टेक्नोलॉजी

Vembu Claims Zoho Mention Cut Microsoft Price by 90%

'Zoho का नाम सुनते ही Microsoft ने 90% घटा दिए दाम', श्रीधर वेम्बु का दावा; बोले- बाजार में विकल्प होंगे तभी ग्राहकों को मिलेगा फायदा

surbhi जुलाई 2, 2026 0
Zoho founder Sridhar Vembu speaks about software competition, claiming a customer received a major Microsoft discount after mentioning Zoho.
Sridhar Vembu on Zoho vs Microsoft

नई दिल्ली: भारतीय SaaS कंपनी Zoho के सह-संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बु ने एक दिलचस्प अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे उनके एक ग्राहक ने सिर्फ Zoho का नाम लेकर Microsoft से भारी डिस्काउंट हासिल कर लिया। वेम्बु ने इस घटना को वर्तमान AI प्रतिस्पर्धा से जोड़ते हुए कहा कि किसी भी बाजार में मजबूत विकल्प (Competition) होना बेहद जरूरी है, क्योंकि प्रतिस्पर्धा ही ग्राहकों के हितों की रक्षा करती है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में दावा किया कि उनके एक भारतीय ग्राहक को Microsoft Office लाइसेंस रिन्यू कराने के दौरान अचानक काफी अधिक कीमत चुकाने के लिए कहा गया। लेकिन जैसे ही ग्राहक ने Microsoft को बताया कि वह Zoho Office Suite पर शिफ्ट होने पर विचार कर रहा है, कंपनी ने कथित तौर पर लाइसेंस की कीमत में लगभग 90 प्रतिशत तक की कटौती कर दी।

हालांकि, इस दावे पर Microsoft की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ग्राहक ने सिर्फ Zoho का नाम लिया और बदल गई कीमत

श्रीधर वेम्बु के मुताबिक, संबंधित ग्राहक पहले से Zoho के कुछ अन्य प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहा था। जब Microsoft Office के लाइसेंस का नवीनीकरण कराने का समय आया, तो उसे पहले की तुलना में काफी अधिक कीमत बताई गई।

इसके बाद ग्राहक ने Microsoft के प्रतिनिधियों से कहा कि वह Zoho Office Suite को विकल्प के रूप में देख रहा है। वेम्बु का दावा है कि इतना सुनते ही Microsoft ने अपने लाइसेंस की कीमत में करीब 90% तक की कमी कर दी।

उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि ग्राहक ने बाद में उन्हें धन्यवाद देते हुए बताया कि "Zoho खरीदे बिना ही उसके काफी पैसे बच गए।"

AI की प्रतिस्पर्धा से जोड़ा पूरा मामला

श्रीधर वेम्बु ने इस उदाहरण का इस्तेमाल मौजूदा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की प्रतिस्पर्धा को समझाने के लिए किया। उनका कहना था कि आज अमेरिकी AI कंपनियों को चीनी ओपन-सोर्स AI मॉडल्स से कड़ी चुनौती मिल रही है और यही प्रतिस्पर्धा पूरे उद्योग के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है।

उन्होंने इशारा किया कि जब किसी बड़ी कंपनी को मजबूत विकल्पों का सामना करना पड़ता है, तो उसे अपने उत्पादों की कीमत, गुणवत्ता और सेवाओं में सुधार करना पड़ता है। इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलता है।

"अगली बार Zoho का नाम जरूर लेना"

अपने पोस्ट में वेम्बु ने हल्के-फुल्के अंदाज में सलाह भी दी कि अगर कोई Microsoft Office का लाइसेंस रिन्यू करा रहा है, तो उसे Zoho का जिक्र जरूर करना चाहिए। उनका कहना था कि प्रतिस्पर्धा कई बार ग्राहकों के लिए बेहतर डील दिलाने में मददगार साबित होती है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल यह दिखाना था कि बाजार में विकल्प मौजूद होना क्यों जरूरी है।

एकाधिकार पर उठाए सवाल

वेम्बु ने अपने पोस्ट में पुराने एंटी-ट्रस्ट मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी कंपनी का बाजार पर अत्यधिक नियंत्रण ग्राहकों के हित में नहीं होता। उनके अनुसार, जब किसी सेक्टर में सिर्फ एक या दो बड़ी कंपनियां हावी हो जाती हैं, तो वे कीमतें और शर्तें अपनी सुविधा के अनुसार तय कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि मजबूत प्रतिस्पर्धा कंपनियों को जवाबदेह बनाती है और उपभोक्ताओं को बेहतर कीमत, बेहतर सेवा और अधिक विकल्प उपलब्ध कराती है।

भारतीय AI को लेकर जताया भरोसा

श्रीधर वेम्बु ने भारत के AI इकोसिस्टम को लेकर भी आशावादी रुख अपनाया। उनका कहना है कि भारतीय विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों में तेजी से AI पर काम हो रहा है।

