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BJP Leads Assam Polls

Election 2026 Results LIVE: शुरुआती रुझानों में BJP की मजबूत बढ़त, कांग्रेस पीछे

surbhi मई 4, 2026 0
Vote counting underway in Assam with BJP leading trends on electronic display screens
Assam Election Results 2026 BJP Lead

गुवाहाटी, 4 मई: असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना सोमवार सुबह 8 बजे से शुरू हो चुकी है और शुरुआती रुझानों में Bharatiya Janata Party (BJP) ने बढ़त बना ली है। 126 सीटों पर हुए इस चुनाव के नतीजे आज यह तय करेंगे कि राज्य में सत्ता किसके हाथ में जाएगी।

9:45 बजे तक रुझान

ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 58 सीटों के रुझान सामने आ चुके हैं, जिनमें:

  • BJP 36 सीटों पर आगे
  • Indian National Congress (कांग्रेस) 10 सीटों पर बढ़त
  • Bodoland People's Front (BPF) 5 सीटों पर आगे
  • Asom Gana Parishad (AGP) 3 सीटों पर बढ़त
  • Assam Jatiya Parishad (AJP) 3 सीटों पर आगे
  • All India United Democratic Front (AIUDF) 1 सीट पर बढ़त

रुझानों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि NDA गठबंधन राज्य में मजबूत स्थिति में है।

तेजी से बढ़ी BJP की बढ़त

मतगणना के शुरुआती घंटों में BJP की बढ़त लगातार बढ़ती गई:

  • 9:15 बजे तक BJP 8 सीटों पर आगे थी
  • 9:30 बजे तक बढ़त 19 सीटों तक पहुंची
  • 9:45 बजे तक BJP 36 सीटों पर आगे हो गई

नेताओं के बयान

केंद्रीय मंत्री Sarbananda Sonowal ने दावा किया है कि NDA गठबंधन लगभग 100 सीटों के आसपास पहुंच सकता है और सरकार बनाएगा। वहीं मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व में BJP लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है।

दूसरी ओर, कांग्रेस नेता Gaurav Gogoi ने ‘साइलेंट वोटर’ पर भरोसा जताते हुए परिणाम बदलने की उम्मीद जताई है।

मतदान और उम्मीदवार

  • 9 अप्रैल को मतदान हुआ था
  • 85% से अधिक मतदान दर्ज किया गया
  • कुल 2.5 करोड़ मतदाताओं ने हिस्सा लिया
  • 126 सीटों पर 722 उम्मीदवार मैदान में
  • इनमें 59 महिला उम्मीदवार शामिल

प्रमुख मुद्दे

इस बार चुनाव में CAA-NRC, बांग्लादेशी घुसपैठ, बाढ़, रोजगार, विकास और चाय बागान मजदूरों की स्थिति जैसे मुद्दे हावी रहे।

सुरक्षा और मतगणना

35 जिलों के 40 मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच पहले पोस्टल बैलेट और फिर EVM वोटों की गिनती की जा रही है। CAPF और राज्य पुलिस की भारी तैनाती की गई है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Maharashtra Politics: 'ऑपरेशन टाइगर' सफल! शिवसेना (UBT) के 6 सांसद शिंदे गुट में शामिल, NDA और हुआ मजबूत

  मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हुआ है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को बड़ा झटका देते हुए पार्टी के छह लोकसभा सांसद आधिकारिक तौर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। शिंदे गुट ने इसे 'ऑपरेशन टाइगर' की बड़ी सफलता करार दिया है। इस घटनाक्रम से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ताकत और बढ़ गई है, जबकि शिवसेना (UBT) के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती और गहरी हो गई है। एकनाथ शिंदे बोले- 'ऑपरेशन टाइगर' हुआ सफल उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवसेना (UBT) के सभी छह बागी सांसदों के उनकी पार्टी में शामिल होने के साथ ही 'ऑपरेशन टाइगर' सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक विस्तार नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कौन-कौन से सांसद शिंदे गुट में हुए शामिल? शिवसेना (UBT) छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में शामिल हैं: Sanjay Deshmukh (यवतमाल) Sanjay Jadhav (परभणी) Sanjay Dina Patil (मुंबई उत्तर-पूर्व) Nagesh Patil Ashtikar (हिंगोली) Omprakash Raje Nimbalkar (धाराशिव) Bhausaheb Wakchaure (शिरडी) ये सभी सांसद कुछ दिन पहले आयोजित शिवसेना (UBT) की संसदीय दल की बैठक में अनुपस्थित रहे थे, जिसके बाद उनके पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई थीं। दीपक केसरकर बोले- NDA और होगा मजबूत शिवसेना नेता Deepak Kesarkar ने सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे NDA की राजनीतिक स्थिति और मजबूत होगी। उन्होंने कहा, "यह कदम महाराष्ट्र में गठबंधन की ताकत बढ़ाएगा और आने वाले चुनावों में महायुति को और मजबूती प्रदान करेगा।" उद्धव ठाकरे ने बुलाई थी आपात बैठक सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने से पहले Uddhav Thackeray ने मुंबई में पार्टी नेताओं की अहम बैठक बुलाई थी। बैठक में संगठनात्मक स्थिति, विधानसभा चुनाव की रणनीति और पार्टी में संभावित टूट को रोकने पर चर्चा हुई थी। छह सांसदों के जाने से शिवसेना (UBT) की संसदीय ताकत को बड़ा झटका लगा है। 2022 के बाद फिर बड़ा राजनीतिक झटका गौरतलब है कि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे ने बड़ी संख्या में विधायकों के साथ बगावत कर शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। उस घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी लगातार संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है। अब लोकसभा सांसदों के इस दलबदल ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विधान परिषद चुनाव में भी महायुति की बड़ी जीत इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों में भी महायुति गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है। 17 सीटों में से 16 सीटों पर जीत दर्ज कर गठबंधन ने अपनी राजनीतिक बढ़त साबित की। सीटों का प्रदर्शन: भाजपा: 11 सीटें शिवसेना (शिंदे): 3 सीटें एनसीपी (अजित पवार): 2 सीटें नासिक सीट पर भाजपा के बागी निर्दलीय उम्मीदवार Gokul Gite ने शिवसेना उम्मीदवार Narendra Darade को हराकर महायुति के लिए एकमात्र झटका दिया। किन नेताओं ने दर्ज की जीत? निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवारों में शामिल हैं: Ravindra Phatak Dushyant Chaturvedi Aniket Tatkare Vikram Kakade Arun Lakhani Prajakt Tanpure वहीं भाजपा के अन्य विजयी उम्मीदवारों में सुहास शीर्षत, अविनाश ब्राह्मणकर, धैर्यशील कदम, राजेंद्र राउत, बसवराज पाटिल, राजीव पोतदार, नंदकिशोर महाजन, प्रवीण पोटे और अमर राजुरकर शामिल हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने और विधान परिषद चुनाव में महायुति की बड़ी जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। जहां NDA का कुनबा और मजबूत दिखाई दे रहा है, वहीं उद्धव ठाकरे के सामने पार्टी के अस्तित्व और संगठनात्मक एकजुटता को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।  

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बंगाल में ‘40 करोड़’ वाला ब्लास्ट! महुआ मोईत्रा पर भड़कीं शताब्दी रॉय, मानहानि केस की दी चेतावनी

