लगातार दूसरी हार से बिगड़ा समीकरण
Royal Challengers Bengaluru को Lucknow Super Giants के खिलाफ मिली हार ने आईपीएल 2026 प्लेऑफ की रेस को और रोमांचक बना दिया है। रजत पाटीदार की कप्तानी वाली RCB अब अंक तालिका में तीसरे स्थान पर खिसक गई है।
सीजन की शुरुआत में टीम ने पहले पांच मैचों में चार जीत दर्ज कर टॉप-2 की मजबूत दावेदार मानी जा रही थी, लेकिन लगातार दो हार के बाद अब स्थिति पहले जैसी आसान नहीं रही।
इस समय Sunrisers Hyderabad और Punjab Kings अंक तालिका में RCB से ऊपर मौजूद हैं। खास बात यह है कि बेंगलुरु को अभी अपने बचे हुए मुकाबलों में पंजाब और हैदराबाद दोनों से भिड़ना है। ऐसे में टीम की टॉप-2 की उम्मीद अब इन मैचों पर काफी हद तक निर्भर करेगी।
RCB को अभी मुंबई इंडियंस, कोलकाता नाइट राइडर्स, पंजाब किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मुकाबले खेलने हैं।
अगर RCB अपने बाकी चारों मुकाबले जीत लेती है, तो टीम के 20 अंक हो जाएंगे। आईपीएल के 10 टीमों वाले फॉर्मेट में 20 अंक आमतौर पर टॉप-2 में जगह पक्की करने के लिए काफी माने जाते हैं।
अगर बेंगलुरु 4 में से 3 मुकाबले जीतती है, तो टीम 18 अंकों तक पहुंच जाएगी। RCB का नेट रन रेट (+1.234) फिलहाल काफी मजबूत है, जो उसे बड़ा फायदा दे सकता है। ऐसे में अगर दूसरी टीमें भी 18 अंकों पर खत्म करती हैं, तो बेहतर NRR के कारण RCB आगे निकल सकती है।
हालांकि इसके लिए पंजाब और हैदराबाद जैसी टीमों को सीधे मुकाबलों में हराना बेहद जरूरी होगा।
अगर RCB अपने आखिरी चार मैचों में सिर्फ दो जीत दर्ज करती है, तो टीम 16 अंकों तक ही पहुंच पाएगी। ऐसी स्थिति में टॉप-2 में पहुंचने के लिए उसे दूसरी टीमों के परिणामों पर निर्भर रहना पड़ेगा।
साथ ही Rajasthan Royals और Gujarat Titans जैसी टीमों की हार भी जरूरी हो जाएगी।
RCB के लिए आने वाले मुकाबले बेहद अहम माने जा रहे हैं। अगर टीम एक और मैच हारती है, तो वह टॉप-2 की रेस से बाहर होकर तीसरे या चौथे स्थान के लिए संघर्ष करती नजर आ सकती है। वहीं लगातार जीत टीम को सीधे क्वालिफायर-1 तक पहुंचा सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
FIFA World Cup को फुटबॉल का सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट माना जाता है, जहां दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। 1930 से शुरू हुए इस टूर्नामेंट में अब तक कई दिग्गजों ने अपने गोलों से इतिहास रच दिया है। खास बात यह है कि कुछ खिलाड़ियों ने लगातार कई संस्करणों में शानदार प्रदर्शन कर खुद को अमर बना लिया। फुटबॉल फैंस अब FIFA World Cup 2026 का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत आने वाले महीनों में होने वाली है। इसी बीच आइए जानते हैं अब तक के टॉप-5 गोल स्कोरर खिलाड़ियों के बारे में। FIFA World Cup के टॉप-5 गोल स्कोरर खिलाड़ी 1. मिरोस्लाव क्लोज़ – जर्मनी (16 गोल) Miroslav Klose FIFA World Cup इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2002, 2006, 2010 और 2014 के चार विश्व कप में हिस्सा लिया और कुल 16 गोल किए। 2014 वर्ल्ड कप में ब्राजील के खिलाफ जर्मनी की 7–1 जीत के दौरान उन्होंने यह रिकॉर्ड अपने नाम किया था। उनकी निरंतरता और बड़े मैचों में प्रदर्शन उन्हें इस सूची में शीर्ष पर रखता है। 