हालांकि, कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे जो मिले हुए अवसर का पूरा फायदा नहीं उठा सके या उन्हें पर्याप्त मौका नहीं मिला। ऐसे में भविष्य में उनकी टीम इंडिया में वापसी आसान नहीं दिखाई देती। आइए जानते हैं उन तीन खिलाड़ियों के बारे में जिनके लिए आगे का रास्ता चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
विकेटकीपर बल्लेबाज प्रभसिमरन सिंह को जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टीम में दूसरे विकेटकीपर के रूप में शामिल किया गया था। हालांकि पूरी सीरीज के दौरान उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला।
भारतीय टीम में विकेटकीपर के लिए पहले से ही कड़ी प्रतिस्पर्धा है। टी20 विश्व कप 2026 के बाद आराम पर रहे संजू सैमसन की वापसी होने पर चयन की दौड़ और मुश्किल हो सकती है। ऐसे में यदि भविष्य में प्रभसिमरन को दोबारा मौका नहीं मिलता, तो यह चयन संतुलन और प्रतिस्पर्धा का परिणाम हो सकता है।
आईपीएल 2026 में अपनी तेज गेंदबाजी से पहचान बनाने वाले अशोक शर्मा को जिम्बाब्वे दौरे पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिला।
पहले टी20 मुकाबले में उन्होंने चार ओवर में 28 रन खर्च किए, लेकिन कोई विकेट हासिल नहीं कर सके। इसके बाद उन्हें दूसरे मैच की प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया।
तीसरे मैच में प्रिंस यादव के चोटिल होने के कारण उन्हें फिर मौका मिला, जहां उन्होंने चार ओवर में 20 रन देकर एक विकेट लिया। हालांकि भारतीय टीम के तेज गेंदबाजी विकल्पों में मयंक यादव, प्रिंस यादव और अन्य युवा गेंदबाजों की मौजूदगी को देखते हुए भविष्य में उनके लिए नियमित स्थान बनाना आसान नहीं होगा।
ऑलराउंडर सूर्यांश शेड्गे को पिछले कुछ महीनों में आयरलैंड, इंग्लैंड और जिम्बाब्वे दौरे पर टीम इंडिया का हिस्सा बनने का अवसर मिला।
हालांकि हर सीरीज में उन्हें सीमित मौके मिले। इंग्लैंड दौरे पर वह बल्ले और गेंद दोनों से प्रभाव नहीं छोड़ सके। जिम्बाब्वे के खिलाफ भी उन्हें सिर्फ एक मुकाबला खेलने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने गेंदबाजी में 15 रन दिए, जबकि बल्लेबाजी का अवसर नहीं मिला।
भारतीय टीम में हार्दिक पंड्या और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे स्थापित ऑलराउंडर उपलब्ध रहने पर सूर्यांश शेड्गे के लिए नियमित जगह बनाना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भारतीय क्रिकेट में युवा प्रतिभाओं की लंबी कतार है। हर सीरीज में नए खिलाड़ियों को मौका मिल रहा है और चयनकर्ताओं के सामने विकल्प भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में किसी खिलाड़ी के लिए एक-दो मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन करना ही काफी नहीं होता, बल्कि लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करना जरूरी होता है।
हालांकि यह केवल मौजूदा प्रदर्शन और टीम संयोजन के आधार पर लगाया जा रहा आकलन है। भविष्य में घरेलू क्रिकेट, आईपीएल या अन्य टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन कर ये खिलाड़ी फिर से भारतीय टीम में वापसी कर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
