टेक्नोलॉजी

IIT Delhi Startup Unveils 50°C Cooling AC

IIT Delhi और भारतीय स्टार्टअप का इनोवेशन: 50°C में भी कूलिंग देगा नया Split AC, जानें पूरी डिटेल

surbhi मई 2, 2026 0
IIT Delhi and Optimist launch a high-performance split AC designed to cool efficiently even at 50 degrees Celsius
IIT Delhi Optimist 50 Degree Split AC Launch

देश में हर साल बढ़ती गर्मी और हीटवेव के बीच एयर कंडीशनर अब सिर्फ लग्ज़री नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है। ऐसे में IIT Delhi और भारतीय स्टार्टअप Optimist ने मिलकर एक ऐसा 1.5 Ton 5 Star Split AC तैयार किया है, जो 50 डिग्री सेल्सियस तक की भीषण गर्मी में भी कूलिंग देने का दावा करता है। यह इनोवेशन खासतौर पर भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

एक्सट्रीम हीट के लिए बना खास AC

भारत के कई हिस्सों में गर्मियों में तापमान 45°C से ऊपर पहुंच जाता है, जहां पारंपरिक AC की क्षमता कम होने लगती है।
इस नए AC की खासियतें:

  • 50°C तक भी स्थिर और प्रभावी कूलिंग
  • हाई-एंबिएंट कूलिंग टेक्नोलॉजी
  • लंबे समय तक लगातार चलने की क्षमता
  • गर्म हवा में भी कंप्रेसर की बेहतर परफॉर्मेंस

कंपनी का दावा है कि यह AC सिर्फ ठंडी हवा नहीं देता, बल्कि कठिन मौसम में भी लगातार परफॉर्म करता है, जो इसे बाकी मॉडलों से अलग बनाता है।

रिसर्च-बेस्ड टेक्नोलॉजी, IIT का साथ

इस प्रोजेक्ट को मजबूत बनाने में IIT Delhi की अहम भूमिका रही है।

  • लंबे समय तक रिसर्च और डेवलपमेंट
  • एडवांस लैब टेस्टिंग
  • रियल वर्ल्ड कंडीशन्स में ट्रायल

स्टार्टअप Optimist का कहना है कि इस AC को सिर्फ सैद्धांतिक नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है।

संभावित एडवांस फीचर्स (रिपोर्ट्स के आधार पर)

हालांकि कंपनी ने सभी टेक्निकल डिटेल्स सार्वजनिक नहीं की हैं, लेकिन इसमें कुछ आधुनिक फीचर्स होने की उम्मीद है:

  • इन्वर्टर टेक्नोलॉजी (कम बिजली खपत)
  • बेहतर हीट एक्सचेंज सिस्टम
  • मजबूत कंप्रेसर, जो हाई टेम्परेचर में भी काम करे
  • एनर्जी एफिशिएंसी के लिए 5-स्टार रेटिंग

कीमत और वैल्यू फॉर मनी

  • कीमत: लगभग ₹44,490
  • कैटेगरी: प्रीमियम सेगमेंट

इस कीमत में 50°C तक कूलिंग देने का दावा इसे खास बनाता है। आम तौर पर इस रेंज में मिलने वाले AC इतने एक्सट्रीम तापमान के लिए डिजाइन नहीं होते।

किन इलाकों के लिए बेस्ट?

यह AC खासतौर पर उन जगहों के लिए उपयोगी है जहां गर्मी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचती है:

  • दिल्ली-एनसीआर
  • राजस्थान
  • उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई हिस्से
  • औद्योगिक या गर्म वातावरण वाले इलाके

इसके अलावा, जिन लोगों को 24x7 कूलिंग चाहिए, उनके लिए भी यह एक भरोसेमंद विकल्प हो सकता है।

भारतीय AC मार्केट पर असर

अगर यह टेक्नोलॉजी बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो इसके कई बड़े प्रभाव हो सकते हैं:

  • भारतीय कंपनियों की टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी
  • विदेशी ब्रांड्स को कड़ी टक्कर मिलेगी
  • एक्सट्रीम वेदर के लिए नए स्टैंडर्ड सेट होंगे
  • रिसर्च-बेस्ड प्रोडक्ट्स का ट्रेंड बढ़ेगा

यह इनोवेशन “मेक इन इंडिया” और “डिजाइन इन इंडिया” की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा सकता है।

ध्यान रखने वाली बातें

हालांकि यह AC काफी एडवांस बताया जा रहा है, लेकिन खरीदने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है:

