रिपोर्ट के मुताबिक, यह तकनीक दीवारों, छतों और खिड़कियों पर इस्तेमाल की जा सकती है। इसका उद्देश्य गर्म मौसम में सूरज की गर्मी को बाहर रखना और ठंड के दौरान इमारत के भीतर गर्माहट बनाए रखने में मदद करना है। खास बात यह है कि कोटिंग का मोड बदलने के लिए बहुत कम बिजली की जरूरत होती है, जो पारंपरिक AC या हीटर की ऊर्जा खपत की तुलना में काफी कम हो सकती है।
स्मार्ट इलेक्ट्रोक्रोमिक कोटिंग एक एडवांस्ड सामग्री तकनीक है, जिसे इमारतों की बाहरी सतहों और खिड़कियों पर लगाया जा सकता है। यह बाहरी मौसम के अनुसार अपने तापीय व्यवहार को बदलने में सक्षम होती है।
गर्मियों में इसका इस्तेमाल सूर्य की किरणों और गर्मी को अधिक मात्रा में रिफ्लेक्ट करने के लिए किया जा सकता है। इससे इमारत के अंदर गर्मी का प्रवेश कम करने में मदद मिलती है। वहीं ठंड के मौसम में यही तकनीक गर्मी को बनाए रखने में सहायता कर सकती है।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि भवन के तापमान को नियंत्रित करने का कुछ काम कोटिंग खुद संभाल सकती है, जिससे AC और हीटर पर निर्भरता घट सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस स्मार्ट कोटिंग में बेहद पतले ग्राफीन और कॉपर-बिस्मथ जैसे पदार्थों का इस्तेमाल किया गया है। इलेक्ट्रिक कंट्रोल के जरिए कोटिंग के अलग-अलग मोड बदले जा सकते हैं।
इसके काम करने को आसान भाषा में इस तरह समझा जा सकता है:
लैब और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की छत पर किए गए परीक्षणों में इस तकनीक ने इमारत के तापमान को आसपास की हवा की तुलना में लगभग 1 डिग्री तक कम करने की क्षमता दिखाई। वहीं हीटिंग मोड में तापमान को 33 डिग्री तक बढ़ाने की क्षमता का भी उल्लेख किया गया है।
इस तकनीक को लेकर किए गए कंप्यूटर सिमुलेशन में ऊर्जा बचत की संभावनाओं का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में स्मार्ट कोटिंग के इस्तेमाल से AC और हीटिंग सिस्टम की ऊर्जा खपत में औसतन 73.69 MBtu तक की कमी का अनुमान लगाया गया है।
रिपोर्ट में इसे लगभग 21,600 यूनिट बिजली के बराबर बताया गया है। इसके अलावा, कम ऊर्जा खपत का सीधा फायदा पर्यावरण को भी हो सकता है। अनुमान के मुताबिक, प्रत्येक इमारत सालाना करीब 4,063 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बच सकती है।
हालांकि, इन आंकड़ों को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने से पहले यह समझना जरूरी है कि ऊर्जा बचत इमारत की डिजाइन, स्थानीय मौसम, आकार, सामग्री और इस्तेमाल के तरीके जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।
इमारतों में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है और इसका एक बड़ा हिस्सा तापमान नियंत्रित करने में खर्च होता है। अगर बाहरी सतहें और खिड़कियां खुद ही गर्मी के आदान-प्रदान को नियंत्रित करने में मदद करें, तो HVAC सिस्टम पर दबाव कम किया जा सकता है।
इसका संभावित फायदा तीन स्तरों पर हो सकता है:
यानी यह तकनीक सिर्फ घरों को ठंडा या गर्म रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की ऊर्जा-कुशल इमारतों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। स्मार्ट इलेक्ट्रोक्रोमिक कोटिंग को AC या हीटर का सीधा विकल्प नहीं, बल्कि उनकी ऊर्जा जरूरत कम करने वाली सहायक तकनीक के तौर पर देखना ज्यादा उचित है।
बहुत ज्यादा गर्मी या अत्यधिक ठंड वाले इलाकों में पारंपरिक HVAC सिस्टम की जरूरत बनी रह सकती है। हालांकि, अगर भवन की सतहें पहले से ही तापमान नियंत्रण में मदद करेंगी, तो AC या हीटर को कम मेहनत करनी पड़ सकती है।
तकनीक की संभावनाएं आकर्षक हैं, लेकिन इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने से पहले कई चुनौतियों का समाधान जरूरी है।
वैज्ञानिकों के सामने प्रमुख सवाल हैं कि इस कोटिंग को बड़े स्तर पर कम लागत में कैसे बनाया जाए, यह कितने वर्षों तक प्रभावी रहेगी और अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में इसका प्रदर्शन कितना स्थिर रहेगा।
खासकर बेहद ठंडे क्षेत्रों में इसकी हीटिंग क्षमता को और बेहतर बनाने की जरूरत बताई जा रही है। इसके अलावा वास्तविक इमारतों में लंबे समय तक परीक्षण के बाद ही इसकी व्यावसायिक उपयोगिता का सही आकलन किया जा सकेगा।
भविष्य में घर और दफ्तर सिर्फ बिजली से चलने वाले AC, हीटर और अन्य उपकरणों पर निर्भर नहीं रहेंगे। बिल्डिंग की दीवारें, छतें और खिड़कियां भी ऊर्जा प्रबंधन का हिस्सा बन सकती हैं।
