Future Technology

Gold-Silver Price
Gold-Silver Price: सोना-चांदी हुआ सस्ता, खरीदारी का सुनहरा मौका

नई दिल्ली, एजेंसियां। सोना और चांदी खरीदने या इनमें निवेश करने की योजना बना रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सर्राफा बाजार में गिरावट के चलते दोनों कीमती धातुओं के दाम नीचे आ गए हैं। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख और घरेलू निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।   इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत में 10 ग्राम पर 680 रुपये की गिरावट आई है। इसके बाद सोने का औसत भाव घटकर ₹1,41,800 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। स्थानीय टैक्स और अन्य शुल्कों के कारण विभिन्न शहरों में कीमतों में मामूली अंतर देखा जा सकता है।   वहीं चांदी की कीमतों में भी गिरावट जारी रही। प्रति किलोग्राम चांदी का भाव करीब ₹1,320 घटकर ₹2,18,690 के स्तर पर आ गया है। कुछ शहरों में खुदरा मांग बेहतर रहने के कारण चांदी के दाम ₹2,19,800 प्रति किलो तक बने हुए हैं।   अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं पर दबाव बना हुआ है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते सोना करीब 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,034.40 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी 0.34 प्रतिशत टूटकर 57.235 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है।   बाजार विशेषज्ञों का कहना  बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई कारण हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। इसके अलावा घरेलू बाजार में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली भी कीमतों में नरमी का एक प्रमुख कारण बनी है।   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव जारी रहता है तो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों और खरीदारों को बाजार की चाल पर नजर रखते हुए ही खरीदारी का फैसला करना चाहिए।

anjali kumari जुलाई 16, 2026 0
Temple wearable device by Deepinder Goyal attached near temple area for health monitoring
Temple Launch: कनपटी पर चिपकने वाली दीपेंदर गोयल की 'Temple' डिवाइस जल्द होगी लॉन्च, जानें कीमत, फीचर्स और क्या होगा खास

Zomato के सह-संस्थापक दीपेंदर गोयल की बहुप्रतीक्षित वियरेबल डिवाइस Temple एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से इस डिवाइस को लेकर उत्सुकता बनी हुई थी और अब इसकी लॉन्च टाइमलाइन को लेकर नई जानकारी सामने आई है। गोयल के अनुसार, यह डिवाइस अगले 6 से 12 महीनों के भीतर यानी 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक बाजार में लॉन्च की जा सकती है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसकी अंतिम लॉन्च तारीख या कीमत की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। क्या है Temple डिवाइस? Temple एक बेहद कॉम्पैक्ट वियरेबल डिवाइस है, जिसे कनपटी (Temple Area) पर चिपकाकर पहना जाता है। इसका आकार फली (Bean) जैसा बताया गया है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस केवल सामान्य फिटनेस डेटा ही नहीं, बल्कि शरीर की मेटाबोलिक स्थिति (Metabolic State) को रियल-टाइम में मॉनिटर करने में सक्षम होगी। इसका उद्देश्य शरीर की ऊर्जा, रिकवरी और प्रदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण बायोमार्कर्स का विश्लेषण करना है। हर किसी के लिए नहीं है यह डिवाइस दीपेंदर गोयल ने कहा कि Temple को शुरुआत से ही आम उपभोक्ताओं के लिए नहीं बनाया गया है। उनके अनुसार, यह डिवाइस मुख्य रूप से हाई-परफॉर्मेंस एथलीट्स और ऐसे लोगों के लिए विकसित की जा रही है, जिन्हें अपने शरीर की मेटाबोलिक परफॉर्मेंस का गहराई से विश्लेषण करना होता है। गोयल ने यह भी कहा कि उन्होंने इस डिवाइस को सबसे पहले अपनी जरूरत को ध्यान में रखकर विकसित करना शुरू किया था और व्यवसाय उसका स्वाभाविक परिणाम है। लॉन्च में हुई देरी गोयल ने स्वीकार किया कि Temple प्रोजेक्ट अपनी तय समयसीमा से पीछे चल रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले करीब 18 महीनों से वे इसकी लॉन्चिंग को लेकर उम्मीद जता रहे हैं, लेकिन तकनीकी विकास और परीक्षण के कारण इसमें देरी हुई। अब उनका अनुमान है कि अगले 6 से 12 महीनों के भीतर इसे बाजार में उतारा जा सकता है। संभावित कीमत कितनी होगी? रिपोर्ट्स के अनुसार Temple की संभावित कीमत लगभग 1,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 1 लाख रुपये से कम) हो सकती है। हालांकि, कंपनी ने कीमत की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की है। अंतिम कीमत लॉन्च के समय अलग हो सकती है। Apple Watch और Galaxy Ring से कितनी अलग? फिटनेस वियरेबल्स की दुनिया में पहले से Apple Watch, Samsung Galaxy Ring और अन्य स्मार्ट डिवाइस मौजूद हैं। लेकिन Temple का फोकस पारंपरिक फिटनेस ट्रैकिंग से आगे बढ़कर एडवांस मेटाबोलिक मॉनिटरिंग पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह डिवाइस— शरीर की मेटाबोलिक स्थिति को रियल-टाइम में ट्रैक कर सकती है। ऊर्जा स्तर (Energy Levels) का विश्लेषण कर सकती है। लैक्टिक एसिड जैसे एथलेटिक बायोमार्कर्स की निगरानी करने में सक्षम हो सकती है। प्रोफेशनल एथलीट्स और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग करने वालों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। यदि कंपनी अपने दावों के अनुसार इस तकनीक को सफलतापूर्वक बाजार में उतारती है, तो Temple प्रीमियम हेल्थ और फिटनेस वियरेबल्स सेगमेंट में एक अलग पहचान बना सकती है।  

