राजनीति

Siddaramaiah Resigns as Karnataka CM

कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की शुरुआत, राज्यपाल ने स्वीकार किया सिद्धारमैया का इस्तीफा

surbhi मई 29, 2026 0
Siddaramaiah meets Karnataka Governor after submitting resignation amid Congress leadership change
Siddaramaiah Resignation Karnataka Politics

कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही उनके नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। अब राज्य में नए मुख्यमंत्री के चयन और नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने तक सिद्धारमैया कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। कांग्रेस में पिछले कई महीनों से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।

कांग्रेस आलाकमान के निर्देश का पालन करते हुए छोड़ा मुख्यमंत्री पद

सिद्धारमैया ने 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के निर्देशों का पालन किया है और पार्टी के फैसले का सम्मान किया है।

इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में सिद्धारमैया ने कहा कि पार्टी की ओर से उन्हें राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी रुचि राष्ट्रीय राजनीति में नहीं है और वह कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय बने रहना चाहते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि विधायक के रूप में उनका कार्यकाल अभी दो वर्ष बाकी है और वह जनता के बीच रहकर अपनी राजनीतिक भूमिका जारी रखेंगे।

2023 में सत्ता में वापसी के बाद शुरू हुआ था दूसरा कार्यकाल

सिद्धारमैया ने 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला था। कांग्रेस ने बीजेपी को हराकर राज्य में सत्ता वापसी की थी और सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया था, जबकि डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

अब उनके इस्तीफे के साथ ही राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य में संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

इस्तीफे के बाद समर्थकों में भावुकता, कई जगह हुए विरोध प्रदर्शन

मुख्यमंत्री पद छोड़ने के फैसले के बाद सिद्धारमैया समर्थकों में नाराजगी और भावुकता देखने को मिली। 28 मई को राज्य के कई हिस्सों में समर्थकों ने प्रदर्शन किया और नेतृत्व परिवर्तन के फैसले पर सवाल उठाये।

बेंगलुरु स्थित सिद्धारमैया के सरकारी आवास पर बड़ी संख्या में समर्थक जमा हुए। कई समर्थकों ने उनसे इस्तीफा वापस लेने की अपील की। इस दौरान माहौल काफी भावुक नजर आया।

सिद्धारमैया बाहर आये और समर्थकों को समझाने की कोशिश की। उन्होंने लोगों से शांत रहने और पार्टी के फैसले का सम्मान करने की अपील की।

डीके शिवकुमार के आवास के बाहर जश्न, समर्थकों ने मनायी खुशी

जहां एक तरफ सिद्धारमैया समर्थकों में निराशा थी, वहीं दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के आवास के बाहर जश्न का माहौल देखने को मिला।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि डीके शिवकुमार कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए उनके समर्थकों ने मिठाइयां बांटीं और जश्न मनाया।

कई कांग्रेस नेता और विधायक भी शिवकुमार को बधाई देने उनके आवास पहुंचे। पार्टी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर समर्थन जताया और नेतृत्व परिवर्तन को कांग्रेस के लिए नया अध्याय बताया।

दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ अहम बैठकों की संभावना

इस्तीफे के तुरंत बाद सिद्धारमैया दिल्ली के लिए रवाना हो गए। माना जा रहा है कि वह कांग्रेस आलाकमान के साथ नए मुख्यमंत्री के चयन और मंत्रिमंडल गठन को लेकर चर्चा करेंगे।

उधर, डीके शिवकुमार भी बाद में दिल्ली पहुंचे। वर्तमान में वह उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में होने वाली बैठकों में विधायक दल के नए नेता के चयन, मंत्रिमंडल के स्वरूप और प्रदेश संगठन में संभावित बदलाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

नए मुख्यमंत्री के नाम पर कांग्रेस के अंतिम फैसले का इंतजार

कर्नाटक में अब सबसे बड़ी नजर कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर टिकी हुई है। हालांकि डीके शिवकुमार का नाम सबसे आगे माना जा रहा है, लेकिन पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य में सत्ता और संगठन दोनों को संतुलित रखने की रणनीति के तहत फैसला ले सकता है। आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में और बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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JPSC-JSSC विवाद पर बाबूलाल मरांडी का सरकार पर हमला, सीबीआई जांच और अधिकारियों पर एफआईआर की मांग

