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जनगणना 2027: आंकड़े आने के बाद आरक्षण और समाज में बड़े बदलाव संभव

जनगणना 2027: आंकड़े सामने आने के बाद समाज और आरक्षण में हो सकते हैं बदलाव

Ranjan Kumar Tiwari मार्च 19, 2026 0
भीड़भाड़ वाले इलाके में लोगों की बड़ी संख्या, जनगणना और जनसंख्या से जुड़ा दृश्य
जनगणना 2027 और सामाजिक बदलाव

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में जनगणना 2027 अगले महीने से शुरू हो रही है। यह प्रक्रिया दो चरणों में होगी। पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक “हाउस लिस्टिंग” होगा, जिसमें मकानों और उनकी सुविधाओं की गिनती की जाएगी। दूसरा चरण अगले साल 9 फरवरी से फरवरी अंत तक लोगों की संख्या की गणना करेगा। कुछ राज्यों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह गिनती इस साल अक्टूबर में पहले ही कर दी जाएगी।

महिला आरक्षण:
संसद ने सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था, जो संसद और विधानसभाओं में 33% महिलाओं के आरक्षण का प्रावधान करता है। यह कानून जनगणना 2027 के आंकड़े आने के बाद लागू होगा। महिला आरक्षण लागू होने पर संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़कर 150 से अधिक हो सकती है।

दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व पर प्रभाव:
दक्षिणी राज्यों (तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक) को चिंता है कि 2027 की जनगणना परिसीमन के आधार के रूप में इस्तेमाल होने पर उनका संसद में प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। उनके अनुसार उत्तर भारत में जनसंख्या अधिक होने के कारण वहां के राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है। इसलिए दक्षिण के कुछ राज्य 1971 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाने की मांग कर रहे हैं।

जाति जनगणना का महत्व:
इस बार की जनगणना में जातियों की भी गिनती की संभावना है। इसका सबसे बड़ा फायदा ओबीसी वर्ग को होगा, क्योंकि इससे उनकी वास्तविक जनसंख्या का पता चलेगा और वे आरक्षण और कल्याण योजनाओं में बढ़ोतरी की मांग कर सकते हैं। वर्तमान में ओबीसी को 27% आरक्षण मिलता है, जबकि उनका दावा है कि उनकी जनसंख्या करीब 50% है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आरक्षण 50% से अधिक नहीं हो सकता, लेकिन तमिलनाडु में यह 69% है।

शहरीकरण और गांवों का आंकलन:
पिछले वर्षों में गांवों से शहरों की ओर पलायन बढ़ा है। इससे शहरी बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ा है। पहले चरण में मकानों, वहां रहने वालों और उनकी स्थिति का डेटा जुटाया जाएगा। यह आंकड़ा कल्याणकारी योजनाओं और विकास की नीतियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। जनगणना 2027 के आंकड़े आने के बाद समाज में आरक्षण, संसदीय प्रतिनिधित्व, महिला सशक्तिकरण और शहरी-ग्रामीण विकास योजनाओं में बड़े बदलाव की संभावना है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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असम में पीएम मोदी का विपक्ष पर हमला, बोले- ‘दिल्ली का शाही परिवार इस बार हार का शतक लगाएगा’

