Energy Crisis

S Jaishankar meeting Russian officials as India secures increased oil and gas supply amid Hormuz crisis
होर्मुज संकट के बीच भारत को राहत: S. Jaishankar की कूटनीति रंग लाई, रूस ने बढ़ाई ऊर्जा सप्लाई

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित सप्लाई के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की रूस के शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम बैठक के बाद रूस ने भारत को तेल और गैस आपूर्ति बढ़ाने का भरोसा दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है और भारत जैसे बड़े आयातक देशों की चिंता बढ़ गई थी। रूस का भरोसा: ऊर्जा संकट में बड़ी राहत रूस के उप-प्रधानमंत्री Denis Manturov ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और विदेश मंत्री जयशंकर के साथ बैठक में स्पष्ट किया कि रूसी कंपनियां भारत को कच्चा तेल और एलएनजी (LNG) की सप्लाई बढ़ाने में सक्षम हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2026 में रूस से भारत को तेल सप्लाई में करीब 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो इस संकट के समय भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उर्वरक आपूर्ति में भी बढ़ोतरी ऊर्जा के साथ-साथ रूस ने उर्वरकों की सप्लाई बढ़ाने का भी भरोसा दिया है। 2025 के अंत तक भारत को खनिज उर्वरकों की आपूर्ति में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। दोनों देशों के बीच यूरिया उत्पादन को लेकर संयुक्त परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं, जो भारत के कृषि क्षेत्र को मजबूती देंगी। कूटनीतिक स्तर पर बढ़ा सहयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। वहीं विदेश मंत्री जयशंकर ने ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, उद्योग और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही। इसके अलावा, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर भी विस्तृत चर्चा हुई। भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती हाल के समय में भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से मजबूत हुआ है। प्रतिबंधों में आंशिक ढील के बाद रूस एक बार फिर भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है, जो रणनीतिक साझेदारी को और गहरा बना रहा है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Russian oil tanker arriving in Cuba amid global tensions as US chooses not to intervene
रूस का ऑयल टैंकर क्यूबा पहुंचा, ट्रंप ने क्यों नहीं रोका? जानिए रणनीति, राजनीति और मानवीय वजहें

वैश्विक राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ तब देखने को मिला जब Vladimir Putin द्वारा भेजा गया तेल टैंकर Cuba पहुंच गया-और हैरानी की बात यह रही कि United States ने इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं की। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और रूस के बीच संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है-क्या अमेरिका अपनी नीति बदल रहा है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति है? क्यूबा क्यों झेल रहा है संकट? क्यूबा इस समय गंभीर ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। लगातार बिजली कटौती, ईंधन की कमी और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर असर ने हालात को बदतर बना दिया है। इस संकट की बड़ी वजह Nicolás Maduro से जुड़े घटनाक्रम और तेल आपूर्ति में आई बाधा मानी जा रही है, जिससे क्यूबा की निर्भरता और बढ़ गई। रूस ने क्यों भेजा तेल? रूस ने क्यूबा को तेल भेजकर साफ संदेश दिया है कि वह अपने सहयोगियों के साथ खड़ा है। क्रेमलिन के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने कहा कि क्यूबा की मुश्किल परिस्थितियों को देखते हुए यह मदद “जिम्मेदारी” के तहत की गई है। इस कदम के जरिए रूस ने न केवल मानवीय सहायता दी, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी भी दिखाई। ट्रंप ने टैंकर क्यों नहीं रोका? सबसे बड़ा सवाल यही है कि Donald Trump ने इस टैंकर को रोकने का आदेश क्यों नहीं दिया। इसके पीछे कई अहम वजहें मानी जा रही हैं: 1. मानवीय संकट क्यूबा में हालात बेहद खराब हैं-अस्पतालों तक में ईंधन की कमी है। ऐसे में टैंकर रोकना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का कारण बन सकता था। 2. टकराव से बचने की रणनीति अगर अमेरिका टैंकर को रोकता, तो यह सीधे रूस से टकराव का कारण बन सकता था-यहां तक कि नौसैनिक संघर्ष भी हो सकता था। 3. सीमित प्रभाव का आकलन ट्रंप ने खुद कहा कि इससे रूस को कोई बड़ा फायदा नहीं होगा। यानी अमेरिका इसे “लो-इम्पैक्ट” घटना मान रहा है। 4. वैश्विक तनाव पहले ही चरम पर ईरान, मध्य-पूर्व और अन्य क्षेत्रों में तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। ऐसे में अमेरिका कोई नया मोर्चा खोलने से बचना चाहता है। क्या बदल रही है अमेरिका की नीति? विशेषज्ञों का मानना है कि यह अमेरिका की नीति में स्थायी बदलाव नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार लिया गया एक व्यावहारिक फैसला है। यह कदम दिखाता है कि जहां एक तरफ अमेरिका अपनी सख्त विदेश नीति जारी रखता है, वहीं दूसरी ओर मानवीय संकट और रणनीतिक संतुलन को भी ध्यान में रखता है। रूस को क्या मिला फायदा? क्यूबा में प्रभाव मजबूत हुआ वैश्विक स्तर पर “सहयोगी देश” की छवि बनी अमेरिका को बिना टकराव संदेश दिया