2. रोनाल्डो नाज़ारियो – ब्राजील (15 गोल) Ronaldo Nazário, जिन्हें ‘फेनोमेनों’ कहा जाता है, इस सूची में दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने 1998, 2002 और 2006 के वर्ल्ड कप में कुल 15 गोल किए। 2002 में उन्होंने ब्राजील को खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई और गोल्डन बूट भी अपने नाम किया। 3. गर्ड मुलर – पश्चिम जर्मनी (14 गोल) Gerd Müller, जिन्हें ‘डेर बॉम्बर’ के नाम से जाना जाता है, ने 1970 और 1974 के विश्व कप में 14 गोल किए। उनका गोल स्कोरिंग औसत बेहद प्रभावशाली रहा, और 1974 में उन्होंने जर्मनी को वर्ल्ड कप जीताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 4. जस्ट फॉन्टेन – फ्रांस (13 गोल) Just Fontaine ने केवल 1958 वर्ल्ड कप में खेलते हुए 13 गोल दागे। यह आज भी एक ही टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड है, जिसे तोड़ना बेहद कठिन माना जाता है। 5. लियोनेल मेसी – अर्जेंटीना (13 गोल) Lionel Messi ने 2006 से 2022 तक पांच वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया और 13 गोल किए। 2022 में उनकी कप्तानी में अर्जेंटीना ने वर्ल्ड कप खिताब जीता। मेसी ने अपने करियर में गोल्डन बॉल भी कई बार जीती और फुटबॉल इतिहास में सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल हैं। वर्ल्ड कप रिकॉर्ड्स और महत्व FIFA World Cup न केवल गोल और जीत का मंच है, बल्कि यह खिलाड़ियों की विरासत तय करने वाला टूर्नामेंट भी है। इन दिग्गजों ने साबित किया है कि बड़े मैचों में प्रदर्शन ही असली पहचान बनाता है।
Virat Kohli ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मुकाबलों में उनसे बड़ा खिलाड़ी कोई नहीं। Royal Challengers Bengaluru के स्टार बल्लेबाज ने रायपुर में Kolkata Knight Riders के खिलाफ शानदार नाबाद 105 रन की पारी खेलकर टीम को यादगार जीत दिलाई। पिछले दो मैचों में खाता तक नहीं खोल पाने वाले विराट ने इस मुकाबले में दमदार वापसी करते हुए कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। उनकी इस पारी के दम पर आरसीबी ने केकेआर को 6 विकेट से हराया और अंक तालिका में टॉप स्थान हासिल किया। टी20 क्रिकेट में सबसे तेज 14000 रन पूरे विराट कोहली ने अपनी पारी के दौरान 78 रन बनाते ही टी20 क्रिकेट में 14000 रन पूरे कर लिए। इसके साथ ही उन्होंने Chris Gayle का बड़ा रिकॉर्ड तोड़ दिया। कोहली ने सिर्फ 409 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की, जबकि गेल ने 14000 रन तक पहुंचने के लिए 423 पारियां खेली थीं। इस सूची में David Warner, Jos Buttler और Kieron Pollard जैसे दिग्गज भी शामिल हैं। IPL में चेज करते हुए बराबरी का रिकॉर्ड कोहली ने इस शतक के साथ आईपीएल में रन चेज करते हुए अपने तीसरे शतक का रिकॉर्ड बनाया। अब वह इस मामले में जोस बटलर की बराबरी पर पहुंच गए हैं। आरसीबी के लिए यह पारी इसलिए भी खास रही क्योंकि टीम दबाव में थी और विराट ने अंत तक टिककर मैच फिनिश किया। KKR के खिलाफ भी विराट का जलवा केकेआर के खिलाफ यह विराट कोहली का दूसरा आईपीएल शतक रहा। इससे पहले उन्होंने 2019 में कोलकाता में शतक लगाया था। अब रायपुर में 105 रन की नाबाद पारी खेलकर उन्होंने एक और खास उपलब्धि अपने नाम कर ली। आरसीबी और केकेआर के मुकाबलों में अब तक सबसे यादगार पारियों में Chris Gayle का 102 रन और विराट के दो शतक शामिल हो चुके हैं। IPL में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बने