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China Launches UWORLD U1 Humanoid Robot

UWORLD U1: चीन ने लॉन्च किया इंसानों जैसा ह्यूमनॉइड रोबोट, महिला-पुरुष दोनों अवतार में मिलेगा, समझेगा भावनाएं और आंखों में देखकर करेगा बात

surbhi जुलाई 2, 2026 0
UBTech UWORLD U1 humanoid robot with lifelike human appearance, emotional AI, and male and female versions unveiled in China.
UBTech UWORLD U1 Humanoid Robot

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स की दुनिया में चीन ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चीन की अग्रणी रोबोटिक्स कंपनी UBTech ने 30 जून को शेन्जेन में अपना नया ह्यूमनॉइड रोबोट UWORLD U1 लॉन्च किया। यह रोबोट पारंपरिक औद्योगिक मशीनों से बिल्कुल अलग है। इसे फैक्ट्रियों में काम कराने के बजाय इंसानों के साथ रहने, बातचीत करने और उन्हें भावनात्मक सहयोग (Emotional Support) देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

UWORLD U1 का डिजाइन और रूप-रंग काफी हद तक इंसानों जैसा है। इसमें सिलिकॉन स्किन, अत्याधुनिक इमोशनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑन-डिवाइस डेटा स्टोरेज जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह रोबोट लोगों के साथ प्राकृतिक तरीके से संवाद कर सकता है और समय के साथ उनके व्यवहार और पसंद को समझते हुए अधिक व्यक्तिगत अनुभव प्रदान करता है।

इंसानों का साथी बनने के लिए तैयार किया गया

UBTech के अनुसार, UWORLD U1 को ऐसे वातावरण के लिए डिजाइन किया गया है जहां इंसानों के साथ लगातार संवाद की आवश्यकता होती है। इसका इस्तेमाल बुजुर्गों की देखभाल, शिक्षा, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, रिसेप्शन सेवाओं, प्रीमियम होम सर्विस और अन्य ग्राहक-केंद्रित कार्यों में किया जा सकता है।

कंपनी का कहना है कि यह रोबोट सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बातचीत के दौरान सामने वाले की भावनाओं को समझने और उसके अनुसार प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी रखता है।

तीन वेरिएंट में उपलब्ध

UWORLD U1 को तीन अलग-अलग मॉडल में पेश किया गया है।

  • U1 Lite
  • U1 Pro
  • U1 Ultra

फिलहाल इसकी बिक्री केवल चीन में शुरू की गई है।

कीमत की बात करें तो इसकी शुरुआती कीमत 119,800 युआन (करीब 14 लाख रुपये) है, जबकि हाई-एंड Ultra मॉडल की कीमत 990,000 युआन (करीब 1.15 करोड़ रुपये) तक जाती है।

महिला और पुरुष दोनों अवतार में मिलेगा

UWORLD U1 की एक खास विशेषता यह है कि इसे पुरुष और महिला दोनों रूपों में तैयार किया गया है।

  • पुरुष मॉडल की लंबाई लगभग 183 सेंटीमीटर है।
  • महिला मॉडल की लंबाई लगभग 168 सेंटीमीटर रखी गई है।

रोबोट में कुल 88 सर्वो जॉइंट्स दिए गए हैं, जिनकी मदद से यह इंसानों की तरह सिर, हाथ, गर्दन और शरीर की कई स्वाभाविक गतिविधियां कर सकता है। इसके पूरे बाहरी हिस्से पर सिलिकॉन कोटिंग की गई है ताकि बातचीत के दौरान यह अधिक वास्तविक महसूस हो।

20 से ज्यादा भावनाओं को पहचान सकता है

UWORLD U1 की सबसे बड़ी ताकत इसका Emotional AI System है।

कंपनी के मुताबिक यह रोबोट 20 से अधिक प्रकार की मानवीय भावनाओं को पहचान सकता है। बातचीत के दौरान यह सामने वाले व्यक्ति से आई कॉन्टैक्ट बनाए रखता है, चेहरे के भावों को समझता है और पिछली बातचीत को याद रखते हुए भविष्य में अधिक व्यक्तिगत जवाब देता है।