surbhi जुलाई 16, 2026 0
UBTech UWORLD U1 humanoid robot with lifelike human appearance, emotional AI, and male and female versions unveiled in China.
UWORLD U1: चीन ने लॉन्च किया इंसानों जैसा ह्यूमनॉइड रोबोट, महिला-पुरुष दोनों अवतार में मिलेगा, समझेगा भावनाएं और आंखों में देखकर करेगा बात

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स की दुनिया में चीन ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चीन की अग्रणी रोबोटिक्स कंपनी UBTech ने 30 जून को शेन्जेन में अपना नया ह्यूमनॉइड रोबोट UWORLD U1 लॉन्च किया। यह रोबोट पारंपरिक औद्योगिक मशीनों से बिल्कुल अलग है। इसे फैक्ट्रियों में काम कराने के बजाय इंसानों के साथ रहने, बातचीत करने और उन्हें भावनात्मक सहयोग (Emotional Support) देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। UWORLD U1 का डिजाइन और रूप-रंग काफी हद तक इंसानों जैसा है। इसमें सिलिकॉन स्किन, अत्याधुनिक इमोशनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑन-डिवाइस डेटा स्टोरेज जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह रोबोट लोगों के साथ प्राकृतिक तरीके से संवाद कर सकता है और समय के साथ उनके व्यवहार और पसंद को समझते हुए अधिक व्यक्तिगत अनुभव प्रदान करता है। इंसानों का साथी बनने के लिए तैयार किया गया UBTech के अनुसार, UWORLD U1 को ऐसे वातावरण के लिए डिजाइन किया गया है जहां इंसानों के साथ लगातार संवाद की आवश्यकता होती है। इसका इस्तेमाल बुजुर्गों की देखभाल, शिक्षा, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, रिसेप्शन सेवाओं, प्रीमियम होम सर्विस और अन्य ग्राहक-केंद्रित कार्यों में किया जा सकता है। कंपनी का कहना है कि यह रोबोट सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बातचीत के दौरान सामने वाले की भावनाओं को समझने और उसके अनुसार प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी रखता है। तीन वेरिएंट में उपलब्ध UWORLD U1 को तीन अलग-अलग मॉडल में पेश किया गया है। U1 Lite U1 Pro U1 Ultra फिलहाल इसकी बिक्री केवल चीन में शुरू की गई है। कीमत की बात करें तो इसकी शुरुआती कीमत 119,800 युआन (करीब 14 लाख रुपये) है, जबकि हाई-एंड Ultra मॉडल की कीमत 990,000 युआन (करीब 1.15 करोड़ रुपये) तक जाती है। महिला और पुरुष दोनों अवतार में मिलेगा UWORLD U1 की एक खास विशेषता यह है कि इसे पुरुष और