surbhi मार्च 31, 2026 0
Diesel supply pipeline from India to Bangladesh amid fuel crisis due to Hormuz Strait tensions
होर्मुज संकट के बीच भारत का बड़ा कदम: बांग्लादेश को डीजल सप्लाई, ईंधन संकट में मिली राहत

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz पर संकट के बीच बांग्लादेश गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रहा है। ऐसे मुश्किल समय में भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देश का साथ देते हुए डीजल की आपूर्ति कर राहत पहुंचाई है। पाइपलाइन के जरिए डीजल सप्लाई भारत ने Bangladesh को Numaligarh Refinery से पाइपलाइन के माध्यम से लगभग 7,000 टन डीजल की नई खेप भेजी है। इससे पहले भी हाल के दिनों में कई खेप भेजी जा चुकी हैं, जिससे कुल आपूर्ति बढ़कर लगभग 15,000 टन तक पहुंच गई है। यह सप्लाई India-Bangladesh Friendship Pipeline के जरिए की जा रही है, जो दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग का एक अहम उदाहरण है। क्यों बढ़ा संकट? Iran और अमेरिका के बीच तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर पड़ा है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। बांग्लादेश जैसे देश, जो समुद्री आयात पर निर्भर हैं, इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। वहां ईंधन की कमी के साथ-साथ जमाखोरी भी एक बड़ी समस्या बन गई है। आंतरिक संकट ने बढ़ाई परेशानी बांग्लादेश में हालात और बिगड़ गए जब आठ जिलों में टैंकर कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी। इससे दिनाजपुर, रंगपुर, निलफामारी समेत कई इलाकों में ईंधन आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। इसका सीधा असर परिवहन व्यवस्था पर पड़ा है, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। भारत-बांग्लादेश संबंधों की मिसाल भारत का यह कदम दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को दर्शाता है। संकट के समय भारत ने त्वरित मदद देकर यह साबित किया है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। ऊर्जा आपूर्ति जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह सहयोग बांग्लादेश के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
Petrol pumps in India with normal fuel supply as companies deny shortage rumors amid global tensions
पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाहों पर तेल कंपनियों का बयान, कहा- देश में पर्याप्त स्टॉक

अमेरिका-ईरान युद्ध और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में रुकावटों के बीच देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों पर भारतीय तेल कंपनियों ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और इंडियन ऑयल (IOC) ने इन खबरों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। कंपनियों ने क्या कहा? तेल कंपनियों ने संयुक्त रूप से कहा: देश में पेट्रोल, डीजल और LPG का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है सप्लाई चेन सामान्य रूप से काम कर रही है लोगों को घबराकर खरीदारी करने की कोई जरूरत नहीं BPCL का बयान भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने कहा कि: पेट्रोल-डीजल की कमी की खबरें पूरी तरह गलत हैं कंपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही है ईंधन की निर्बाध आपूर्ति जारी है HPCL ने भी किया साफ हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने ग्राहकों से अपील की: “देश में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। कृपया अफवाहों पर ध्यान न दें और सामान्य खपत जारी रखें।” क्यों फैली अफवाह? 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद: खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बने हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई तेल और गैस टैंकरों में देरी की खबरें आईं इसी के चलते लोगों में ईंधन संकट की आशंका बढ़ने लगी। सरकार और पीएम का संकेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संसद में कहा था कि: खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है इसके “गंभीर परिणाम” हो सकते हैं हालांकि, फिलहाल देश में सप्लाई सामान्य बनी हुई है। क्या करें उपभोक्ता? अफवाहों पर भरोसा न करें घबराकर ज्यादा ईंधन खरीदने से बचें सामान्य तरीके से ही उपयोग जारी रखें

