राष्ट्रीय

केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए ₹84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी दी है।

ऑफशोर ऊर्जा खोज को बढ़ावा देने के लिए केंद्र ने ₹84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी दी

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
समुद्र मंथन योजना
ऑफशोर ऊर्जा खोज योजना

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और तेल-गैस के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ₹84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी दी है। योजना का मुख्य उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस के नए भंडार की खोज को तेज करना और घरेलू उत्पादन बढ़ाना है। सरकार के इस फैसले को देश की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

ऑफशोर क्षेत्रों में बढ़ेगी तेल-गैस की खोज

 

‘समुद्र मंथन’ योजना के तहत देश के अपतटीय यानी समुद्र के भीतर स्थित संभावित क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन की खोज और उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य ऐसे क्षेत्रों में अन्वेषण गतिविधियों को तेज करना है, जहां अभी तक उपलब्ध संसाधनों का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाया है। इससे भविष्य में घरेलू तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

 

ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश

 

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में घरेलू तेल और गैस भंडार की खोज बढ़ाना सरकार की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है। योजना के जरिए नए संसाधनों को उत्पादन से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा, जिससे आने वाले वर्षों में आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा की बचत करने में मदद मिल सकती है।

 

निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद

 

सरकार की इस बड़ी पहल से तेल एवं गैस क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अन्वेषण, ड्रिलिंग, तकनीकी सेवाओं और संबंधित उद्योगों में गतिविधियां बढ़ने से रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘समुद्र मंथन’ योजना भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने के साथ घरेलू तेल-गैस उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर सकती है।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

राष्ट्रीय

View more
Yavatmal Accident
महाराष्ट्र में दर्दनाक हादसा: उफनती नदी में बही SUV, मां और दो बेटियों की मौत

मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। दरव्हा क्षेत्र में कुपटी नदी पर बने पुल को पार करते समय एक एसयूवी तेज बहाव में बह गई। हादसे में महिला माधवी खंडारे और उनकी दो मासूम बेटियों की मौत हो गई, जबकि पति अविनाश खंडारे ने पेड़ का सहारा लेकर किसी तरह अपनी जान बचा ली। पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीम ने सर्च ऑपरेशन के बाद तीनों के शव बरामद किए।   भारी बारिश से हालात गंभीर, कई जिलों में अलर्ट जानकारी के अनुसार परिवार अहिल्यानगर के लोनी क्षेत्र जा रहा था। भारी बारिश के कारण नदी का पानी पुल के ऊपर से बह रहा था, लेकिन चालक बहाव का सही अंदाजा नहीं लगा सका और कार पानी में बह गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने महाराष्ट्र में अगले पांच दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कई जिलों में रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट लागू है। राज्य में बारिश और बाढ़ से करीब 100 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

abhishek singh अगस्त 1, 2026 0
Alluri Sitarama Raju International Airport

आंध्र प्रदेश में नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन, भोगापुरम एयरपोर्ट से विकास को मिलेगी नई उड़ान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज आंध्र प्रदेश और कर्नाटक दौरे पर, ₹18,000 करोड़ से ज्यादा की विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात

PM Kisan Yojana

पीएम-किसान योजना का 5 साल के लिए विस्तार, किसानों को मिलती रहेगी ₹6,000 सालाना सहायता

West Bengal Digital Census
बंगाल में डिजिटल जनगणना अभियान शुरू, आज से 15 अगस्त तक घर बैठे दे सकेंगे जानकारी

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में जनगणना-2027 के डिजिटल अभियान की शुरुआत हो गई है। पहली बार देश में जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल तकनीक के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में 1 अगस्त से 15 अगस्त 2026 तक स्व-गणना (Self-Enumeration) की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जिसके जरिए लोग ऑनलाइन अपने घर और परिवार से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।   1 अगस्त से शुरू हुआ स्व-गणना चरण   पश्चिम बंगाल में जनगणना की पहली डिजिटल प्रक्रिया के तहत नागरिकों को खुद ऑनलाइन जानकारी भरने का विकल्प दिया गया है। स्व-गणना का पहला चरण 1 से 14 अगस्त तक चलेगा। इसके बाद 16 अगस्त से 14 सितंबर तक हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन चलाया जाएगा। इस व्यवस्था से लोगों को गणनाकर्मियों के घर पहुंचने का इंतजार किए बिना निर्धारित डिजिटल माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलेगी।   मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगा काम   जनगणना के लिए पश्चिम बंगाल में सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किए गए हैं। हाउस लिस्टिंग के दौरान गणनाकर्मी मोबाइल ऐप के जरिए आंकड़े दर्ज करेंगे, जबकि अधिकारियों को डिजिटल पोर्टल के माध्यम से काम की निगरानी करने की सुविधा मिलेगी। सैटेलाइट आधारित मैपिंग का भी इस्तेमाल किया जाएगा।   2027 में पूरी होगी जनगणना प्रक्रिया   जनगणना-2027 के लिए 1 मार्च 2027 को संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है। पश्चिम बंगाल में स्व-गणना और हाउस लिस्टिंग के बाद आगे की जनगणना प्रक्रिया जारी रहेगी। इस बार डिजिटल तकनीक के साथ नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है।   सही जानकारी देने की अपील   सरकार ने नागरिकों से जनगणना में सक्रिय रूप से भाग लेने और सही एवं सटीक जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की है। जनगणना से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल भविष्य में सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों और नीतियां तैयार करने में किया जाएगा।   पश्चिम बंगाल में डिजिटल जनगणना की यह पहल देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें तकनीक के जरिए आंकड़े जुटाने और उनकी निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

