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Josh Inglis Joins LSG for IPL 2026

IPL 2026: लखनऊ सुपर जायंट्स को बड़ी राहत, 8.60 करोड़ के जोश इंग्लिस टीम से जुड़े

surbhi मई 2, 2026 0
Josh Inglis joins Lucknow Super Giants squad for IPL 2026 after returning from his wedding
Josh Inglis Joins LSG IPL 2026

आईपीएल 2026 में खराब फॉर्म से जूझ रही Lucknow Super Giants के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। टीम के महंगे खिलाड़ी Josh Inglis अब स्क्वाड से जुड़ गए हैं और 4 मई को होने वाले अगले मुकाबले के लिए चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे।

शादी के कारण देर से जुड़े इंग्लिस

जोश इंग्लिस ने पहले ही फ्रेंचाइज़ियों को सूचित कर दिया था कि अपनी शादी के कारण वह टूर्नामेंट के शुरुआती मैचों में उपलब्ध नहीं रहेंगे। 18 अप्रैल को पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के मार्गरेट रिवर में उनकी शादी हुई थी, जिसके चलते वह देर से टीम से जुड़े।

8.60 करोड़ में खरीदा, अब टीम को उम्मीद

लखनऊ सुपर जायंट्स ने उन्हें आईपीएल ऑक्शन में 8.60 करोड़ रुपये में खरीदा था। इससे पहले वह Punjab Kings का हिस्सा थे, लेकिन सीमित उपलब्धता के कारण टीम ने उन्हें रिलीज कर दिया था।

टीम के लिए क्यों अहम हैं इंग्लिस?

31 वर्षीय विकेटकीपर-बल्लेबाज का टी20 फॉर्म शानदार रहा है। आईपीएल 2025 में उन्होंने 11 मैचों में 278 रन बनाए थे, जिसमें उनका स्ट्राइक रेट 162 रहा।
टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में उनके नाम दो शतक भी दर्ज हैं, जिससे उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

लगातार हार से जूझ रही LSG

इस सीजन में लखनऊ का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। 8 मैचों में टीम के पास सिर्फ 4 अंक हैं और वह पॉइंट्स टेबल में सबसे नीचे है। शुरुआती 3 मैचों में 2 जीत के बाद टीम लगातार 5 मुकाबले हार चुकी है। बल्लेबाजी की कमजोरी टीम की सबसे बड़ी समस्या रही है, ऐसे में इंग्लिस की एंट्री से मध्यक्रम को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

ब्रीट्जके टीम से बाहर

इस बीच टीम के साउथ अफ्रीकी खिलाड़ी Matthew Breetzke निजी कारणों से अपने देश लौट गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके परिवार में एक करीबी के निधन के कारण उन्होंने यह फैसला लिया है। उनकी वापसी को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Jasprit Bumrah ruled out
श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर हुए जसप्रीत बुमराह

मुंबई, एजेंसियां। भारत को श्रीलंका के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह घुटने की चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं, जिसके चलते उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया है। उनकी जगह जम्मू-कश्मीर के युवा तेज गेंदबाज आकिब नबी को पहली बार भारतीय सीनियर टेस्ट टीम में शामिल किया गया है।   रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन का मिला इनाम   आकिब नबी ने पिछले दो रणजी ट्रॉफी सीजन में शानदार गेंदबाजी करते हुए 104 विकेट लिए हैं। 2025-26 रणजी सीजन में उन्होंने 60 विकेट झटककर जम्मू-कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। हाल ही में इंडिया-ए टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर भी उन्होंने दो प्रथम श्रेणी मैचों में छह विकेट लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा था।   प्रथम श्रेणी क्रिकेट में दमदार रिकॉर्ड   25 वर्षीय आकिब नबी अब तक 43 प्रथम श्रेणी मैचों में 162 विकेट ले चुके हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 24 रन देकर सात विकेट रहा है, जबकि 16 बार उन्होंने एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट हासिल किए हैं। इसके अलावा उन्होंने लिस्ट-ए और टी20 क्रिकेट में भी गेंद और बल्ले दोनों से उपयोगी प्रदर्शन किया है।   शुभमन गिल करेंगे टीम की कप्तानी   श्रीलंका दौरे पर भारतीय टेस्ट टीम की कमान शुभमन गिल संभालेंगे, जबकि केएल राहुल उपकप्तान होंगे। टीम में ऋषभ पंत, रवींद्र जडेजा, मोहम्मद सिराज और कुलदीप यादव जैसे अनुभवी खिलाड़ी शामिल हैं। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए भारत के लिए यह टेस्ट सीरीज बेहद अहम मानी जा रही है।