यानी अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से इस रोबोट से बातचीत करता है, तो समय के साथ यह उसकी पसंद, व्यवहार और बातचीत के तरीके को समझकर उसी अनुसार प्रतिक्रिया देने लगता है।

क्लाउड पर नहीं, डिवाइस में ही सुरक्षित रहेगा डेटा

UBTech ने प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए UWORLD U1 में ऑन-डिवाइस AI प्रोसेसिंग का इस्तेमाल किया है।

इसका इमोशनल AI मॉडल Rockchip RK3588 प्रोसेसर पर चलता है, जिससे अधिकांश प्रोसेसिंग सीधे डिवाइस पर होती है और क्लाउड सर्वर पर निर्भरता काफी कम हो जाती है।

यूजर का व्यक्तिगत डेटा क्लाउड पर अपलोड होने के बजाय रोबोट में ही सुरक्षित रहता है।

कंपनी के अनुसार इसमें तीन-स्तरीय प्राइवेसी आर्किटेक्चर दिया गया है, जिसमें लोकल-फर्स्ट प्रोसेसिंग, सीमित क्लाउड उपयोग और यूजर कंट्रोल्ड हार्डवेयर सिक्योरिटी शामिल है। इसका उद्देश्य AI डिवाइसों से जुड़ी बढ़ती गोपनीयता संबंधी चिंताओं को कम करना है।

सिर्फ वयस्कों के लिए उपलब्ध

UBTech ने स्पष्ट किया है कि UWORLD U1 को किसी इंडस्ट्रियल रोबोट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसे विशेष रूप से वयस्क खरीदारों के लिए विकसित किया गया है, जहां स्वाभाविक संवाद, साथ और भावनात्मक सहयोग की जरूरत होती है।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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iPhone 15
iPhone 15 में ओवरहीटिंग और नेटवर्क की दिक्कत, Apple India को ₹45,500 देने का आदेश

नई दिल्ली, एजेंसियां। Apple के iPhone 15 को लेकर उपभोक्ता विवाद का एक मामला सामने आया है। हरियाणा के रोहतक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने iPhone 15 में ओवरहीटिंग और नेटवर्क कनेक्टिविटी जैसी समस्याओं की शिकायत पर Apple India को ग्राहक को ₹45,500 का भुगतान करने का आदेश दिया है।   जनवरी 2024 में खरीदा था iPhone 15   मामले के अनुसार, राजबिर फोगाट नाम के ग्राहक ने जनवरी 2024 में ₹64,999 में iPhone 15 खरीदा था। ग्राहक का आरोप था कि फोन इस्तेमाल करने के दौरान उसे लगातार ओवरहीटिंग, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी और नेटवर्क से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा।   समस्या दूर कराने के लिए ग्राहक कई बार Apple के अधिकृत सर्विस सेंटर पहुंचा। वहां फोन की सेटिंग्स में बदलाव और सॉफ्टवेयर अपडेट समेत कई उपाय किए गए, लेकिन शिकायत दूर नहीं हुई।   सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने के बाद भी नहीं मिली राहत   ग्राहक ने 29 अप्रैल 2024 को Apple कस्टमर केयर से भी संपर्क किया और कंपनी की ओर से बताए गए निर्देशों का पालन किया। इसके बावजूद फोन की समस्या बनी रही।   इसके बाद ग्राहक को iCloud स्टोरेज लेने और मोबाइल नेटवर्क बदलने की सलाह दी गई। उन्होंने ₹75 प्रति माह की दर से iCloud स्टोरेज लिया और अपना मोबाइल कनेक्शन Jio से Airtel में भी बदल लिया। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।   ग्राहक ने उपभोक्ता आयोग में की शिकायत   लगातार परेशानी के बाद राजबिर फोगाट ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया। उन्होंने फोन बदलने या ₹64,999 की पूरी राशि वापस करने की मांग की। ग्राहक ने अपनी शिकायत के समर्थन में टैक्स इनवॉयस, कॉल से जुड़े स्क्रीनशॉट और फोन की समस्या से संबंधित सर्विस रिकॉर्ड समेत अन्य दस्तावेज आयोग के समक्ष पेश किए।   Apple ने मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट से किया इनकार   सुनवाई के दौरान Apple India ने फोन में किसी मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट से इनकार किया। कंपनी ने दावा किया कि डिवाइस में अनधिकृत बदलाव किए गए थे। Apple के अनुसार, अधिकृत सर्विस सेंटर को फोन के निचले हिस्से में धूल के कण मिले थे। कंपनी ने फोन के रियर कैमरा, बैक ग्लास और रियर माइक्रोफोन से जुड़ी कथित समस्याओं का भी उल्लेख किया। कंपनी ने कहा कि अनधिकृत मॉडिफिकेशन उसकी एक साल की वारंटी के दायरे में नहीं आते।   आयोग ने ग्राहक के पक्ष में सुनाया फैसला   मामले की सुनवाई के बाद रोहतक उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने Apple India को प्रभावित ग्राहक को ₹45,500 का भुगतान करने का निर्देश दिया।   यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब स्मार्टफोन में खराबी और बिक्री के बाद सर्विस से जुड़ी शिकायतें उपभोक्ता आयोगों तक पहुंच रही हैं। मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि यदि किसी उत्पाद में लगातार समस्या बनी रहती है और उपभोक्ता को उचित समाधान नहीं मिलता, तो वह उपभोक्ता आयोग का रुख कर सकता है।

