यह सुविधा 1 अगस्त 2026 से शुरू होने की बात कही गई है। खास बात यह है कि इसके लिए ग्राहकों को अलग से Netflix का सब्सक्रिप्शन खरीदने या किसी मोबाइल रिचार्ज के साथ बंडल प्लान लेने की जरूरत नहीं होगी।
इस ऑफर का फायदा उठाने के लिए Flipkart Plus मेंबर्स को एक कैलेंडर महीने में कुछ खास शॉपिंग शर्तें पूरी करनी होंगी।
यानी आसान भाषा में समझें तो अगर आप एक कैलेंडर महीने में 299 रुपये या उससे अधिक के चार योग्य ऑर्डर करते हैं, तो आपको अगले 30 दिनों के लिए Netflix Mobile Plan का लाभ मिल सकता है।
इस ऑफर की खास बात यह है कि ग्राहकों को सिर्फ सामान्य Flipkart शॉपिंग तक सीमित नहीं रखा गया है। खबर के मुताबिक, Flipkart Minutes और Flipkart Grocery पर किए गए योग्य ऑर्डर भी इस ऑफर के लिए गिने जा सकते हैं।
इससे उन ग्राहकों के लिए भी ऑफर हासिल करना आसान हो सकता है, जो रोजमर्रा की जरूरतों का सामान क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए खरीदते हैं।
यह कोई ऐसा Netflix सब्सक्रिप्शन नहीं है जो एक बार मिलने के बाद लंबे समय तक चलता रहे। इसका लाभ 30 दिनों के लिए मिलेगा।
अगर ग्राहक अगले महीने भी Netflix का यह फायदा लेना चाहता है, तो उसे फिर से उसी खरीदारी पैटर्न को पूरा करना होगा। यानी एक नए कैलेंडर महीने में फिर से 299 रुपये या उससे अधिक के चार क्वालिफाइंग ऑर्डर पूरे करने होंगे।
ध्यान रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ऑफर Flipkart Plus Members के लिए है। अगर आप Flipkart Plus के सदस्य नहीं हैं, तो खबर में दी गई जानकारी के मुताबिक इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा।
इसलिए सिर्फ Flipkart से चार बार खरीदारी कर लेने से हर ग्राहक को मुफ्त Netflix सब्सक्रिप्शन मिल जाएगा, ऐसा मानना सही नहीं होगा। ऑफर की पात्रता और क्वालिफाइंग ऑर्डर की शर्तें पूरी करना जरूरी है।
अब तक Netflix का मुफ्त सब्सक्रिप्शन आमतौर पर मोबाइल या टेलीकॉम प्लान के साथ मिलने वाले ऑफर्स में देखा जाता रहा है। इस साझेदारी को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यहां Netflix का लाभ मोबाइल रिचार्ज के बजाय ई-कॉमर्स शॉपिंग के आधार पर दिया जा रहा है।
Flipkart Plus ग्राहकों के लिए यह ऑफर खास तौर पर दिलचस्प हो सकता है, क्योंकि नियमित खरीदारी करने वाले ग्राहक अपनी सामान्य शॉपिंग के साथ OTT बेनिफिट भी हासिल कर सकेंगे।
अगर आपके पास Flipkart Plus Membership नहीं है, तो इस ऑफर का फायदा नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति में Netflix का सब्सक्रिप्शन लेने के लिए मोबाइल नेटवर्क कंपनियों के उन रिचार्ज प्लान को देखा जा सकता है, जिनमें Netflix का लाभ शामिल होता है।
खबर में Netflix Mobile Plan की कीमत 199 रुपये प्रति माह बताई गई है।
यह ऑफर उन ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो वैसे भी हर महीने Flipkart से खरीदारी करते हैं। लेकिन केवल Netflix पाने के लिए गैर-जरूरी सामान खरीदना आर्थिक रूप से समझदारी नहीं होगी।
अगर आपकी नियमित खरीदारी पहले से ही इस सीमा और ऑर्डर पैटर्न को पूरा करती है, तभी यह ऑफर आपके लिए ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है। खरीदारी करने से पहले Flipkart ऐप में अपने अकाउंट पर ऑफर की पात्रता, क्वालिफाइंग ऑर्डर और लागू नियम जरूर जांच लें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन निर्माता OnePlus ने भारतीय बाजार में अपना नया बजट 5G स्मार्टफोन OnePlus N6x 5G लॉन्च कर दिया है। लॉन्च ऑफर के साथ इसकी शुरुआती प्रभावी कीमत ₹17,499 रखी गई है। फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 7,000mAh की बड़ी बैटरी, 120Hz डिस्प्ले और AI आधारित फीचर्स हैं। कंपनी का कहना है कि यह स्मार्टफोन लंबी बैटरी लाइफ और रोजमर्रा के बेहतर प्रदर्शन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। 