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कॉमनवेल्थ गेम्स समापन समारोह ग्लास्गो
CWG 2026 खत्म: भारत ने जीते 39 पदक, 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी मिली अहमदाबाद को

ग्लास्गो। 11 दिनों तक चले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का रविवार को रंगारंग समापन हो गया। भारत ने प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 39 पदक (13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य) जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। समापन समारोह में नई बॉक्सिंग चैंपियन जैस्मिन लैम्बोरिया भारतीय दल की ध्वजवाहक रहीं।   2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत को   समापन समारोह के दौरान आधिकारिक तौर पर कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी भारत को सौंपी गई। खेलों का शताब्दी संस्करण गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित होगा। इस मौके पर कॉमनवेल्थ गेम्स का आधिकारिक ध्वज और बैटन भारत को सौंपे गए। समारोह में ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सिंघवी मौजूद रहे।   कम खिलाड़ियों के बावजूद दमदार प्रदर्शन   भारत ने इस बार 122 खिलाड़ियों का दल उतारा था, जिसने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीते। यह उपलब्धि खास इसलिए मानी जा रही है क्योंकि इस बार कई ऐसे खेल प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं थे, जिनमें भारत पारंपरिक रूप से अधिक पदक जीतता रहा है। इसके बावजूद भारत ने 2022 के बर्मिंघम खेलों की तरह चौथा स्थान बरकरार रखा।   ऑस्ट्रेलिया रहा शीर्ष पर   पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया 171 पदकों (70 स्वर्ण) के साथ पहले स्थान पर रहा। इंग्लैंड 110 पदकों के साथ दूसरे और कनाडा 62 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भारत और मेजबान स्कॉटलैंड दोनों ने 39-39 पदक जीते, लेकिन अधिक स्वर्ण पदकों के आधार पर भारत चौथे स्थान पर रहा।   अहमदाबाद पर टिकी दुनिया की नजर   भारत इससे पहले 2010 में नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी कर चुका है। अब 2030 में अहमदाबाद इस बहु-खेल आयोजन के शताब्दी संस्करण की मेजबानी करेगा। समापन समारोह में स्कॉटलैंड और भारत की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया और ग्लास्गो से अहमदाबाद तक मेजबानी के हस्तांतरण का प्रतीकात्मक संदेश दिया।   CWG 2026 खत्म, भारत ने जीते 39 पदक   ग्लास्गो। 11 दिनों तक चले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का रविवार को रंगारंग समापन हो गया। भारत ने प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 39 पदक (13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य) जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। समापन समारोह में नई बॉक्सिंग चैंपियन जैस्मिन लैम्बोरिया भारतीय दल की ध्वजवाहक रहीं।   2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत को   समापन समारोह के दौरान आधिकारिक तौर पर कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी भारत को सौंपी गई। खेलों का शताब्दी संस्करण गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित होगा। इस मौके पर कॉमनवेल्थ गेम्स का आधिकारिक ध्वज और बैटन भारत को सौंपे गए। समारोह में ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सिंघवी मौजूद रहे।   कम खिलाड़ियों के बावजूद दमदार प्रदर्शन   भारत ने इस बार 122 खिलाड़ियों का दल उतारा था, जिसने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीते। यह उपलब्धि खास इसलिए मानी जा रही है क्योंकि इस बार कई ऐसे खेल प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं थे, जिनमें भारत पारंपरिक रूप से अधिक पदक जीतता रहा है। इसके बावजूद भारत ने 2022 के बर्मिंघम खेलों की तरह चौथा स्थान बरकरार रखा।   ऑस्ट्रेलिया रहा शीर्ष पर   पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया 171 पदकों (70 स्वर्ण) के साथ पहले स्थान पर रहा। इंग्लैंड 110 पदकों के साथ दूसरे और कनाडा 62 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भारत और मेजबान स्कॉटलैंड दोनों ने 39-39 पदक जीते, लेकिन अधिक स्वर्ण पदकों के आधार पर भारत चौथे स्थान पर रहा।   अहमदाबाद पर टिकी दुनिया की नजर   भारत इससे पहले 2010 में नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी कर चुका है। अब 2030 में अहमदाबाद इस बहु-खेल आयोजन के शताब्दी संस्करण की मेजबानी करेगा। समापन समारोह में स्कॉटलैंड और भारत की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया और ग्लास्गो से अहमदाबाद तक मेजबानी के हस्तांतरण का प्रतीकात्मक संदेश दिया।

