्रतीक है। दोनों देशों के नेतृत्व के बीच व्यक्तिगत विश्वास को द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।  

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दिल्ली के मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन पर बैग से देसी पिस्तौल बरामद, दो युवक गिरफ्तार

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन पर नियमित सुरक्षा जांच के दौरान दो यात्रियों के बैग से एक देसी पिस्तौल और एक जिंदा कारतूस बरामद होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। यह बरामदगी सीआईएसएफ की एक्स-रे बैगेज स्क्रीनिंग के दौरान हुई, जिसके बाद दोनों को तुरंत दिल्ली मेट्रो रेल पुलिस के हवाले कर दिया गया।   सुरक्षा जांच में हुआ खुलासा   अधिकारियों के अनुसार, घटना गुरुवार सुबह नियमित जांच के दौरान सामने आई। एक्स-रे मशीन से बैग की जांच के दौरान संदिग्ध वस्तु दिखाई देने पर सीआईएसएफ जवानों ने बैग की तलाशी ली, जिसमें देसी पिस्तौल और एक जिंदा कारतूस मिला। इसके बाद दोनों यात्रियों को हिरासत में ले लिया गया।   बरेली के रहने वाले हैं दोनों आरोपी   पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार दोनों युवकों की पहचान राजवीर और गौरव के रूप में हुई है। दोनों उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के निवासी हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वे हथियार लेकर मेट्रो स्टेशन क्यों पहुंचे थे और उनके पास इसके लिए कोई वैध लाइसेंस था या नहीं।   आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज   दिल्ली पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही उनके आपराधिक रिकॉर्ड और हथियार के स्रोत की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि हथियार का इस्तेमाल किसी आपराधिक गतिविधि के लिए किया जाना था या नहीं।   CISF की सतर्कता से टला बड़ा खतरा   अधिकारियों ने कहा कि सीआईएसएफ की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से प्रतिबंधित हथियार को दिल्ली मेट्रो नेटवर्क में ले जाने से रोक दिया गया। मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की गहनता से पड़ताल कर रही है।

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