गॉल, एजेंसियां। भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में शानदार उपलब्धि हासिल की। जडेजा ने टेस्ट क्रिकेट में 350 विकेट पूरे कर लिए और ऐसा करने वाले भारत के सिर्फ पांचवें गेंदबाज बन गए। इसके साथ ही उन्होंने कपिल देव के एक खास ऑलराउंड रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली।
गॉल टेस्ट में श्रीलंका के खिलाफ जडेजा ने केशरा नुवंथा को आउट करके अपना 350वां टेस्ट विकेट पूरा किया। वह भारत की ओर से 350 टेस्ट विकेट लेने वाले पांचवें गेंदबाज हैं। उनसे पहले अनिल कुंबले, कपिल देव, रविचंद्रन अश्विन और हरभजन सिंह यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। जडेजा ने यह मुकाम अपने 90वें टेस्ट मैच में हासिल किया।
जडेजा की उपलब्धि इसलिए और खास है क्योंकि उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में 4,000 से ज्यादा रन भी हैं। वह टेस्ट इतिहास में 4,000 से अधिक रन और 350 या उससे ज्यादा विकेट हासिल करने वाले सिर्फ चौथे खिलाड़ी बन गए हैं। इस सूची में उनसे पहले कपिल देव, इयान बॉथम और डेनियल विटोरी शामिल थे। भारत की तरफ से इस दुर्लभ डबल को हासिल करने वाले जडेजा कपिल देव के बाद दूसरे खिलाड़ी हैं।
जडेजा ने सिर्फ रिकॉर्ड ही नहीं बनाया, बल्कि श्रीलंका की पहली पारी में गेंद से भी अहम योगदान दिया। उन्होंने 3 विकेट लेकर भारत को श्रीलंका को 284 रन पर समेटने में मदद की। उनके साथ डेब्यू कर रहे मानव सुथार ने 4 विकेट लिए और दोनों बाएं हाथ के स्पिनरों ने मिलकर श्रीलंका के सात विकेट झटके। भारत ने पहली पारी में 462 रन बनाए थे, जिसके जवाब में श्रीलंका 284 रन पर आउट हुआ और भारत को 178 रन की बढ़त मिली।
कपिल देव के बाद जडेजा का इस विशेष क्लब में शामिल होना भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि है। खास बात यह भी है कि जडेजा ने यह उपलब्धि कपिल देव से कम टेस्ट मैचों में हासिल की। इससे टेस्ट क्रिकेट में उनके एक बेहतरीन ऑलराउंडर के रूप में दर्जे को और मजबूती मिली है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
ढाका, एजेंसियां। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने महिला एशिया कप 2026 के लिए 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। कप्तानी निगार सुल्ताना जॉटी के हाथों में रहेगी, जबकि नाहिदा अख्तर को उपकप्तान बनाया गया है। यह टीम एशिया कप के साथ-साथ 2026 एशियन गेम्स में भी बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व करेगी। शर्मिन सुल्ताना की टीम में वापसी टीम में सबसे प्रमुख बदलाव शर्मिन सुल्ताना की वापसी है। उन्होंने मई 2026 में श्रीलंका के खिलाफ आखिरी बार अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला था। उन्हें ताज नेहर की जगह टीम में शामिल किया गया है। चयनकर्ताओं ने शीर्ष क्रम में अतिरिक्त विकल्प की जरूरत को देखते हुए यह फैसला लिया। बांग्लादेश की 15 सदस्यीय टीम निगार सुल्ताना जॉटी — कप्तान नाहिदा अख्तर — उपकप्तान दिलारा अख्तर जुएरिया फरदौस शर्मिन अख्तर सुप्ता शर्मिन सुल्ताना शोभना मोस्तारी शोर्ना अख्तर रितु मोनी फाहिमा खातून राबेया खान मारुफा अख्तर सुल्ताना खातून शांजिदा अख्तर माघला फरीहा इस्लाम त्रिश्ना श्रीलंका और UAE के साथ ग्रुप में बांग्लादेश महिला एशिया कप 28 अगस्त से 13 सितंबर 2026 तक दुबई में खेला जाएगा। बांग्लादेश को ग्रुप-B में मौजूदा चैंपियन श्रीलंका, मेजबान UAE और इंडोनेशिया के साथ रखा गया है।बांग्लादेश अपने अभियान की शुरुआत 31 अगस्त को इंडोनेशिया के खिलाफ करेगा। इसके बाद 6 सितंबर को श्रीलंका और 8 सितंबर को UAE से मुकाबला होगा। टूर्नामेंट का फाइनल 13 सितंबर को खेला जाएगा। एशियन गेम्स में भी यही टीम उतरेगी BCB के मुताबिक यही 15 सदस्यीय टीम जापान के आइची-नागोया एशियन गेम्स में भी हिस्सा लेगी। बांग्लादेश का पहला मुकाबला 17 सितंबर को चीन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में होगा। अगर टीम सेमीफाइनल में पहुंचती है तो उसका सामना भारत या जापान से हो सकता है।