7,000mAh बैटरी और 45W फास्ट चार्जिंग OnePlus N6x 5G में 7,000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो 45W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। कंपनी के अनुसार, एक बार चार्ज करने पर फोन लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें 6.8 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है। MediaTek चिपसेट और AI फीचर्स फोन में MediaTek Dimensity 6300/6360 Apex चिपसेट (बाजार के अनुसार अलग कॉन्फ़िगरेशन की रिपोर्ट) दिया गया है, जो 5G कनेक्टिविटी और बेहतर मल्टीटास्किंग का समर्थन करता है। इसके साथ AI आधारित कई स्मार्ट फीचर्स और Android 16 पर आधारित OxygenOS उपलब्ध कराया गया है। डिवाइस में 50MP रियर कैमरा सेटअप और फ्रंट कैमरा भी दिया गया है। मजबूत डिजाइन और बिक्री की तारीख OnePlus N6x 5G को मजबूत बिल्ड क्वालिटी और IP64 रेटिंग के साथ पेश किया गया है। कंपनी के अनुसार, इसकी बिक्री 4 अगस्त से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और आधिकारिक स्टोर पर शुरू होगी। फोन दो रंगों—Burgundy Red और Ice Blue—में उपलब्ध होगा। बजट 5G सेगमेंट में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा OnePlus N6x 5G की एंट्री के साथ ₹20,000 से कम कीमत वाले 5G स्मार्टफोन सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है। बड़ी बैटरी, हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और आकर्षक लॉन्च ऑफर के कारण यह फोन बजट श्रेणी में ग्राहकों के लिए एक मजबूत विकल्प माना जा रहा है।
छत पर सोलर पैनल लगाकर अगर आप यह मान रहे हैं कि अब सिर्फ धूप से बिजली बनती रहेगी और किसी रखरखाव की जरूरत नहीं पड़ेगी, तो यह सोच महंगी साबित हो सकती है। सोलर पैनल की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए समय-समय पर उनकी सफाई और देखभाल बेहद जरूरी है। लंबे समय तक पैनलों पर धूल, मिट्टी और अन्य गंदगी जमा रहने से सूर्य की रोशनी का पैनल तक पहुंचना प्रभावित होता है और बिजली उत्पादन में बड़ी गिरावट आ सकती है। घरों और व्यावसायिक इमारतों की छतों पर सोलर सिस्टम तेजी से लगाए जा रहे हैं। बिजली बिल में बचत और सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के फायदे इसे आकर्षक विकल्प बनाते हैं। लेकिन सोलर पैनल लगवाने के बाद उसकी नियमित देखभाल को नजरअंदाज करना पूरे सिस्टम की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। धूल और गंदगी से क्यों घटता है बिजली उत्पादन? सोलर पैनल आमतौर पर खुले स्थानों में लगाए जाते हैं। ऐसे में वे लगातार धूल, मिट्टी, पक्षियों की बीट और मौसम से जुड़ी दूसरी गंदगी के संपर्क में रहते हैं। धीरे-धीरे इनकी सतह पर गंदगी की परत जमने लगती है। जब पैनल की सतह साफ नहीं रहती, तो सूर्य की रोशनी का एक हिस्सा पैनल की सतह तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता। इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है। यानी सिस्टम चालू होने के बावजूद वह अपनी संभावित क्षमता के मुताबिक बिजली नहीं बना पाता। स्टडीज में 10 से 40% तक गिरावट का दावा खबर में उद्धृत रिसर्च और स्टडीज के अनुसार, सोलर पैनलों पर धूल जमने से उनकी कार्यक्षमता में 10% से 40% तक की कमी देखी गई है। हालांकि, वास्तविक असर मौसम, स्थानीय वातावरण, धूल की मात्रा, पैनल के प्रकार और अन्य परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। 