anjali kumari अगस्त 1, 2026 0
Jaish-e-Mohammed

बर्धमान से जैश-ए-मोहम्मद का संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार, STF ने दबोचा; जांच में मिले अहम सुराग

समुद्र मंथन योजना

ऑफशोर ऊर्जा खोज को बढ़ावा देने के लिए केंद्र ने ₹84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी दी

Chandrashekhar Azad announcing Azad Samaj Party assembly in-charges for Uttar Pradesh elections 2027

UP चुनाव 2027 की तैयारी में जुटी आजाद समाज पार्टी, 45 विधानसभा प्रभारियों की पहली सूची जारी

Indore-Manmad railway line project connecting Madhya Pradesh and Maharashtra
इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन पर बड़ा अपडेट, 309 किमी के नए रूट से मुंबई का सफर होगा आसान; 8 घंटे में पहुंचेगी ट्रेन

Indore–Manmad Rail Line: मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत विकसित हो रही इस 309 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के लिए मध्य प्रदेश में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। परियोजना पूरी होने के बाद इंदौर से मुंबई की रेल दूरी करीब 200 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे यात्रा का समय लगभग 4 से 4.5 घंटे तक घटने की उम्मीद है। अनुमान है कि भविष्य में इंदौर से मुंबई का सफर करीब 8 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। मध्य प्रदेश में तेज हुआ भूमि अधिग्रहण रेल परियोजना के लिए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कुल 349.789 हेक्टेयर वन भूमि रेलवे को हस्तांतरित की जाएगी। मध्य प्रदेश: 207.3023 हेक्टेयर महाराष्ट्र: 142.4867 हेक्टेयर रेलवे और वन विभाग के बीच आवश्यक सहमति बनने के बाद अब परियोजना को गति मिल रही है। इन जिलों को मिलेगा सीधा लाभ इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई महत्वपूर्ण जिले सीधे जुड़ेंगे। इनमें प्रमुख जिले हैं— इंदौर धार खरगोन बड़वानी धुले नासिक मनमाड़ यह रेल कॉरिडोर मालवा और निमाड़ क्षेत्र को महाराष्ट्र के औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों से बेहतर कनेक्टिविटी देगा। मुंबई की दूरी होगी 200 किमी कम नई रेल लाइन बनने के बाद इंदौर और मुंबई के बीच रेलवे मार्ग लगभग 200 किलोमीटर छोटा हो जाएगा। इससे यात्रियों का सफर न केवल तेज होगा, बल्कि माल परिवहन भी अधिक किफायती और आसान बनेगा। रेलवे के अनुसार, आधुनिक ट्रैक और तेज रफ्तार ट्रेनों के संचालन से यात्रा समय में करीब 4 से 4.5 घंटे की बचत हो सकती है। व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा यह परियोजना केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापार और उद्योग के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नई रेल लाइन से— मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच माल परिवहन तेज होगा। औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। उत्तर भारत से पश्चिमी और दक्षिण भारत की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। केंद्र सरकार का मानना है कि इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना दोनों राज्यों के आर्थिक विकास को नई गति देने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Collapsed Kohinoor building in Bhiwandi after a deadly accident killing 10 people

भिवंडी बिल्डिंग हादसे में बड़ा एक्शन, 10 मौतों के बाद मालिक और ठेकेदार पर FIR दर्ज

Sanjay Raut criticizes Amit Shah over Jammu and Kashmir Kulgam terror attack

'गृहमंत्रालय नहीं, गैंग चला रहे हैं', अमित शाह पर संजय राउत का हमला; कुलगाम आतंकी हमले पर मांगा इस्तीफा

Heavy rainfall and flood situation in Gujarat and Kerala after IMD red alert

गुजरात-केरल में मूसलाधार बारिश का रेड अलर्ट, 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी हवाएं; कई जिलों में बाढ़ का खतरा

0 Comments

Top week

Smoke rises after reported airstrikes in Iraq as regional tensions escalate in West Asia
दुनिया

US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 30, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?