Dinesh Karthik ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 से पहले Royal Challengers Bangalore की अपनी पसंदीदा ऑल-टाइम प्लेइंग इलेवन का चयन किया है। इस टीम में सबसे चौंकाने वाला फैसला कप्तानी को लेकर देखने को मिला, जहां कार्तिक ने टीम की कमान दिग्गज बल्लेबाज Virat Kohli की बजाय Rajat Patidar को सौंपी है।
कार्तिक ने एक बातचीत में कहा कि विराट कोहली ने कई सीजन तक RCB का सफल नेतृत्व किया है, लेकिन उनकी ऑल-टाइम टीम के कप्तान रजत पाटीदार होंगे। उन्होंने कहा कि पाटीदार ने कम समय में बतौर बल्लेबाज शानदार प्रभाव छोड़ा है और टीम की खिताबी सफलता में अहम भूमिका निभाई है।
कार्तिक की इस टीम में ओपनिंग की जिम्मेदारी विस्फोटक बल्लेबाज Chris Gayle और अनुभवी खिलाड़ी Faf du Plessis को दी गई है। इसके चलते IPL इतिहास के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज विराट कोहली को तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए चुना गया है।
नंबर-4 पर कप्तान रजत पाटीदार और नंबर-5 पर RCB के दिग्गज बल्लेबाज AB de Villiers को जगह मिली है।
कार्तिक ने विकेटकीपर के रूप में Jitesh Sharma को नंबर-6 पर रखा है, जबकि नंबर-7 पर ऑलराउंडर Krunal Pandya को शामिल किया है। कार्तिक का मानना है कि टीम की खिताबी जीत में क्रुणाल की गेंदबाजी और निर्णायक मैचों में उनके प्रदर्शन का बड़ा योगदान रहा है।
गेंदबाजी विभाग में कार्तिक ने तेज गेंदबाज Mohammed Siraj और Josh Hazlewood को टीम में जगह दी है। वहीं स्पिन आक्रमण की जिम्मेदारी Yuzvendra Chahal को सौंपी गई है। इसके अलावा ऑलराउंडर गेंदबाज के तौर पर Harshal Patel को भी टीम में शामिल किया गया है।
क्रिस गेल, फाफ डु प्लेसिस, विराट कोहली, रजत पाटीदार (कप्तान), एबी डिविलियर्स, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), क्रुणाल पांड्या, हर्षल पटेल, मोहम्मद सिराज, युजवेंद्र चहल, जोश हेजलवुड।
कार्तिक की इस टीम ने फैंस के बीच चर्चा जरूर छेड़ दी है, खासकर इस बात को लेकर कि टीम के सबसे बड़े स्टार विराट कोहली को कप्तानी नहीं सौंपी गई।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
गॉल, एजेंसियां। दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज बल्लेबाज एबी डिविलियर्स ने भारतीय क्रिकेट के दो महान बल्लेबाजों सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली की तुलना करते हुए बड़ा बयान दिया है। डिविलियर्स ने कहा कि सचिन तेंदुलकर ने सबसे पहले भारतीय बल्लेबाजों को विदेशी परिस्थितियों में सफल होने का भरोसा दिया, लेकिन विराट कोहली ने इस मानक को एक नए स्तर तक पहुंचाया। उनका यह बयान भारत की श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में 165 रन की जीत के बाद आया है। सचिन ने दिखाई विदेशी परिस्थितियों में सफलता की राह डिविलियर्स के मुताबिक, सचिन तेंदुलकर वह बल्लेबाज थे जिन्होंने भारतीय क्रिकेटरों को यह विश्वास दिलाया कि उपमहाद्वीप के बाहर भी तेज, उछाल वाली और सीमिंग परिस्थितियों में बड़ी पारियां खेली जा सकती हैं। सचिन ने अपने टेस्ट करियर में 15,921 रन और 51 शतक बनाए। विदेशी मैदानों पर भी उनका रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा और वह टेस्ट क्रिकेट में विदेशी परिस्थितियों में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में शीर्ष पर हैं। विराट ने उस स्तर को और आगे बढ़ाया डिविलियर्स ने कहा कि विराट कोहली ने सचिन द्वारा शुरू की गई इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भारतीय बल्लेबाजी का स्तर और ऊंचा किया। खास तौर पर विराट की कप्तानी के दौरान भारत ने विदेशी टेस्ट सीरीज में अधिक आक्रामक और प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेला। विराट ने अपने टेस्ट करियर का अंत 123 टेस्ट में 9,230 रन के साथ किया। उन्होंने विदेशी परिस्थितियों में भी कई यादगार पारियां खेलीं और भारत को मुश्किल परिस्थितियों में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। राहुल और पडिक्कल जैसे खिलाड़ियों पर भी असर डिविलियर्स का मानना है कि सचिन और विराट की सफलता का प्रभाव मौजूदा भारतीय बल्लेबाजों पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने केएल राहुल और देवदत्त पडिक्कल का उदाहरण देते हुए कहा कि नई पीढ़ी के बल्लेबाज विदेशी परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में