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गॉल में गौतम गंभीर और गैरी कर्स्टन की मुलाकात, टेस्ट क्रिकेट के भविष्य पर हुई खास बातचीत

abhishek singh अगस्त 20, 2026 0
Gautam Gambhir, Gary Kirsten
Gautam Gambhir and Gary Kirsten Meeting in Galle

गॉल, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका के बीच पहले टेस्ट के दौरान भारतीय मुख्य कोच गौतम गंभीर और श्रीलंका के मुख्य कोच गैरी कर्स्टन की खास मुलाकात चर्चा में रही। दोनों के बीच पुराना रिश्ता है—कर्स्टन के भारतीय टीम के कोच रहते गंभीर 2011 विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा थे। इस बार दोनों आमने-सामने की टीमों के कोच के रूप में मिले। 

 

कोचिंग और टेस्ट क्रिकेट पर हुई बातचीत

 

कर्स्टन ने मुलाकात के बारे में बताया कि दोनों ने पुरानी यादों को ज्यादा नहीं छेड़ा, बल्कि कोचिंग और उससे जुड़ी चुनौतियों पर बातचीत की। दोनों की टेस्ट क्रिकेट को लेकर सोच और मूल्यों में काफी समानता है। 

 

2011 विश्व कप की यादें भी जुड़ी हैं

 

गंभीर और कर्स्टन की जोड़ी भारतीय क्रिकेट के सफल दौर से जुड़ी रही है। कर्स्टन के मार्गदर्शन में भारतीय टीम ने 2011 वनडे विश्व कप जीता था और गंभीर ने फाइनल में 97 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली थी। अब दोनों अलग-अलग टीमों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 

 

टेस्ट क्रिकेट को लेकर साझा सोच

 

कर्स्टन ने कहा कि वह और गंभीर टेस्ट क्रिकेट के मूल्यों को काफी महत्व देते हैं। दोनों का मानना है कि लंबे प्रारूप की अपनी खास पहचान और चुनौतियां हैं। गॉल टेस्ट के बाद कर्स्टन ने यह भी कहा कि टेस्ट क्रिकेट में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए श्रीलंका को अधिक टेस्ट मैच खेलने की जरूरत है।

 

भारत ने गॉल टेस्ट में दर्ज की बड़ी जीत

 

मुलाकात के दौरान दोनों टीमों के कोचों के बीच आपसी सम्मान साफ नजर आया। मैदान पर भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को 165 रन से हराया और दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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दलीप ट्रॉफी फाइनल का वेन्यू बदला, बेंगलुरु से चेन्नई शिफ्ट हुआ मुकाबला

चेन्नई, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने दलीप ट्रॉफी 2026-27 के फाइनल का आयोजन स्थल बदल दिया है। पहले यह मुकाबला बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में होना था, लेकिन अब फाइनल चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में खेला जाएगा। BCCI ने यह फैसला दर्शकों को स्टेडियम में मैच देखने का मौका देने के लिए लिया है।    6 से 10 सितंबर तक होगा फाइनल   दलीप ट्रॉफी का फाइनल 6 से 10 सितंबर 2026 तक खेला जाएगा। बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में दर्शकों की मौजूदगी पर कुछ प्रतिबंध हैं, इसलिए BCCI ने फाइनल को ऐसे मैदान पर कराने का फैसला किया है जहां क्रिकेट प्रशंसक सीधे स्टेडियम पहुंचकर मुकाबला देख सकें।    बाकी मुकाबले बेंगलुरु में ही होंगे   फाइनल के वेन्यू में बदलाव के बावजूद टूर्नामेंट के बाकी मुकाबलों के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दलीप ट्रॉफी के शुरुआती मुकाबले 23 अगस्त से बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ही खेले जाएंगे। इस संस्करण में छह क्षेत्रीय टीमें हिस्सा ले रही हैं।    दर्शकों के लिए बढ़ाया गया कवरेज   BCCI ने दलीप ट्रॉफी के प्रसारण और कवरेज को भी बढ़ाने की जानकारी दी है। सभी मुकाबलों की लाइव स्ट्रीमिंग होगी, जबकि एक क्वार्टर फाइनल, एक सेमीफाइनल और फाइनल का टीवी प्रसारण भी किया जाएगा। चेन्नई में फाइनल कराने से दर्शकों को घरेलू क्रिकेट के इस बड़े मुकाबले को मैदान से देखने का मौका मिलेगा।

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इंग्लैंड बनाम पाकिस्तान टेस्ट: पहले दिन इंग्लैंड का दबदबा, पाकिस्तान 171 रन पर ऑलआउट

