नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8th Pay Commission से जुड़ा नया अपडेट सामने आया है। आयोग ने कर्मचारियों, पेंशनर्स, कर्मचारी संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से बातचीत के लिए कई शहरों में क्षेत्रीय बैठकों का कार्यक्रम तय किया है। इन बैठकों में वेतन, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों पर सुझाव लिए जाएंगे।
8th Pay Commission की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।
आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक अलग-अलग शहरों में क्षेत्रीय बैठकें इस प्रकार होंगी:
जयपुर: 31 अगस्त और 1 सितंबर
चेन्नई: 7 और 8 सितंबर
पुडुचेरी: 9 सितंबर
चंडीगढ़: 16 से 18 सितंबर
इसके अलावा आयोग मुंबई में सेंट्रल रेलवे जोन के विभिन्न विभागों का दौरा करेगा। इस दौरान कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों और उनसे जुड़े मुद्दों को समझने का प्रयास किया जाएगा।
आयोग ने अभी इन बैठकों का विस्तृत एजेंडा जारी नहीं किया है। हालांकि, कर्मचारियों की नजर सबसे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर पर है। फिटमेंट फैक्टर के आधार पर कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में संशोधन किया जाता है।
कर्मचारी संगठन फिटमेंट फैक्टर को 2.86 से 3.83 गुना तक करने की मांग कर रहे हैं। यदि 2.86 गुना फिटमेंट फैक्टर की मांग स्वीकार होती है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़कर 50,000 रुपये से अधिक हो सकती है।
8th Pay Commission के सामने करीब 65 लाख पेंशनर्स से जुड़े मुद्दे भी हैं। नए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बेसिक पेंशन में संशोधन की संभावना है।
प्रस्ताव के मुताबिक, न्यूनतम पेंशन मौजूदा 9,000 रुपये से बढ़कर 20,500 रुपये से अधिक हो सकती है। हालांकि, यह संभावित बदलाव है और अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।
इसके अलावा HRA और महंगाई भत्ते (DA) से जुड़े बदलावों पर भी विचार किया जा सकता है।
8th Pay Commission का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था। आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए मई 2027 तक का समय दिया गया है।
आयोग की सिफारिशें आने के बाद उन्हें लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। रिपोर्ट आने के साथ ही कर्मचारियों को तुरंत बढ़ी हुई सैलरी मिलना जरूरी नहीं है। सरकार की मंजूरी और लागू करने की प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता है।
नोट: 2.86 या 3.83 फिटमेंट फैक्टर और उससे बनने वाली नई सैलरी/पेंशन फिलहाल कर्मचारी संगठनों की मांग या संभावित गणना है, इसे सरकार द्वारा मंजूर वेतन वृद्धि नहीं माना जाना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर अभियान चला रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 2029 लोकसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर फिलहाल कोई सीधा ऐलान नहीं किया है। हिंगोली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने चुनावी राजनीति की बजाय सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने को अपनी प्राथमिकता बताया। ‘स्कूल सुधर गए तो चुनाव लड़ने का मुद्दा ही नहीं बचेगा’ अभिजीत दीपके से जब हिंगोली लोकसभा सीट से 2029 में चुनाव लड़ने की तैयारियों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अगर सरकार सभी सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधार देती है, तो उनके पास लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कोई मुद्दा ही नहीं बचेगा। उनका यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले सप्ताह ही उन्होंने महाराष्ट्र में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत वह ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की समस्याओं को सामने ला रहे हैं। दीपके का कहना है कि कई ग्रामीण बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। उन्होंने सरकार से छात्रों के लिए आने-जाने की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है। अधिकारियों और नेताओं के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की मांग दीपके ने महाराष्ट्र सरकार के सामने यह सवाल भी रखा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिए अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य क्यों नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मंत्रियों और नेताओं से कम से कम एक दिन अपने बच्चों को गांव के सरकारी स्कूलों में भेजने की अपील की। उनके मुताबिक, ऐसा करने से उन्हें ग्रामीण छात्रों की वास्तविक समस्याओं और सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति को समझने का मौका मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार नहीं चाहते, क्योंकि गरीब परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलने से राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है। स्कूल में शिक्षक के नशे में सोने का वीडियो किया था साझा दीपके ने हाल ही में एक जिला परिषद स्कूल का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। उन्होंने दावा किया था कि वीडियो में स्कूल के प्रधानाध्यापक कथित तौर पर शराब के नशे में कक्षा में सोते नजर आए। उनके अनुसार, शिकायत के बाद अधिकारियों ने संबंधित शिक्षक को मंगलवार को निलंबित कर दिया। हालांकि, दीपके ने कहा कि जब तक स्कूल में नए शिक्षक की नियुक्ति नहीं होती, वह गांव नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने बताया कि स्कूल में चार शिक्षकों की आवश्यकता है, जबकि फिलहाल केवल दो शिक्षक कार्यरत हैं। उन्होंने दो और शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है। साथ ही, आने वाले दिनों में चार-पांच अन्य स्कूलों का दौरा करने की बात भी कही है। चुनाव से ज्यादा शिक्षा पर फोकस? अभिजीत दीपके का ताजा बयान फिलहाल 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर किसी स्पष्ट राजनीतिक घोषणा के बजाय शिक्षा व्यवस्था को लेकर उनके अभियान पर केंद्रित दिखाई देता है। हालांकि, हिंगोली से उनका नाम चुनावी चर्चा में आने के बाद यह सवाल जरूर उठ रहा है कि क्या भविष्य में वह सीधे चुनावी राजनीति में उतरेंगे।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली की खराब हवा और प्रदूषित यमुना को लेकर संसद की स्थायी समिति ने गंभीर चिंता जताई है। समिति ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद दिल्ली की वायु गुणवत्ता और यमुना की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। रिपोर्ट में वैज्ञानिक संस्थानों की विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल प्रदूषण की समस्या से सीधे निपटने के लिए करने की सिफारिश की गई है। दिल्ली की हवा पर समिति ने जताई चिंता राज्यसभा की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन संबंधी विभागीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में दिल्ली को दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानियों में शामिल होने पर चिंता जताई। समिति ने कहा कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सिर्फ योजनाएं बनाने के बजाय उपलब्ध वैज्ञानिक संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल जरूरी है। समिति ने केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (CSIO) से सेंसर, पर्यावरण निगरानी उपकरण और रियल टाइम डेटा सिस्टम विकसित करने की दिशा में काम करने को कहा है। प्रदूषण मापने के लिए विकसित हो रही तकनीक CSIO ने समिति को बताया कि उसके वैज्ञानिक पर्यावरण प्रदूषण की निगरानी के लिए कई तकनीकों पर काम कर रहे हैं। संस्थान ने ऐसी गैस मॉनिटरिंग प्रणाली विकसित की है, जिससे मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड और अमोनिया जैसी गैसों की निगरानी की जा सकती है। इस तकनीक का इस्तेमाल पराली जलाने से निकलने वाली गैसों की निगरानी में भी किया जा सकता है। दिल्ली में प्रदूषण कम करने को लेकर चेन्नई स्थित केंद्र की ओर से एक प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। धूल रोकने के लिए इलेक्ट्रोस्टैटिक तकनीक धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए संस्थान ने इलेक्ट्रोस्टैटिक स्प्रे तकनीक विकसित की है। इसमें पानी की बेहद छोटी बूंदों पर विद्युत आवेश दिया जाता है, जिससे वे धूल के कणों के संपर्क में आकर उन्हें नीचे बैठाने में मदद करती हैं। संस्थान के अनुसार यह तकनीक खास तौर पर महीन धूल को नियंत्रित करने में उपयोगी हो सकती है। इससे धूल नियंत्रण के लिए पानी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की खपत भी कम करने में