महिला दोनों रूपों में तैयार किया गया है। पुरुष मॉडल की लंबाई लगभग 183 सेंटीमीटर है। महिला मॉडल की लंबाई लगभग 168 सेंटीमीटर रखी गई है। रोबोट में कुल 88 सर्वो जॉइंट्स दिए गए हैं, जिनकी मदद से यह इंसानों की तरह सिर, हाथ, गर्दन और शरीर की कई स्वाभाविक गतिविधियां कर सकता है। इसके पूरे बाहरी हिस्से पर सिलिकॉन कोटिंग की गई है ताकि बातचीत के दौरान यह अधिक वास्तविक महसूस हो। 20 से ज्यादा भावनाओं को पहचान सकता है UWORLD U1 की सबसे बड़ी ताकत इसका Emotional AI System है। कंपनी के मुताबिक यह रोबोट 20 से अधिक प्रकार की मानवीय भावनाओं को पहचान सकता है। बातचीत के दौरान यह सामने वाले व्यक्ति से आई कॉन्टैक्ट बनाए रखता है, चेहरे के भावों को समझता है और पिछली बातचीत को याद रखते हुए भविष्य में अधिक व्यक्तिगत जवाब देता है। यानी अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से इस रोबोट से बातचीत करता है, तो समय के साथ यह उसकी पसंद, व्यवहार और बातचीत के तरीके को समझकर उसी अनुसार प्रतिक्रिया देने लगता है। क्लाउड पर नहीं, डिवाइस में ही सुरक्षित रहेगा डेटा UBTech ने प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए UWORLD U1 में ऑन-डिवाइस AI प्रोसेसिंग का इस्तेमाल किया है। इसका इमोशनल AI मॉडल Rockchip RK3588 प्रोसेसर पर चलता है, जिससे अधिकांश प्रोसेसिंग सीधे डिवाइस पर होती है और क्लाउड सर्वर पर निर्भरता काफी कम हो जाती है। यूजर का व्यक्तिगत डेटा क्लाउड पर अपलोड होने के बजाय रोबोट में ही सुरक्षित रहता है। कंपनी के अनुसार इसमें तीन-स्तरीय प्राइवेसी आर्किटेक्चर दिया गया है, जिसमें लोकल-फर्स्ट प्रोसेसिंग, सीमित क्लाउड उपयोग और यूजर कंट्रोल्ड हार्डवेयर सिक्योरिटी शामिल है। इसका उद्देश्य AI डिवाइसों से जुड़ी बढ़ती गोपनीयता संबंधी चिंताओं को कम करना है। सिर्फ वयस्कों के लिए उपलब्ध UBTech ने स्पष्ट किया है कि UWORLD U1 को किसी इंडस्ट्रियल रोबोट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसे विशेष रूप से वयस्क खरीदारों के लिए विकसित किया गया है, जहां स्वाभाविक संवाद, साथ और भावनात्मक सहयोग की जरूरत होती है।  

surbhi जुलाई 2, 2026 0
Flexible hydrogel generator producing electricity from air moisture and human sweat for wearable devices
हवा की नमी और पसीने से बनेगी बिजली! वैज्ञानिकों ने बनाया अनोखा हाइड्रोजेल जनरेटर, बिना चार्जर चल सकेंगे स्मार्ट डिवाइस