  • आपके कमरे का साइज (1.5 टन उपयुक्त है या नहीं)
  • बिजली की खपत और बिल
  • सर्विस नेटवर्क और वारंटी
  • आपके इलाके का वास्तविक तापमान
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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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नई दिल्ली, एजेंसियां। बच्चों की देखभाल में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। स्मार्ट बेबी मॉनिटर बनाने वाली कई स्टार्टअप कंपनियां ऐसे एआई-आधारित सिस्टम विकसित कर रही हैं, जो बच्चे की नींद, सांस लेने की गति, करवट बदलने और अन्य गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं। विशेषज्ञ इसे 'बेबी सर्विलांस' के नए दौर के रूप में देख रहे हैं।   हर गतिविधि का तैयार होता है डिजिटल रिकॉर्ड     रिपोर्ट के अनुसार, एआई से लैस स्मार्ट कैमरे बच्चों की एचडी वीडियो रिकॉर्डिंग का विश्लेषण कर उनके सोने-जागने का समय, सांस लेने का पैटर्न, रात में जागने की संख्या और माता-पिता की जरूरत पड़ने जैसी गतिविधियों का विस्तृत डेटा तैयार करते हैं। यह जानकारी चार्ट और विश्लेषण के रूप में अभिभावकों को उपलब्ध कराई जाती है।     भविष्य में व्यवहार और विकास पर भी नजर     स्टार्टअप कंपनियां ऐसे सिस्टम विकसित करने पर काम कर रही हैं, जो भविष्य में बच्चों की दिनभर की गतिविधियों, विकास और व्यवहार का भी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर सकें। इससे माता-पिता को बच्चों की दिनचर्या और स्वास्थ्य पर अधिक विस्तृत जानकारी मिल सकेगी।     प्राइवेसी को लेकर बढ़ी चिंता     हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की तकनीक जहां बच्चों की निगरानी और देखभाल में मददगार हो सकती है, वहीं इससे निजता (Privacy) और डेटा सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बच्चों के संवेदनशील डेटा के संग्रह और उपयोग को लेकर स्पष्ट सुरक्षा मानकों की आवश्यकता बताई जा रही है।     स्टार्टअप्स का तेजी से बढ़ता कारोबार     स्मार्ट बेबी मॉनिटरिंग क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां तेजी से विस्तार कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में से एक के लाखों सक्रिय उपयोगकर्ता हैं और उसका कारोबार करोड़ों डॉलर तक पहुंच चुका है, जिससे एआई आधारित पेरेंटिंग तकनीकों की बढ़ती लोकप्रियता का संकेत मिलता है।  

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साइबर सुरक्षा सरकारी डेटा सेंटर
सरकारी डेटा सेंटर पर साइबर खतरा, 'शेप-शिफ्टिंग' वायरस की एंट्री से बढ़ी चिंता

देहरादून, एजेंसियां। उत्तराखंड के सरकारी डेटा सेंटर पर एक बार फिर साइबर हमले का खतरा मंडरा रहा है। इस बार अधिकारियों को एक कथित 'बहरूपिया वायरस' (Shape-Shifting Malware) के जरिए सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने की आशंका है। प्रारंभिक जांच में एक बड़े चीनी हैकर समूह की संभावित संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और जांच जारी है।   कई विभागों के डेटा पर खतरे की आशंका   प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह मैलवेयर सिस्टम में प्रवेश करने के बाद अपना स्वरूप बदल लेता है, जिससे उसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। आशंका है कि खाद्य आपूर्ति, जीएसटी, पर्यटन और आम नागरिकों से जुड़े अन्य विभागों के डेटा को निशाना बनाया गया हो। फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि कोई संवेदनशील डेटा चोरी हुआ है या नहीं।   2024 के रैनसमवेयर हमले के बाद फिर चुनौती   बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में सरकारी डेटा सेंटर पर हुए Makop Ransomware हमले से उबरने के बाद अब यह नया साइबर खतरा सामने आया है। इस बार अब तक किसी तरह की फिरौती या अन्य मांग सामने नहीं आई है, लेकिन साइबर सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।   सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल   मामले के सामने आने के बाद डेटा सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले के समय फायरवॉल सक्रिय नहीं थी और कुछ खरीदे गए साइबर सुरक्षा उपकरणों के उपयोग को लेकर भी जांच की जा रही है।   जांच जारी, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार   आईटीडीए (ITDA) और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की तकनीकी जांच में जुटी हैं। फिलहाल किसी भी डेटा चोरी या विदेशी हैकर समूह की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।   सरकारी डेटा सेंटर पर साइबर खतरा, 'शेप-शिफ्टिंग' वायरस की एंट्री से बढ़ी चिंता   देहरादून, एजेंसियां। उत्तराखंड के सरकारी डेटा सेंटर पर एक बार फिर साइबर हमले का खतरा मंडरा रहा है। इस बार अधिकारियों को एक कथित 'बहरूपिया वायरस' (Shape-Shifting Malware) के जरिए सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने की आशंका है। प्रारंभिक जांच में एक बड़े चीनी हैकर समूह की संभावित संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और जांच जारी है।   कई विभागों के डेटा पर खतरे की आशंका   प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह मैलवेयर सिस्टम में प्रवेश करने के बाद अपना स्वरूप बदल लेता है, जिससे उसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। आशंका है कि खाद्य आपूर्ति, जीएसटी, पर्यटन और आम नागरिकों से जुड़े अन्य विभागों के डेटा को निशाना बनाया गया हो। फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि कोई संवेदनशील डेटा चोरी हुआ है या नहीं।   2024 के रैनसमवेयर हमले के बाद फिर चुनौती   बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में सरकारी डेटा सेंटर पर हुए Makop Ransomware हमले से उबरने के बाद अब यह नया साइबर खतरा सामने आया है। इस बार अब तक किसी तरह की फिरौती या अन्य मांग सामने नहीं आई है, लेकिन साइबर सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।   सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल   मामले के सामने आने के बाद डेटा सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले के समय फायरवॉल सक्रिय नहीं थी और कुछ खरीदे गए साइबर सुरक्षा उपकरणों के उपयोग को लेकर भी जांच की जा रही है।   जांच जारी, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार   आईटीडीए (ITDA) और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की तकनीकी जांच में जुटी हैं। फिलहाल किसी भी डेटा चोरी या विदेशी हैकर समूह की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