दिसपुर, एजेंसियां। असम विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बरपेटा में आयोजित एक चुनावी रैली में विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पीएम मोदी ने दावा किया कि असम की जनता इस बार दो बड़े फैसले करने जा रही है— पहला, राज्य में भाजपा-एनडीए सरकार की हैट्रिक तय है और दूसरा, दिल्ली में बैठा “शाही परिवार” इस बार हार का शतक लगाएगा। उनके इस बयान को कांग्रेस नेतृत्व पर सीधा राजनीतिक हमला माना जा रहा है।   कांग्रेस पर साधा निशाना, भाजपा की विकास नीति गिनाई रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस कभी भी दीर्घकालिक विकास की सोच के साथ काम नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति अल्पकालिक लाभ और भ्रष्टाचार पर आधारित रही है, जबकि भाजपा दीर्घकालिक विकास, स्थिरता और सुशासन पर ध्यान देती है। पीएम ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में असम में शांति और स्थिरता लाने के लिए लगातार काम किया गया है और आने वाले समय में राज्य की समृद्धि को और आगे बढ़ाया जाएगा।   महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष से समर्थन की अपील प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में महिला आरक्षण विधेयक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुला रही है और सभी राजनीतिक दलों से अपील की गई है कि वे महिलाओं के अधिकारों से जुड़े इस महत्वपूर्ण कानून को सर्वसम्मति से पारित कराने में सहयोग करें। पीएम ने कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह कानून सभी राज्यों के हित में है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत जैसे राज्यों का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। सरकार महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था और कुल सीटों की संख्या बढ़ाने पर भी काम कर रही है।   कार्यकर्ताओं को स्थापना दिवस की बधाई रैली के दौरान पीएम मोदी ने भाजपा के स्थापना दिवस पर पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भाजपा “राष्ट्र प्रथम” के मंत्र के साथ देश सेवा में जुटी है। साथ ही, बरपेटा रैली में उमड़ी भीड़ को लेकर उन्होंने जनता का आभार भी जताया।

Anjali Kumari अप्रैल 6, 2026 0
Arvind Kejriwal at Delhi High Court hearing in excise policy case amid judge recusal controversy

शराब नीति मामला: हाईकोर्ट में आज खुद पक्ष रखेंगे केजरीवाल, जज बदलने की मांग पर भी विवाद

Dark storm clouds, lightning and strong winds over city indicating rain and hailstorm alert in India

आज का मौसम (6 अप्रैल 2026): 12 राज्यों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट, अगले 72 घंटे भारी

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केरल में बीजेपी कार्यकर्ता के घर पर फेंका गया विस्फोटक, तेज धमाके से दहला इलाका

Landslide and heavy snowfall in Sikkim blocking roads, stranded tourists waiting for rescue
सिक्किम में बर्फबारी और भूस्खलन, 1500 पर्यटक फंसे; 15 की मौत

देशभर में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। सिक्किम से लेकर उत्तर भारत तक बारिश, बर्फबारी और आंधी-तूफान ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। सिक्किम में लैंडस्लाइड, 1500 टूरिस्ट फंसे सिक्किम के मंगन जिले में लाचेन-चुंगथांग रोड पर रविवार को भारी बारिश और बर्फबारी के कारण भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हुआ। सड़क पर बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं, जिससे करीब 1500 पर्यटक फंस गए हैं। प्रशासन और राहत टीमें मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं और पर्यटकों को सुरक्षित निकालने की कोशिश जारी है। उत्तराखंड में बर्फबारी और ओलावृष्टि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से उत्तराखंड के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिला। उत्तरकाशी के यमुनोत्री धाम समेत तीन जिलों में बर्फबारी हुई, जबकि छह जिलों में बारिश के साथ ओले गिरे। इससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। हिमाचल में भारी बर्फबारी, फसलों को नुकसान हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति के ऊंचे इलाकों में भी जोरदार बर्फबारी हुई। गोंदला: 28.5 सेमी बर्फ केलांग: 20 सेमी हंसा: 5 सेमी वहीं, शिमला, कुल्लू और मंडी में ओलावृष्टि से सेब की फसल को नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। यूपी में आंधी-बारिश का कहर, 15 की मौत उत्तर प्रदेश में आंधी, बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। पिछले 72 घंटों में बिजली गिरने से 15 लोगों की मौत हो चुकी है। काशी, गोंडा, सुल्तानपुर, कानपुर समेत 11 जिलों में रुक-रुककर बारिश हुई, जबकि कानपुर, मथुरा और संभल में ओले भी गिरे। 16 राज्यों में मौसम विभाग का अलर्ट मौसम विभाग ने देश के 16 राज्यों में आंधी, बारिश और तेज हवाओं को लेकर अलर्ट जारी किया है। आने वाले दिनों में भी मौसम ऐसा ही बना रहने की संभावना है। सतर्क रहने की सलाह प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। खासकर पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
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होर्मुज संकट के बीच तंजानिया पहुंचा INS त्रिकंद, भारत को मिल सकती है गैस राहत

