1294 – स्विट्जरलैंड के बर्ने प्रांत से यहूदियों को बाहर निकाला गया।
1700 - गेल्डरलैंड में ग्रेगोरियन कैलेंडर शुरू किया।
1737 - रूस-तुर्की युद्ध, 1735-1739: फील्ड मार्शल मुनीच के अनुसार रूसी सेना ने ओककोव के तुर्क गढ़ को बर्खास्त कर दिया और 4,000 तुर्को को कैद कर लिया गया।
1755 - फिलीपींस ने सभी गैर कैथोलिक चीनी रेस्तरां को बंद करवाया।
1758 - सात साल युद्ध के डोमस्टाटल का युद्ध प्रारम्भ हुआ।
1853 - पेरिस के पुनर्जन्म शुरू करने के लिए जॉर्जेस-युगेन हासमैन को सेन (विभाग) की प्राथमिकता के रूप में चुना गया।
1859 - नेवादा में कॉमस्टॉक सिल्वर लॉड की खोज की गयी।
1860 - ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के संग्रहालय में विकास के बारे में ऐतिहासिक बहस आयोजित की गयी।
1870 – अदा केपले लॉ कॉलेज से स्नातक की परीक्षा पास करने वाली पहली महिला बनी।
1876 – सर्बिया ने तुर्की के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
1882 - अमेरिकी राष्ट्रपति के हत्यारे चार्ल्स जे गुइटेू को वाशिंगटन डीसी में फांसी पर लटकाया गया।
1886 - महिलाओं के लिए रॉयल होलोवे कॉलेज लंदन के पास इंग्लैंड में महारानी विक्टोरिया द्वारा स्थापित किया गया।
1889 - अंतर-संसदीय संघ की स्थापना हुई ।
1894 – लंदन में टॉवर ब्रिज काे खाेला गया।
1914 – दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के अधिकारों के लिये आंदोलन करने के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पहली बार गिरफ्तार किया गया।
1933 – फासीवाद के खिलाफ एंटवर्प में 50 हजार लोगों ने प्रदर्शन किया।
1934 – ईसवी को जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ़ हिटलर ने अपनी नेशनल सोशियालिस्ट पार्टी में विरोधियों का सफ़ाया कर दिया।
1938 – बच्चों का पसंदीदा कार्टून सुपरमैन पहली बार कॉमिक्स (डीसी कॉमिक्स एक्शन सीरीज भाग-1) में नज़र आया।
1947 – भारत के विभाजन की घोषणा के बाद बंगाल और पंजाब के विभाजन के लिए बाउंडरी कमीशन के सदस्यों की घोषणा की गई।
1948 – ब्रिटिश सेना की अंतिम टुकड़ी इजरायल छोड़ स्वदेश रवाना हुयी।
1960 – अमेरिका ने क्यूबा से चीनी का आयात बंद करने का निर्णय लिया।
1962 – रवांडा और बुरूंडी देश स्वतंत्र हुये।
1984 - जॉन टर्नर कनाडा के 17 वें प्रधानमंत्री बने।
1990 – पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी ने अपनी अर्थव्यवस्था का विलय किया।
1994 – फ्रांस के तोलूज़ में ए-330 एयरबस विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से सात लोग मारे गये।
1997 – हांगकांग पर से ब्रिटिश हुकूमत खत्म हुई।
1999 - आस्ट्रेलियाई उप-प्रधानमंत्री तथा नेशनल पार्टी के नेता टीम फ़िशर का इस्तीफ़ा।
2000 – अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने अमेरिका में डिजिटल हस्ताक्षर को कानूनी मान्यता दी।
2002 - ब्राजील ने जर्मनी को 2-0 से हराकर फ़ुटबाल के विश्व कप पर कब्ज़ा किया।
2005 – स्पेन में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दी गयी।
2005 - ब्राजील ने कनफ़ेडरेशन फ़ुटबाल कप जीता।
2006 - फ़ुटबाल विश्वकप में जर्मनी ने अर्जेन्टीना को हराया।
2007 - संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आम सहमति से शांति रक्षण विभाग के बंटवारे का निर्णय किया।
2008 - रविकांत, उमा शंकर चौधरी व विमल चन्द्र पाण्डेय को संयुक्त रूप से भारतीय ज्ञानपीठ का नवलेखन पुरस्कार प्रदान किया गया।
2008 - भारतीय पत्रकार अनीसुद्दीन अजीज को इंटरनेशनल एसोसियेशन आफ़ बुक कीपर्स (आईएबी) के न्यू बिजनेस आफ़ द ईयर अवार्ड से सम्मानित किया गया।
2008 - पाकिस्तान सरकार ने कबाइली ख़ैबर दर्रा क्षेत्र में दहशत फैला रहे तीन आतंकी गुटों पर प्रतिबन्ध लगाया।
2008 - राबर्ट मुगावे ने जिम्बाव्वे के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।
2012 – मोहम्मद मुर्सी मिस्र के राष्ट्रपति बने।
2019 - संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की रानी हया बिंत अल हुसैन के दो बच्चों और 31 मिलियन पाउंड (271 करोड़ रुपये) के साथ लापता हुई।
2019 - आइटीबीपी (ITBP) की डीआइजी अपर्णा कुमार ने अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी को फतह कर लिया है। माउंट डेनाली (Mount Denali) पर तिरगा फहराने वाली अपर्ण कुमार पहली IPS बनी।