2025 में International Conference on Advanced Technologies for Humanity में प्रस्तुत एक पेपर में 30 स्टडीज के आधार पर सोलर पैनलों पर धूल जमने के प्रभाव का उल्लेख किया गया। इसमें धूल के कारण बिजली उत्पादन और कार्यक्षमता में उल्लेखनीय गिरावट की बात सामने आई। सिर्फ एक महीने की सफाई न करने पर 30% तक नुकसान खबर में MIT की रिसर्च का हवाला देते हुए बताया गया है कि बिना सफाई के केवल एक महीने में ऊर्जा उत्पादन में करीब 30% तक की कमी देखी गई। इसका मतलब है कि पैनल बाहर से सामान्य नजर आने के बावजूद उसकी सतह पर जमा धूल बिजली बनाने की क्षमता को काफी प्रभावित कर सकती है। भारतीय शोधकर्ताओं के एक अन्य अध्ययन में भी पैनल के प्रकार के आधार पर अलग-अलग असर सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पॉलीक्रिस्टलाइन सोलर पैनल में बिजली उत्पादन में करीब 30.48% की गिरावट देखी गई, जबकि मोनोक्रिस्टलाइन पैनल में यह कमी लगभग 14% रही। 6 महीने तक सफाई नहीं की तो 65% तक गिरावट लंबे समय तक सोलर पैनलों की सफाई न करने पर समस्या और गंभीर हो सकती है। खबर में विभिन्न स्टडीज का हवाला देते हुए कहा गया है कि छह महीने तक सफाई नहीं करने की स्थिति में बिजली उत्पादन में गिरावट 65% तक देखी गई है। अगर किसी सिस्टम की उत्पादन क्षमता इतनी कम हो जाए, तो सोलर पैनल लगवाने से मिलने वाली बिजली बचत का उद्देश्य भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए पैनल लगवाने के साथ-साथ उसके नियमित रखरखाव को भी प्राथमिकता देना जरूरी है। सोलर पैनल लगाने के बाद इन बातों को न करें नजरअंदाज सोलर सिस्टम की क्षमता बनाए रखने के लिए सिर्फ पैनल लगवाना पर्याप्त नहीं है। उसकी स्थिति और सतह पर जमा गंदगी पर भी नजर रखनी चाहिए। खासतौर पर धूल वाले इलाकों, निर्माण गतिविधियों वाले क्षेत्रों या ऐसे स्थानों पर जहां पक्षियों की आवाजाही अधिक हो, वहां पैनलों पर गंदगी तेजी से जमा हो सकती है। सोलर पैनल की सफाई और रखरखाव का तरीका सिस्टम की निर्माता कंपनी की गाइडलाइन के अनुसार होना चाहिए। सफाई के दौरान पैनल को नुकसान न पहुंचे, इसका भी ध्यान रखना जरूरी है। क्यों जरूरी है नियमित मेंटेनेंस? सोलर पैनल पर किया गया निवेश लंबे समय तक लाभ देने के उद्देश्य से किया जाता है। अगर धूल और गंदगी के कारण उत्पादन लगातार कम होता रहे, तो बिजली बिल में अपेक्षित बचत नहीं हो पाएगी। इसलिए सोलर सिस्टम को केवल एक बार का निवेश मानने के बजाय उसके नियमित रखरखाव को भी जरूरी प्रक्रिया समझना चाहिए। समय पर सफाई, सिस्टम की निगरानी और जरूरत पड़ने पर तकनीकी जांच से इसकी कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
AI से काम कराने के लिए अब हर बार लंबा Prompt लिखकर निर्देश देने की जरूरत कम हो सकती है। AI कंपनी Anthropic ने Claude के लिए ‘Record a Skill’ नाम का नया फीचर पेश किया है। इसकी मदद से यूजर Claude को किसी काम की प्रक्रिया सिर्फ करके दिखा सकता है। AI स्क्रीन पर होने वाली गतिविधियों और यूजर के बोलकर दिए गए निर्देशों को समझकर उस पूरी प्रक्रिया को एक ‘Skill’ में बदल देगा। एक बार किसी काम को समझने के बाद Claude भविष्य में उसी तरह के काम को दोहराने में मदद कर सकेगा। यह फीचर खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, जो कंप्यूटर पर रोजाना या हर सप्ताह एक जैसी प्रक्रिया बार-बार करते हैं। कैसे काम करता है ‘Record a Skill’? आमतौर पर AI को किसी काम के लिए पहले उसके हर स्टेप के बारे में बताना पड़ता है। उदाहरण के लिए, किसी वेबसाइट से डेटा निकालना, उसे स्प्रेडशीट में डालना, कॉलम व्यवस्थित करना और फिर तय फॉर्मेट में रिपोर्ट तैयार करना हो तो यूजर को पूरी प्रक्रिया Prompt के जरिए समझानी पड़ सकती है। ‘Record a Skill’ इस तरीके को बदलने की कोशिश करता है। यूजर अपने कंप्यूटर पर काम करते हुए स्क्रीन रिकॉर्ड कर सकता है। काम करते समय वह अपनी आवाज में यह भी बता सकता है