नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए लोगों से भारतीय हैंडलूम उत्पादों को अपनाने और बुनकरों का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हैंडलूम खरीदने से न केवल देश के पारंपरिक बुनकरों और छोटे कारोबारियों को आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी बल मिलेगा।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने लोगों से अपने पसंदीदा हैंडलूम उत्पादों के साथ छोटे-छोटे वीडियो, जिनमें 'Get Ready With Me (GRWM)' जैसे वीडियो भी शामिल हैं, बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करने का आग्रह किया ताकि भारतीय हैंडलूम की विविधता दुनिया तक पहुंच सके।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 7 अगस्त 1905 को अंग्रेजों के खिलाफ स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जिसने देश में स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की नई चेतना जगाई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस उसी ऐतिहासिक आंदोलन की याद में मनाया जाता है और यह भारतीय हस्तकरघा उद्योग की समृद्ध विरासत का प्रतीक है।
पीएम मोदी ने कहा कि लोगों द्वारा हैंडलूम उत्पाद खरीदने और उनका प्रचार करने से बुनकरों तथा छोटे व्यापारियों की आय बढ़ेगी। उन्होंने सभी से भारतीय हस्तकरघा उत्पादों को प्राथमिकता देने और देश की पारंपरिक कला को वैश्विक पहचान दिलाने में सहयोग करने की अपील की।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत वर्ष 2015 में की गई थी। यह दिवस हर साल 7 अगस्त को मनाया जाता है और इसका उद्देश्य देश के हथकरघा बुनकरों के योगदान को सम्मान देना, पारंपरिक बुनाई कला को बढ़ावा देना तथा इस क्षेत्र के सतत विकास को प्रोत्साहित करना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत बढ़ाने वाली 114 राफेल मल्टीरोल फाइटर जेट की बहुचर्चित मेगा डील निर्णायक चरण में पहुंच गई है। फ्रांस ने भारत को इस सौदे के लिए अपना विस्तृत तकनीकी और व्यावसायिक प्रस्ताव (Technical & Commercial Proposal) सौंप दिया है। प्रस्ताव में बड़ी संख्या में राफेल विमानों का निर्माण भारत में करने की योजना भी शामिल है, जिससे रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बड़ा प्रोत्साहन मिल सकता है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारत द्वारा भेजे गए लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) के जवाब में फ्रांस ने अपनी पेशकश भेज दी है। अब रक्षा मंत्रालय का खरीद विभाग और भारतीय वायुसेना इस प्रस्ताव का विस्तृत तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन कर रहे हैं। 114 में से 94 राफेल भारत में बनेंगे प्रस्ताव के अनुसार, 114 में से 94 राफेल लड़ाकू विमान भारत में ही निर्मित किए जाएंगे। इसके लिए फ्रांस की प्रमुख रक्षा कंपनी दसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) अपने साझेदार MBDA, Safran और Thales के साथ भारतीय कंपनियों के सहयोग से उत्पादन करेगी। इससे भारत में अत्याधुनिक रक्षा तकनीक, विनिर्माण क्षमता और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है। स्वदेशी हथियारों से लैस होंगे राफेल भारत फ्रांस के उस प्रस्ताव का भी अध्ययन कर रहा है, जिसमें राफेल विमानों में स्वदेशी हथियारों और उपकरणों को शामिल करने की बात कही गई है। इन विमानों में भारत की विकसित 'अस्त्र' एयर-टू-एयर मिसाइल सहित अन्य स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के एकीकरण पर भी विचार किया जा रहा है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को नई तकनीकी क्षमता मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी। भारतीय उद्योग को मिल सकता है बड़ा फायदा इस मेगा डील में स्वदेशीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। अनुमान है कि इस परियोजना से भारतीय