राष्ट्रीय

Azad Samaj Party Announces 45 Assembly In-charges for UP Election 2027

UP चुनाव 2027 की तैयारी में जुटी आजाद समाज पार्टी, 45 विधानसभा प्रभारियों की पहली सूची जारी

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Chandrashekhar Azad announcing Azad Samaj Party assembly in-charges for Uttar Pradesh elections 2027
Azad Samaj Party Begins UP Election 2027 Preparations with New Appointments

Azad Samaj Party: सांसद चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को तेज करते हुए आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के 45 विधानसभा प्रभारियों की पहली सूची जारी कर दी है। पार्टी ने सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न वर्गों के नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। इस सूची में एक भी सामान्य (जनरल) वर्ग के नेता को जगह नहीं मिली है।

सामाजिक समीकरण पर फोकस

पार्टी की ओर से जारी सूची के अनुसार 45 विधानसभा प्रभारियों में—

  • 18 अनुसूचित जाति (SC)
  • 16 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
  • 10 मुस्लिम
  • 1 सिख समुदाय के नेता को जिम्मेदारी दी गई है।

पार्टी ने इस सूची में ब्राह्मण और ठाकुर समुदाय के किसी नेता को शामिल नहीं किया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह रणनीति दलित, पिछड़ा और मुस्लिम (PDM) सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की दिशा में पार्टी का बड़ा कदम माना जा रहा है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर विशेष जोर

आजाद समाज पार्टी ने पहली सूची में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों पर विशेष फोकस किया है। जिन प्रमुख जिलों में प्रभारियों की घोषणा की गई है, उनमें—

  • मेरठ
  • मुजफ्फरनगर
  • शामली
  • हापुड़
  • अलीगढ़
  • हाथरस
  • आगरा

शामिल हैं।

पूर्व मंत्री और पूर्व IPS को भी जिम्मेदारी

पार्टी ने कुछ चर्चित चेहरों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है।

  • हाथरस विधानसभा से पूर्व IPS अधिकारी आदित्य प्रकाश वर्मा को प्रभारी बनाया गया है।
  • अलीगढ़ की छर्रा सीट से पूर्व मंत्री चौधरी महेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • मेरठ शहर से बदर अली,
  • शामली की थाना भवन सीट से मोहम्मद मौसम राव,
  • मऊ की मधुबन सीट से शिवसागर यादव को विधानसभा प्रभारी बनाया गया है।

2027 चुनाव की तैयारियों का आगाज

आजाद समाज पार्टी की यह पहली सूची ऐसे समय आई है, जब उत्तर प्रदेश में सभी प्रमुख राजनीतिक दल 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट चुके हैं। इससे पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) भी अपने विधानसभा प्रभारियों की घोषणा कर चुकी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नियुक्तियों के जरिए चंद्रशेखर आजाद संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी अब आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर में संगठनात्मक गतिविधियां तेज करेगी।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

kalpana

राष्ट्रीय

View more
West Bengal Digital Census
बंगाल में डिजिटल जनगणना अभियान शुरू, आज से 15 अगस्त तक घर बैठे दे सकेंगे जानकारी