surbhi मार्च 25, 2026 0
Ras Laffan industrial city damaged after attack impacting Qatar LNG production and global gas supply
ईरान के हमले से वैश्विक गैस संकट: कतर की 17% LNG क्षमता ठप, भारत पर मंडरा रहा बड़ा खतरा

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान द्वारा कतर के प्रमुख गैस केंद्र रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर किए गए हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला कर रख दिया है। इस हमले के कारण कतर की लगभग 17% LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) उत्पादन क्षमता प्रभावित हो गई है, जिसे पूरी तरह बहाल होने में 3 से 5 साल तक का समय लग सकता है। 20 अरब डॉलर का नुकसान, वर्षों तक असर कतर एनर्जी के CEO साद अल-काबी के अनुसार, हमले में 14 LNG ट्रेनों में से दो और एक गैस-टू-लिक्विड (GTL) प्लांट को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इससे हर साल करीब 12.8 मिलियन टन LNG उत्पादन प्रभावित होगा और अनुमानित 20 अरब डॉलर का राजस्व नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस संकट का असर अगले 5 वर्षों तक बना रह सकता है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होगी। ‘फोर्स मेज्योर’ लागू, सप्लाई पर संकट कतर को अपने कई अंतरराष्ट्रीय अनुबंधों पर ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करना पड़ा है, जिसका मतलब है कि वह तय आपूर्ति पूरी नहीं कर पाएगा। इसका असर इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों पर पड़ेगा, जो कतर की LNG पर निर्भर हैं। इस हमले का असर बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर भी पड़ा है, जिनमें ExxonMobil और Shell शामिल हैं, जिनकी इस प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी है। भारत के लिए क्यों है खतरे की घंटी? भारत अपनी गैस जरूरतों का लगभग 50-60% हिस्सा कतर से आयात करता है। ऐसे में इस हमले का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। LPG (रसोई गैस) की कीमतों में बढ़ोतरी   उद्योगों के लिए गैस सप्लाई में कमी   बिजली उत्पादन लागत में वृद्धि   विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो भारत को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ सकती है। वैश्विक बाजार में हड़कंप कतर दुनिया की लगभग 20% LNG सप्लाई करता है, ऐसे में इस हमले का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई   यूरोप में गैस कीमतों में 24% तक उछाल   LPG, हीलियम, कंडेन्सेट और अन्य उत्पादों में भारी गिरावट   क्षेत्रीय तनाव और गहराया यह हमला उस समय हुआ जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। ईरान ने यह कार्रवाई अपने गैस ढांचे पर हुए हमलों के जवाब में की। साद अल-काबी ने इस घटना को ‘क्षेत्र के लिए बड़ा झटका’ बताते हुए कहा कि इससे मध्य पूर्व की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। तेल और गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
High electricity demand in Bihar with power lines and transformers amid rising summer heat and energy consumption
बिहार में बिजली की रिकॉर्ड मांग: गर्मी और गैस संकट ने बढ़ाया लोड, पटना बना ‘पावर हब’

