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रोहित-विराट के 2027 विश्व कप भविष्य पर बहस तेज, पूर्व क्रिकेटर ने चयनकर्ताओं को दी अहम सलाह

ranjan kumar tiwari जुलाई 28, 2026 0
2027 वनडे विश्व कप में रोहित शर्मा और विराट कोहली के भविष्य पर आकाश चोपड़ा की सलाह
Rohit Sharma Virat Kohli 2027 World Cup Aakash Chopra Advice

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने 2027 वनडे विश्व कप को लेकर रोहित शर्मा और विराट कोहली के भविष्य पर चल रही बहस के बीच चयनकर्ताओं को अहम सलाह दी है। उन्होंने कहा कि रोहित और विराट जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का मूल्यांकन केवल एक या दो मैचों के आधार पर नहीं किया जा सकता। चोपड़ा का मानना है कि यदि दोनों खिलाड़ी फिट हैं, उपलब्ध हैं और लगातार रन बना रहे हैं, तो उन्हें 2027 विश्व कप की योजना का हिस्सा बनाए रखना चाहिए।

 

'अनुभव की कोई कीमत नहीं होती'

 

आकाश चोपड़ा ने कहा कि बड़े टूर्नामेंटों में अनुभव सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने विशेष रूप से रोहित शर्मा को भारत की वनडे टीम के लिए 'इररिप्लेसेबल' (अप्रतिस्थापनीय) बताते हुए कहा कि टीम प्रबंधन को जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। उनके अनुसार, विश्व कप जैसे टूर्नामेंट में दबाव झेलने का अनुभव युवा खिलाड़ियों से कहीं अधिक अहम साबित होता है।

 

इंग्लैंड सीरीज के बाद बढ़ी अटकलें

 

इंग्लैंड के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज के बाद रोहित शर्मा और विराट कोहली के भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। हालांकि रोहित ने निर्णायक मुकाबले में शानदार शतक लगाकर आलोचकों को जवाब दिया। दूसरी ओर, BCCI की ओर से अभी तक दोनों खिलाड़ियों के 2027 विश्व कप खेलने या नहीं खेलने को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है।

 

चयनकर्ताओं के सामने संतुलन की चुनौती

 

पूर्व क्रिकेटर का मानना है कि चयनकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं के बीच सही संतुलन बनाना है। उन्होंने कहा कि यदि रोहित और विराट अपनी फिटनेस और प्रदर्शन का स्तर बनाए रखते हैं, तो दोनों 2027 विश्व कप में भारत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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अजीत अगरकर और उनकी पत्नी फातिमा अगरकर द्वारा शुरू किए गए नए एजुकेशन वेंचर ACE Juniors की तस्वीर
अजीत अगरकर ने शुरू किया नया एजुकेशन वेंचर, बच्चों के लिए खोलेंगे स्कूल

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर अब क्रिकेट के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाने जा रहे हैं। अगरकर और उनकी पत्नी फातिमा अगरकर ने मिलकर ACE Juniors नाम से एक नया एजुकेशन वेंचर शुरू किया है, जिसका उद्देश्य छोटे बच्चों के शुरुआती विकास और शिक्षा पर ध्यान देना है।   बच्चों की शुरुआती शिक्षा पर रहेगा फोकस   अजीत अगरकर का यह नया प्रोजेक्ट छोटे बच्चों की शिक्षा और उनके संपूर्ण विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। ACE Juniors में बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन, टीमवर्क, रचनात्मकता और जीवन कौशल विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।   अगरकर का मानना है कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में सही दिशा और बेहतर माहौल मिलना बेहद जरूरी होता है। इसी सोच के साथ उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया है।   29 जुलाई को होगा लॉन्च कार्यक्रम   रिपोर्ट्स के अनुसार ACE Juniors का आधिकारिक लॉन्च कार्यक्रम 29 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में खेल, शिक्षा, मनोरंजन और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोगों के शामिल होने की संभावना है। इस नए वेंचर के जरिए अगरकर परिवार शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है।   क्रिकेट के बाद शिक्षा क्षेत्र में नई पारी   अजीत अगरकर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी रह चुके हैं और वर्तमान में भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम की चयन समिति के अध्यक्ष हैं। उन्होंने अपने क्रिकेट करियर के बाद कमेंट्री और चयनकर्ता की भूमिका निभाई है।   अब शिक्षा क्षेत्र में उनकी यह नई शुरुआत उन्हें एक अलग पहचान दिला सकती है। खेल जगत से जुड़े कई खिलाड़ी पहले भी स्कूल, अकादमी और शिक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट शुरू कर चुके हैं।   बच्चों के भविष्य निर्माण पर जोर   ACE Juniors का लक्ष्य केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक कौशल विकसित करना भी है। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती उम्र में बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देने से उनके भविष्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।   अजीत अगरकर का यह कदम क्रिकेट से बाहर उनकी नई भूमिका को दिखाता है, जहां वह युवा पीढ़ी के विकास में योगदान देने की कोशिश कर रहे हैं।  