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Duleep Trophy 2026-27 Central Zone

दलीप ट्रॉफी में सेंट्रल जोन की कप्तानी करेंगे रजत पाटीदार, रिंकू सिंह होंगे उपकप्तान

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भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले अभ्यास मैच तीन दिन का हुआ, 7 अगस्त से कोलंबो में मुकाबला

CWG 2026 Medal Tally

भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा, कुल 39 पदक हुए

Preeti Pawar Gold Medal
प्रीति पवार ने बॉक्सिंग में स्वर्ण जीतकर भारत के गोल्ड अभियान को दी शानदार शुरुआत

ग्लासगो, एजेंसियां। भारत की मुक्केबाज प्रीति पवार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया। उन्होंने फाइनल मुकाबले में कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को सर्वसम्मत निर्णय से हराया। यह प्रतियोगिता में भारत का पहला बॉक्सिंग स्वर्ण पदक रहा।   फाइनल में प्रीति का शानदार दबदबा   प्रीति ने मुकाबले की शुरुआत संयम के साथ की। शुरुआती दौर में डेलगाडो ने कुछ अच्छे पंच लगाए, लेकिन भारतीय मुक्केबाज ने जल्द ही अपनी लय हासिल कर ली। प्रीति ने सटीक पंच और प्रभावी लेफ्ट हुक के जरिए मुकाबले पर नियंत्रण बनाना शुरू किया। पहले राउंड में सभी जजों ने प्रीति के पक्ष में 5-0 का फैसला दिया।   दूसरे राउंड में और मजबूत हुई पकड़   दूसरे राउंड में प्रीति ने अपने पंचों की सटीकता और आक्रामकता बढ़ा दी। उनके लगातार कॉम्बिनेशन पंचों के बाद डेलगाडो को स्टैंडिंग काउंट भी मिला। इस राउंड में भी जजों ने प्रीति को 5-0 से बेहतर माना। तीसरे राउंड में भारतीय मुक्केबाज ने अपनी बढ़त को कायम रखा और डेलगाडो को लगातार दबाव में रखा। अंतिम घंटी बजने के बाद प्रीति को सर्वसम्मत निर्णय से विजेता घोषित किया गया।   भारत के बॉक्सिंग अभियान को मिली शानदार शुरुआत   प्रीति पवार का स्वर्ण भारत के लिए खास रहा क्योंकि वह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बॉक्सिंग का पहला भारतीय स्वर्ण था। इसके बाद भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन जारी रखा और प्रतियोगिता में भारत के बॉक्सिंग दल ने कुल 10 पदक—7 स्वर्ण और 3 रजत जीतकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया।   देश को समर्पित किया स्वर्ण पदक   स्वर्ण जीतने के बाद प्रीति पवार ने अपनी ऐतिहासिक जीत को भारत को समर्पित किया। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए देशवासियों के समर्थन और शुभकामनाओं को महत्वपूर्ण बताया। प्रीति की जीत ने ग्लासगो में भारतीय दल के लिए शानदार दिन की शुरुआत की और आगे आने वाले भारतीय मुक्केबाजों का आत्मविश्वास भी बढ़ाया।

abhishek singh अगस्त 2, 2026 0
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