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में जनगणना-2027 के डिजिटल अभियान की शुरुआत हो गई है। पहली बार देश में जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल तकनीक के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में 1 अगस्त से 15 अगस्त 2026 तक स्व-गणना (Self-Enumeration) की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जिसके जरिए लोग ऑनलाइन अपने घर और परिवार से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।   1 अगस्त से शुरू हुआ स्व-गणना चरण   पश्चिम बंगाल में जनगणना की पहली डिजिटल प्रक्रिया के तहत नागरिकों को खुद ऑनलाइन जानकारी भरने का विकल्प दिया गया है। स्व-गणना का पहला चरण 1 से 14 अगस्त तक चलेगा। इसके बाद 16 अगस्त से 14 सितंबर तक हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन चलाया जाएगा। इस व्यवस्था से लोगों को गणनाकर्मियों के घर पहुंचने का इंतजार किए बिना निर्धारित डिजिटल माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलेगी।   मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगा काम   जनगणना के लिए पश्चिम बंगाल में सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किए गए हैं। हाउस लिस्टिंग के दौरान गणनाकर्मी मोबाइल ऐप के जरिए आंकड़े दर्ज करेंगे, जबकि अधिकारियों को डिजिटल पोर्टल के माध्यम से काम की निगरानी करने की सुविधा मिलेगी। सैटेलाइट आधारित मैपिंग का भी इस्तेमाल किया जाएगा।   2027 में पूरी होगी जनगणना प्रक्रिया   जनगणना-2027 के लिए 1 मार्च 2027 को संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है। पश्चिम बंगाल में स्व-गणना और हाउस लिस्टिंग के बाद आगे की जनगणना प्रक्रिया जारी रहेगी। इस बार डिजिटल तकनीक के साथ नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है।   सही जानकारी देने की अपील   सरकार ने नागरिकों से जनगणना में सक्रिय रूप से भाग लेने और सही एवं सटीक जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की है। जनगणना से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल भविष्य में सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों और नीतियां तैयार करने में किया जाएगा।   पश्चिम बंगाल में डिजिटल जनगणना की यह पहल देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें तकनीक के जरिए आंकड़े जुटाने और उनकी निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

anjali kumari अगस्त 1, 2026 0
Jaish-e-Mohammed

बर्धमान से जैश-ए-मोहम्मद का संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार, STF ने दबोचा; जांच में मिले अहम सुराग

समुद्र मंथन योजना

ऑफशोर ऊर्जा खोज को बढ़ावा देने के लिए केंद्र ने ₹84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी दी

Chandrashekhar Azad announcing Azad Samaj Party assembly in-charges for Uttar Pradesh elections 2027

UP चुनाव 2027 की तैयारी में जुटी आजाद समाज पार्टी, 45 विधानसभा प्रभारियों की पहली सूची जारी

Indore-Manmad railway line project connecting Madhya Pradesh and Maharashtra
इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन पर बड़ा अपडेट, 309 किमी के नए रूट से मुंबई का सफर होगा आसान; 8 घंटे में पहुंचेगी ट्रेन

Indore–Manmad Rail Line: मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत विकसित हो रही इस 309 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के लिए मध्य प्रदेश में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। परियोजना पूरी होने के बाद इंदौर से मुंबई की रेल दूरी करीब 200 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे यात्रा का समय लगभग 4 से 4.5 घंटे तक घटने की उम्मीद है। अनुमान है कि भविष्य में इंदौर से मुंबई का सफर करीब 8 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। मध्य प्रदेश में तेज हुआ भूमि अधिग्रहण रेल परियोजना के लिए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कुल 349.789 हेक्टेयर वन भूमि रेलवे को हस्तांतरित की जाएगी। मध्य प्रदेश: 207.3023 हेक्टेयर महाराष्ट्र: 142.4867 हेक्टेयर रेलवे और वन विभाग के बीच आवश्यक सहमति बनने के बाद अब परियोजना को गति मिल रही है। इन जिलों को मिलेगा सीधा लाभ इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई महत्वपूर्ण जिले सीधे जुड़ेंगे। इनमें प्रमुख जिले हैं— इंदौर धार खरगोन बड़वानी धुले नासिक मनमाड़ यह रेल कॉरिडोर मालवा और निमाड़ क्षेत्र को महाराष्ट्र के औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों से बेहतर कनेक्टिविटी देगा। मुंबई की दूरी होगी 200 किमी कम नई रेल लाइन बनने के बाद इंदौर और मुंबई के बीच रेलवे मार्ग लगभग 200 किलोमीटर छोटा हो जाएगा। इससे यात्रियों का सफर न केवल तेज होगा, बल्कि माल परिवहन भी अधिक किफायती और आसान बनेगा। रेलवे के अनुसार, आधुनिक ट्रैक और तेज रफ्तार ट्रेनों के संचालन से यात्रा समय में करीब 4 से 4.5 घंटे की बचत हो सकती है। व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा यह परियोजना केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापार और उद्योग के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नई रेल लाइन से— मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच माल परिवहन तेज होगा। औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। उत्तर भारत से पश्चिमी और दक्षिण भारत की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। केंद्र सरकार का मानना है कि इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना दोनों राज्यों के आर्थिक विकास को नई गति देने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Collapsed Kohinoor building in Bhiwandi after a deadly accident killing 10 people