मदद मिल सकती है। इसकी अनुमानित लागत करीब 1 से 6 लाख रुपये बताई गई है। यमुना की रियल टाइम मॉनिटरिंग की योजना यमुना की स्थिति सुधारने के लिए पानी की गुणवत्ता की लगातार निगरानी करने की योजना भी सामने आई है। सेंसर और IoT आधारित प्रणाली के जरिए नदी के पानी के अलग-अलग मानकों का रियल टाइम डेटा जुटाने का प्रस्ताव है। इस डेटा को एक केंद्रीय प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जा सकता है, जिससे अधिकारियों को प्रदूषण वाले इलाकों की पहचान और सफाई की कार्रवाई में मदद मिलेगी। यमुना की सफाई में माइक्रोब्स का इस्तेमाल समिति ने जीनोमिक्स एवं समेकित जीव विज्ञान संस्थान से ऐसे सूक्ष्मजीवों की पहचान और अध्ययन करने की सिफारिश की है, जो यमुना में मौजूद सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और अन्य प्रदूषकों को तोड़ने में सक्षम हों। समिति ने वैज्ञानिक संस्थानों से नई तकनीक विकसित करने के साथ-साथ उन्हें जल्द से जल्द जमीन पर लागू करने पर भी जोर दिया है। साबरमती की तर्ज पर विकसित होगा यमुना रिवरफ्रंट दिल्ली सरकार यमुना के किनारे साबरमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर विकास करने की तैयारी कर रही है। जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने अधिकारियों के साथ गुजरात में साबरमती रिवरफ्रंट का निरीक्षण किया। सरकार के मुताबिक यमुना किनारे बड़े पार्क, साइकिल ट्रैक और खेल मैदान विकसित करने की योजना है। लक्ष्य दिल्ली में एक आधुनिक और विश्वस्तरीय यमुना रिवरफ्रंट तैयार करना है। कलिंदी कुंज में बनेगा छठ घाट यमुना किनारे कलिंदी कुंज में करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से छठ घाट विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है। इससे छठ पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके अलावा धोबी घाटों से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए भी साबरमती मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है। दिल्ली में मशीनीकृत लॉन्ड्री जैसी व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है। कुल मिलाकर, समिति ने साफ किया है कि दिल्ली की हवा और यमुना को सुधारने के लिए केवल बजट खर्च करना पर्याप्त नहीं है। प्रदूषण की लगातार निगरानी, वैज्ञानिक तकनीक और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
काठमांडू, एजेंसियां। भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने नेपाल के प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री बालेंद्र (बालेन) शाह से मुलाकात की। यह बैठक मंगलवार को काठमांडू स्थित सिंहदरबार में प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और सैन्य संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई। बैठक में नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। आपसी हित और सैन्य सहयोग पर बातचीत बैठक के दौरान भारत और नेपाल के बीच आपसी हित से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ दोनों देशों के द्विपक्षीय सैन्य संबंधों को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया गया। भारतीय सेना प्रमुख का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब दोनों पड़ोसी देश पारंपरिक रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। जनरल धीरज सेठ को मिला मानद जनरल का पद नेपाल यात्रा के दौरान राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने जनरल धीरज सेठ को नेपाली सेना के मानद जनरल की उपाधि प्रदान की। भारत और नेपाल के सेना प्रमुखों को एक-दूसरे की सेना में मानद जनरल का पद देने की यह परंपरा 1950 से चली आ रही है और दोनों सेनाओं के बीच विशेष संबंधों का प्रतीक मानी जाती है। गोरखा भर्ती और रक्षा संबंधों पर नजर जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा के दौरान गोरखा सैनिकों की भारतीय सेना में भर्ती का मुद्दा भी चर्चा में रहा है। नेपाल के पूर्व गोरखा सैनिकों ने बालेन शाह सरकार से अग्निपथ योजना के तहत नेपाली युवाओं की भर्ती का रास्ता साफ करने की मांग की है। जनरल सेठ ने नेपाल के सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल से भी द्विपक्षीय बातचीत की। उनकी तीन दिवसीय यात्रा का उद्देश्य भारत-नेपाल के पारंपरिक सैन्य संबंधों को और मजबूत करना तथा रक्षा सहयोग को नई गति देना है।