Meta Platforms ने WhatsApp यूजर्स के लिए एक नया प्राइवेसी फीचर पेश किया है, जिसका नाम Incognito Chat रखा गया है। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स को Meta AI के साथ ज्यादा सुरक्षित और निजी बातचीत का अनुभव देना है।
कंपनी के CEO Mark Zuckerberg ने हाल ही में इस फीचर की घोषणा की। Meta का दावा है कि यह नया मोड AI चैट्स को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाएगा और बातचीत खत्म होते ही मैसेज अपने आप गायब हो जाएंगे।
Meta के अनुसार, Incognito Chat में की गई बातचीत सामान्य क्लाउड सर्वर पर प्रोसेस नहीं होगी। इसके बजाय, इसे एक सिक्योर और एन्क्रिप्टेड सिस्टम के जरिए संभाला जाएगा।
कंपनी का कहना है कि न तो Meta और न ही कोई बाहरी व्यक्ति इन चैट्स को पढ़ सकेगा। सबसे अहम बात यह है कि AI से हुई बातचीत सेशन खत्म होते ही अपने आप डिलीट हो जाएगी और सर्वर पर स्टोर नहीं होगी।
यह फीचर उन यूजर्स के लिए खास माना जा रहा है जो AI चैट्स के दौरान अपनी निजी जानकारी को लेकर चिंतित रहते हैं।
Meta ने बताया कि Incognito Chat फीचर उसकी Private Processing टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इस तकनीक को पिछले साल WhatsApp के AI फीचर्स के साथ पेश किया गया था।
इस सिस्टम में यूजर्स की रिक्वेस्ट सामान्य सर्वर पर प्रोसेस होने के बजाय Trusted Execution Environments (TEE) नाम के एन्क्रिप्टेड और आइसोलेटेड सिस्टम में प्रोसेस होती है।
इसका फायदा यह है कि किसी भी थर्ड पार्टी को यूजर डेटा तक पहुंच नहीं मिल पाती और चैट की गोपनीयता बनी रहती है। Meta का दावा है कि यह फीचर दूसरे AI प्लेटफॉर्म्स से अलग है, क्योंकि कई AI सेवाएं यूजर्स की बातचीत को लंबे समय तक स्टोर करके रखती हैं।
कंपनी के मुताबिक, Incognito Chat फीचर को फिलहाल धीरे-धीरे Android और iOS यूजर्स के लिए रोलआउट किया जा रहा है।
इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को अपना WhatsApp ऐप लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करना होगा। हालांकि शुरुआती चरण में यह सुविधा केवल चुनिंदा अकाउंट्स पर उपलब्ध होगी।
Meta ने यह भी कहा है कि फीचर की उपलब्धता यूजर के क्षेत्र और अकाउंट टाइप के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। जिन यूजर्स को यह अपडेट मिलेगा, उन्हें Meta AI के साथ प्राइवेट बातचीत के लिए अलग विकल्प दिखाई देगा।
Meta का कहना है कि उसकी Private Processing टेक्नोलॉजी की जांच कई स्वतंत्र साइबर सिक्योरिटी कंपनियों ने की है। इनमें NCC Group और Trail of Bits जैसी कंपनियां शामिल हैं।
कंपनी के मुताबिक, इन सुरक्षा परीक्षणों में यह पाया गया कि सिस्टम यूजर्स की प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत सिक्योरिटी मानकों का पालन करता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: अगर आपके घर की किसी दराज में सालों पुराना स्मार्टफोन, लैपटॉप या टैबलेट रखा हुआ है, तो आप अकेले नहीं हैं। दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोग पुराने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल बंद करने के बाद भी उन्हें बेचने, दान करने या रीसाइक्लिंग के लिए नहीं देते। हालिया रिसर्च के मुताबिक इसके पीछे सिर्फ तकनीकी कारण नहीं, बल्कि डेटा सुरक्षा, मनोवैज्ञानिक सोच और जानकारी की कमी जैसी कई अहम वजहें जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोग सही तरीके से डेटा मिटाने और अधिकृत रीसाइक्लिंग प्रक्रिया के बारे में जागरूक हों, तो ई-वेस्ट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डेटा चोरी का डर सबसे बड़ी वजह रिसर्च के अनुसार सबसे बड़ा कारण निजी डेटा के लीक होने का डर है। कई लोगों को लगता है कि पुराने फोन या लैपटॉप से फोटो, वीडियो, बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड और निजी दस्तावेज पूरी तरह हटाना आसान नहीं होता। यही वजह है कि वे डिवाइस बेचने या किसी और को देने के बजाय घर में ही सुरक्षित रखना बेहतर समझते हैं। रीसाइक्लिंग की जानकारी का अभाव कई लोग यह भी नहीं जानते कि पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की रीसाइक्लिंग कहां और कैसे कराई जाए। जानकारी की कमी के कारण वे पुराने गैजेट वर्षों तक घर में ही संभालकर रखते हैं। कुछ लोगों को यह प्रक्रिया कठिन लगती है, जबकि आज कई अधिकृत ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर और एक्सचेंज प्रोग्राम उपलब्ध हैं, जिनसे यह काम पहले की तुलना में काफी आसान हो चुका है। पुराने फोन को बैकअप समझकर रखते हैं कई यूजर्स अपने पुराने स्मार्टफोन या लैपटॉप को भविष्य के लिए बैकअप डिवाइस मानकर रखते हैं। उन्हें लगता है कि यदि नया फोन खराब हो जाए या किसी जरूरी फाइल की जरूरत पड़े, तो पुराना डिवाइस काम आ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक बिना इस्तेमाल पड़े रहने से डिवाइस की बाजार कीमत लगातार घटती रहती है। साथ ही बैटरी और हार्डवेयर भी खराब होने लगते हैं, जिससे बाद में उसे बेचना या दोबारा इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है। पुराना फोन बेचने से पहले क्या करें? यदि आप अपना पुराना स्मार्टफोन या लैपटॉप बेचना, दान करना या रीसाइक्लिंग के लिए देना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें— सभी जरूरी डेटा का बैकअप लें। डिवाइस का Factory Reset करके पूरा डेटा मिटाएं। अपने Google या Apple अकाउंट से डिवाइस को Remove करें। SIM कार्ड और मेमोरी कार्ड निकाल लें। केवल अधिकृत रीसाइक्लिंग सेंटर या भरोसेमंद खरीदार को ही डिवाइस दें। इन सावधानियों से आपकी निजी जानकारी सुरक्षित रहेगी और नया उपयोगकर्ता भी डिवाइस का बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल कर सकेगा। ई-वेस्ट कम करने में मिलेगी मदद विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोगों में डेटा सुरक्षा और ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग को लेकर जागरूकता बढ़े, तो लाखों पुराने स्मार्टफोन और लैपटॉप दोबारा उपयोग या रीसाइक्लिंग के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। इससे इलेक्ट्रॉनिक कचरा कम होगा, पर्यावरण को फायदा मिलेगा और मूल्यवान संसाधनों का दोबारा इस्तेमाल संभव हो सकेगा।
नई दिल्ली: स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Infinix ने भारतीय बाजार में अपना नया प्रीमियम स्मार्टफोन Infinix Note 60 Pro Pininfarina Edition लॉन्च कर दिया है। यह डिवाइस अपने शानदार डिजाइन, दमदार हार्डवेयर और एडवांस फीचर्स के कारण चर्चा में है। कंपनी ने इस स्मार्टफोन को मशहूर इटालियन डिजाइन हाउस Pininfarina के सहयोग से तैयार किया है, जिससे इसे एक लग्जरी और स्पोर्टी लुक मिला है। फोन में कार्बन फाइबर फिनिश, एयरोस्पेस-ग्रेड एल्युमिनियम फ्रेम, हाई-रिफ्रेश रेट AMOLED डिस्प्ले, पावरफुल प्रोसेसर और बड़ी बैटरी जैसे फीचर्स दिए गए हैं। