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HPCL Turns to Russian Oil Imports

HPCL का बड़ा फैसला: बढ़ती ऊर्जा लागत से बचने के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई

surbhi मई 13, 2026 0
HPCL oil refinery operations as India increases Russian crude imports amid rising global energy prices
HPCL Increases Russian Oil Imports

भारत की प्रमुख सरकारी तेल कंपनी Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) ने बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों के बीच एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने रूस से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की खरीद में तेजी लाने का फैसला किया है, ताकि उत्पादन लागत और मुनाफे पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके।

कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर Vikas Kaushal ने पोस्ट-अर्निंग्स कॉन्फ्रेंस कॉल में बताया कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए कंपनी अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए रूसी तेल पर अधिक निर्भर हो रही है।

मुनाफे को स्थिर रखने की रणनीति

HPCL ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण लागत बढ़ रही है। ऐसे में कंपनी अपने रिफाइनिंग मार्जिन को बचाने के लिए सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर रही है।

प्रबंधन के अनुसार, कंपनी ने अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुरक्षित कर ली है। साथ ही, जुलाई महीने के लिए स्पॉट कार्गो की खरीद भी शुरू कर दी गई है।

रूस से बढ़ी खरीद, वैश्विक संकट का असर

जानकारी के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव जैसे हालात ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। इसी दबाव को कम करने के लिए HPCL अब रूस से ज्यादा मात्रा में कच्चा तेल खरीद रही है।

कंपनी का मानना है कि मौजूदा स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो घरेलू स्तर पर ईंधन कीमतों को स्थिर रखना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

वित्तीय नतीजे: मुनाफे में 20% की बढ़ोतरी

HPCL ने हाल ही में अपने तिमाही नतीजे जारी किए, जिसमें कंपनी के शुद्ध मुनाफे में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • शुद्ध मुनाफा: ₹4,902 करोड़
  • पिछले तिमाही में: ₹4,703 करोड़
  • EBITDA में वृद्धि: 27.9% की मजबूत बढ़त
  • कुल राजस्व: लगभग ₹1.14 लाख करोड़ (स्थिर)

कंपनी ने वित्त वर्ष के लिए ₹19.25 प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड भी घोषित किया है।

ईंधन खपत पर सरकार की चिंता

कंपनी की यह रणनीति ऐसे समय में सामने आई है जब देश में ऊर्जा खपत और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की ओर से भी ईंधन की बचत और खपत कम करने की अपील की गई है।

हालांकि HPCL का कहना है कि वह बाजार की परिस्थितियों के अनुसार संतुलित नीति अपना रही है ताकि उपभोक्ताओं पर अचानक बोझ न बढ़े।

क्या है आगे की चुनौती?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारत की तेल कंपनियों को सप्लाई और कीमत दोनों स्तर पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में रूस जैसे स्रोतों पर बढ़ती निर्भरता एक रणनीतिक बदलाव के रूप में देखी जा रही है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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SpiceJet विमान में AC और वेंटिलेशन बंद होने के बाद परेशान यात्री
SpiceJet Flight: विमान में AC बंद होने से यात्रियों का दम घुटा, रनवे से लौटी फ्लाइट; दूसरी उड़ान से पुणे भेजे गए यात्री