उद्योग को करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का अवसर मिल सकता है। टाटा समूह, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) सहित कई भारतीय रक्षा कंपनियों को उत्पादन, कंपोनेंट निर्माण और सप्लाई चेन में भागीदारी मिलने की संभावना है। सरकार-से-सरकार (G2G) मॉडल पर होगी खरीद भारत ने इसी वर्ष मई में फ्रांस को सरकार-से-सरकार (Government-to-Government) मॉडल के तहत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए आधिकारिक अनुरोध भेजा था। गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना के लिए राफेल विमान का चयन पहली बार वर्ष 2012 में वैश्विक प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के बाद किया गया था। यदि यह नया समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण और देश की रक्षा तैयारियों के लिए सबसे बड़े सौदों में से एक होगा।
322 ईसा पूर्व – सिंकदर महान की मौत के बाद उनके राज्य मैसोडेनिया और एथेंस के बीच लड़ाई की शुरुआत हुई। 1606 – शेक्सपियर की नाटक मैक्बेथ का पहली बार मंचन किंग जेम्स प्रथम के लिए किया गया। 1668 – प्रसिद्ध न्यूटन ने ट्रिनीटी कॉलेज कैंब्रिज से मास्टर डिग्री हासिल की। 1753 – ब्रिटेन म्यूजियम की स्थापना पार्लियामेंट एक्ट के तहत की गई। 1880 - उचित वक्ता पण्डित दुर्गाप्रसाद मिश्र द्वारा प्रकाशित होने वाला समाचार पत्र था। 1905 – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटिश सामानों के बहिष्कार की घोषणा की। 1914 – रूस ने पूर्वी परूसिया पर हमला किया। 1944 – 51 फीट लंबाई, 8 फीट ऊंचाई और पांच टन के वजन वाले पहले इलेक्ट्रॉनिक कैलकुलेटर का निर्माण हुआ। 1946 – ब्रिटेन ने पहली बार सिक्के पर एक अश्वेत की तस्वीर उकेरने को मंजूरी दी। 1947 – बृहन मुंबई नगर निगम ने बॉम्बे बिजली वितरण और परिवहन कंपनी बेस्ट का अधिग्रहण किया। 1957 – अमेरिका ने नेवादा परीक्षण स्थल पर परमाणु परीक्षण किया। 1959 – एक्सप्लोरर 6 ने पहली बार अंतरिक्ष से धरती की ली गई तस्वीर प्रसारित की। 1960 – अफ़्रीक़ा महाद्वीप के देश आइवरी कोस्ट को फ़्रांस के अधिकार से स्वतंत्रता मिली। 1970 – पहले कंप्यूटर चेस टूर्नामेंट का आयोजन किया गया। 1982 – अमरीका लेबनान और फ़िलिस्तीन के स्वतंत्रता संगठन के बीच बैरुत में समझौते पर हस्ताक्षर हुए। 1985 – गीत सेठी विश्व अमेचर बिलियर्ड्स चैंपियनशिप जीतने वाले तीसरे भारतीय बने। 1990 – अमेरिका ने सऊदी अरब में सेना तैनात कर ऑपरेशन डेजर्ट शील्ड की शुरूआत की। 1994 – इजरायल और जॉर्डन के बीच पहली टेलीफोन सेवा शुरु हुई। 1996 - अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा 13 हज़ार वर्ष पूर्व पृथ्वी पर गिरे उल्का पिंड के अवशेषों से मंगल ग्रह पर एक कोशिका वाले जीवों के होने की संभावना का पता चला। 1998 - केन्या एवं तंजानिया की राजधानियों में स्थित अमेरिकी दूतावासों पर आतंकवादी हमले में 200 से अधिक लोगों की मृत्यु। 1999 - पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ ने एक बार फिर भारत से वार्ता की पेशकश की। 2000 - रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन द्वारा एक क़ानून पर हस्ताक्षर कर अपनी शक्ति का विस्तार। 2003 - बगदाद में जार्डन दूतावास के बाहर हुए कार बम विस्फोट में 12 लोगों की मृत्यु। 2005 - इस्रायल के वित्तमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने पद से इस्तीफ़ा दिया। 2008 - सार्वजनिक क्षेत्र के देना बैंक ने अपनी प्रथान ब्याज दरें 0.75% बढ़ाकर 14.25% करने की घोषणा की। 2008 - सार्वजनिक क्षेत्र के कार्पोरेशन बैंक ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में 0.50% बढ़ोतरी किए जाने की घोषणा की। 2012 – नाइजीरिया के ओकेन में चर्च में तीन बंदूकधारियों ने हमला कर 19 लोगों की हत्या की। 