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Xiaomi 18 Series
Xiaomi 18 सीरीज का ग्लोबल लॉन्च करीब, EEC सर्टिफिकेशन में दिखे दो मॉडल

बीजिंग, एजेंसियां। स्मार्टफोन निर्माता Xiaomi की अगली फ्लैगशिप सीरीज Xiaomi 18 को लेकर नई जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी की नई सीरीज के दो मॉडल EEC (यूरेशियन इकोनॉमिक कमीशन) सर्टिफिकेशन में दिखाई दिए हैं। इस सर्टिफिकेशन के बाद माना जा रहा है कि Xiaomi 18 सीरीज का ग्लोबल लॉन्च जल्द हो सकता है।   Xiaomi 18 और Xiaomi 18 Pro को मिला सर्टिफिकेशन   रिपोर्ट के अनुसार, Xiaomi 18 और Xiaomi 18 Pro मॉडल EEC डेटाबेस में दिखाई दिए हैं। सर्टिफिकेशन में सामने आए मॉडल नंबर ग्लोबल मार्केट में लॉन्च की ओर इशारा कर रहे हैं। इससे संकेत मिलते हैं कि कंपनी इस बार चीन के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी फ्लैगशिप सीरीज को तेजी से पेश कर सकती है।   Snapdragon चिप और 200MP कैमरा की चर्चा   लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक, Xiaomi 18 सीरीज में Qualcomm का नया फ्लैगशिप प्रोसेसर Snapdragon 8 Elite Gen 6 मिलने की उम्मीद है। वहीं कैमरा सेक्शन में बड़े अपग्रेड की चर्चा है, जिसमें 200MP सेंसर और बेहतर टेलीफोटो कैमरा शामिल हो सकते हैं। Xiaomi इस सीरीज को प्रीमियम फोटोग्राफी और परफॉर्मेंस के लिए तैयार कर रही है।   बड़ी बैटरी और नए डिजाइन के साथ आ सकती है सीरीज   रिपोर्ट्स के अनुसार, Xiaomi 18 Pro में बड़ी बैटरी, हाई-रेजोल्यूशन डिस्प्ले और बेहतर चार्जिंग सपोर्ट मिलने की संभावना है। कुछ लीक में 7,000mAh तक की बैटरी और नए डिजाइन एलिमेंट्स का दावा किया गया है। हालांकि कंपनी ने अभी तक इन फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।   सितंबर में चीन लॉन्च, ग्लोबल मार्केट में जल्द एंट्री की उम्मीद   मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Xiaomi 18 सीरीज को पहले चीन में लॉन्च किया जा सकता है, जिसके बाद ग्लोबल बाजारों में इसकी एंट्री होगी। भारत लॉन्च को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं और कुछ रिपोर्ट्स में दिसंबर 2026 के आसपास भारत में लॉन्च की संभावना जताई गई है।   फ्लैगशिप स्मार्टफोन बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा   Xiaomi 18 सीरीज के आने के बाद प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में मुकाबला और तेज होने की उम्मीद है। कंपनी इस सीरीज के जरिए Samsung और Apple जैसे ब्रांड्स को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। हालांकि कीमत और लॉन्च डेट की आधिकारिक घोषणा Xiaomi की ओर से अभी बाकी है।

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