नई दिल्ली: कल्पना कीजिए कि आपकी स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड या हेल्थ मॉनिटर को कभी चार्ज करने की जरूरत ही न पड़े। वे सिर्फ हवा की नमी या आपके शरीर के पसीने से खुद ही ऊर्जा बनाकर काम करते रहें। यह सुनने में भले भविष्य की तकनीक लगे, लेकिन वैज्ञानिकों ने इस दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल कर ली है। शोधकर्ताओं ने एक नया फ्लेक्सिबल हाइड्रोजेल मॉइस्चर-इलेक्ट्रिक जनरेटर विकसित किया है, जो वातावरण में मौजूद नमी और मानव शरीर से निकलने वाले पसीने को सोखकर सीधे बिजली उत्पन्न कर सकता है। यह तकनीक भविष्य में वियरेबल डिवाइस और मेडिकल सेंसर की दुनिया बदल सकती है। क्यों खास है यह नई तकनीक? आज स्मार्टवॉच, फिटनेस ट्रैकर, वायरलेस ईयरबड्स और मेडिकल सेंसर जैसे उपकरणों की सबसे बड़ी चुनौती उनकी बैटरी है। इन्हें बार-बार चार्ज करना पड़ता है और समय के साथ बैटरी खराब होने पर इलेक्ट्रॉनिक कचरा भी बढ़ता है। वैश्विक स्तर पर ई-वेस्ट लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में वैज्ञानिक ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं जो छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खुद ऊर्जा पैदा करने में सक्षम बना सकें। नया हाइड्रोजेल जनरेटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हवा की नमी से कैसे बनती है बिजली? यह मॉइस्चर-इलेक्ट्रिक जनरेटर हवा में मौजूद जलवाष्प (Water Vapor) को अवशोषित करता है और उसे विद्युत ऊर्जा में बदल देता है। इसका मतलब है कि: त्वचा पर लगाए गए हेल्थ सेंसर फिटनेस बैंड स्मार्ट पैच फेस मास्क आधारित सेंसर मेडिकल मॉनिटर भविष्य में बाहरी चार्जर या बड़ी बैटरी के बिना भी काम कर सकते हैं। नई तकनीक कैसे काम करती है? इस तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विशेष प्रकार का हाइड्रोजेल है। शोधकर्ताओं ने: पानी और ग्लिसरॉल आधारित चिपकने वाला हाइड्रोजेल तैयार किया। इसे लिक्विड मेटल और स्ट्रेचेबल सिल्वर इलेक्ट्रोड से जोड़ा। ग्लिसरॉल की मदद से हाइड्रोजेल और इलेक्ट्रोड के बीच मजबूत संपर्क बनाया। इससे डिवाइस के अंदर विद्युत प्रवाह लगातार बना रहता है, चाहे उसे मोड़ा जाए, खींचा जाए या पहनकर इस्तेमाल किया जाए। हजारों बार मोड़ने पर भी नहीं हुआ खराब इस तकनीक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में इसकी मजबूती शामिल है। परीक्षण के दौरान: डिवाइस को 8,000 बार मोड़ा गया। 80% तक खींचकर 1,000 बार टेस्ट किया गया। 180 डिग्री तक मोड़ने और खींचने के बाद भी इसकी कार्यक्षमता बरकरार रही। यानी यह रोजमर्रा के उपयोग के लिए काफी लचीला और टिकाऊ साबित हुआ। 85% नमी में लगातार 9 दिन तक बिजली टेस्टिंग के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि: 85% आर्द्रता (Humidity) में यह लगभग 0.94 वोल्ट बिजली उत्पन्न करने में सक्षम रहा। डिवाइस ने लगातार 220 घंटे यानी 9 दिन से अधिक समय तक स्थिर बिजली उत्पादन किया। हालांकि यह किसी स्मार्टफोन चार्जर जितनी ऊर्जा नहीं बनाता, लेकिन छोटे सेंसर और वियरेबल डिवाइस चलाने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। किन क्षेत्रों में हो सकता है उपयोग? विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। संभावित उपयोग: स्वास्थ्य सेवाएं ECG मॉनिटर हार्ट रेट सेंसर सांसों की निगरानी करने वाले उपकरण फिटनेस और स्पोर्ट्स फिटनेस ट्रैकर्स एथलीट परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग बुजुर्गों की देखभाल निरंतर स्वास्थ्य निगरानी आपातकालीन स्वास्थ्य सेंसर दूरस्थ चिकित्सा (Telemedicine) ऐसे क्षेत्रों में मेडिकल मॉनिटरिंग जहां बिजली की उपलब्धता सीमित है क्या स्मार्टवॉच और ईयरबड्स बिना चार्जर चलेंगे? फिलहाल यह तकनीक शुरुआती शोध चरण में है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने से पहले: लंबे समय तक परीक्षण सुरक्षित पैकेजिंग बड़े आकार के प्रोटोटाइप व्यावसायिक उत्पादन जैसे चरण पूरे करने होंगे। हालांकि यदि यह तकनीक सफलतापूर्वक बाजार में आती है, तो भविष्य में स्मार्टवॉच, हेल्थ बैंड और अन्य छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बैटरी पर निर्भरता काफी कम हो सकती है। तकनीक की सबसे बड़ी उपलब्धि यह शोध सिर्फ एक नई ऊर्जा तकनीक नहीं बल्कि ई-वेस्ट कम करने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि छोटे उपकरण वातावरण की नमी से स्वयं ऊर्जा पैदा कर सकें, तो बैटरी बदलने और चार्जिंग की जरूरत काफी हद तक घट सकती है।  

surbhi जून 25, 2026 0
Humanoid robot Xiao Gai operates an automated retail store without any human employees in Hong Kong.
Robot Store: बिना कर्मचारियों के चल रही अनोखी दुकान, अकेला ह्यूमनॉइड रोबोट संभाल रहा पूरा कारोबार