उन्होंने कहा कि AI मॉडल्स को ट्रेन करने की लागत लगातार कम हो रही है और आने वाले वर्षों में भारतीय AI मॉडल्स भी वैश्विक स्तर पर मजबूत प्रतिस्पर्धा पेश कर सकते हैं।

वेम्बु के मुताबिक, भारत को AI की दौड़ में पीछे मानने की जरूरत नहीं है। यदि निवेश, रिसर्च और नवाचार इसी गति से आगे बढ़ते रहे, तो भारतीय कंपनियां भी दुनिया के बड़े AI खिलाड़ियों को चुनौती देने की स्थिति में पहुंच सकती हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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iPhone 15
iPhone 15 में ओवरहीटिंग और नेटवर्क की दिक्कत, Apple India को ₹45,500 देने का आदेश

नई दिल्ली, एजेंसियां। Apple के iPhone 15 को लेकर उपभोक्ता विवाद का एक मामला सामने आया है। हरियाणा के रोहतक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने iPhone 15 में ओवरहीटिंग और नेटवर्क कनेक्टिविटी जैसी समस्याओं की शिकायत पर Apple India को ग्राहक को ₹45,500 का भुगतान करने का आदेश दिया है।   जनवरी 2024 में खरीदा था iPhone 15   मामले के अनुसार, राजबिर फोगाट नाम के ग्राहक ने जनवरी 2024 में ₹64,999 में iPhone 15 खरीदा था। ग्राहक का आरोप था कि फोन इस्तेमाल करने के दौरान उसे लगातार ओवरहीटिंग, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी और नेटवर्क से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा।   समस्या दूर कराने के लिए ग्राहक कई बार Apple के अधिकृत सर्विस सेंटर पहुंचा। वहां फोन की सेटिंग्स में बदलाव और सॉफ्टवेयर अपडेट समेत कई उपाय किए गए, लेकिन शिकायत दूर नहीं हुई।   सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने के बाद भी नहीं मिली राहत   ग्राहक ने 29 अप्रैल 2024 को Apple कस्टमर केयर से भी संपर्क किया और कंपनी की ओर से बताए गए निर्देशों का पालन किया। इसके बावजूद फोन की समस्या बनी रही।   इसके बाद ग्राहक को iCloud स्टोरेज लेने और मोबाइल नेटवर्क बदलने की सलाह दी गई। उन्होंने ₹75 प्रति माह की दर से iCloud स्टोरेज लिया और अपना मोबाइल कनेक्शन Jio से Airtel में भी बदल लिया। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।   ग्राहक ने उपभोक्ता आयोग में की शिकायत   लगातार परेशानी के बाद राजबिर फोगाट ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया। उन्होंने फोन बदलने या ₹64,999 की पूरी राशि वापस करने की मांग की। ग्राहक ने अपनी शिकायत के समर्थन में टैक्स इनवॉयस, कॉल से जुड़े स्क्रीनशॉट और फोन की समस्या से संबंधित सर्विस रिकॉर्ड समेत अन्य दस्तावेज आयोग के समक्ष पेश किए।   Apple ने मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट से किया इनकार   सुनवाई के दौरान Apple India ने फोन में किसी मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट से इनकार किया। कंपनी ने दावा किया कि डिवाइस में अनधिकृत बदलाव किए गए थे। Apple के अनुसार, अधिकृत सर्विस सेंटर को फोन के निचले हिस्से में धूल के कण मिले थे। कंपनी ने फोन के रियर कैमरा, बैक ग्लास और रियर माइक्रोफोन से जुड़ी कथित समस्याओं का भी उल्लेख किया। कंपनी ने कहा कि अनधिकृत मॉडिफिकेशन उसकी एक साल की वारंटी के दायरे में नहीं आते।   आयोग ने ग्राहक के पक्ष में सुनाया फैसला   मामले की सुनवाई के बाद रोहतक उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने Apple India को प्रभावित ग्राहक को ₹45,500 का भुगतान करने का निर्देश दिया।   यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब स्मार्टफोन में खराबी और बिक्री के बाद सर्विस से जुड़ी शिकायतें उपभोक्ता आयोगों तक पहुंच रही हैं। मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि यदि किसी उत्पाद में लगातार समस्या बनी रहती है और उपभोक्ता को उचित समाधान नहीं मिलता, तो वह उपभोक्ता आयोग का रुख कर सकता है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। किफायती इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए जानी जाने वाली कंपनी itel ने भारतीय घरेलू उपकरण बाजार में कदम बढ़ाते हुए अपनी पहली वॉशिंग मशीन और नई स्मार्ट टीवी रेंज लॉन्च की है। कंपनी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यह पोर्टफोलियो पेश किया। नई रेंज में तीन सेमी-ऑटोमैटिक वॉशिंग मशीन मॉडल और कई स्मार्ट टीवी शामिल हैं।   ₹9,999 से शुरू हुई वॉशिंग मशीन की कीमत   itel ने तीन वॉशिंग मशीन मॉडल पेश किए हैं। WM080SA (8 किलोग्राम) की कीमत ₹9,999, WM095SA (9.5 किलोग्राम) की कीमत ₹12,099 और WM105SA (10.5 किलोग्राम) की कीमत ₹12,699 रखी गई है। ये मॉडल सेमी-ऑटोमैटिक श्रेणी में आते हैं और देशभर के रिटेल स्टोर्स पर उपलब्ध होंगे।   QLED और Mini LED टीवी पर फोकस   नई स्मार्ट टीवी रेंज में कंपनी ने QLED डिस्प्ले तकनीक को ज्यादा मॉडल्स तक पहुंचाया है। खास बात यह है कि पहली बार itel के पोर्टफोलियो में 55 इंच और 65 इंच स्क्रीन साइज वाले QD-Mini LED टीवी भी शामिल किए गए हैं।   इसके अलावा टीवी में Free Dish कनेक्टिविटी, वॉयस कंट्रोल, स्क्रीन कास्टिंग/मिररिंग और HDMI ARC/eARC जैसे फीचर्स दिए गए हैं। Google QLED सीरीज 43, 50 और 55 इंच तथा Android QLED सीरीज 32 और 43 इंच विकल्पों में उपलब्ध होगी।   टीवी की कीमत ₹12,069 से शुरू   itel की नई टीवी रेंज की शुरुआती कीमत ₹12,069 है। कंपनी का लक्ष्य कम कीमत में स्मार्ट टीवी और बेहतर डिस्प्ले तकनीक उपलब्ध कराना है। नई रेंज में QLED को व्यापक स्तर पर शामिल करने के साथ कंपनी ने प्रीमियम डिजाइन और बेहतर ऑडियो पर भी जोर दिया है।   1,000 से ज्यादा सर्विस सेंटर का सपोर्ट   नई वॉशिंग मशीन और टीवी रेंज को कंपनी के Carlcare आफ्टर-सेल्स नेटवर्क का सपोर्ट मिलेगा। भारत में 1,000 से ज्यादा Carlcare सर्विस सेंटर होने का दावा किया गया है, जिससे कंपनी छोटे शहरों और कस्बों में भी बिक्री के बाद सेवा उपलब्ध कराने की तैयारी में है।   itel का यह कदम स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से आगे बढ़कर भारतीय होम अप्लायंसेज बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