पटना: बिहार में मार्च की शुरुआत के साथ ही गर्मी का असर अब बिजली खपत पर साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ते तापमान और LPG संकट के कारण राज्य में बिजली की मांग ने इस बार रिकॉर्ड स्तर छू लिया है। आंकड़ों के मुताबिक, 18 मार्च को जहां पिछले साल 405 मेगावाट बिजली की खपत दर्ज की गई थी, वहीं इस साल यह बढ़कर 517 मेगावाट तक पहुंच गई है। यानी इस बार खपत में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। गर्मी बढ़ते ही बढ़ी बिजली की खपत मार्च में ही तापमान बढ़ने के कारण लोगों ने पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। आमतौर पर यह स्तर महीने के अंत में देखने को मिलता था, लेकिन इस बार पहले ही खपत 500 मेगावाट के पार पहुंच गई है। बिजली कंपनियों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है। गैस संकट ने बढ़ाया दबाव बढ़ती बिजली खपत के पीछे एक बड़ा कारण रसोई गैस की कमी भी है। LPG सिलेंडर की अनियमित आपूर्ति के चलते कई घरों में लोग खाना बनाने के लिए इंडक्शन चूल्हों और अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे घरेलू बिजली उपयोग में अचानक बढ़ोतरी हुई है, जिसने सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। पटना बना सबसे बड़ा खपत केंद्र पूरे बिहार में इस समय करीब 4900 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है। इसमें अकेले पटना जिला 600 से 650 मेगावाट खपत के साथ सबसे आगे है। अन्य शहरों में मुजफ्फरपुर में 210 मेगावाट, गया में 243 मेगावाट और पूर्णिया में 128 मेगावाट की औसत खपत दर्ज की जा रही है। इंडक्शन और इलेक्ट्रिक उपकरणों का बढ़ता चलन गैस संकट के कारण पटना समेत कई शहरों में इंडक्शन चूल्हा और इलेक्ट्रिक ओवन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही घरों में कूलर और एसी भी पूरे समय चल रहे हैं, जिससे बिजली की मांग और बढ़ गई है। बिजली कंपनियों का अनुमान है कि इस साल अधिकतम खपत 1000 मेगावाट के आंकड़े को भी पार कर सकती है। ‘जीरो ट्रिपिंग’ पर फोकस ऊर्जा विभाग ने बढ़ती मांग को देखते हुए सभी जिलों में मेंटेनेंस कार्य तेज कर दिया है। ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने निर्देश दिया है कि 31 मार्च तक सभी जरूरी मरम्मत कार्य पूरे कर लिए जाएं। साथ ही इंजीनियरों को ‘जीरो ट्रिपिंग’ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तकनीकी खराबियों से बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो। सिस्टम को दुरुस्त करने में जुटी टीमें बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रांसमिशन लाइन और ट्रांसफार्मरों की लगातार जांच की जा रही है। ग्रिड की स्थिरता और वोल्टेज सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्देश्य साफ है-गर्मी के चरम पर पहुंचने से पहले ही व्यवस्था को मजबूत कर लिया जाए, ताकि लोगों को बिजली कटौती का सामना न करना पड़े। आने वाले दिनों में बढ़ सकती है चुनौती बिजली खपत में यह तेजी आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकती है। अगर गर्मी और बढ़ी और गैस संकट जारी रहा, तो मांग और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि वे पीक ऑवर्स में बिजली का संयम से उपयोग करें, ताकि सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव कम किया जा सके।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Missile strike impact near Qatar LNG facility causing fire and disruption to global gas supply
कतर में मिसाइल हमले से LNG सप्लाई पर संकट, Petronet LNG और GAIL के शेयर 4% तक गिरे

कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमले की खबर के बाद भारतीय शेयर बाजार में गैस कंपनियों के स्टॉक्स दबाव में आ गए। गुरुवार को Petronet LNG और GAIL (India) के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। Petronet LNG और GAIL के शेयरों में गिरावट कारोबार के दौरान Petronet LNG का शेयर लगभग 5.85% तक टूटकर 274.55 रुपये के इंट्राडे लो पर पहुंच गया। वहीं GAIL (India) का शेयर भी करीब 3.15% गिरकर 146.2 रुपये तक फिसल गया। पिछले दो सत्रों में तेजी दिखाने वाले इन स्टॉक्स में अचानक आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हमले से क्यों बढ़ी चिंता? कतर का रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी दुनिया का सबसे बड़ा LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) निर्यात केंद्र माना जाता है। यहां से वैश्विक LNG सप्लाई का बड़ा हिस्सा जाता है। कतर अधिकारियों के अनुसार, इस इलाके पर ईरान की ओर से मिसाइल हमला किया गया, जिसमें कई हमले नाकाम किए गए, लेकिन एक मिसाइल टकराने से नुकसान हुआ। इसके बाद आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं। ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी QatarEnergy ने बताया कि कई LNG सुविधाएं प्रभावित हुई हैं और वहां बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है। हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। वैश्विक सप्लाई पर असर, भारत भी प्रभावित रास लाफान वैश्विक गैस सप्लाई का अहम केंद्र है। यहां किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ता है। भारत की कंपनियां जैसे Petronet LNG LNG आयात पर काफी निर्भर हैं। ऐसे में सप्लाई बाधित होने की आशंका से इन कंपनियों के मार्जिन और भविष्य की लागत पर असर पड़ सकता है। मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव यह हमला ऐसे समय हुआ है जब मध्य पूर्व में पहले से ही तनाव चरम पर है। हाल ही में इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाने के बाद हालात और बिगड़ गए। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि कतर, सऊदी अरब और यूएई के ऊर्जा प्रतिष्ठान भी निशाने पर आ सकते हैं। इसी कड़ी में अब यह हमला क्षेत्रीय संकट को और गहरा करता दिख रहा है। अमेरिका की चेतावनी अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि अगर कतर की LNG सुविधाओं पर दोबारा हमला हुआ तो अमेरिका कड़ी प्रतिक्रिया देगा।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
LPG gas agency amid supply shortage in India
LPG संकट गहराया: क्या आगे भी मिलेगा रसोई गैस सिलेंडर? सरकार ने 10 दिनों में लिए बड़े फैसले, सप्लाई बनाए रखने की कोशिश