हॉन्गकॉन्ग: तकनीक की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब इसका असर रिटेल सेक्टर में भी साफ दिखाई देने लगा है। हॉन्गकॉन्ग में एक ऐसा अनोखा स्टोर शुरू किया गया है, जहां किसी इंसानी कर्मचारी की जरूरत नहीं पड़ती। इस पूरी दुकान का संचालन सिर्फ एक ह्यूमनॉइड रोबोट कर रहा है, जिसका नाम "शाओ गाई" (Xiao Gai) है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह 24 घंटे संचालित होने वाला अपनी तरह का पहला पॉप-अप स्टोर है। इस पोर्टेबल कैप्सूल स्टोर को बीजिंग स्थित गैलबॉट कंपनी ने विकसित किया है। क्या-क्या कर सकता है यह रोबोट? करीब 5 फीट 6 इंच लंबा शाओ गाई अपने लंबे रोबोटिक हाथों की मदद से शेल्फ पर रखे सामान को व्यवस्थित कर सकता है, ग्राहकों के लिए उत्पाद चुन सकता है और चेकआउट काउंटर का काम भी संभाल सकता है। यह रोबोट कई भाषाओं में ग्राहकों से बातचीत करने में सक्षम है और दोस्ताना तरीके से लोगों की सहायता करता है। स्टोर में स्नैक्स, दैनिक जरूरत का सामान और दवाइयों समेत कई उत्पाद उपलब्ध हैं। कंपनी का दावा है कि इस तकनीक की मदद से बिक्री में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। क्या रोबोट इंसानों की नौकरियां छीन लेंगे? रोबोट आधारित यह मॉडल जितना आकर्षक दिखाई देता है, उतने ही बड़े सवाल भी खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के बढ़ते इस्तेमाल से भविष्य में कई पारंपरिक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। इसी दिशा में जापान एयरलाइंस ने भी टोक्यो के हानेडा एयरपोर्ट पर सामान ढोने और प्रबंधन के लिए रोबोटिक सहायकों का इस्तेमाल शुरू किया है। गैलबॉट कंपनी का लक्ष्य आने वाले समय में 10 शहरों में ऐसे 100 स्टोर्स शुरू करने का है। अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं हैं रोबोट हालांकि, रोबोटिक तकनीक अभी भी विकास के दौर में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले कुछ मामलों में रोबोट नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं और गलतियां भी कर चुके हैं। एक उदाहरण में, स्टॉकहोम की एक AI-आधारित कॉफी शॉप ने गलत ऑर्डर देकर अपना पूरा बजट समय से पहले खत्म कर दिया था। इसी तरह कुछ रोबोट्स के व्यवहार में तकनीकी गड़बड़ियां भी सामने आ चुकी हैं। यानी फिलहाल रोबोट इंसानों की मदद जरूर कर रहे हैं, लेकिन पूरी तरह इंसानों की जगह लेना अभी दूर की बात मानी जा रही है।  

surbhi जून 22, 2026 0
Elon Musk discusses AI-driven future economy after his wealth surpasses one trillion dollars
दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बने एलन मस्क, बोले- भविष्य में पैसे की अहमियत खत्म हो सकती है