2019 - यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के वैज्ञानिकों ने दुनिया के सबसे पतले सोने का निर्माण किया है, जिसका माप 2 परमाणु की मोटाई के बराबर है और एक नाख़ून से लाख गुना पतला है। 2019 - राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने की घोषणा की । 2019 - पाकिस्तान ने राजनयिक संबंधों में कटौती कर भारतीय उच्चायुक्त को वापस भेजा। 2020 - मॉरीशस के द्वीप को जापानी स्वामित्व वाले जहाज के तेल रिसाव के कारण पर्यावरणीय आपातकाल घोषित किया गया। 2020 - एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ इंडिया ( एक्जिम बैंक ) ने बिजली आपूर्ति में सुधार के लिए $ 250 मिलियन एलओसी को मोजाम्बिक को प्रदान की। 2020 - देश की पहली किसान विशेष पार्सल रेलगाड़ी को महाराष्ट्र के देवलाली रेलवे स्टेशन से झंडी दिखाकर रवाना किया गया। 2020 - अमेरिका ने हांगकांग की मुख्य कार्यकारी कैरी लैम, पूर्व पुलिस प्रमुख और आठ अन्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए। 2021 - बिजली गिरने से बिहार में सात, ओडिशा में पांच और बंगाल में चार की मौत, 12 से ज्यादा घायल हुए। 2021 - भाला फेंक 23 वर्षीय खिलाड़ी नीरज चोपड़ा एथलेटिक्स में ओलंपिक स्वर्ण पदक (इतिहास रचकर) जीतने वाले पहले भारतीय बने। 2022 - ISRO के नये रॉकेट की सफल लॉन्चिंग हुई (मुकेश शास्त्री हालुवास भिवानी द्वारा संकलित पंचांग) लेकिन सैटेलाइट्स से संपर्क टूट गया , SSLV डेटा लॉस का शिकार हुआ। 2022 - अमेरिकी नौसेना के जहाज का पहला भारत दौरा, रिपेयरिंग के लिए चेन्नई समुद्री तट पहुँचा। 2022 - एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को विपक्ष की उम्मीदवार मार्ग्रेट अल्वा से 346 वोट अधिक मिले। चुनाव आयोग ने एक प्रमाण पत्र जारी कर जगदीप धनखड़ को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में चुने जाने की घोषणा की। 2022 - कोलंबिया में प्रथम वामपंथी राष्ट्रपति श्री गुस्ताव पेट्रो को शपथ दिलाई गई। 2023 - न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करने के लिए संसद ने मध्यस्थता विधेयक 2023 पारित किया। 2023 - संसद ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक 2023 पारित किया। 2023 - कंबोडिया के राजा ने आधिकारिक तौर पर हुन मानेट को देश का अगला प्रधानमंत्री नियुक्त किया। 2023 - इराक ट्रेकोमा को खत्म करने के लिए WHO द्वारा मान्यता प्राप्त 18वां देश बना। 2024 - नेपाल में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने से पायलट और चार चीनी पर्यटकों सहित सभी पांच लोगों की मौत हुई। 2024 - बिहार के नवादा जिले में बिजली गिरने से छह लोगों की मौत हुई व 3 लोग गंभीर रूप से झुलसे। 2025 - भारत के महान कृषि वैज्ञानिक और हरित क्रांति के जनक डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन की 100वीं जयंती (जन्म शताब्दी) मनाई गई। 7 अगस्त को जन्मे व्यक्ति 1304 – इटली के शायर और लेखक फ़्रैन्सिसको पेटर्क का जन्म हुआ। उन्होंने सादा शब्दों के शेरों से बहुत ख्याति प्राप्त की। 1702 - मुहम्मदशाह रौशन अख़्तर - मुग़ल वंश का 14वाँ बादशाह था। 1871 - अवनीन्द्रनाथ ठाकुर, प्रख्यात कलाकार तथा साहित्यकार। 1900 - लेफ्टिनेंट-कर्नल सर मलिक खिजर हयात तिवाना केसीएसआई , ओबीई राजनेता, सेना अधिकारी और जमींदार जिन्होंने ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के संघवादी प्रधान मंत्री के रूप में कार्य किया। 1904 - वासुदेव शरण अग्रवाल- भारत के प्रसिद्ध विद्वान। 1907 - सचिन्द्र लाल सिंह - त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री। 1925 - एम. एस. स्वामीनाथन - प्रसिद्ध भारतीय कृषि वैज्ञानिक तथा 'हरित क्रांति' के अगुआ। 1955 - सुरेश वाडकर एक भारतीय पार्श्वगायक । 1975 – दक्षिण अफ्रीका की अभिनेत्री चार्लीज थेरोन का जन्म हुआ। 7 अगस्त को हुए निधन 1941 - रवीन्द्रनाथ टैगोर, भारतीय लेखक, नोबेल पुरस्कार विजेता। इन्होंने ही भारत का राष्ट्रीय गान लिखा था। 