भिवंडी बिल्डिंग हादसे में बड़ा एक्शन, 10 मौतों के बाद मालिक और ठेकेदार पर FIR दर्ज

Sanjay Raut criticizes Amit Shah over Jammu and Kashmir Kulgam terror attack

'गृहमंत्रालय नहीं, गैंग चला रहे हैं', अमित शाह पर संजय राउत का हमला; कुलगाम आतंकी हमले पर मांगा इस्तीफा

Heavy rainfall and flood situation in Gujarat and Kerala after IMD red alert

गुजरात-केरल में मूसलाधार बारिश का रेड अलर्ट, 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी हवाएं; कई जिलों में बाढ़ का खतरा

Opposition MPs stage a symbolic protest over the Ram Mandir donation controversy in Parliament premises.
'मंदिर दान' प्रदर्शन पर घिरे पप्पू यादव, संसद परिसर में एक्टिंग के बाद थाने में दर्ज हुई शिकायत

Ram Mandir Donation Row: संसद परिसर में राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करना पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को भारी पड़ता नजर आ रहा है। शुक्रवार (31 जुलाई) को संसद परिसर में किए गए उनके सांकेतिक प्रदर्शन को लेकर दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। नुक्कड़ नाटक के जरिए किया था विरोध संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने के लिए नुक्कड़ नाटक (स्ट्रीट थिएटर) का सहारा लिया गया। प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव साधु के वेश में नजर आए। उनके सामने एक दानपात्र रखा गया था, जिसमें विपक्षी सांसदों ने सांकेतिक रूप से चढ़ावा डाला। इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई सांसद भी शामिल हुए। जहांगीरपुरी थाने में दर्ज हुई शिकायत रिपोर्ट के अनुसार, सूर्य मैथिल नाम के व्यक्ति ने दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने में पप्पू यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संसद परिसर में किए गए प्रदर्शन से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया। शिकायतकर्ता ने लगाए ये आरोप समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में शिकायतकर्ता सूर्य मैथिल ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव ने भगवा रंग का अपमान किया। उनका आरोप है कि भगवान रामलला विराजमान की तस्वीर को पैरों के नीचे रखा गया, जिससे सनातन समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, डिंपल यादव, अवधेश प्रसाद और INDIA गठबंधन के अन्य सांसदों का समर्थन प्राप्त था। संसद परिसर में प्रदर्शन से मचा था सियासी घमासान शुक्रवार को संसद परिसर में हुए इस विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा बटोरी। विपक्ष ने राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सत्तापक्ष ने प्रदर्शन के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई। फिलहाल पुलिस को शिकायत सौंप दी गई है। मामले में अब तक पप्पू यादव या उनके कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायत के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई और तथ्यों की जांच करेगी।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Security personnel conduct a search operation after a terror attack in Jammu and Kashmir's Kulgam district.

जम्मू-कश्मीर में 10 दिन में दूसरा आतंकी हमला, तीन की मौत; सुरक्षा व्यवस्था और सख्त

Prime Minister Narendra Modi addressing the nation in a video message on the Jantar Mantar protest controversy.

जंतर-मंतर विवाद पर PM मोदी का युवाओं के नाम संदेश: बोले- 'मैं इन बच्चों को माफ करना चाहता हूं'

A teenage girl issues a public apology in a video after controversy over remarks made during the Jantar Mantar protest.

जंतर-मंतर विवाद: PM मोदी पर टिप्पणी करने वाली युवती ने मांगी माफी, बोली- 'मुझसे बड़ी गलती हुई, मैं शर्मिंदा हूं'

0 Comments

Top week

Smoke rises after reported airstrikes in Iraq as regional tensions escalate in West Asia
दुनिया

US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 30, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?