राष्ट्रीय

15,400 टन LPG लेकर नवी मुंबई पहुंचा ‘ग्रीन आशा’, होर्मुज पार कर भारत को राहत

Anjali Kumari अप्रैल 9, 2026 0
Green Asha LPG ship India
Green Asha LPG ship India

मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। 15,400 टन एलपीजी (LPG) लेकर भारतीय ध्वज वाला टैंकर ‘ग्रीन आशा’ सुरक्षित रूप से नवी मुंबई पहुंच गया है। यह जहाज 6 अप्रैल को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकला था और अब भारत पहुंचकर घरेलू गैस आपूर्ति को मजबूती देगा। अधिकारियों के अनुसार, इसी दिन निकला दूसरा टैंकर ‘ग्रीन सानवी’ पहले ही भारत पहुंच चुका है। ऐसे समय में यह आपूर्ति बेहद अहम मानी जा रही है, जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ रहा है।

 

जेएनपीए ने किया स्वागत, जहाज और चालक दल पूरी तरह सुरक्षित


जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण ने गुरुवार को इस टैंकर के आगमन की पुष्टि करते हुए उसका स्वागत किया। प्राधिकरण के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला एलपीजी टैंकर है जो सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर भारत के इस महत्वपूर्ण बंदरगाह तक पहुंचा है। टैंकर ने BPCL-IOCL द्वारा संचालित तरल बर्थ पर लंगर डाला। प्राधिकरण ने बताया कि जहाज, उसका माल और चालक दल के सभी सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसे जटिल अंतरराष्ट्रीय हालात में भारत की समुद्री संचालन क्षमता और आपूर्ति प्रबंधन की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

 

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक उपलब्धि


नवी मुंबई स्थित यह बंदरगाह, जिसे जेएनपीटी या न्हावा शेवा बंदरगाह भी कहा जाता है, देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में बेहद अहम भूमिका निभाता है। पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज मार्ग पर बाधाओं ने तेल और गैस आपूर्ति को प्रभावित किया है, लेकिन भारत वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए आपूर्ति बनाए रखने में जुटा है। ‘ग्रीन आशा’ का सुरक्षित पहुंचना इस बात का संकेत है कि भारत चुनौतीपूर्ण हालात में भी अपनी एलपीजी और ऊर्जा जरूरतों को संतुलित रखने में सफल हो रहा है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Mirzapur advocate murder
मिर्जापुर में सनसनीखेज वारदात: वरिष्ठ अधिवक्ता की गोली मारकर हत्या, सीसीटीवी में कैद हुए हमलावर

मिर्जापुर, एजेंसी। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हुए बदमाशों ने शनिवार की सुबह एक खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। कटरा कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सत्भाव नगर गांव में बाइक सवार हमलावरों ने पूर्व ग्राम प्रधान और वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव सिंह (उर्फ रिंटू सिंह) की सीने में गोली मारकर हत्या कर दी। यह पूरी घटना पास में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसमें बदमाश अधिवक्ता के सीने पर कट्टा सटाकर गोली चलाते नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल व्याप्त है।   सुबह की सैर के दौरान घात लगाकर हमला जानकारी के मुताबिक, यह वारदात 11 अप्रैल, 2026 की सुबह उस समय हुई जब राजीव सिंह अपने गांव में रोजाना की तरह टहलने निकले थे। इसी दौरान दो अज्ञात युवक मोटरसाइकिल पर सवार होकर वहां पहुंचे। वायरल वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि एक हमलावर बाइक से नीचे उतरा और अधिवक्ता के समीप जाकर उनके सीने पर देसी तमंचा (कट्टा) सटा दिया। इससे पहले कि राजीव सिंह कुछ समझ पाते, आरोपी ने ट्रिगर दबा दिया। गोली लगने के तुरंत बाद अधिवक्ता जमीन पर गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई।   भागने की कोशिश में फंसी बदमाशों की बाइक हत्याकांड को अंजाम देने के बाद हमलावरों ने तुरंत मौके से फरार होने की कोशिश की, लेकिन उनकी मोटरसाइकिल ने उन्हें धोखा दे दिया। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, शूटर अपने साथी की बाइक पर पीछे बैठ तो गया, पर काफी देर तक गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई। इसी बीच शोर सुनकर पास मौजूद दो स्थानीय युवकों ने साहस दिखाते हुए बदमाशों को पकड़ने का प्रयास किया। हालांकि, खुद को घिरा देख बदमाशों ने उन युवकों पर भी कट्टा तान दिया और जान से मारने की धमकी देकर उन्हें पीछे धकेल दिया। कुछ पलों की मशक्कत के बाद बाइक स्टार्ट हुई और दोनों आरोपी तेजी से भाग निकले।   पहले भी हो चुके थे जानलेवा हमले इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि मृतक अधिवक्ता ने अपनी जान को खतरा होने की आशंका पहले ही जताई थी। उन्होंने पूर्व में कटरा थाने में एक प्रार्थना पत्र देकर पुलिस को सूचित किया था कि उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है। बताया जा रहा है कि राजीव सिंह पर इससे पहले भी 2 बार जानलेवा हमले हो चुके थे, लेकिन पुलिस की ओर से पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित नहीं किए गए। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते पुलिस ने उनकी शिकायत पर ठोस कदम उठाए होते, तो आज यह दुखद घटना नहीं होती।   पुलिस की कार्रवाई और रंजिश का एंगल घटना की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग के आला अधिकारी और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जांच टीम ने इलाके के सभी सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है ताकि हमलावरों के भागने के रूट का पता लगाया जा सके। प्राथमिक जांच के आधार पर पुलिस इसे पुरानी रंजिश या व्यक्तिगत विवाद का मामला मान रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संदिग्धों की धरपकड़ के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं और जल्द ही आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। इस हत्या के विरोध में स्थानीय वकीलों और ग्रामीणों में भारी रोष देखा जा रहा है।