1974 - वर्जीनिया एपगर - अमेरिकी प्रसूति एनेस्थेटिस्ट थीं। 1976 - पी. सी. अदिचन - चौथी लोकसभा के सदस्य। 2009 - गुलशन बावरा - हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार थे। 2011 - नैंसी वेक - दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान प्रसिद्ध महिला लड़ाकों में से एक थीं। 2018 - एम. करुणानिधि - तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री थे। 2019 - बॉलीवुड अभिनेता रितिक रोशन के नाना और प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक जे. ओम प्रकाश का निधन। 2023 - अमेरिकी फिल्म, निर्देशक, निर्माता व पटकथा लेखक विलियम डेविड फ्रीडकिन (87) का निधन हुआ। 2023 - इतालवी मोटर साइकिल रेसर मिर्को जियानसंटी (Mirko Giansanti , 46) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी पेशेवर बेसबॉल कैचर जिम्मी विलियम प्राइस (81) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी डिस्क जॉकी डीजे कैस्पर (58) का निधन हुआ। 2024 - अमेरिकी रॉक गायक जैक रसेल (63) का लेवी बॉडी डिमेंशिया से निधन हुआ। 7 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव गुरु श्री हरकिशन जयन्ती (प्राचीन परंपरानुसार)। श्री रवींद्र नाथ टैगोर जी स्मृति दिवस। श्री मुत्तुवेल करुणानिधि स्मृति दिवस। बालोतरा जिला स्थापना दिवस (राज.)। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस। राष्ट्रीय भाला फेंक दिवस {National Javelin Day , ( एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया AFI) दिवस }। डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन की 101वीं जयंती। विश्व स्तनपान सप्ताह समापन (01 से 07 अगस्त)। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक पारित, डिजिटल बैंक रिकॉर्ड को मिलेगी कानूनी मान्यता नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 को विपक्ष के हंगामे के बीच वॉइस वोट से पारित कर दिया। हंगामे के कारण विधेयक पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी। यह विधेयक 1891 के पुराने कानून को बदलने और बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कानूनी प्रावधानों को मौजूदा डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप बनाने का प्रयास है। 1891 के कानून की जगह लेगा नया विधेयक बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 का उद्देश्य Bankers' Books Evidence Act, 1891 को निरस्त कर उसकी जगह नया कानूनी ढांचा तैयार करना है। पुराना कानून उस दौर में बनाया गया था जब बैंकिंग रिकॉर्ड मुख्य रूप से कागजों में रखे जाते थे। नए विधेयक में मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े प्रावधानों को शामिल किया गया है। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड होंगे मान्य विधेयक की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में बैंक के इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड आधारित रिकॉर्ड को कानूनी साक्ष्य के तौर पर मान्यता देना शामिल है। इससे अदालतों में बैंकिंग रिकॉर्ड पेश करने की प्रक्रिया को डिजिटल युग के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी। प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी कार्यवाही में इस्तेमाल करने का रास्ता भी स्पष्ट होगा। विपक्ष के हंगामे के बीच हुई वोटिंग विधेयक पर विचार और पारित करने की प्रक्रिया के दौरान लोकसभा में विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी और विरोध कर रहे थे। हंगामे के बीच विधेयक को बिना विस्तृत बहस के वॉइस वोट से पारित कर दिया गया। सरकार की ओर से इसे बैंकिंग और न्यायिक व्यवस्था को डिजिटल दौर के अनुरूप बनाने वाला कदम बताया गया है। अब विधेयक की आगे की संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसके प्रावधान कानून का हिस्सा बन सकेंगे।