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श्रीलंका टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम में पहली बार शामिल किए गए ऑलराउंडर सारांश जैन
कौन हैं सारांश जैन? श्रीलंका टेस्ट दौरे के लिए पहली बार टीम इंडिया में मिली जगह

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के श्रीलंका दौरे के लिए घोषित टेस्ट स्क्वाड में सबसे बड़ा सरप्राइज नाम सारांश जैन का रहा। मध्य प्रदेश के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले 33 वर्षीय ऑफ स्पिन ऑलराउंडर को पहली बार टीम इंडिया में जगह मिली है। चयनकर्ताओं ने उन्हें चोटिल वॉशिंगटन सुंदर के स्थान पर टीम में शामिल किया है। पिछले कई वर्षों से रणजी ट्रॉफी और इंडिया-ए के लिए लगातार दमदार प्रदर्शन करने के बाद आखिरकार उन्हें राष्ट्रीय टीम का बुलावा मिला है।   घरेलू क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड, बल्ले और गेंद दोनों से किया कमाल   इंदौर में जन्मे सारांश जैन दाएं हाथ के ऑफ स्पिनर और उपयोगी निचले क्रम के बल्लेबाज हैं। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 40 से अधिक मैच खेलते हुए 130 से ज्यादा विकेट लिए हैं और 1,400 से अधिक रन भी बनाए हैं, जिसमें एक शतक और कई अर्धशतक शामिल हैं। हाल के घरेलू सत्रों में उनके लगातार ऑलराउंड प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।   परिवार के संघर्ष के बाद पूरा हुआ टीम इंडिया का सपना   सारांश जैन का सफर आसान नहीं रहा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनके पिता कैंसर से जूझते रहे, लेकिन उन्होंने बेटे के करियर पर असर न पड़े इसलिए अपनी बीमारी तक छिपाई। वहीं उनके बड़े भाई ने अपने क्रिकेट करियर का सपना छोड़कर सारांश को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया। अब टीम इंडिया में चयन के साथ उनके परिवार का वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ है।   श्रीलंका दौरे पर टेस्ट डेब्यू का सुनहरा मौका   यदि अंतिम एकादश में जगह मिलती है, तो सारांश जैन को श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने का मौका मिलेगा। भारतीय टीम 15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला खेलेगी और चयनकर्ताओं को उम्मीद है कि सारांश अपनी घरेलू फॉर्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दोहरा सकेंगे।  

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नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। टीम की सबसे बड़ी खबर अनुभवी ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा की वापसी और घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले सारांश जैन को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया जाना है।   जडेजा की वापसी, बुमराह फिटनेस पर निर्भर   रविंद्र जडेजा टेनिस एल्बो की चोट से उबरने के बाद टेस्ट टीम में लौटे हैं। वहीं तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को भी टीम में शामिल किया गया है, लेकिन उनका खेलना BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) से मिलने वाली फिटनेस मंजूरी पर निर्भर करेगा। बल्लेबाज साई सुदर्शन भी फिटनेस क्लीयरेंस मिलने पर ही चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे।   सारांश जैन को मिला पहला टेस्ट कॉल-अप   ऑफ स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली है। उन्हें वॉशिंगटन सुंदर की अनुपलब्धता के कारण मौका दिया गया है। मध्य प्रदेश के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले सारांश ने रणजी ट्रॉफी और इंडिया-ए के लिए लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है, जिसके बाद चयनकर्ताओं ने उन पर भरोसा जताया।   शुभमन गिल कप्तान, राहुल उपकप्तान   श्रीलंका दौरे पर भारतीय टीम की कमान शुभमन गिल के हाथों में रहेगी, जबकि केएल राहुल को उपकप्तान बनाया गया है। टीम 7 अगस्त से कोलंबो में चार दिवसीय अभ्यास मैच खेलेगी, जिसके बाद 15 अगस्त से गॉल में पहला टेस्ट शुरू होगा। यह सीरीज ICC विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 का हिस्सा होगी।   भारत की टेस्ट टीम (श्रीलंका दौरा): शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), साई सुदर्शन* (फिटनेस क्लीयरेंस के अधीन), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार, सारांश जैन, जसप्रीत बुमराह* (फिटनेस क्लीयरेंस के अधीन), मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़ और देवदत्त पडिक्कल।  

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