देश में रसोई गैस यानी LPG की किल्लत ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय हालात और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के चलते गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। खासकर Strait of Hormuz में भारतीय तेल और गैस टैंकरों के फंसे होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। Iran और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है, जिसका सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। आपूर्ति संकट, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं केंद्र सरकार ने साफ किया है कि स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन नियंत्रण में रखने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि गैस का इस्तेमाल सोच-समझकर करें और अनावश्यक स्टॉकिंग से बचें। साथ ही, सरकार पाइपलाइन के जरिए गैस (PNG) के उपयोग को तेजी से बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है ताकि LPG पर निर्भरता कम हो सके। जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई LPG की किल्लत के बीच कालाबाजारी और जमाखोरी पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। देशभर में 12,000 से ज्यादा छापे   15,000 से अधिक सिलेंडर जब्त   आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई   इसके बावजूद कई जगहों पर लोग गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में नजर आ रहे हैं और कुछ मामलों में ब्लैक में 3000 रुपये तक में सिलेंडर बिकने की खबरें हैं। सरकार का बैकअप प्लान स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं: घरेलू LPG उत्पादन में 40% तक बढ़ोतरी   राज्यों को 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त मिट्टी का तेल   15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने नए वितरण दिशा-निर्देश लागू किए   PNG नेटवर्क विस्तार को तेज करने के निर्देश   जिनके पास PNG कनेक्शन है, उन्हें LPG सरेंडर करने की सलाह   कमर्शियल यूजर्स के लिए नई नीति सरकार ने यह भी घोषणा की है कि जो राज्य PNG नेटवर्क को तेजी से बढ़ाएंगे, उन्हें कमर्शियल LPG सप्लाई में 30% तक बढ़ोतरी दी जाएगी। होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों को PNG अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। क्या घरों तक गैस मिलती रहेगी? सरकार ने भरोसा दिलाया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी और घरों तक गैस सप्लाई जारी रहेगी। ऑनलाइन बुकिंग 90% से ज्यादा हो चुकी है, और लोगों से अपील की गई है कि वे एजेंसियों पर भीड़ न लगाएं-सिलेंडर घर तक पहुंचाए जाएंगे। कब खत्म होगी किल्लत? हालांकि कुछ टैंकर भारत पहुंच चुके हैं, लेकिन पहले की बाधाओं का असर अभी भी दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक आपूर्ति पर दबाव बना रह सकता है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
LPG cylinders stacked outside gas agency amid supply shortage affecting commercial use in Jharkhand
झारखंड में गैस संकट की आहट: कॉमर्शियल LPG सप्लाई 80% घटी, बुकिंग और डिलीवरी में बढ़ा इंतजार