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया सियासी तूफान खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोईत्रा द्वारा पार्टी छोड़ने वाले बागी सांसदों पर कथित तौर पर 40-40 करोड़ रुपये लेकर पाला बदलने का आरोप लगाने के बाद विवाद गहरा गया है। अब बागी सांसदों ने महुआ मोईत्रा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा विवाद कृष्णनगर से सांसद महुआ मोईत्रा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र किया और दावा किया कि पश्चिम बंगाल के बागी सांसदों ने एनडीए समर्थित पार्टी में शामिल होने के लिए भारी रकम ली है। महुआ ने आरोप लगाया कि प्रत्येक सांसद को कथित तौर पर 40 करोड़ रुपये की डील ऑफर की गई, जिसमें 4 करोड़ रुपये एडवांस और शेष राशि मासिक किस्तों में देने की व्यवस्था की गई। महुआ मोईत्रा ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया है। शताब्दी रॉय और काकोली घोष ने बुलाई बैठक महुआ के आरोपों से नाराज बागी गुट ने जवाबी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। बीरभूम से सांसद शताब्दी रॉय और बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इस मुद्दे पर 20 बागी सांसदों की एक वर्चुअल बैठक बुलाई। बैठक में शामिल सांसदों ने महुआ मोईत्रा के खिलाफ आपराधिक मानहानि (क्रिमिनल डिफेमेशन) का मुकदमा दायर करने पर सहमति जताई। शताब्दी रॉय का पलटवार शताब्दी रॉय ने महुआ मोईत्रा के आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह के आरोप लगाकर उनकी और अन्य सांसदों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि बिना किसी सबूत के इस प्रकार के आरोप स्वीकार नहीं किए जा सकते और जरूरत पड़ने पर कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा। कई बड़े चेहरे बागी खेमे में शामिल तृणमूल कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं में कई हाई-प्रोफाइल चेहरे शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय, अभिनेता और सांसद देव (दीपक अधिकारी), सांसद सायोनी घोष, सांसद जून मालिया, पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान तथा नेता पार्थ भौमिक जैसे नाम शामिल हैं। बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है तल्खी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ यह सियासी संकट अब कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है। यदि महुआ मोईत्रा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर होता है, तो यह मामला राज्य की राजनीति में और अधिक तनाव पैदा कर सकता है। फिलहाल, महुआ मोईत्रा के आरोपों और बागी सांसदों की कानूनी चेतावनी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
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Shashi Tharoor Narendra MODI
शशि थरूर की पीएम मोदी पर टिप्पणी से सियासी घमासान, बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस सांसद शशि थरूर  द्वारा नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक पहल की सराहना करने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय नाविकों की सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के रुख का समर्थन करते हुए थरूर के बयान को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और राहुल गांधी  को निशाने पर लिया।   थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  के साथ सार्वजनिक और निजी दोनों बैठकों में भारत की चिंताओं को स्पष्ट रूप से रखा। उन्होंने कहा कि युद्ध की परिस्थितियों में वाणिज्यिक जहाजों पर तैनात नागरिक नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए, क्योंकि वे सैनिक नहीं होते। थरूर ने यह भी कहा कि भारतीय ध्वज वाले और अन्य जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक कार्यरत हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा भारत की प्राथमिक चिंता है।   कांग्रेस ने उठाए थे सवाल इससे पहले कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि ओमान की खाड़ी में एक व्यापारिक पोत पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पार्टी ने सवाल उठाया था कि अमेरिका से इस घटना पर जवाब या खेद व्यक्त करने की मांग क्यों नहीं की गई।   भाजपा ने राहुल गांधी को घेरा थरूर के बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार किया। भाजपा प्रवक्ता Pradeep Bhandari ने कहा कि थरूर की टिप्पणी ने राहुल गांधी के आरोपों की पोल खोल दी है। उन्होंने दावा किया कि जब राष्ट्रीय हित की बात आती है तो प्रधानमंत्री मोदी मजबूती से भारत का पक्ष रखते हैं, जबकि कांग्रेस नेतृत्व लगातार सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाता रहा है।   गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की यह द्विपक्षीय मुलाकात जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान लगभग 16 महीने बाद हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, भारतीय नाविकों की सुरक्षा और अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।

abhishek singh जून 20, 2026 0
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