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OpenAI
ChatGPT में Ads की शुरुआत, यूजर्स को जवाबों के बीच दिख सकते हैं विज्ञापन

नई दिल्ली, एजेंसियां। OpenAI ने ChatGPT में विज्ञापनों को लेकर अपनी योजना को आगे बढ़ाया है। कंपनी ने बताया है कि Free और Go प्लान इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को ChatGPT में विज्ञापन दिखाई दे सकते हैं। विज्ञापन चैट के जवाब से अलग और स्पष्ट रूप से Sponsored के रूप में दिखाए जाएंगे।   जवाबों को प्रभावित नहीं करेंगे विज्ञापन   OpenAI के अनुसार विज्ञापन ChatGPT के जवाबों को प्रभावित नहीं करेंगे। विज्ञापनदाता यूजर की बातचीत को अपने विज्ञापन के हिसाब से बदलने या जवाबों में किसी ब्रांड को प्राथमिकता दिलाने के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। विज्ञापन और AI के जवाबों के बीच स्पष्ट अंतर रखा जाएगा।   किन यूजर्स को दिखेंगे Ads?   वर्तमान नीति के अनुसार Free और Go प्लान वाले यूजर्स को विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं। वहीं Plus, Pro और Enterprise जैसे पेड प्लान विज्ञापन-मुक्त रहते हैं। यूजर्स को विज्ञापन के पास उपलब्ध विकल्पों के जरिए उसे छिपाने या उसकी प्रासंगिकता पर प्रतिक्रिया देने का विकल्प भी मिल सकता है।   बातचीत और विज्ञापन डेटा को लेकर क्या कहा गया?   OpenAI के मुताबिक विज्ञापनदाताओं को यूजर्स की निजी बातचीत उपलब्ध नहीं कराई जाती और यूजर डेटा विज्ञापनदाताओं को बेचा नहीं जाता। विज्ञापन ChatGPT के जवाबों से अलग रखे जाते हैं।   विज्ञापन क्यों लाए जा रहे हैं?   ChatGPT के बड़े स्तर पर इस्तेमाल के बीच विज्ञापन मॉडल को Free और कम कीमत वाले प्लान को सपोर्ट करने वाले अतिरिक्त राजस्व स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, विज्ञापनों का वास्तविक अनुभव यूजर के प्लान और उपलब्धता के आधार पर अलग हो सकता है।

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