स्पेसएक्स IPO के बाद एलन मस्क की संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर के पार दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति और टेक उद्यमी Elon Musk ने एक नया इतिहास रच दिया है। स्पेसएक्स के बहुचर्चित आईपीओ (IPO) के बाद उनकी कुल संपत्ति लगभग 1.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे वे दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने की ओर बढ़ गए हैं। हालांकि अपनी रिकॉर्ड संपत्ति को लेकर चर्चा के बीच मस्क का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने दावा किया है कि भविष्य में ऐसा समय आ सकता है जब पैसे की मौजूदा अहमियत खत्म हो जाएगी। AI और रोबोट बदल देंगे दुनिया की अर्थव्यवस्था 2026 एबंडेंस समिट के दौरान बातचीत में मस्क ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत रोबोटिक्स मानव समाज को एक ऐसे दौर में ले जा सकते हैं, जहां वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन इतना अधिक होगा कि पारंपरिक आर्थिक मॉडल बदल जाएंगे। मस्क के अनुसार, AI आधारित मशीनें इतनी बड़ी मात्रा में काम कर सकेंगी कि इंसानों के लिए पारंपरिक नौकरियों की जरूरत कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में लोगों को केवल न्यूनतम आय नहीं, बल्कि "यूनिवर्सल हाई इनकम" (UHI) जैसी व्यवस्था मिल सकती है। “पैसे की प्रासंगिकता खत्म हो जाएगी” बातचीत के दौरान मस्क ने कहा कि भविष्य में पैसे का महत्व धीरे-धीरे कम हो सकता है। उनका मानना है कि जब AI और रोबोट लगभग हर वस्तु और सेवा को सस्ती और आसानी से उपलब्ध करा देंगे, तब लोगों की जीवनशैली बेहतर होगी और आर्थिक संसाधनों का वितरण अलग तरीके से होगा। मस्क के इस बयान पर मंच पर मौजूद उद्यमी Peter Diamandis ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि जैसे ही आप ट्रिलियनेयर बन रहे हैं, उसी समय पैसा कम महत्वपूर्ण हो रहा है? इस पर मस्क ने हंसते हुए जवाब दिया, "हां, लगभग ऐसा ही है।" यूनिवर्सल हाई इनकम क्या है? मस्क ने यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) से आगे बढ़कर यूनिवर्सल हाई इनकम (UHI) की अवधारणा पेश की। उनका कहना है कि AI के कारण उत्पादन लागत बेहद कम हो जाएगी और लोगों को केवल बुनियादी जरूरतें पूरी करने के बजाय उच्च जीवन स्तर का लाभ मिल सकेगा। इस मॉडल में स्वास्थ्य सेवाएं, आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं पहले की तुलना में अधिक सुलभ और सस्ती हो सकती हैं। भविष्य में सबसे मूल्यवान क्या होगा? मस्क के अनुसार भविष्य की अर्थव्यवस्था में केवल मुद्रा नहीं, बल्कि ऊर्जा और भौतिक संसाधन सबसे महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक AI सिस्टम डॉलर या अन्य मुद्राओं की परवाह नहीं करेंगे। उनके लिए असली महत्व बिजली, कंप्यूटिंग क्षमता, फैक्ट्रियों और कच्चे माल जैसे संसाधनों का होगा। सरल शब्दों में कहें तो भविष्य में आर्थिक ताकत का निर्धारण बैंक बैलेंस से ज्यादा ऊर्जा उत्पादन, तकनीकी क्षमता और संसाधनों पर नियंत्रण से हो सकता है। विशेषज्ञों के बीच बहस तेज मस्क के इस दृष्टिकोण को लेकर विशेषज्ञों के बीच बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे तकनीकी प्रगति की स्वाभाविक दिशा मानते हैं, जबकि कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पूरी तरह से "पैसारहित" अर्थव्यवस्था की कल्पना अभी काफी दूर की बात है। फिलहाल इतना तय है कि AI और रोबोटिक्स के बढ़ते प्रभाव ने भविष्य की नौकरियों, आय और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Smartphone controlling robotic arm remotely using advanced COBALT technology system demonstration
अब स्मार्टफोन से कंट्रोल होंगे रोबोट के हाथ! वैज्ञानिकों ने विकसित की अनोखी तकनीक, दुनिया के किसी भी कोने से कर सकेंगे ऑपरेट