हजारीबाग। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हजारीबाग के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और भारतीय जनता पार्टी छात्रों के आंदोलन का समर्थन करती है।   सीआईडी जांच पर उठाए सवाल   बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार द्वारा कराई जा रही सीआईडी जांच केवल खानापूर्ति है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे ही परीक्षा अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ सकेगी।   अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग   मरांडी ने मांग की कि JPSC और JSSC में कार्यरत सभी संबंधित अधिकारियों और पदाधिकारियों को तत्काल पदमुक्त कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर स्तर पर गड़बड़ियां हुई हैं, जिससे योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है।   अभय तिवारी मामले का किया जिक्र   प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने हाल ही में गिरफ्तार अभय तिवारी का भी उल्लेख किया। मरांडी ने दावा किया कि जांच में सामने आया है कि उसके परिवार के कुछ सदस्यों को हालिया भर्ती परीक्षाओं में नौकरी मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरे भर्ती घोटाले की ओर इशारा करता है और इसकी गहन जांच आवश्यक है।   छात्रों के आंदोलन को बताया जायज   मरांडी ने कहा कि राज्यभर में छात्र परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं और उनकी मांगें उचित हैं। उनके अनुसार, यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई गई तो युवाओं का सरकारी भर्ती परीक्षाओं से भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि JPSC और JSSC जैसी महत्वपूर्ण भर्ती एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बजाय भर्ती प्रक्रिया को विवादों में डाल रही हैं, इसलिए पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

abhishek singh जुलाई 30, 2026 0
Mamata Banerjee

ममता बनर्जी की चुनाव आयोग को चिट्ठी, TMC विवाद पर जल्द फैसला लेने की मांग

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राज्यसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश, परीक्षा में धांधली रोकने के लिए सख्त प्रावधानों पर जोर

Former Madhya Pradesh Home Minister Narottam Mishra casts his vote during the Datia Assembly by-election

Datia Bypoll: दतिया उपचुनाव के लिए वोटिंग जारी, नरोत्तम मिश्रा बोले- मैंने कमल का बटन दबाया

Anti Paper Leak Amendment Bill
लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पास, परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार का बड़ा कदम

नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा में नकल और संगठित धांधली पर रोक लगाना तथा देश की परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है।   पेपर लीक करने वालों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान   नए संशोधन में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित नियमों के तहत दोषियों को कड़ी जेल की सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। संगठित तरीके से पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर और सख्त कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।   फास्ट ट्रैक जांच और सुनवाई पर जोर   सरकार ने परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच और सुनवाई को तेज करने के लिए विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत पेपर लीक मामलों में तेजी से जांच और समयबद्ध सुनवाई का प्रावधान किया गया है, ताकि छात्रों को जल्द न्याय मिल सके।   संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस   विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष ने इसे छात्रों के हित में बड़ा सुधार बताया। वहीं विपक्ष ने परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही, पेपर लीक की घटनाओं और छात्रों के भरोसे से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी नेताओं ने कहा कि केवल कानून बनाने के साथ-साथ व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।   छात्रों के भविष्य और परीक्षा की विश्वसनीयता पर फोकस   सरकार का दावा है कि नया कानून प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने में मदद करेगा और मेहनत करने वाले छात्रों के हितों की रक्षा करेगा। पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाना इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य बताया गया है।

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Priyanka Gandhi & Prahlad Joshi
प्रियंका गांधी और प्रह्लाद जोशी के बीच लोकसभा में तीखी बहस, शिक्षा मंत्री पर बयान को लेकर हंगामा

नई दिल्ली ,एजेंसियां। लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के बीच तीखी बहस देखने को मिली। प्रियंका गांधी के एक बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और सदन में हंगामा हुआ।   पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर प्रियंका गांधी ने सरकार को घेरा   लोकसभा में चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने पेपर लीक मामलों, छात्रों की परेशानियों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में सुधार, छात्रों पर कार्रवाई और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।   प्रह्लाद जोशी पर टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद   बहस के दौरान प्रियंका गांधी ने नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर एक टिप्पणी की, जिस पर भाजपा नेताओं ने विरोध जताया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और प्रह्लाद जोशी ने उनके बयान को आपत्तिजनक बताते हुए उनसे प्रमाण देने और माफी मांगने की मांग की। प्रह्लाद जोशी ने कहा कि बिना तथ्यों के आरोप लगाना उचित नहीं है और गलत जानकारी फैलाने पर कार्रवाई होनी चाहिए।   सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप   प्रियंका गांधी के बयान के बाद भाजपा सांसदों ने विरोध किया, जबकि कांग्रेस ने शिक्षा, परीक्षा और छात्रों के मुद्दों पर सरकार को घेरना जारी रखा। इस दौरान सदन में कई बार हंगामे की स्थिति बनी।   विवादित टिप्पणी लोकसभा रिकॉर्ड से हटाई गई   रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रियंका गांधी द्वारा प्रह्लाद जोशी को लेकर की गई टिप्पणी को लोकसभा की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाया गया। इस मामले ने संसद में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।

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