ग्लास्गो (स्कॉटलैंड)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पांचवें दिन सोमवार को भारतीय खिलाड़ियों के लिए बेहद अहम मुकाबले होने हैं। आज पहली बार एथलेटिक्स स्पर्धाओं की शुरुआत होगी, जबकि भारोत्तोलन, मुक्केबाजी, तैराकी, जिम्नास्टिक, पैरा एथलेटिक्स और लॉन बॉल्स में भी भारतीय खिलाड़ी अपनी चुनौती पेश करेंगे। दिनभर में भारत के पास 10 पदक जीतने का मौका रहेगा। एथलेटिक्स में स्टार खिलाड़ियों पर रहेंगी निगाहें एथलेटिक्स में भारत के स्टार लंबी कूद खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर और लोकेश सत्यनाथन पुरुष लंबी कूद क्वालिफिकेशन में उतरेंगे। वहीं तेजस शिर्से 110 मीटर बाधा दौड़ की हीट में हिस्सा लेंगे और क्वालिफाई करने पर फाइनल भी खेलेंगे। दिन का सबसे बड़ा आकर्षण पुरुष हाई जंप फाइनल होगा, जिसमें तेजस्विन शंकर, सर्वेश अनिल कुशारे और जे. आदर्श राम भारत के लिए पदक जीतने की कोशिश करेंगे। भारोत्तोलन में तीन पदकों की उम्मीद भारोत्तोलन में भारत की चुनौती तीन वर्गों में रहेगी। ज्ञानेश्वरी यादव (53 किग्रा), बिंदियारानी देवी (58 किग्रा) और वी. अजय बाबू (79 किग्रा) अपने-अपने फाइनल मुकाबलों में उतरेंगे। तीनों खिलाड़ियों से भारत को पदक की उम्मीद है। मुक्केबाजी और जिम्नास्टिक में भी अहम मुकाबले मुक्केबाजी में सचिन सिवाच, अंकुश, साक्षी चौधरी और सुमित कुंडू अपने-अपने प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले खेलेंगे। वहीं आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक के महिला वॉल्ट फाइनल में प्रतिष्ठा सामंता पदक के लिए चुनौती पेश करेंगी। पैरा एथलेटिक्स और तैराकी में भी दावेदारी पैरा एथलेटिक्स में शर्मिला धांकर और शिल्पा के. शायला महिला शॉटपुट F57 फाइनल में उतरेंगी। वहीं पुरुष T38 100 मीटर फाइनल में राकेशभाई भट्ट और श्रेयांश त्रिवेदी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। तैराकी में साजन प्रकाश 200 मीटर बटरफ्लाई हीट में हिस्सा लेंगे। क्वालिफाई करने पर वह देर रात फाइनल में पदक के लिए चुनौती देंगे। भारत की नजर पदकों की संख्या बढ़ाने पर कॉमनवेल्थ गेम्स के पांचवें दिन भारतीय दल की सबसे बड़ी उम्मीद एथलेटिक्स, भारोत्तोलन और पैरा एथलेटिक्स से रहेगी। यदि प्रमुख खिलाड़ी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करते हैं, तो भारत सोमवार को अपने पदकों की संख्या में बड़ा इजाफा कर सकता है।
भारतीय क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे दौरे पर शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन मैचों की टी20 सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली। कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई में युवा खिलाड़ियों से सजी टीम ने मेजबान जिम्बाब्वे को हर विभाग में मात दी। इस दौरे पर कई नए चेहरों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। वैभव सूर्यवंशी ने दो अर्धशतकों की बदौलत 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' का पुरस्कार जीता, जबकि मयंक यादव और प्रिंस यादव ने गेंदबाजी से प्रभावित किया। हालांकि, कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे जो मिले हुए अवसर का पूरा फायदा नहीं उठा सके या उन्हें पर्याप्त मौका नहीं मिला। ऐसे में भविष्य में उनकी टीम इंडिया में वापसी आसान नहीं दिखाई देती। आइए जानते हैं उन तीन खिलाड़ियों के बारे में जिनके लिए आगे का रास्ता चुनौतीपूर्ण हो सकता है। 1. प्रभसिमरन सिंह: पूरे दौरे में नहीं मिला एक भी मौका विकेटकीपर बल्लेबाज प्रभसिमरन सिंह को जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टीम में दूसरे विकेटकीपर के रूप में शामिल किया गया था। हालांकि पूरी सीरीज के दौरान उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। भारतीय टीम में विकेटकीपर के लिए पहले से ही कड़ी प्रतिस्पर्धा है। टी20 विश्व कप 2026 के बाद आराम पर रहे संजू सैमसन की वापसी होने पर चयन की दौड़ और मुश्किल हो सकती है। ऐसे में यदि भविष्य में प्रभसिमरन को दोबारा मौका नहीं मिलता, तो यह चयन संतुलन और प्रतिस्पर्धा का परिणाम हो सकता है। 