कि वह कौन-सा कदम क्यों उठा रहा है। Claude स्क्रीन पर दिखाई देने वाली गतिविधियों और वॉयस इंस्ट्रक्शन को मिलाकर उस प्रक्रिया को समझता है और उसे एक Skill के रूप में तैयार करता है। यानी AI को केवल यह बताने के बजाय कि काम कैसे करना है, यूजर उसे काम करके दिखा सकता है। वेबसाइट से स्प्रेडशीट तक, कई कामों में मदद इस फीचर की उपयोगिता को एक उदाहरण से समझें। मान लीजिए किसी व्यक्ति को हर सप्ताह एक वेबसाइट से आंकड़े लेने होते हैं। इसके बाद उन आंकड़ों को स्प्रेडशीट में डालना, जरूरी कॉलम व्यवस्थित करना और एक निश्चित फॉर्मेट में रिपोर्ट तैयार करनी होती है। यूजर एक बार पूरी प्रक्रिया स्क्रीन रिकॉर्ड करके Claude को सिखा सकता है। इसके बाद उसी तरह की प्रक्रिया दोहराने में Claude उस Skill का इस्तेमाल कर सकता है। इससे नियमित और दोहराए जाने वाले डिजिटल कामों को व्यवस्थित करने में समय बच सकता है। प्रोजेक्ट ट्रैकिंग से लेकर फाइल मैनेजमेंट तक ‘Record a Skill’ का इस्तेमाल केवल रिपोर्ट बनाने तक सीमित नहीं है। यह फीचर ऐसे कई दोहराए जाने वाले कंप्यूटर कार्यों में उपयोगी हो सकता है, जिनमें एक तय प्रक्रिया बार-बार फॉलो करनी पड़ती है। उदाहरण के तौर पर: फाइलों के नाम बदलना दस्तावेजों को तय फोल्डर में रखना नियमित रिपोर्ट तैयार करना प्रोजेक्ट ट्रैकर अपडेट करना डेटा को व्यवस्थित करना वेबसाइट से जानकारी लेकर उसे दूसरे टूल में दर्ज करना बार-बार होने वाले ऑफिस वर्कफ्लो को दोहराना ऐसे कामों में सबसे बड़ा फायदा उन यूजर्स को मिल सकता है, जिनका काम एक तय डिजिटल प्रक्रिया पर निर्भर करता है। Claude को इस्तेमाल करने का तरीका Anthropic के अनुसार, ‘Record a Skill’ को Claude के Cowork मोड में इस्तेमाल किया जा सकता है। यूजर्स को इसके लिए: Claude का डेस्कटॉप ऐप खोलना होगा। Cowork मोड में जाना होगा। ‘Plus’ मेन्यू पर क्लिक करना होगा। वहां ‘Record a Skill’ विकल्प चुनना होगा। इसके बाद स्क्रीन रिकॉर्डिंग शुरू करके अपनी प्रक्रिया को करके दिखाना होगा। जरूरत के अनुसार काम करते समय बोलकर अतिरिक्त निर्देश भी दिए जा सकते हैं। फिलहाल यह सुविधा Claude के Pro, Max और Team प्लान वाले यूजर्स के लिए उपलब्ध कराई गई है। AI को सिखाते समय सबसे जरूरी है डेटा की सुरक्षा यह फीचर जितना सुविधाजनक है, उतनी ही सावधानी भी मांगता है। स्क्रीन रिकॉर्डिंग के दौरान यूजर के कंप्यूटर पर मौजूद संवेदनशील जानकारी भी रिकॉर्ड हो सकती है। इसमें बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड, निजी बातचीत, व्यक्तिगत दस्तावेज या कंपनी से जुड़ी गोपनीय जानकारी शामिल हो सकती है। इसलिए कोई Skill रिकॉर्ड करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि स्क्रीन पर संवेदनशील डेटा दिखाई न दे। जरूरत हो तो ऐसे टैब, विंडो या जानकारी को पहले बंद या छिपा देना चाहिए। AI के साथ काम करने का तरीका बदल सकता है नया फीचर ‘Record a Skill’ की खासियत यह है कि यह AI को निर्देश देने के पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर “करके सिखाने” की अवधारणा पेश करता है। अगर यह फीचर व्यवहार में उम्मीद के मुताबिक काम करता है, तो बार-बार होने वाले डिजिटल कार्यों को ऑटोमेट करने की प्रक्रिया आम यूजर्स के लिए भी आसान हो सकती है। हालांकि, किसी भी AI ऑटोमेशन की तरह यहां भी अंतिम परिणाम की निगरानी जरूरी होगी। खासकर डेटा, फाइलों और महत्वपूर्ण बिजनेस प्रक्रियाओं से जुड़े कामों में AI की ओर से किए गए बदलावों को जांचना महत्वपूर्ण रहेगा। कुल मिलाकर, Anthropic का यह फीचर AI को केवल सवालों का जवाब देने वाले चैटबॉट से आगे ले जाकर ऐसे डिजिटल असिस्टेंट की दिशा में बढ़ाता है, जिसे यूजर अपनी जरूरत के हिसाब से काम करने का तरीका सिखा सकता है।