Anjali Kumari अप्रैल 11, 2026 0
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पुणे में बड़ी चूक: मंत्री छगन भुजबल का हेलीकॉप्टर हेलीपैड की बजाय कार पार्किंग में उतरा, CM ने दिए जांच के आदेश

महाराष्ट्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। राज्य सरकार के मंत्री छगन भुजबल का हेलीकॉप्टर निर्धारित हेलीपैड की बजाय सीधे कार पार्किंग क्षेत्र में उतार दिया गया। इस घटना ने सुरक्षा प्रोटोकॉल और पायलट की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना पुणे के खानवडी इलाके में उस समय हुई, जब भुजबल नासिक से एक जिला परिषद स्कूल के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। निर्धारित हेलीपैड मौजूद होने के बावजूद पायलट ने हेलीकॉप्टर को पास की पार्किंग में लैंड करा दिया। मौके पर मचा हड़कंप अचानक हुई इस लैंडिंग से कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि मंत्री पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पायलट की लापरवाही पर उठे सवाल प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना पायलट की बड़ी चूक मानी जा रही है। एविएशन से जुड़े नियमों के तहत हेलीकॉप्टर को केवल अधिकृत हेलीपैड पर ही उतारने की अनुमति होती है, ऐसे में यह लैंडिंग सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मानी जा रही है। CM ने दिए जांच के आदेश मामले को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट कहा है कि इस घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल यह घटना न सिर्फ पायलट की लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी चूक भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकती है, इसलिए जांच के निष्कर्ष बेहद अहम होंगे।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
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UP में बड़ा न्यायिक फेरबदल: 1,086 जजों का ट्रांसफर, अदालतों की कार्यप्रणाली सुधारने की तैयारी

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मथुरा में भीषण नाव दुर्घटना: पांटून पुल से टकराकर पलटी मोटरबोट, पंजाब-हरियाणा के 10 श्रद्धालुओं की मौत

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संसद में दिखी पक्ष-विपक्ष की दुर्लभ केमिस्ट्री: महात्मा फुले की 200वीं जयंती पर पीएम मोदी और राहुल गांधी के बीच हुई लंबी चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय लोकतंत्र की एक सुखद और विरल तस्वीर शनिवार को संसद भवन परिसर में देखने को मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक-दूसरे के साथ सहज मुद्रा में नजर आए। अवसर था समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष कार्यक्रम का। संसद के 'प्रेरणा स्थल' पर आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा के दौरान राजनीति के दो धुर विरोधियों के बीच कड़वाहट के बजाय सौहार्दपूर्ण संवाद ने सबका ध्यान खींचा।   श्रद्धांजलि सभा में साथ आए दिग्गज नेता संसद भवन परिसर में स्थित प्रेरणा स्थल पर आज सुबह से ही गहमागहमी रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महात्मा फुले को नमन करने पहुंचे, जहां विपक्ष के नेता राहुल गांधी पहले से मौजूद थे। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन हाथ जोड़कर और मुस्कुराते हुए किया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और कई अन्य पूर्व व वर्तमान सांसद भी उपस्थित थे। सभी नेताओं ने महान समाज सुधारक की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। डेढ़ मिनट का संवाद और वायरल वीडियो इस मुलाकात की सबसे खास बात वह 1 मिनट 30 सेकंड का वीडियो है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि पीएम मोदी और राहुल गांधी केवल औपचारिक तौर पर नहीं मिले, बल्कि उनके बीच काफी देर तक सार्थक बातचीत हुई। इस दौरान दोनों के चेहरों पर मुस्कान थी और वे किसी गंभीर विषय पर चर्चा करते दिखे। आमतौर पर सदन के भीतर और बाहर एक-दूसरे पर तीखे हमले करने वाले इन दोनों शीर्ष नेताओं का यह 'कैंडिड' अंदाज राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।   महात्मा फुले की विरासत का सम्मान यह पूरा आयोजन महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जन्मशती के गौरवशाली अवसर पर केंद्रित था। भाजपा और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं ने इस मौके पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समाज के वंचित वर्गों के लिए फुले के योगदान को याद किया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ कई वरिष्ठ भाजपा नेता भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस सौहार्दपूर्ण माहौल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।   संवाद और लोकतंत्र की मजबूती राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद परिसर में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच इस तरह का संवाद स्वस्थ लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। पिछले कुछ समय से संसद में जारी गतिरोध के बीच, पीएम मोदी और राहुल गांधी की इस मुलाकात ने यह संदेश दिया है कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय प्रतीकों और महापुरुषों के सम्मान के मुद्दे पर सभी एकजुट हैं। यह वायरल वीडियो न केवल एक शिष्टाचार भेंट है, बल्कि देश की संसदीय परंपराओं की उस मजबूती को भी दर्शाता है जहाँ संवाद के रास्ते हमेशा खुले रहते हैं।

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