लीड्स, एजेंसियां। इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच तीन टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला हेडिंग्ले, लीड्स में शुरू हो गया है। पहले दिन इंग्लैंड ने शानदार गेंदबाजी करते हुए पाकिस्तान की पहली पारी को 171 रन पर समेट दिया। जवाब में दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड ने 2 विकेट पर 112 रन बना लिए और अब वह पाकिस्तान से सिर्फ 59 रन पीछे है।    ओली रॉबिन्सन और जोश टंग ने मचाई तबाही   इंग्लैंड के लिए ओली रॉबिन्सन और जोश टंग ने शानदार गेंदबाजी की। दोनों ने पाकिस्तान की पहली पारी में 5-5 विकेट झटके। रॉबिन्सन ने 5/51 और टंग ने 5/46 के आंकड़े दर्ज किए। दोनों गेंदबाजों के पांच-पांच विकेट लेने के कारण इंग्लैंड ने पाकिस्तान की पारी को 171 रन पर समेट दिया।   पाकिस्तान की बल्लेबाजी लड़खड़ाई   पाकिस्तान ने शुरुआत में कुछ प्रतिरोध दिखाया, लेकिन 97 रन के स्कोर के बाद टीम तेजी से विकेट गंवाती चली गई। अब्दुल्लाह शफीक ने 61 रन बनाकर पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन उनके आउट होने के बाद पाकिस्तान की पारी ज्यादा देर नहीं टिक सकी।   जो रूट की कप्तानी में इंग्लैंड मजबूत स्थिति में   इंग्लैंड के लिए जो रूट ने कप्तान के रूप में वापसी की है। दिन का खेल खत्म होने तक रूट 37 रन बनाकर नाबाद रहे। इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाजों के जल्दी आउट होने के बाद रूट और जॉर्डन कॉक्स ने पारी को संभाला। इंग्लैंड 112/2 पर है और पहली पारी में बढ़त बनाने की स्थिति में पहुंच चुका है।   मैच में बना अनोखा रिकॉर्ड   रॉबिन्सन और टंग ने पांच-पांच विकेट लेने के बाद मैच की गेंद को आधा-आधा कटवा लिया, ताकि दोनों गेंदबाज अपने शानदार प्रदर्शन की निशानी अपने पास रख सकें। इंग्लैंड के लिए एक ही टेस्ट पारी में दो गेंदबाजों के पांच-पांच विकेट लेने का यह कारनामा लंबे समय बाद देखने को मिला।

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गॉल टेस्ट जीत के बाद केएल राहुल का बड़ा बयान, बोले- हर टेस्ट जीत टीम के लिए खास

गॉल, एजेंसियां। श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में भारत की 165 रन की शानदार जीत के बाद उपकप्तान केएल राहुल ने टीम के प्रदर्शन को लेकर बड़ा बयान दिया। राहुल ने कहा कि हर टेस्ट मैच की जीत खास होती है और श्रीलंका जैसी परिस्थितियों में मिली यह जीत टीम के आत्मविश्वास को और मजबूत करेगी।    जीत से बढ़ा टीम का आत्मविश्वास   राहुल के मुताबिक, टेस्ट क्रिकेट में जीत हासिल करना हमेशा महत्वपूर्ण होता है, लेकिन विदेशी परिस्थितियों में मिली जीत का महत्व और बढ़ जाता है। गॉल की स्पिन के अनुकूल पिच पर भारतीय टीम ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में बेहतर प्रदर्शन किया। भारत ने पहली पारी में 460 रन बनाए। देवदत्त पडिक्कल ने 167 रन की शानदार पारी खेली, जबकि राहुल ने भी 82 रन बनाकर टीम के बड़े स्कोर में अहम योगदान दिया।    पडिक्कल की पारी को लेकर राहुल ने क्या कहा?   राहुल ने युवा बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल के प्रदर्शन की विशेष तौर पर तारीफ की। पडिक्कल ने अपने करियर का पहला टेस्ट शतक लगाते हुए 167 रन बनाए। राहुल के अनुसार, पडिक्कल लंबे समय से लगातार मेहनत कर रहे थे और उन्हें जैसे ही मौका मिला, उन्होंने उसे बड़ी पारी में बदल दिया।    राहुल ने पडिक्कल की तैयारी और धैर्य को उनकी सफलता की बड़ी वजह बताया। उनका यह प्रदर्शन भारतीय टीम के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे मध्यक्रम में एक युवा विकल्प मजबूत हुआ है।   खुद राहुल भी शतक से चूके   गॉल टेस्ट में राहुल ने 82 रन की पारी खेली। वह एक बार फिर शतक से चूक गए, हालांकि उनकी पारी ने भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में मदद की। मैच के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव के कारण उन्हें कुछ समय के लिए मैदान से बाहर भी जाना पड़ा था, लेकिन वह दोबारा बल्लेबाजी करने उतरे।    भारत ने सीरीज में बनाई 1-0 की बढ़त   भारत ने श्रीलंका को दूसरी पारी में 206 रन पर समेटकर मुकाबला 165 रन से जीत लिया। युवा स्पिनर मानव सुथार ने मैच में 10 विकेट लेकर जीत में अहम भूमिका निभाई। इस जीत के साथ भारत ने दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है।

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