तकनीक की दुनिया में एक और बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका के शोधकर्ताओं ने ऐसा सिस्टम विकसित किया है, जो भविष्य में रोबोटिक्स की तस्वीर बदल सकता है। अब सिर्फ एक स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन की मदद से दुनिया के किसी भी कोने में मौजूद रोबोटिक हाथों (Robotic Arms) को नियंत्रित किया जा सकेगा। अमेरिका के Georgia Institute of Technology के शोधकर्ताओं ने COBALT नाम का एक नया प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जिसका उद्देश्य रोबोटिक्स को आम लोगों के लिए अधिक सुलभ और आसान बनाना है। स्मार्टफोन बनेगा रोबोट का कंट्रोलर COBALT सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि यह स्मार्टफोन को मोशन कंट्रोलर में बदल देता है। यूजर जैसे ही अपने फोन को किसी दिशा में हिलाता है, उसी प्रकार रोबोटिक आर्म भी रियल टाइम में मूवमेंट दोहराता है। इस तकनीक की मदद से उपयोगकर्ता दूर बैठे-बैठे वस्तुओं को उठाने, रखने और अन्य बुनियादी कार्यों को आसानी से अंजाम दे सकते हैं। इसके लिए किसी विशेष तकनीकी ज्ञान या रोबोटिक्स अनुभव की आवश्यकता नहीं होती। बिना अनुभव वाले लोगों ने भी किया सफल इस्तेमाल शोधकर्ताओं ने इस सिस्टम का परीक्षण कई देशों के लोगों पर किया। भारत, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के प्रतिभागियों ने बिना किसी रोबोटिक्स अनुभव के अपने स्मार्टफोन के जरिए जॉर्जिया टेक में मौजूद रोबोटिक आर्म्स को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया। यह परिणाम दर्शाते हैं कि भविष्य में रोबोटिक्स तकनीक आम लोगों तक पहुंच सकती है और इसे सीखना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में भी मिलेगा बड़ा फायदा COBALT केवल रोबोट कंट्रोल करने तक सीमित नहीं है। यह शिक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हाल ही में शोधकर्ताओं ने हाई स्कूल के छात्रों को इसका डेमो दिखाया, जहां छात्रों ने अपने स्मार्टफोन से दूर स्थित रोबोटिक आर्म्स को नियंत्रित किया। इससे उन स्कूलों और संस्थानों को फायदा मिल सकता है जहां महंगे रोबोटिक्स उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। फैक्टरियों और घरों में बदल सकती है काम करने की शैली विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह तकनीक फैक्टरियों, गोदामों, अस्पतालों और घरों में काम करने वाले रोबोट्स को अधिक उपयोगी बना सकती है। भविष्य में रोबोट सामान्य कार्य स्वयं कर सकेंगे और किसी जटिल परिस्थिति में इंसानों से रिमोट सहायता मांग सकेंगे। इससे कार्यक्षमता बढ़ेगी और मानव हस्तक्षेप की जरूरत कम होगी। WebRTC तकनीक पर आधारित है COBALT यह पूरा सिस्टम WebRTC तकनीक पर आधारित है, जिसका उपयोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म में भी किया जाता है। इसकी मदद से डेटा ट्रांसमिशन में देरी बेहद कम होती है और रोबोट की गतिविधियां लगभग तुरंत प्रतिक्रिया देती हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, उपयोगकर्ताओं ने वर्चुअल रियलिटी हेडसेट, कीबोर्ड और पारंपरिक कंट्रोलर्स की तुलना में स्मार्टफोन आधारित नियंत्रण को अधिक सहज और सुविधाजनक पाया। COBALT भविष्य में रोबोटिक्स को आम लोगों तक पहुंचाने और रिमोट ऑटोमेशन को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  

surbhi जून 8, 2026 0
AI, AGI, jobs, and future technology risks
AI से दुनिया में मच सकती है बड़ी उथल-पुथल, इंसानों के पास सिर्फ 3 साल का समय: पूर्व Google X अधिकारी

