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बांग्लादेश से हार के बाद ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे टेस्ट के लिए टीम में किया बदलाव, जेक वेदराल्ड बाहर

abhishek singh अगस्त 18, 2026 0
Matthew Renshaw
Australia has made changes to the squad for the Second Test

मेलबर्न, एजेंसियां। बांग्लादेश के खिलाफ डार्विन में पहला टेस्ट 9 विकेट से गंवाने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे टेस्ट के लिए अपनी टीम में बड़ा बदलाव किया है। सलामी बल्लेबाज जेक वेदराल्ड को 13 सदस्यीय टीम से बाहर कर दिया गया है, जबकि उनकी जगह बाएं हाथ के बल्लेबाज मैथ्यू रेनशॉ को शामिल किया गया है।

 

वेदराल्ड का खराब प्रदर्शन पड़ा भारी

 

डार्विन टेस्ट में वेदराल्ड ऑस्ट्रेलिया की दोनों पारियों में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। उन्होंने पहली पारी में 23 रन बनाए, जबकि दूसरी पारी में बिना खाता खोले आउट हो गए। बांग्लादेश के खिलाफ इस प्रदर्शन के बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें दूसरे टेस्ट की टीम से बाहर कर दिया। वेदराल्ड ने अब तक ऑस्ट्रेलिया के लिए छह टेस्ट खेले हैं और उनका टेस्ट औसत करीब 20.36 है। लगातार खराब प्रदर्शन के कारण उनकी जगह पर सवाल उठ रहे थे।

 

तीन साल बाद रेनशॉ की वापसी

 

मैथ्यू रेनशॉ करीब तीन साल बाद ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम में वापस लौटे हैं। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। हालिया शेफील्ड शील्ड सीजन में रेनशॉ ने छह मैचों में 499 रन, 49.90 की औसत से बनाए थे। रेनशॉ ने अपना आखिरी टेस्ट मैच 2023 में भारत के खिलाफ खेला था। अब उनके पास बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी को मजबूती देने का मौका होगा।

 

लाबुशेन को फिलहाल बरकरार रखा

 

वेदराल्ड के अलावा ऑस्ट्रेलियाई टीम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मार्नस लाबुशेन भी टीम में बने हुए हैं, हालांकि उनके प्रदर्शन पर भी सवाल उठ रहे हैं। पहले टेस्ट में लाबुशेन दोनों पारियों में मिलाकर सिर्फ 32 रन बना सके थे। कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने संकेत दिया है कि लाबुशेन को अब बड़ी पारी खेलकर खुद को साबित करना होगा।

 

22 अगस्त से खेला जाएगा दूसरा टेस्ट

 

ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच सीरीज का दूसरा और आखिरी टेस्ट 22 अगस्त 2026 से मैके के ग्रेट बैरियर रीफ एरिना में खेला जाएगा। पहला टेस्ट जीतकर बांग्लादेश ने दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। अब ऑस्ट्रेलिया के सामने सीरीज बराबर करने की चुनौती है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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संदीप पाटिल के क्रिकेट करियर और उपलब्धियों की तस्वीर
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नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में संदीप पाटिल का नाम खास तौर पर लिया जाता है, जिन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और अलग अंदाज से पहचान बनाई। 1983 विश्व कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा रहे पाटिल ने क्रिकेट के बाद अभिनय में भी किस्मत आजमाई और फिर कोचिंग व चयनकर्ता के रूप में क्रिकेट से जुड़े रहे। 18 अगस्त 1956 को बॉम्बे में जन्मे संदीप पाटिल आज अपना 70वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके पिता मधुसूदन पाटिल भी मुंबई के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल चुके थे। क्रिकेट की विरासत को आगे बढ़ाते हुए संदीप पाटिल ने भारतीय टीम के मिडिल ऑर्डर में अपनी मजबूत जगह बनाई।   पाकिस्तान के खिलाफ किया अंतरराष्ट्रीय डेब्यू   संदीप पाटिल ने 15 जनवरी 1980 को पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया। इसी साल 6 दिसंबर को उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे क्रिकेट में कदम रखा। भारत के लिए पाटिल ने 29 टेस्ट मैचों में 36.93 की औसत से 1,588 रन बनाए। उनके नाम चार टेस्ट शतक भी हैं। वहीं 45 वनडे मैचों में उन्होंने 1,005 रन बनाए, जिसमें नौ अर्धशतक शामिल हैं। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी उनका रिकॉर्ड शानदार रहा और उन्होंने 130 मैचों में 8,156 रन बनाए।   बॉब विलिस के एक ओवर में बरसाए चौके   संदीप पाटिल की सबसे यादगार पारियों में 1982 का मैनचेस्टर टेस्ट शामिल है। इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने नाबाद 129 रन बनाए थे। इस दौरान उन्होंने इंग्लैंड के तेज गेंदबाज बॉब विलिस के एक ओवर में लगातार छह चौके लगाए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने इस पारी को भारतीय क्रिकेट के यादगार किस्सों में शामिल कर दिया।   1983 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा   संदीप पाटिल 1983 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य थे। सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 32 रन की अहम पारी खेली थी। भारत ने यह मुकाबला जीतकर फाइनल में जगह बनाई और फिर वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार वनडे विश्व कप अपने नाम किया।   क्रिकेट के बाद फिल्मों में आजमाई किस्मत   क्रिकेट से संन्यास के बाद संदीप पाटिल ने अभिनय की दुनिया में भी कदम रखा। साल 1985 में उनकी फिल्म 'कभी अजनबी थे' रिलीज हुई। इसमें उनके साथ पूनम ढिल्लों और देबश्री रॉय नजर आई थीं। हालांकि, यह उनका एकमात्र फिल्म प्रोजेक्ट रहा और इसके बाद उन्होंने एक्टिंग से दूरी बना ली।   कोचिंग में भी हासिल की सफलता   पाटिल ने क्रिकेट से अपना रिश्ता खत्म नहीं किया और कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली। नवंबर 1996 में उन्हें केन्या की राष्ट्रीय टीम का कोच बनाया गया। उनके मार्गदर्शन में केन्या ने 2003 वनडे विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया और सेमीफाइनल तक पहुंची। सेमीफाइनल में केन्या को भारत के हाथों 91 रन से हार मिली। इसके बाद पाटिल ओमान क्रिकेट टीम और भारत-ए के साथ भी कोच के तौर पर जुड़े।   चयन समिति के अध्यक्ष भी रहे   संदीप पाटिल ने क्रिकेट प्रशासन में भी अहम भूमिका निभाई। दिसंबर 2012 से सितंबर 2016 तक वह बीसीसीआई की सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष रहे। उनके कार्यकाल में भारतीय टीम ने 2013 चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता। इस तरह संदीप पाटिल का करियर सिर्फ एक क्रिकेटर तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने खिलाड़ी, विश्व कप विजेता, अभिनेता, कोच और चयनकर्ता के रूप में क्रिकेट के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई।