झारखंड में गैस संकट गहराने के संकेत मिल रहे हैं। कॉमर्शियल LPG सिलेंडरों की आपूर्ति में भारी कटौती के कारण होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक संस्थानों पर सीधा असर पड़ने वाला है। राज्य में इस संकट को लेकर चिंता बढ़ गई है। सप्लाई में 80% कटौती, बढ़ेंगी मुश्किलें झारखंड विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार की ओर से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति में 80 प्रतिशत की कमी कर दी गई है। अब राज्य को केवल 20 प्रतिशत ही गैस मिल पा रही है। इस फैसले का असर सीधे तौर पर बाजार, होटल उद्योग और छोटे व्यवसायों पर पड़ेगा।   बुकिंग और रिफिलिंग में बढ़ा इंतजार राज्य में गैस की उपलब्धता कम होने से उपभोक्ताओं को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। पहले जहां गैस बुकिंग के 48 घंटे के भीतर सिलेंडर मिल जाता था, अब डिलीवरी में 3 से 4 दिन लग रहे हैं। इसके साथ ही घरेलू गैस की बुकिंग अवधि भी बढ़ा दी गई है- शहरी क्षेत्रों में 15 दिन से बढ़ाकर 25 दिन ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक का इंतजार   लाखों रिफिल पेंडिंग, स्थिति गंभीर सरकारी आंकड़ों के अनुसार 16 मार्च 2026 तक राज्य में करीब 3.27 लाख गैस रिफिल लंबित हैं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियों ने यह जानकारी साझा की है। 13 मार्च को केंद्र और राज्य अधिकारियों के बीच हुई बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि फिलहाल आपूर्ति सीमित रहेगी।   जरूरत 2273 MT, मिल रही सिर्फ 20% गैस मंत्री के अनुसार झारखंड में हर महीने औसतन 2273 मीट्रिक टन कॉमर्शियल गैस की आवश्यकता होती है। लेकिन कटौती के बाद अब सिर्फ करीब 454 मीट्रिक टन गैस ही उपलब्ध हो पा रही है, जो कुल मांग का मात्र 20 प्रतिशत है।   होटल-रेस्तरां और उद्योग पर असर इस कमी का सबसे ज्यादा असर रांची, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर और रामगढ़ जैसे शहरों के होटल, रेस्तरां और औद्योगिक कैंटीन पर पड़ेगा। कॉमर्शियल गैस के बिना इन संस्थानों का संचालन प्रभावित हो सकता है।   राज्य के राजस्व पर भी पड़ेगा असर कॉमर्शियल गैस की कमी से न सिर्फ आम लोगों की परेशानी बढ़ेगी, बल्कि राज्य सरकार को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। होटल और व्यवसायिक गतिविधियों में कमी आने से GST के जरिए मिलने वाला राजस्व घटने की आशंका है।   अंतरराष्ट्रीय हालात का भी असर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव, खासकर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच की स्थिति का असर गैस आपूर्ति पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।   स्थिति पर नजर, समाधान की कोशिश जारी राज्य सरकार और गैस कंपनियों के बीच लगातार बातचीत जारी है। हालांकि, फिलहाल आम उपभोक्ताओं और व्यवसायियों को गैस की कमी और बढ़े इंतजार का सामना करना पड़ेगा।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
LPG tanker ships waiting near Strait of Hormuz amid Middle East tensions before sailing to India
ईरान युद्ध के बीच भारत की बड़ी तैयारी: 8 LPG टैंकर जल्द पार करेंगे होर्मुज, गैस की किल्लत की आशंका कम