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली से पुणे जा रही SpiceJet की फ्लाइट SG 105 में मंगलवार रात तकनीकी समस्या के बाद यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। विमान के केबिन में AC और वेंटिलेशन काम नहीं करने से यात्रियों को गर्मी और उमस के बीच सांस लेने में दिक्कत होने लगी। स्थिति बिगड़ने पर यात्रियों ने हंगामा किया, जिसके बाद विमान को रनवे से वापस लाया गया। बाद में एयरलाइन ने दूसरी फ्लाइट की व्यवस्था कर यात्रियों को पुणे भेजा।   100 से अधिक यात्री गर्मी और उमस से परेशान   यह फ्लाइट दिल्ली से पुणे के लिए रवाना होने वाली थी। यात्रियों के मुताबिक, विमान में बोर्डिंग के बाद काफी देर तक AC नहीं चला। विमान रनवे पर करीब 40 से 45 मिनट तक रहने के बावजूद केबिन का तापमान और वेंटिलेशन सामान्य नहीं हुआ। गर्मी और घुटन के कारण कई यात्रियों की तबीयत बिगड़ने लगी। कुछ यात्रियों ने सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। इसके बाद यात्रियों ने उड़ान रोकने और विमान के दरवाजे खोलने की मांग शुरू कर दी।   बच्चों और गर्भवती महिलाओं को भी हुई परेशानी   एक यात्री लेशपाल ने ANI को बताया कि केबिन में वेंटिलेशन नहीं होने के कारण यात्रियों को काफी दिक्कत हुई। उनके मुताबिक, गर्मी के कारण यात्रियों के कपड़े पसीने से भीग गए और कुछ बच्चे रोने लगे। गर्भवती महिलाओं को भी परेशानी होने की बात कही गई। यात्रियों के हंगामे के बाद विमान को वापस लाया गया और उन्हें उतरने की अनुमति दी गई।   तकनीकी जांच के बाद विमान उड़ान के लिए अनुपयुक्त पाया गया   SpiceJet के प्रवक्ता के अनुसार, फ्लाइट में तकनीकी समस्या सामने आई थी। विमान को उड़ान के लिए तैयार किया जा रहा था, लेकिन समस्या के कारण उसे संचालित नहीं किया जा सका। एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों को हुई परेशानी के लिए उसे खेद है और उन्हें उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दूसरे विमान की व्यवस्था की गई।   सुबह पांच बजे दूसरी फ्लाइट से भेजे गए यात्री   यात्रियों के अनुसार, दूसरी फ्लाइट की व्यवस्था के बाद उन्हें अगले दिन सुबह करीब 5 बजे पुणे के लिए रवाना किया गया। इसके चलते यात्रियों को कई घंटे एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा। घटना के बाद यात्रियों ने विमान में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति और तकनीकी समस्या के बावजूद बोर्डिंग कराए जाने पर सवाल उठाए हैं। एयरलाइन की ओर से तकनीकी खराबी और उड़ान में हुई देरी को लेकर जानकारी दी गई है।

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मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में बुधवार तड़के भारी बारिश के बीच घाटकोपर-कुर्ला इलाके में भूस्खलन हुआ। पहाड़ी का एक हिस्सा चॉल पर गिरने से कई लोग मलबे में दब गए। शुरुआती रिपोर्टों में दो मौतों की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या बढ़कर छह बताई गई है। राहत और बचाव अभियान जारी है।   तड़के हुआ हादसा   भूस्खलन के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई। मलबे की चपेट में आए लोगों को निकालने के लिए राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचे। भारी बारिश और मलबे के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आने की जानकारी सामने आई है।   मलबे में फंसे लोगों की तलाश   प्रशासन और बचाव एजेंसियां मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं। शुरुआती घंटों में कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई थी। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है।   भारी बारिश ने बढ़ाई परेशानी   मुंबई में लगातार हो रही बारिश के बीच यह हादसा हुआ है। भूस्खलन के बाद स्थानीय प्रशासन ने बचाव कार्य तेज कर दिया है और प्रभावित इलाके में लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। मृतकों की संख्या में आगे और बदलाव हो सकता है क्योंकि बचाव अभियान जारी है।

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लोकसभा से केरल का नाम केरलम करने वाला विधेयक पारित
केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाला बिल लोकसभा से पास, अब आगे की प्रक्रिया पर नजर

नई दिल्ली, एजेंसियां। केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की दिशा में केंद्र सरकार को बड़ी सफलता मिली है। केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को लोकसभा ने 11 अगस्त को मंजूरी दे दी। यह विधेयक संविधान की पहली अनुसूची में राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव रखता है।   लोकसभा में बिना चर्चा के पास हुआ बिल   लोकसभा में यह विधेयक विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित हुआ। विधेयक को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से पेश किया गया था। विपक्ष उस समय अन्य मुद्दों को लेकर सदन में विरोध कर रहा था।   मलयालम नाम ‘केरलम’ को मिलेगी संवैधानिक पहचान   विधेयक का मुख्य उद्देश्य राज्य के आधिकारिक नाम को Kerala से Keralam करना है। ‘केरलम’ राज्य का मलयालम नाम है। विधेयक संविधान की पहली अनुसूची में आवश्यक बदलाव का प्रस्ताव करता है। केरल विधानसभा ने जून 2024 में राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 में इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी थी।   अभी तुरंत नहीं बदलेगा राज्य का नाम   लोकसभा से बिल पास होने के बाद भी इसे कानून बनने के लिए संसद की पूरी संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसलिए फिलहाल सरकारी तौर पर राज्य का नाम ‘केरल’ ही है। विधेयक के कानून बनने के बाद केंद्र सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों और संवैधानिक प्रावधानों में नाम ‘केरलम’ किया जा सकेगा।

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