2027 तक AGI आने का दावा, बड़े बदलाव की चेतावनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच पूर्व Google X बिजनेस प्रमुख Mo Gawdat ने दुनिया को लेकर एक बड़ी चेतावनी दी है। उनका मानना है कि आने वाले तीन वर्षों के भीतर AI इतना शक्तिशाली हो सकता है कि यह रोजगार, अर्थव्यवस्था और समाज की मौजूदा संरचना को पूरी तरह बदल दे। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में गॉडेट ने कहा कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) या तो व्यावहारिक रूप से आ चुकी है या फिर 2027 तक इसका आगमन हो सकता है। उनके अनुसार, यह बदलाव मानव इतिहास के सबसे बड़े तकनीकी परिवर्तनों में से एक साबित हो सकता है। आज के AI टूल्स सिर्फ शुरुआत हैं ChatGPT, Gemini, Claude और Grok जैसे AI टूल्स आज लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। ये ईमेल लिखने, दस्तावेजों का विश्लेषण करने, यात्रा की योजना बनाने और कई अन्य कार्यों में मदद कर रहे हैं। लेकिन गॉडेट का कहना है कि आम लोग AI की जो क्षमताएं देख रहे हैं, वह उसकी वास्तविक शक्ति का केवल एक छोटा हिस्सा है। उनका दावा है कि रिसर्च लैब्स में विकसित हो रहे सिस्टम कहीं अधिक उन्नत हैं और वे खुद अपने कोड को बेहतर बनाने की क्षमता हासिल कर रहे हैं। उनके मुताबिक, आम जनता AI को चैटबॉट और वायरल वीडियो के रूप में देख रही है, जबकि पर्दे के पीछे इसकी प्रगति कहीं ज्यादा तेज और गंभीर है। सबसे पहले सफेदपोश नौकरियों पर असर गॉडेट का मानना है कि AI का पहला बड़ा प्रभाव व्हाइट-कॉलर यानी दफ्तर आधारित नौकरियों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कॉल सेंटर एजेंट, प्रशासनिक सहायक, ट्रैवल एजेंट और अन्य नियमित कंप्यूटर आधारित भूमिकाएं सबसे पहले प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा पैरालीगल, वित्तीय विश्लेषक, ग्राफिक डिजाइनर, संगीतकार, मिडिल मैनेजर और कुछ मेडिकल डायग्नोस्टिक भूमिकाओं में भी AI कार्यभार को काफी हद तक कम कर सकता है। उनका तर्क है कि AI की मदद से एक कर्मचारी वह काम कर सकेगा जिसके लिए पहले कई लोगों की जरूरत पड़ती थी। अचानक नहीं, धीरे-धीरे आएगा बदलाव हालांकि गॉडेट का मानना है कि नौकरियों पर असर एकदम से नहीं दिखेगा। शुरुआत में कंपनियां नए कर्मचारियों की भर्ती कम कर सकती हैं, खासकर एंट्री-लेवल पदों पर। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कई कंपनियों ने शुरुआती स्तर की नियुक्तियों को सीमित करना शुरू कर दिया है। इसका मतलब यह नहीं कि बड़े पैमाने पर छंटनी हो रही है, लेकिन कार्यबल की वृद्धि की रफ्तार जरूर धीमी पड़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकारें समय रहते तैयारी नहीं करतीं, तो बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई सामाजिक अस्थिरता को जन्म दे सकती है। मैन्युअल काम भी नहीं बचेंगे गॉडेट का मानना है कि फिलहाल शारीरिक श्रम से जुड़े कई कार्य AI और रोबोट्स से सुरक्षित दिखाई देते हैं, लेकिन यह स्थिति हमेशा नहीं रहेगी। उन्होंने स्वचालित वाहनों का उदाहरण देते हुए कहा कि रोबोटिक्स का विस्तार भविष्य में परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सैन्य क्षेत्र और कानून-व्यवस्था जैसे क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। विशेष प्रकार की मशीनें धीरे-धीरे कई मैन्युअल कार्यों को संभाल सकती हैं। AI खतरा नहीं, अवसर भी बन सकता है हालांकि उनकी भविष्यवाणी पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। गॉडेट का मानना है कि यदि AI का जिम्मेदारी से उपयोग किया गया, तो यह मानवता की कई बड़ी समस्याओं के समाधान में मदद कर सकता है। उनके अनुसार, अत्यधिक बुद्धिमान AI सिस्टम वैज्ञानिक खोजों को तेज कर सकते हैं, चिकित्सा अनुसंधान में क्रांति ला सकते हैं और वैश्विक उत्पादकता बढ़ा सकते हैं। युवाओं के लिए क्या है सलाह? AI युग में करियर बनाने को लेकर गॉडेट की सलाह स्पष्ट है—AI से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय उसके साथ काम करना सीखें। उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसे कौशल विकसित करने चाहिए जिन्हें मशीनें आसानी से नहीं दोहरा सकतीं। सहानुभूति, प्रभावी संवाद, रचनात्मकता, नेतृत्व और मजबूत मानवीय रिश्ते भविष्य में सबसे मूल्यवान गुण साबित हो सकते हैं। उनका मानना है कि जैसे-जैसे AI कई तकनीकी कार्यों में इंसानों से बेहतर होता जाएगा, वैसे-वैसे मानवता से जुड़े गुण लोगों की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे। विशेषज्ञों में मतभेद भी मौजूद हालांकि AI के भविष्य को लेकर सभी विशेषज्ञ एकमत नहीं हैं। कई तकनीकी विशेषज्ञ मानते हैं कि AGI के आने का समय अभी अनिश्चित है और AI के प्रभाव का वास्तविक स्वरूप कई आर्थिक, सामाजिक और नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगा। फिर भी, गॉडेट की चेतावनी इस बात की ओर संकेत करती है कि AI केवल एक नई तकनीक नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार को प्रभावित करने वाली बड़ी शक्ति बन सकती है।  

surbhi जून 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
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PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0