  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध हालात के बीच भारत ने घरेलू रसोई गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। सरकार के अनुसार, जल्द ही 8 LPG टैंकर Strait of Hormuz को पार कर भारत की ओर रवाना होंगे, जिससे देश में गैस संकट की आशंकाओं को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल ये सभी टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य के ठीक पहले इंतजार कर रहे हैं और उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारत और ईरान के बीच लगातार बातचीत जारी है।   जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री के बीच हुई बातचीत ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने के लिए भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच कई दौर की फोन पर बातचीत हुई है। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय LPG टैंकरों को सुरक्षित मार्ग मिल सके और वे बिना किसी बाधा के होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर सकें।   होर्मुज के पास खड़े हैं 8 टैंकर सरकारी सूत्रों के अनुसार, आठ LPG टैंकर इस समय होर्मुज के पास खड़े हैं और स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। ईरानी अधिकारियों ने भारतीय जहाजों की आवाजाही में सहयोग का भरोसा दिया है। इसके साथ ही मानवीय पहलू पर भी बातचीत हो रही है। करीब 250 ईरानी नाविक फिलहाल भारत में हैं, जिन्हें रहने की सुविधा दी गई है और उनके स्वदेश लौटने की व्यवस्था की जा रही है।   सरकार ने बनाया संकट प्रबंधन प्लान ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए केंद्र सरकार का क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (Crisis Management Group) लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यह समूह तेल और गैस की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहा है, ताकि देश में LPG कुकिंग गैस की सप्लाई सामान्य बनी रहे।   भारत की LPG आयात पर निर्भरता भारत अपनी कुल LPG जरूरतों का करीब 60 से 67 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इस आयात का बड़ा भाग खाड़ी देशों से आता है और अधिकांश शिपमेंट Strait of Hormuz के रास्ते ही भारत पहुंचते हैं। ऐसे में इस समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट देश की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।   नौसेना एस्कॉर्ट पर भी विचार सूत्रों के अनुसार, अगर हालात ज्यादा तनावपूर्ण होते हैं तो भारत अपने ईंधन से भरे जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना एस्कॉर्ट देने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
People standing in long queues outside LPG gas agency amid supply concerns in India
LPG आपूर्ति पर संकट की आशंका: जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने लागू किया ESMA, रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का निर्देश

  पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने LPG की संभावित कमी और जमाखोरी को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए Essential Services Maintenance Act (ESMA) के प्रावधान लागू कर दिए हैं। सरकार ने तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को LPG उत्पादन अधिकतम करने और उपलब्ध हाइड्रोकार्बन संसाधनों को LPG पूल की ओर मोड़ने का निर्देश दिया है, ताकि घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अनिश्चितता बढ़ गई है। खास तौर पर Strait of Hormuz के आसपास की स्थिति ने तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता पैदा कर दी है। भारत अपने कुल कच्चे तेल और गैस आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से प्राप्त करता है, जो इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं।   LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश सरकार ने आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए देश की सभी प्रमुख रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उद्देश्य यह है कि घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जा सके और बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति पैदा न हो। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की कुल LPG खपत लगभग 3.13 करोड़ टन रही, जबकि घरेलू स्तर पर इसका उत्पादन करीब 1.28 करोड़ टन ही हो पाया। शेष मांग को आयात के जरिए पूरा करना पड़ा। ऐसे में वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान की आशंका को देखते हुए सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं।   प्राकृतिक गैस वितरण की प्राथमिकताएं तय सरकार ने आवश्यक वस्तु कानून के प्रावधान लागू करते हुए प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और वितरण की प्राथमिकता भी तय कर दी है। इसके तहत पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और वाहनों के लिए संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) को पहली प्राथमिकता दी गई है और इन्हें 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी प्राथमिकता उर्वरक उत्पादन करने वाले संयंत्रों को दी गई है। इन संयंत्रों को उनकी पिछले छह महीनों की औसत जरूरत के आधार पर कम से कम 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है, ताकि कृषि क्षेत्र पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।   ESMA क्या है Essential Services Maintenance Act (ESMA) एक ऐसा कानून है, जिसे आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए लागू किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि आम जनता के दैनिक जीवन से जुड़ी सेवाएं-जैसे सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं और ऊर्जा आपूर्ति-किसी भी स्थिति में बाधित न हों।   महाराष्ट्र में गैस सिलेंडर के लिए कतारें इस बीच गैस की संभावित कमी की खबरों के बाद कुछ क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के बीच चिंता भी बढ़ती दिखाई दे रही है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी और कोल्हापुर जैसे शहरों में LPG सिलेंडर लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें देखी गई हैं। कई उपभोक्ता समय से पहले ही सिलेंडर जमा करने की कोशिश कर रहे हैं। रत्नागिरी शहर की ‘शांतादुर्गा गैस एजेंसी’ समेत कई वितरण केंद्रों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की भीड़ देखी गई, जिससे स्थानीय स्तर पर आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।   सरकार की अपील सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे घबराहट में गैस सिलेंडर का अतिरिक्त भंडारण न करें। अधिकारियों का कहना है कि देश में घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और फिलहाल घबराने की कोई जरूरत नहीं है।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0