2. अशोक शर्मा: डेब्यू के बावजूद नहीं छोड़ पाए मजबूत छाप आईपीएल 2026 में अपनी तेज गेंदबाजी से पहचान बनाने वाले अशोक शर्मा को जिम्बाब्वे दौरे पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिला। पहले टी20 मुकाबले में उन्होंने चार ओवर में 28 रन खर्च किए, लेकिन कोई विकेट हासिल नहीं कर सके। इसके बाद उन्हें दूसरे मैच की प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया। तीसरे मैच में प्रिंस यादव के चोटिल होने के कारण उन्हें फिर मौका मिला, जहां उन्होंने चार ओवर में 20 रन देकर एक विकेट लिया। हालांकि भारतीय टीम के तेज गेंदबाजी विकल्पों में मयंक यादव, प्रिंस यादव और अन्य युवा गेंदबाजों की मौजूदगी को देखते हुए भविष्य में उनके लिए नियमित स्थान बनाना आसान नहीं होगा। 3. सूर्यांश शेड्गे: लगातार मौके मिले, लेकिन जगह पक्की नहीं कर पाए ऑलराउंडर सूर्यांश शेड्गे को पिछले कुछ महीनों में आयरलैंड, इंग्लैंड और जिम्बाब्वे दौरे पर टीम इंडिया का हिस्सा बनने का अवसर मिला। हालांकि हर सीरीज में उन्हें सीमित मौके मिले। इंग्लैंड दौरे पर वह बल्ले और गेंद दोनों से प्रभाव नहीं छोड़ सके। जिम्बाब्वे के खिलाफ भी उन्हें सिर्फ एक मुकाबला खेलने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने गेंदबाजी में 15 रन दिए, जबकि बल्लेबाजी का अवसर नहीं मिला। भारतीय टीम में हार्दिक पंड्या और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे स्थापित ऑलराउंडर उपलब्ध रहने पर सूर्यांश शेड्गे के लिए नियमित जगह बनाना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। टीम इंडिया में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है भारतीय क्रिकेट में युवा प्रतिभाओं की लंबी कतार है। हर सीरीज में नए खिलाड़ियों को मौका मिल रहा है और चयनकर्ताओं के सामने विकल्प भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में किसी खिलाड़ी के लिए एक-दो मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन करना ही काफी नहीं होता, बल्कि लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करना जरूरी होता है। हालांकि यह केवल मौजूदा प्रदर्शन और टीम संयोजन के आधार पर लगाया जा रहा आकलन है। भविष्य में घरेलू क्रिकेट, आईपीएल या अन्य टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन कर ये खिलाड़ी फिर से भारतीय टीम में वापसी कर सकते हैं।
हरारे, एजेंसियां। भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का तीसरा और अंतिम मुकाबला आज (26 जुलाई) हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। भारतीय टीम पहले दो मुकाबले जीतकर सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना चुकी है। अब कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई में टीम इंडिया की नजर जिम्बाब्वे का 3-0 से क्लीन स्वीप करने पर होगी, जबकि मेजबान टीम सम्मान बचाने के इरादे से मैदान में उतरेगी। सीरीज जीत के बाद बेंच स्ट्रेंथ को मिल सकता है मौका दूसरे टी20 के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने संकेत दिए थे कि अंतिम मुकाबले में टीम संयोजन में बदलाव हो सकता है। तेज गेंदबाज प्रिंस यादव की हैमस्ट्रिंग चोट के कारण उनकी उपलब्धता पर संशय बना हुआ है। ऐसे में भारतीय टीम कुछ युवा खिलाड़ियों को मौका देकर अपनी बेंच स्ट्रेंथ भी आजमा सकती है। हालांकि टीम का लक्ष्य जीत का सिलसिला जारी रखते हुए सीरीज में क्लीन स्वीप करने का होगा। युवा खिलाड़ियों पर रहेंगी निगाहें भारत के लिए इस सीरीज में ईशान किशन, तिलक वर्मा, वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा ने शानदार प्रदर्शन किया है। गेंदबाजी में भी युवा खिलाड़ियों ने प्रभावित किया है। तीसरे मुकाबले में भी इन खिलाड़ियों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी, जबकि जिम्बाब्वे अपने घरेलू मैदान पर आखिरी मैच जीतकर सीरीज का अंत सकारात्मक तरीके से करना चाहेगा।