डार्विन, एजेंसियां। बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को पहले टेस्ट में 9 विकेट से हराकर इतिहास रच दिया। यह ऑस्ट्रेलियाई धरती पर बांग्लादेश की पहली टेस्ट जीत है। इस नतीजे ने सिर्फ दो मैचों की सीरीज का समीकरण नहीं बदला, बल्कि ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) 2025-27 की अंक तालिका को भी दिलचस्प बना दिया है। बांग्लादेश ने भारत को पीछे छोड़ा डार्विन टेस्ट जीतने के बाद बांग्लादेश 66.67 प्रतिशत अंक (PCT) के साथ WTC तालिका में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। उसने पांच टेस्ट में तीन जीत, एक हार और एक ड्रॉ हासिल किया है। वहीं भारत 48.15 प्रतिशत PCT के साथ पांचवें स्थान पर खिसक गया है। भारत ने अब तक नौ टेस्ट में चार जीत, चार हार और एक ड्रॉ दर्ज किया है। ऑस्ट्रेलिया हार के बावजूद 77.78 प्रतिशत PCT के साथ शीर्ष पर है, जबकि दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। भारत के लिए अब गलती की गुंजाइश कम भारत के लिए WTC फाइनल की दौड़ पहले से ही चुनौतीपूर्ण थी। टीम इंडिया के पास अभी 9 टेस्ट बाकी हैं—श्रीलंका के खिलाफ 2, न्यूजीलैंड के खिलाफ 2 और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 टेस्ट। मौजूदा 48.15% PCT से भारत को फाइनल की दौड़ में मजबूती से बने रहने के लिए अपने बाकी मुकाबलों में बड़ी संख्या में जीत हासिल करनी होगी। मौजूदा आकलनों के अनुसार कम से कम 7 जीत भारत की स्थिति को काफी मजबूत कर सकती हैं, जबकि 8 जीत होने पर स्थिति और बेहतर होगी। ऑस्ट्रेलिया की हार ने शीर्ष की दौड़ खोली बांग्लादेश से हार के कारण ऑस्ट्रेलिया का PCT 77.78% तक गिर गया है। हालांकि वह अभी भी तालिका में नंबर-1 पर है, लेकिन इस हार ने बाकी टीमों को उसके करीब आने का मौका दिया है। बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी में 198 रन पर समेटने के बाद 426 रन बनाए और 228 रन की बढ़त हासिल की। दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया 284 रन पर ऑलआउट हुआ और बांग्लादेश ने सिर्फ 57 रन का लक्ष्य एक विकेट खोकर हासिल कर लिया। दूसरे टेस्ट पर भी भारत की नजर बांग्लादेश अब दो टेस्ट की सीरीज में 1-0 से आगे है। दूसरा टेस्ट 22 अगस्त से मैके में खेला जाएगा। ऑस्ट्रेलिया ने इस मुकाबले के लिए जेक वेदराल्ड को बाहर कर मैथ्यू रेनशॉ को टीम में शामिल किया है। भारत के नजरिए से बांग्लादेश की यह जीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि WTC में PCT के आधार पर ही टीमों की रैंकिंग और फाइनल की दौड़ तय होती है। बांग्लादेश अगर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज जीतने या कम से कम बढ़त बनाए रखने में सफल रहता है, तो शीर्ष चार की लड़ाई और कड़ी हो जाएगी। भारत को अब श्रीलंका के खिलाफ चल रही सीरीज से ही लगातार जीत दर्ज करके अपनी स्थिति सुधारनी होगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के पूर्व टेस्ट बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने अपने पसंदीदा भारतीय टेस्ट ओपनर्स की सूची साझा की है। उन्होंने टॉप-3 में सुनील गावस्कर, वीरेंद्र सहवाग और मुरली विजय को शामिल किया। पुजारा ने यह सूची बताते हुए साफ किया कि यह उनके पसंदीदा टॉप-3 ओपनर्स हैं। गावस्कर को नंबर-1 पसंद पुजारा की सूची में भारतीय टेस्ट क्रिकेट के महान सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर शामिल हैं। गावस्कर टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन का आंकड़ा पार करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज थे और लंबे समय तक भारतीय बल्लेबाजी की पहचान रहे। मुरली विजय को भी मिली जगह पुजारा ने अपने पूर्व साथी मुरली विजय को भी टॉप-3 में रखा। विजय ने भारत के लिए टेस्ट ओपनर के तौर पर 3,880 रन और 12 शतक बनाए। पुजारा और विजय ने कई टेस्ट मुकाबलों में भारत को मजबूत शुरुआत दिलाई थी। सहवाग की आक्रामक बल्लेबाजी को चुना तीसरे नाम के तौर पर पुजारा ने वीरेंद्र सहवाग को चुना। सहवाग टेस्ट क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए मशहूर रहे और उनके नाम दो तिहरे शतक भी हैं। पुजारा की पसंद में तीनों बल्लेबाजों की एक समान खासियत लंबे समय तक क्रीज पर टिककर बड़ी पारी खेलने की क्षमता रही। राहुल को टॉप-10 में रखा पुजारा से जब केएल राहुल की रैंकिंग को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने राहुल को भारत के टॉप-10 टेस्ट ओपनर्स में जगह दी। पुजारा ने कहा कि विदेशी परिस्थितियों में राहुल के प्रदर्शन और समय के साथ उनके सुधार को देखते हुए वह इस सूची में शामिल होने के हकदार हैं। हालांकि, टॉप-5 में राहुल को रखना उनके लिए मुश्किल फैसला था।