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OpenAI
ChatGPT में Ads की शुरुआत, यूजर्स को जवाबों के बीच दिख सकते हैं विज्ञापन

नई दिल्ली, एजेंसियां। OpenAI ने ChatGPT में विज्ञापनों को लेकर अपनी योजना को आगे बढ़ाया है। कंपनी ने बताया है कि Free और Go प्लान इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को ChatGPT में विज्ञापन दिखाई दे सकते हैं। विज्ञापन चैट के जवाब से अलग और स्पष्ट रूप से Sponsored के रूप में दिखाए जाएंगे।   जवाबों को प्रभावित नहीं करेंगे विज्ञापन   OpenAI के अनुसार विज्ञापन ChatGPT के जवाबों को प्रभावित नहीं करेंगे। विज्ञापनदाता यूजर की बातचीत को अपने विज्ञापन के हिसाब से बदलने या जवाबों में किसी ब्रांड को प्राथमिकता दिलाने के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। विज्ञापन और AI के जवाबों के बीच स्पष्ट अंतर रखा जाएगा।   किन यूजर्स को दिखेंगे Ads?   वर्तमान नीति के अनुसार Free और Go प्लान वाले यूजर्स को विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं। वहीं Plus, Pro और Enterprise जैसे पेड प्लान विज्ञापन-मुक्त रहते हैं। यूजर्स को विज्ञापन के पास उपलब्ध विकल्पों के जरिए उसे छिपाने या उसकी प्रासंगिकता पर प्रतिक्रिया देने का विकल्प भी मिल सकता है।   बातचीत और विज्ञापन डेटा को लेकर क्या कहा गया?   OpenAI के मुताबिक विज्ञापनदाताओं को यूजर्स की निजी बातचीत उपलब्ध नहीं कराई जाती और यूजर डेटा विज्ञापनदाताओं को बेचा नहीं जाता। विज्ञापन ChatGPT के जवाबों से अलग रखे जाते हैं।   विज्ञापन क्यों लाए जा रहे हैं?   ChatGPT के बड़े स्तर पर इस्तेमाल के बीच विज्ञापन मॉडल को Free और कम कीमत वाले प्लान को सपोर्ट करने वाले अतिरिक्त राजस्व स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, विज्ञापनों का वास्तविक अनुभव यूजर के प्लान और उपलब्धता के आधार पर अलग हो सकता है।

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