2020 - बांग्लादेश में एलपीजी व्यवसाय के लिए भारत और बांग्लादेश ने पचास-पचास प्रतिशत भागीदारी से संयुक्त उद्यम कंपनी के गठन संबंधी एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
2020 - चीन - नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति (NPCSC) ने सर्वसम्मति से हांगकांग के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पारित किया।
2020 - पाकिस्तान की सेना में तैनात मेजर जनरल निगार जौहर इतिहास रचते हुए लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पहुंचने वाली पहली महिला बनी।
2021 - केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य अनुसंधान क्षेत्र में भारत और नेपाल के बीच व भारत और म्यांमार के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी।
2022 - एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र के 20वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की।
2022 - इजरायल की संसद भंग कर दी गई।
2022 - जूनियर फर्डिनेंड मार्कोस ने मनीला में फिलीपिन्स के राष्ट्रपति पद की शपथ ली।
2022 - अमेरिका में केतनजी ब्राउन जैक्सन सुप्रीम कोर्ट की पहली अश्वेत महिला जज (अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की 116वीं न्यायाधीश) बनी।
2022 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बॉश इंडिया की भारत में उपस्थिति के 100 वर्ष पूरे करने के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित किया।
2023 - केन्या में अनियंत्रित ट्रक से 48 लोगों की मौत व 30 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
2023 - डायमंड लीग में नीरज चोपड़ा ने 87.66 मीटर दूर भाला फेंक इतिहास रचा।
2023 - नई दिल्ली में विश्व खाद्य भारत-2023 पर दूसरी अंतर-मंत्रालयी समिति की बैठक आयोजित की।
2024 - मथुरा में गंगाजल परियोजना से बनी पानी की टंकी धराशाई होने से दो लोगों की मौत व 15 से अधिक घाय हुए। BCCI ने 125 करोड़ दने की घोषणा की T20 वर्ल्ड कप जीतने पर।
2025 - हैदराबाद के पास संगारेड्डी (पशमैलाराम) स्थित सिगाची फार्मा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 44–46 लोगों की मौत (शुरुआती रिपोर्ट में 13- 14) व करीब 33 लोग घायल हुए।
1903 - मुकुट बिहारी लाल भार्गव - भारतीय राजनीतिज्ञ तथा लोक सभा के सदस्य थे।
1911 - नागार्जुन - भारतीय साहित्यकार।
1921 - रघुवंश - हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक थे।
1928 - कल्याणजी - हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध संगीतकर।
1934 - सी. एन. आर. राव - भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक।
1956 - हरिवंश नारायण सिंह - भारतीय पत्रकार और राजनेता।
1969 - भूपेन्द्र यादव भारत के वरिष्ठ सदन राज्यसभा के सदस्य।
1969 – श्रीलंका के क्रिकेटर सनत जयसूर्या का जन्म हुआ। इन्होंने 110 टेस्ट में 6,973 रन बनाए और 98 विकेट लिए। 445 वनडे में इनके नाम 13,430 रन और 323 विकेट हैं।
1997 - अविका गोर एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री हैं।
1917 - दादा भाई नौरोजी - भारत के प्रसिद्ध दिग्गज राजनेता, उद्योगपति, शिक्षाविद और विचारक।
1970 - आशा देवी आर्यनायकम - एक समर्पित महिला थीं जिन्होंने अनभिज्ञता को दूर करने और ज्ञान, प्रेम और विश्वास से भरी दुनिया बनाने की कोशिश की।
1985 - के. एच. आरा - भारत के प्रसिद्ध चित्रकार थे।
2007 - साहिब सिंह वर्मा
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ।
2020 - गोल्डन बाबा के नाम से मशहूर सुधीर कुमार मक्कड़ उर्फ लाइटबाज का दिल्ली एम्स में निधन हुआ।
2021 - राज कौशल एक भारतीय फिल्म निर्देशक/निर्माता, जोकि मुख्य तौर से हिंदी सिनेमा में सक्रिय थे।
2021 - दुनिया के एकमात्र संस्कृत समाचार पत्र 'सुधर्मा' के संपादक केवी संपत कुमार (64) का मैसूर में दिल का दौरा पड़ने से निधन हुआ।
2021 - यूपी के संतकबीरनगर लोकसभा सीट से पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी (50) का देर रात निधन हुआ।
2023 - बोस्नियाई पेशेवर फुटबॉलर वाहिदीन मुसेमिक (76) का निधन हुआ।