गॉल टेस्ट में पडिक्कल ने 167 रन की शानदार पारी खेलकर अपना पहला टेस्ट शतक लगाया, जबकि केएल राहुल ने भी उपयोगी 81 रन बनाए। भारत ने यह मुकाबला 165 रन से जीता। राहुल को बड़ी पारियां खेलने की सलाह डिविलियर्स ने केएल राहुल की तकनीक की तारीफ करते हुए कहा कि वह भारतीय टीम के लिए बड़ी संपत्ति हैं, लेकिन विदेशी परिस्थितियों में उनके आंकड़े और बेहतर हो सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि राहुल को अच्छी शुरुआत मिलने के बाद उसे बड़ी पारी में बदलने पर ध्यान देना चाहिए। डिविलियर्स के इस बयान से साफ है कि उनके मुताबिक सचिन ने भारतीय बल्लेबाजों के लिए विदेशी क्रिकेट का दरवाजा खोला, जबकि विराट ने उस दरवाजे से आगे बढ़कर विदेशी परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजी की अपेक्षाओं को नई ऊंचाई दी।
लाहौर, एजेंसियां। पाकिस्तान क्रिकेट टीम के आगामी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। टीम इस समय इंग्लैंड के दौरे पर तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खेल रही है, जिसका पहला मुकाबला 19 अगस्त से लीड्स में शुरू हुआ। इसके बाद 27 अगस्त से लॉर्ड्स और 9 सितंबर से एजबेस्टन में अगले दो टेस्ट खेले जाएंगे। इंग्लैंड के खिलाफ तीन टेस्ट पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच मौजूदा टेस्ट सीरीज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप चक्र का हिस्सा है। पहला टेस्ट हेडिंग्ले में 19 से 23 अगस्त, दूसरा टेस्ट लॉर्ड्स में 27 से 31 अगस्त और तीसरा मुकाबला एजबेस्टन में 9 से 13 सितंबर तक प्रस्तावित है। पहले टेस्ट के शुरुआती दिन पाकिस्तान की बल्लेबाजी मुश्किल परिस्थितियों में लड़खड़ा गई और टीम 171 रन पर ऑलआउट हो गई। इंग्लैंड के ओली रॉबिन्सन और जोश टंग ने पांच-पांच विकेट लेकर पाकिस्तान पर दबाव बनाया। अक्टूबर में इंग्लैंड-श्रीलंका के साथ बड़ा मुकाबला पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के कार्यक्रम के मुताबिक अक्टूबर में पाकिस्तान इंग्लैंड और श्रीलंका के साथ छह मैचों की ODI त्रिकोणीय सीरीज की मेजबानी करेगा। यह सीरीज 18 से 31 अक्टूबर के बीच खेली जाएगी। 2027 विश्व कप की तैयारी पर जोर पाकिस्तान के व्यस्त कार्यक्रम का एक बड़ा उद्देश्य आगामी 2027 वनडे विश्व कप की तैयारी भी है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के जरिए टीम अपने खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा प्रतिस्पर्धी क्रिकेट उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है। PCB ने 2026-27 का घरेलू क्रिकेट कैलेंडर भी जारी कर दिया है।
एम्स्टेलवीन, एजेंसियां। भारतीय हॉकी टीम ने 2026 पुरुष हॉकी विश्व कप के पूल-डी के रोमांचक मुकाबले में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 5-3 से हरा दिया। इस जीत के साथ भारत ने टूर्नामेंट के दूसरे दौर में जगह पक्की कर ली, जबकि पाकिस्तान का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया। हरमनप्रीत और अभिषेक ने दागे दो-दो गोल भारत की जीत में कप्तान हरमनप्रीत सिंह और फॉरवर्ड अभिषेक ने शानदार प्रदर्शन किया। दोनों खिलाड़ियों ने दो-दो गोल किए, जबकि हार्दिक सिंह ने भी पेनल्टी स्ट्रोक पर गोल करके भारत की बढ़त मजबूत की। भारत ने बनाई शुरुआती बढ़त भारत ने मुकाबले की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की और शुरुआती दौर में पाकिस्तान पर दबाव बनाया। भारत एक समय 3-0 से आगे था, लेकिन पाकिस्तान ने वापसी करते हुए अंतर कम किया। इसके बावजूद भारतीय टीम ने अपना दबदबा बनाए रखा और तीसरे क्वार्टर के बाद 5-2 की बढ़त हासिल कर ली। पाकिस्तान की वापसी की कोशिश नाकाम पाकिस्तान की ओर से हन्नान शाहिद ने दो गोल किए, जबकि सुफयान खान ने एक गोल दागा। अंतिम क्वार्टर में भारत को एक समय 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा, लेकिन टीम ने दबाव झेलते हुए पाकिस्तान को बराबरी का मौका नहीं दिया और 5-3 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। पूल-डी में दूसरे स्थान पर रहा भारत इस जीत के बाद भारत पूल-डी में 6 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि इंग्लैंड 9 अंकों के साथ शीर्ष पर रहा। पाकिस्तान केवल एक अंक के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गया। भारत अब दूसरे दौर में पूल-ई में आगे की चुनौती का सामना करेगा।