इस शतक के साथ विराट कोहली ने आईपीएल में अपने कुल शतकों की संख्या 9 पहुंचा दी। वह लीग इतिहास में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। इस सूची में उनके बाद जोस बटलर 7 और क्रिस गेल 6 शतकों के साथ मौजूद हैं। प्लेयर ऑफ द मैच में भी बनाई बराबरी इस मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी के लिए विराट कोहली को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। इसके साथ ही उन्होंने आईपीएल में सबसे ज्यादा प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों की सूची में Rohit Sharma की बराबरी कर ली। दोनों के नाम अब 21-21 अवॉर्ड दर्ज हैं।
Gujarat Titans ने आईपीएल 2026 के 56वें मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए Sunrisers Hyderabad को 82 रनों से हराकर अंक तालिका में बड़ा बदलाव कर दिया है। इस जीत के साथ गुजरात टाइटंस अब 16 अंकों के साथ पॉइंट्स टेबल में पहले स्थान पर पहुंच गई है और टीम का प्लेऑफ में पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं इस हार के बाद सनराइजर्स हैदराबाद को बड़ा नुकसान हुआ है। टीम दूसरे स्थान से खिसककर तीसरे नंबर पर पहुंच गई है। अब हैदराबाद के 12 मैचों में 7 जीत और 14 अंक हैं। हालांकि टीम के अभी दो मुकाबले बाकी हैं, जिससे प्लेऑफ की उम्मीद बरकरार है। RCB दूसरे और पंजाब चौथे स्थान पर अंक तालिका में फिलहाल दूसरे स्थान पर Royal Challengers Bengaluru की टीम मौजूद है, जिसके 11 मैचों में 14 अंक हैं। वहीं चौथे नंबर पर Punjab Kings की टीम बनी हुई है। इसके अलावा Chennai Super Kings और Rajasthan Royals भी प्लेऑफ की रेस में मजबूती से बनी हुई हैं। IPL 2026 Updated Points Table स्थान टीम मैच जीत हार बेनतीजा अंक नेट रन रेट 1 गुजरात टाइटंस 12 8 4 0 16 +0.551 2 रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 11 7 4 0 14 +1.103 3 सनराइजर्स हैदराबाद 12 7 5 0 14 +0.331 4 पंजाब किंग्स 11 6 4 1 13 +0.428 5 चेन्नई सुपर किंग्स 11 6 5 0 12 +0.185 6 राजस्थान रॉयल्स 11 6 5 0 12 +0.082 7 दिल्ली कैपिटल्स 12 5 7 0 10 -0.993 8 कोलकाता नाइट राइडर्स 10 4 5 1 9 -0.169 9 मुंबई इंडियंस (बाहर) 11 3 8 0 6 -0.585 10 लखनऊ सुपर जायंट्स (बाहर) 11 3 8 0 6 -0.907 ऐसा रहा मुकाबला अहमदाबाद के Narendra Modi Stadium में खेले गए इस मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। पहले बल्लेबाजी करते हुए गुजरात टाइटंस ने 5 विकेट के नुकसान पर 168 रन बनाए। टीम के लिए Sai Sudharsan ने शानदार 61 रन बनाए, जबकि Washington Sundar ने 50 रनों की अहम पारी खेली। 169 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी हैदराबाद की टीम पूरी तरह बिखर गई और सिर्फ 86 रनों पर ऑलआउट हो गई। बल्लेबाज शुरुआत से ही संघर्ष करते नजर आए। टीम के लिए कप्तान Pat Cummins ने सबसे ज्यादा 19 रन बनाए। गुजरात की ओर से Kagiso Rabada और Jason Holder ने 3-3 विकेट झटके। वहीं Prasidh Krishna ने भी 2 विकेट हासिल किए। प्लेऑफ की रेस हुई और रोमांचक आईपीएल 2026 अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। गुजरात की जीत के बाद टॉप-4 की लड़ाई और भी दिलचस्प हो गई है। जहां गुजरात ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली है, वहीं बाकी टीमों के लिए आने वाले मुकाबले करो या मरो जैसे साबित हो सकते हैं।