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस स्टाइल और परफॉर्मेंस का बेहतरीन संयोजन पेश करता है। Infinix Note 60 Pro Pininfarina Edition की कीमत और उपलब्धता भारत में Infinix Note 60 Pro Pininfarina Edition की कीमत 37,999 रुपये रखी गई है। यह स्मार्टफोन 8GB रैम और 256GB स्टोरेज वेरिएंट में उपलब्ध होगा। कंपनी इसे Torino Black कलर ऑप्शन में बाजार में उतार रही है। इस स्मार्टफोन की बिक्री 29 जून से दोपहर 12 बजे शुरू होगी। प्रीमियम डिजाइन और लिमिटेड एडिशन अपील के कारण यह डिवाइस टेक प्रेमियों और डिजाइन-केंद्रित यूजर्स को आकर्षित कर सकता है। प्रीमियम डिजाइन बना रहा है खास फोन की सबसे बड़ी खासियत इसका डिजाइन है। इसमें Carbon Fibre फिनिश के साथ 360-डिग्री Aerospace-Grade Aluminium Frame दिया गया है। डिवाइस पर मौजूद लाल रंग की एक्सेंट लाइन्स इसे स्पोर्ट्स कार जैसी प्रीमियम फील देती हैं। फोन के रियर पैनल पर Active Matrix Display भी दिया गया है, जो नोटिफिकेशन और अन्य अलर्ट के दौरान आकर्षक लाइट इफेक्ट्स दिखाता है। इसके अलावा कंपनी इस स्पेशल एडिशन स्मार्टफोन को एक यूनिक और प्रीमियम रिटेल बॉक्स के साथ पेश कर रही है। शानदार AMOLED डिस्प्ले Infinix Note 60 Pro Pininfarina Edition में 6.78 इंच का LTPS 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। यह स्क्रीन 144Hz तक के अडैप्टिव रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है, जिससे गेमिंग, स्क्रॉलिंग और वीडियो देखने का अनुभव काफी स्मूथ हो जाता है। डिस्प्ले को Corning Gorilla Glass 7i की सुरक्षा दी गई है। साथ ही 4,500 निट्स की पीक ब्राइटनेस के कारण तेज धूप में भी स्क्रीन आसानी से देखी जा सकती है। दमदार प्रोसेसर और परफॉर्मेंस स्मार्टफोन में Qualcomm Snapdragon 7s Gen 4 प्रोसेसर दिया गया है, जो मल्टीटास्किंग, गेमिंग और AI आधारित फीचर्स को बेहतर तरीके से संभालने में सक्षम है। इसके साथ 8GB रैम और 256GB इंटरनल स्टोरेज का सपोर्ट मिलता है, जिससे यूजर्स को पर्याप्त स्टोरेज स्पेस और तेज परफॉर्मेंस मिलती है। कैमरा सेटअप फोटोग्राफी के लिए फोन में ड्यूल रियर कैमरा सिस्टम दिया गया है। 50MP प्राइमरी कैमरा OIS (Optical Image Stabilization) सपोर्ट ऑटोफोकस फीचर 8MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा वहीं सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 13MP फ्रंट कैमरा मौजूद है। OIS सपोर्ट के कारण कम रोशनी में भी बेहतर फोटो और स्थिर वीडियो रिकॉर्डिंग की उम्मीद की जा सकती है। बड़ी बैटरी और फास्ट चार्जिंग फोन में 6,500mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो लंबे समय तक उपयोग का दावा करती है। चार्जिंग फीचर्स की बात करें तो इसमें: 90W फास्ट चार्जिंग 30W वायरलेस चार्जिंग 7.5W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग 5W वायरलेस रिवर्स चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। यानी यूजर इस फोन की मदद से अन्य डिवाइसेस को भी चार्ज कर सकते हैं। धूल और पानी से सुरक्षा फोन को IP64 रेटिंग दी गई है, जो इसे धूल और पानी की हल्की छींटों से सुरक्षित रखने में मदद करती है। हालांकि इसे पूरी तरह वाटरप्रूफ नहीं माना जा सकता।