स्मार्ट इलेक्ट्रोक्रोमिक कोटिंग इसी दिशा में एक संभावित कदम है। अगर इसे टिकाऊ, किफायती और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है, तो यह ऊर्जा की मांग कम करने और पर्यावरण पर दबाव घटाने में उपयोगी साबित हो सकती है।
फिलहाल यह तकनीक विकास और परीक्षण के चरण में है, लेकिन इसकी क्षमता यह संकेत जरूर देती है कि आने वाले समय में इमारतें सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि खुद तापमान नियंत्रित करने वाली स्मार्ट संरचनाएं भी बन सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। बच्चों की देखभाल में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। स्मार्ट बेबी मॉनिटर बनाने वाली कई स्टार्टअप कंपनियां ऐसे एआई-आधारित सिस्टम विकसित कर रही हैं, जो बच्चे की नींद, सांस लेने की गति, करवट बदलने और अन्य गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं। विशेषज्ञ इसे 'बेबी सर्विलांस' के नए दौर के रूप में देख रहे हैं। हर गतिविधि का तैयार होता है डिजिटल रिकॉर्ड रिपोर्ट के अनुसार, एआई से लैस स्मार्ट कैमरे बच्चों की एचडी वीडियो रिकॉर्डिंग का विश्लेषण कर उनके सोने-जागने का समय, सांस लेने का पैटर्न, रात में जागने की संख्या और माता-पिता की जरूरत पड़ने जैसी गतिविधियों का विस्तृत डेटा तैयार करते हैं। यह जानकारी चार्ट और विश्लेषण के रूप में अभिभावकों को उपलब्ध कराई जाती है। भविष्य में व्यवहार और विकास पर भी नजर स्टार्टअप कंपनियां ऐसे सिस्टम विकसित करने पर काम कर रही हैं, जो भविष्य में बच्चों की दिनभर की गतिविधियों, विकास और व्यवहार का भी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर सकें। इससे माता-पिता को बच्चों की दिनचर्या और स्वास्थ्य पर अधिक विस्तृत जानकारी मिल सकेगी। प्राइवेसी को लेकर बढ़ी चिंता हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की तकनीक जहां बच्चों की निगरानी और देखभाल में मददगार हो सकती है, वहीं इससे निजता (Privacy) और डेटा सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बच्चों के संवेदनशील डेटा के संग्रह और उपयोग को लेकर स्पष्ट सुरक्षा मानकों की आवश्यकता बताई जा रही है। स्टार्टअप्स का तेजी से बढ़ता कारोबार स्मार्ट बेबी मॉनिटरिंग क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां तेजी से विस्तार कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में से एक के लाखों सक्रिय उपयोगकर्ता हैं और उसका कारोबार करोड़ों डॉलर तक पहुंच चुका है, जिससे एआई आधारित पेरेंटिंग तकनीकों की बढ़ती लोकप्रियता का संकेत मिलता है।
देहरादून, एजेंसियां। उत्तराखंड के सरकारी डेटा सेंटर पर एक बार फिर साइबर हमले का खतरा मंडरा रहा है। इस बार अधिकारियों को एक कथित 'बहरूपिया वायरस' (Shape-Shifting Malware) के जरिए सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने की आशंका है। प्रारंभिक जांच में एक बड़े चीनी हैकर समूह की संभावित संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और जांच जारी है। कई विभागों के डेटा पर खतरे की आशंका प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह मैलवेयर सिस्टम में प्रवेश करने के बाद अपना स्वरूप बदल लेता है, जिससे उसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। आशंका है कि खाद्य आपूर्ति, जीएसटी, पर्यटन और आम नागरिकों से जुड़े अन्य विभागों के डेटा को निशाना बनाया गया हो। फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि कोई संवेदनशील डेटा चोरी हुआ है या नहीं। 2024 के रैनसमवेयर हमले के बाद फिर चुनौती बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में सरकारी डेटा सेंटर पर हुए Makop Ransomware हमले से उबरने के बाद अब यह नया साइबर खतरा सामने आया है। इस बार अब तक किसी तरह की फिरौती या अन्य मांग सामने नहीं आई है, लेकिन साइबर सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल मामले के सामने आने के बाद डेटा सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले के समय फायरवॉल सक्रिय नहीं थी और कुछ खरीदे गए साइबर सुरक्षा उपकरणों के उपयोग को लेकर भी जांच की जा रही है। जांच जारी, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार आईटीडीए (ITDA) और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की तकनीकी जांच में जुटी हैं। फिलहाल किसी भी डेटा चोरी या विदेशी हैकर समूह की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। सरकारी