2025 - रंगीन कांच पर अपनी कलाकृतियों के लिए प्रसिद्ध ब्रिटिश कलाकार ब्रायन क्लार्क (71) का कैंसर से निधन हुआ।
2025 - ब्रिटिश पुरातत्वविद् और लेखक ब्रायन फागन (88) का निधन हुआ।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
हैदराबाद, एजेंसियां। वैज्ञानिक ब्रह्मांड के शुरुआती दौर के रहस्यों को समझने के लिए एक अनोखे मिशन पर काम कर रहे हैं। CosmoCube नाम का सूटकेस के आकार का छोटा सैटेलाइट चांद की कक्षा में रहकर बेहद कमजोर रेडियो सिग्नल का अध्ययन करेगा। इन संकेतों के जरिए वैज्ञानिक बिग बैंग के बाद और पहले तारों के बनने से पहले के समय को समझने की कोशिश करेंगे। चांद की रेडियो शील्ड का करेगा इस्तेमाल CosmoCube की खासियत यह है कि यह चांद के उस हिस्से का इस्तेमाल प्राकृतिक ढाल के रूप में करेगा, जो पृथ्वी से दूर रहता है। चांद पृथ्वी से आने वाले रेडियो इंटरफेरेंस को रोकने में मदद करेगा, जिससे सैटेलाइट को ब्रह्मांड से आने वाले बेहद कमजोर संकेतों को पकड़ने का बेहतर मौका मिलेगा। प्रस्तावित मिशन में सैटेलाइट चांद के चारों ओर करीब दो घंटे की कक्षा में घूमेगा। इसमें लगभग 40 मिनट चांद की दूसरी तरफ बिताकर रेडियो सिग्नल रिकॉर्ड करने की योजना है। 13.5 अरब साल पुराने संकेतों की तलाश वैज्ञानिक जिस सिग्नल का अध्ययन करना चाहते हैं, वह शुरुआती ब्रह्मांड में मौजूद हाइड्रोजन से जुड़ा 21-सेंटीमीटर रेडियो सिग्नल है। यह संकेत ब्रह्मांड के उस दौर की जानकारी दे सकता है, जब पहले तारे और आकाशगंगाएं अस्तित्व में नहीं आई थीं। बिग बैंग के बाद ब्रह्मांड में करीब 150 मिलियन वर्षों तक कॉस्मिक डार्क एज का दौर रहा। इसके बाद पहले तारों का निर्माण शुरू हुआ। इस संक्रमण को समझना खगोल विज्ञान की बड़ी चुनौतियों में से एक है। धरती से सिग्नल पकड़ना क्यों मुश्किल? पृथ्वी से इन बेहद कमजोर रेडियो संकेतों का अध्ययन करना आसान नहीं है। आयनोस्फीयर कम-फ्रीक्वेंसी वाली कुछ रेडियो तरंगों को प्रभावित करता है। इसके अलावा FM रेडियो, टेलीकम्युनिकेशन और सैटेलाइट से पैदा होने वाला रेडियो शोर भी कॉस्मिक सिग्नल को दबा सकता है। इसी समस्या को देखते हुए वैज्ञानिक चांद के दूर वाले हिस्से को रेडियो-शांत क्षेत्र के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते हैं। डार्क मैटर के रहस्य भी खुल सकते हैं CosmoCube से मिलने वाले आंकड़े सिर्फ पहले तारों की कहानी समझने में ही मदद नहीं कर सकते, बल्कि शुरुआती ब्रह्मांड में डार्क मैटर की भूमिका पर भी नई जानकारी मिल सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, डार्क मैटर के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव ने गैस और दूसरे पदार्थों को एक साथ खींचने में भूमिका निभाई होगी। इसी प्रक्रिया से आगे चलकर तारों और आकाशगंगाओं के निर्माण में मदद मिली। छोटा सैटेलाइट, बड़ी चुनौती आकार छोटा होने के बावजूद CosmoCube के लिए तकनीकी चुनौतियां काफी बड़ी हैं। सैटेलाइट को अपने ही सिस्टम और दूसरे अंतरिक्षीय स्रोतों से पैदा होने वाले शोर को कॉस्मिक सिग्नल से अलग करना होगा। इसके लिए हल्के रेडियो एंटीना और एडवांस्ड डेटा प्रोसेसिंग तकनीक का इस्तेमाल प्रस्तावित है। वैज्ञानिक सैटेलाइट की स्थिति और आसपास के वातावरण की लगातार निगरानी भी करेंगे, ताकि इंस्ट्रूमेंट से पैदा होने वाले इंटरफेरेंस की पहचान की जा सके। पांच साल में लॉन्च की तैयारी संभव वैज्ञानिकों की टीम फिलहाल CosmoCube के मॉडल को विकसित और टेस्ट कर रही है। इसमें अंतरिक्ष में सैटेलाइट के थर्मल प्रदर्शन का परीक्षण भी शामिल है। टीम के मुताबिक, पर्याप्त सहयोग और संसाधन मिलने पर मिशन को करीब पांच साल में लॉन्च के लिए तैयार किया जा सकता है। हालांकि, चांद के दूर वाले हिस्से में बढ़ते अंतरिक्ष अभियानों और भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण रेडियो-शांत वातावरण को बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती हो सकती है। अगर CosmoCube सफल होता है, तो यह ब्रह्मांड के उस बेहद शुरुआती दौर को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है, जो अब तक वैज्ञानिकों के लिए काफी हद तक अनदेखा रहा है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून की लगातार बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र की 17 अगस्त सुबह की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 110 सड़कें बंद, 91 बिजली ट्रांसफार्मर बाधित और 217 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा असर मंडी और कुल्लू जिलों में देखने को मिला है। मंडी में सबसे ज्यादा सड़कें बंद बारिश से मंडी जिले में 39 सड़कें बंद हैं, जबकि कुल्लू में 33 सड़कें प्रभावित हैं। चंबा में 12, शिमला में नौ, कांगड़ा में छह और सिरमौर में भी कई सड़कें बंद हैं। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आवाजाही प्रभावित हुई है। बिजली और पानी की व्यवस्था भी प्रभावित बारिश के कारण प्रदेश में 91 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर ठप हैं। मंडी में 28, शिमला में 22 और सिरमौर में 41 ट्रांसफार्मर प्रभावित बताए गए हैं। इसके अलावा 217 पेयजल आपूर्ति योजनाओं पर भी बारिश का असर पड़ा है। मानसून में 79 लोगों की मौत 16 अगस्त तक की संचयी रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रदेश में 79 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं मानसून अवधि में सड़क हादसों में 108 लोगों की जान गई है। भूस्खलन, बाढ़, डूबने और बिजली गिरने जैसी घटनाओं ने भी मुश्किलें बढ़ाई हैं। 973 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान 30 जून से 16 अगस्त तक हिमाचल में मानसून से करीब 973.16 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। इसमें सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सरकारी एवं निजी संपत्तियों को हुआ नुकसान शामिल है।
नई दिल्ली: बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा स्वीकार करने की अपील की है। पूनावाला के इस्तीफे के बाद बीजेपी की आंतरिक राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूनावाला के मुताबिक, उन्होंने इससे पहले 30 जुलाई 2026 को आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों का हवाला देते हुए पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे की पेशकश की थी। उस समय पार्टी ने उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार नहीं किया था और उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा था। लंबी चर्चा के बाद लिया अंतिम फैसला अपने ताजा पत्र में शहजाद पूनावाला ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार-विमर्श और गंभीर मंथन के बाद उन्होंने अपने फैसले पर कायम रहने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं और जिन लोगों के बारे में उन्होंने पार्टी नेतृत्व को जानकारी दी थी, उसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने का अंतिम फैसला किया। इस तरह पूनावाला अब बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद के साथ-साथ सक्रिय प्राथमिक सदस्यता से भी अलग होने की प्रक्रिया में हैं। पीएम मोदी समेत वरिष्ठ नेताओं का जताया आभार इस्तीफे के पत्र में पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महामंत्री बीएल संतोष के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के प्रति उनके मन में किसी तरह की नाराजगी या आहत भावना नहीं है। पिछले पांच वर्षों में पार्टी की ओर से मिले मंच और अवसरों के लिए उन्होंने नेतृत्व का धन्यवाद किया। निजी क्षेत्र में जाने की तैयारी पूनावाला ने अपने इस्तीफे की वजह मुख्य रूप से आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों को बताया है। उन्होंने कहा कि अब वह निजी क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी से संगठनात्मक रूप से अलग होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के दृष्टिकोण तथा कार्यों का समर्थन करते रहेंगे। ‘व्यवस्था छोड़ रहा हूं, विचार और व्यक्ति नहीं’ शहजाद पूनावाला के इस्तीफे की सबसे अहम बात उनका यह बयान रहा कि वह “पार्टी की व्यवस्था छोड़ रहे हैं, लेकिन विचार और व्यक्ति नहीं।” इस बयान से साफ है कि पूनावाला ने संगठन से अलग होने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी की विचारधारा के प्रति अपना समर्थन बरकरार रखने की बात कही है। अब देखना होगा कि बीजेपी नेतृत्व उनके इस्तीफे को किस तरह स्वीकार करता है और आगे पार्टी में उनकी भूमिका क्या रहती है।