नई दिल्ली,एजेंसियां। आज के डिजिटल दौर में फोटो, वीडियो, दस्तावेज़ और अन्य महत्वपूर्ण फाइलों को सुरक्षित रखने के लिए Cloud Storage का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। पहले लोग डेटा को केवल हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव या मेमोरी कार्ड में स्टोर करते थे, लेकिन अब इंटरनेट की मदद से क्लाउड स्टोरेज पर फाइलें सेव करना अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित माना जाता है। आइए जानते हैं कि क्लाउड स्टोरेज क्या है, यह कैसे काम करता है और इसका उपयोग कैसे किया जाता है। Cloud Storage क्या है? Cloud Storage एक ऐसी ऑनलाइन सेवा है, जिसमें आपकी फाइलें आपके कंप्यूटर या मोबाइल में नहीं बल्कि इंटरनेट पर मौजूद सुरक्षित सर्वर (Servers) में स्टोर होती हैं। जब भी आपको अपनी फाइल की जरूरत होती है, तो आप इंटरनेट की मदद से कहीं से भी उसे एक्सेस कर सकते हैं। Cloud Storage कैसे काम करता है? जब आप कोई फोटो, वीडियो या दस्तावेज अपलोड करते हैं, तो वह इंटरनेट के माध्यम से Cloud Provider के सुरक्षित डेटा सेंटर में सेव हो जाता है। इसके बाद आप— मोबाइल लैपटॉप टैबलेट दूसरे कंप्यूटर से अपने अकाउंट में लॉगिन करके उन फाइलों को कभी भी देख सकते हैं। Cloud Storage के सबसे बड़े फायदे 1. कहीं से भी एक्सेस यदि आपके पास इंटरनेट है, तो दुनिया के किसी भी स्थान से अपनी फाइलें खोल सकते हैं। 2. डेटा सुरक्षित रहता है मोबाइल या लैपटॉप खराब होने पर भी आपकी फाइलें सुरक्षित रहती हैं। 3. Automatic Backup कई Cloud Services आपके मोबाइल की फोटो और वीडियो का ऑटोमैटिक बैकअप लेती हैं। 4. आसानी से शेयर कर सकते हैं बड़ी फाइलें WhatsApp या Email की बजाय सिर्फ एक लिंक भेजकर शेयर की जा सकती हैं। 5. Storage बढ़ाया जा सकता है जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त स्टोरेज खरीद सकते हैं। Cloud Storage के नुकसान इंटरनेट के बिना फाइलें एक्सेस करना मुश्किल हो सकता है। मुफ्त स्टोरेज सीमित होता है। बहुत अधिक डेटा रखने के लिए भुगतान करना पड़ सकता है। कमजोर पासवर्ड होने पर अकाउंट हैक होने का खतरा बढ़ जाता है। सबसे लोकप्रिय Cloud Storage Services 1. Google Drive Android यूजर्स के लिए सबसे लोकप्रिय Gmail अकाउंट से आसानी से उपयोग किया जा सकता है मुफ्त स्टोरेज उपलब्ध 2. Microsoft OneDrive Windows कंप्यूटर के साथ बेहतर काम करता है। Office फाइलों के लिए उपयोगी। 3. Dropbox फाइल शेयरिंग के लिए प्रसिद्ध। बिजनेस उपयोगकर्ताओं में लोकप्रिय। 4. Apple iCloud iPhone और Mac उपयोगकर्ताओं के लिए। फोटो और बैकअप के लिए उपयोगी। Cloud Storage का उपयोग कैसे करें? Step 1 अपने मोबाइल या कंप्यूटर में Cloud Storage ऐप खोलें। उदाहरण: Google Drive OneDrive Dropbox Step 2 अपना अकाउंट लॉगिन करें। Step 3 Upload बटन पर क्लिक करें। Step 4 जिस फाइल को सेव करना है उसे चुनें। Step 5 कुछ सेकंड में आपकी फाइल Cloud पर सेव हो जाएगी। Cloud Storage का इस्तेमाल किन कामों में होता है? फोटो बैकअप वीडियो स्टोर करना ऑफिस डॉक्यूमेंट PDF फाइलें कॉलेज नोट्स बिजनेस डेटा मोबाइल बैकअप टीम के साथ फाइल शेयर करना Cloud Storage इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां हमेशा मजबूत पासवर्ड रखें। Two-Factor Authentication (2FA) चालू करें। किसी अनजान व्यक्ति के साथ फाइल लिंक शेयर न करें। संवेदनशील दस्तावेज़ अपलोड करते समय अतिरिक्त सुरक्षा का ध्यान रखें। समय-समय पर स्टोरेज की जांच करें और अनावश्यक फाइलें हटाएं।