डेटा सेंटर पर साइबर खतरा, 'शेप-शिफ्टिंग' वायरस की एंट्री से बढ़ी चिंता देहरादून, एजेंसियां। उत्तराखंड के सरकारी डेटा सेंटर पर एक बार फिर साइबर हमले का खतरा मंडरा रहा है। इस बार अधिकारियों को एक कथित 'बहरूपिया वायरस' (Shape-Shifting Malware) के जरिए सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने की आशंका है। प्रारंभिक जांच में एक बड़े चीनी हैकर समूह की संभावित संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और जांच जारी है। कई विभागों के डेटा पर खतरे की आशंका प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह मैलवेयर सिस्टम में प्रवेश करने के बाद अपना स्वरूप बदल लेता है, जिससे उसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। आशंका है कि खाद्य आपूर्ति, जीएसटी, पर्यटन और आम नागरिकों से जुड़े अन्य विभागों के डेटा को निशाना बनाया गया हो। फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि कोई संवेदनशील डेटा चोरी हुआ है या नहीं। 2024 के रैनसमवेयर हमले के बाद फिर चुनौती बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में सरकारी डेटा सेंटर पर हुए Makop Ransomware हमले से उबरने के बाद अब यह नया साइबर खतरा सामने आया है। इस बार अब तक किसी तरह की फिरौती या अन्य मांग सामने नहीं आई है, लेकिन साइबर सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल मामले के सामने आने के बाद डेटा सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले के समय फायरवॉल सक्रिय नहीं थी और कुछ खरीदे गए साइबर सुरक्षा उपकरणों के उपयोग को लेकर भी जांच की जा रही है। जांच जारी, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार आईटीडीए (ITDA) और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की तकनीकी जांच में जुटी हैं। फिलहाल किसी भी डेटा चोरी या विदेशी हैकर समूह की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
बीजिंग, एजेंसियां। स्मार्टफोन निर्माता Xiaomi की अगली फ्लैगशिप सीरीज Xiaomi 18 को लेकर नई जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी की नई सीरीज के दो मॉडल EEC (यूरेशियन इकोनॉमिक कमीशन) सर्टिफिकेशन में दिखाई दिए हैं। इस सर्टिफिकेशन के बाद माना जा रहा है कि Xiaomi 18 सीरीज का ग्लोबल लॉन्च जल्द हो सकता है। Xiaomi 18 और Xiaomi 18 Pro को मिला सर्टिफिकेशन रिपोर्ट के अनुसार, Xiaomi 18 और Xiaomi 18 Pro मॉडल EEC डेटाबेस में दिखाई दिए हैं। सर्टिफिकेशन में सामने आए मॉडल नंबर ग्लोबल मार्केट में लॉन्च की ओर इशारा कर रहे हैं। इससे संकेत मिलते हैं कि कंपनी इस बार चीन के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी फ्लैगशिप सीरीज को तेजी से पेश कर सकती है। Snapdragon चिप और 200MP कैमरा की चर्चा लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक, Xiaomi 18 सीरीज में Qualcomm का नया फ्लैगशिप प्रोसेसर Snapdragon 8 Elite Gen 6 मिलने की उम्मीद है। वहीं कैमरा सेक्शन में बड़े अपग्रेड की चर्चा है, जिसमें 200MP सेंसर और बेहतर टेलीफोटो कैमरा शामिल हो सकते हैं। Xiaomi इस सीरीज को प्रीमियम फोटोग्राफी और परफॉर्मेंस के लिए तैयार कर रही है। बड़ी बैटरी और नए डिजाइन के साथ आ सकती है सीरीज रिपोर्ट्स के अनुसार, Xiaomi 18 Pro में बड़ी बैटरी, हाई-रेजोल्यूशन डिस्प्ले और बेहतर चार्जिंग सपोर्ट मिलने की संभावना है। कुछ लीक में 7,000mAh तक की बैटरी और नए डिजाइन एलिमेंट्स का दावा किया गया है। हालांकि कंपनी ने अभी तक इन फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सितंबर में चीन लॉन्च, ग्लोबल मार्केट में जल्द एंट्री की उम्मीद मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Xiaomi 18 सीरीज को पहले चीन में लॉन्च किया जा सकता है, जिसके बाद ग्लोबल बाजारों में इसकी एंट्री होगी। भारत लॉन्च को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं और कुछ रिपोर्ट्स में दिसंबर 2026 के आसपास भारत में लॉन्च की संभावना जताई गई है। फ्लैगशिप स्मार्टफोन बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा Xiaomi 18 सीरीज के आने के बाद प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में मुकाबला और तेज होने की उम्मीद है। कंपनी इस सीरीज के जरिए Samsung और Apple जैसे ब्रांड्स को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। हालांकि कीमत और लॉन्च डेट की आधिकारिक घोषणा Xiaomi की ओर से अभी बाकी है।