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रियाद, एजेंसियां। फुटबॉल के दिग्गज क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने अपने शानदार करियर के अंत को लेकर बड़ा संकेत दिया है। 41 वर्षीय पुर्तगाली स्टार ने कहा है कि 2026-27 सीजन संभवतः फुटबॉल में उनका आखिरी साल हो सकता है। रोनाल्डो ने यह बात Vogue को दिए एक इंटरव्यू में कही।   25 साल के करियर के बाद संन्यास की तैयारी   रोनाल्डो का पेशेवर करियर करीब 25 वर्षों का रहा है। उन्होंने स्पोर्टिंग सीपी से शुरुआत करने के बाद मैनचेस्टर यूनाइटेड, रियल मैड्रिड, युवेंटस और अब सऊदी अरब के अल-नस्र के लिए खेला है। इस दौरान उन्होंने पांच बैलन डी'ओर पुरस्कार समेत कई बड़े खिताब जीते। रोनाल्डो ने संकेत दिया कि वह फुटबॉल से विदाई के बाद अपनी जिंदगी के लिए भी योजनाएं बना चुके हैं और अपने परिवार, यात्रा तथा पैडल जैसे शौक पर ध्यान देना चाहते हैं।   1,000 गोल का ऐतिहासिक लक्ष्य   संन्यास के संकेत के बावजूद रोनाल्डो के सामने अभी एक बड़ा व्यक्तिगत लक्ष्य है। वह अपने क्लब और देश के लिए 1,000 करियर गोल पूरे करने की कोशिश में हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उनके नाम फिलहाल 976 गोल हैं। यदि वह 1,000 गोल का आंकड़ा हासिल कर लेते हैं, तो यह उनके ऐतिहासिक करियर का बेहद खास समापन होगा।   फुटबॉल की दुनिया में विदाई की चर्चा तेज   रोनाल्डो के बयान के बाद दुनिया भर में उनके संन्यास को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि उन्होंने यह नहीं कहा है कि वह निश्चित रूप से 2026-27 सीजन के बाद संन्यास ले लेंगे। उनका बयान फिलहाल संभावित आखिरी सीजन की ओर संकेत करता है।   रोनाल्डो ने अपने करियर को पीछे मुड़कर देखते हुए कहा कि वह फुटबॉल से एक शानदार विरासत छोड़ना चाहते हैं। ऐसे में आगामी सीजन उनके ऐतिहासिक करियर का अंतिम अध्याय बनता है या नहीं, इस पर दुनिया भर के प्रशंसकों की नजर रहेगी।

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मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने पहली बार जीता मेन्स द हंड्रेड खिताब

लंदन, एजेंसियां। मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने द हंड्रेड 2026 के पुरुष वर्ग का खिताब पहली बार अपने नाम कर लिया। लॉर्ड्स में खेले गए फाइनल में टीम ने ट्रेंट रॉकेट्स को 5 विकेट से हराकर ऐतिहासिक ट्रॉफी जीती। ट्रेंट रॉकेट्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 100 गेंदों में 158/8 रन बनाए, जिसे मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने 98 गेंदों में 5 विकेट खोकर हासिल कर लिया।   टिम सिफर्ट ने मचाया धमाल   मैनचेस्टर की जीत के सबसे बड़े नायक न्यूजीलैंड के बल्लेबाज टिम सिफर्ट रहे। उन्होंने महज 38 गेंदों में 72 रन की तूफानी पारी खेली, जिसमें 7 छक्के और 4 चौके शामिल रहे। सिफर्ट ने फाइनल में 23 गेंदों पर अर्धशतक पूरा किया, जो पुरुष द हंड्रेड फाइनल के इतिहास में सबसे तेज अर्धशतक रहा।   सिफर्ट को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। पूरे टूर्नामेंट में भी उनका बल्ला जमकर चला और उन्होंने 10 पारियों में 394 रन बनाए। उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार भी मिला।   आखिरी ओवर में रोमांचक जीत   159 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए मैनचेस्टर की टीम एक समय मजबूत स्थिति में थी, लेकिन सिफर्ट के आउट होने के बाद ट्रेंट रॉकेट्स ने वापसी की। मोहम्मद आमिर ने दो महत्वपूर्ण विकेट लेकर मुकाबले में रोमांच पैदा कर दिया। मैनचेस्टर को अंतिम पांच गेंदों पर केवल 3 रन चाहिए थे। इसके बाद अनुभवी ऑलराउंडर लियाम डॉसन ने छक्का लगाकर टीम को दो गेंद शेष रहते जीत दिला दी।   पहली बार चैंपियन बनी टीम   यह मैनचेस्टर सुपर जायंट्स का पहला मेन्स द हंड्रेड खिताब है। टीम पहले मैनचेस्टर ओरिजिनल्स के नाम से खेलती थी और 2026 सत्र से इसका नाम मैनचेस्टर सुपर जायंट्स किया गया। फ्रेंचाइजी का संचालन आरपी-संजीव गोयनका समूह से जुड़ा है।

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Prashant Kishor addresses Bankipur voters and promises private sector jobs for 10,000 educated unemployed youths.
बिहार

MLA बनते ही प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान, बांकीपुर के 10 हजार पढ़े-लिखे युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने का दावा

surbhi अगस्त 12, 2026 0

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