External Affairs Minister S Jaishankar speaking amid West Asia tensions after talks with Iran, Qatar and UAE leaders

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जयशंकर सक्रिय, ईरान-कतर-यूएई से की अहम बातचीत

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Royal Enfield Hunter 350 अब नए अंदाज़ में, कंपनी ने जोड़ा दो नया कलर

Indian LPG carrier Green Asha safely crossing Strait of Hormuz amid rising Iran-Israel tensions
होर्मुज संकट के बीच राहत: LPG जहाज ‘ग्रीन आशा’ सुरक्षित पार, अब ‘जग विक्रम’ का इंतजार

ईरान-इजरायल तनाव के बीच खतरनाक बने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। एलपीजी लेकर खाड़ी में फंसा भारतीय जहाज ‘ग्रीन आशा’ सफलतापूर्वक इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार कर चुका है और अब भारतीय नौसेना की निगरानी में सुरक्षित भारत की ओर लौट रहा है। ‘ग्रीन सान्वी’ के बाद ‘ग्रीन आशा’ ने पार किया रास्ता डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, 3 अप्रैल को एलपीजी कैरियर ‘ग्रीन सान्वी’ के सुरक्षित निकलने के बाद रविवार को ‘ग्रीन आशा’ ने भी होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया। इसके साथ ही इस खतरनाक क्षेत्र में अब केवल एक भारतीय जहाज ‘जग विक्रम’ बचा है, जिसकी सुरक्षित वापसी का इंतजार किया जा रहा है। बताया गया है कि ‘जग विक्रम’ भारतीय नौसेना से आगे के निर्देशों का इंतजार कर रहा है, ताकि वह सुरक्षित तरीके से इस क्षेत्र से बाहर निकल सके। 28 फरवरी के बाद बढ़ा खतरा गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद से होर्मुज स्ट्रेट बेहद संवेदनशील हो गया था। इस दौरान कई तेल और गैस से भरे जहाज इस इलाके में फंस गए थे। कुछ जहाजों पर हमले भी हुए, जिससे यह मार्ग लगभग बंद हो गया था। हालांकि, अब राजनयिक प्रयासों और सुरक्षा इंतजामों के चलते धीरे-धीरे जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो रही है। कब पहुंचेगा ‘ग्रीन सान्वी’? करीब 46,655 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर लौट रहा ‘ग्रीन सान्वी’ 7 अप्रैल को गुजरात के भरूच जिले के दहेज बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, BW TYR नामक एलपीजी कैरियर फिलहाल मुंबई के बाहरी बंदरगाह पर ‘शिप-टू-शिप’ ट्रांसफर के जरिए अपना माल उतार रहा है। एक अन्य जहाज BW ELM को चेन्नई के एन्नोर पोर्ट की ओर मोड़ा गया है। पहले भी पहुंचे कई जहाज पिछले सप्ताह ‘जग वसंत’ करीब 47,612 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर गुजरात के कांडला पहुंचा, जबकि ‘पाइन गैस’ ने न्यू मैंगलोर में 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति की। अब भी खाड़ी में मौजूद हैं कई भारतीय जहाज शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल: 16 भारतीय जहाज फारसी खाड़ी में 4 जहाज ओमान की खाड़ी में 1 जहाज अदन की खाड़ी में 2 जहाज लाल सागर में मौजूद हैं इनमें से 5 जहाज शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं। 20,000 भारतीय नाविकों की मौजूदगी रिपोर्ट के अनुसार, पूरे खाड़ी क्षेत्र में करीब 20,000 भारतीय नाविक मौजूद हैं। इनमें: 528 नाविक भारतीय झंडे वाले जहाजों पर 433 फारसी खाड़ी में 95 ओमान की खाड़ी में तैनात हैं 5 अप्रैल तक विभिन्न शिपिंग कंपनियों ने 1,479 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। नौसेना की निगरानी में ऑपरेशन भारतीय नौसेना लगातार इस पूरे ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए है और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर रही है। ‘ग्रीन आशा’ का सुरक्षित पार होना भारत के लिए बड़ी राहत है, जबकि अब सभी की नजरें ‘जग विक्रम’ की सुरक्षित वापसी पर टिकी हैं।  

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