Bhumi Pednekar

Bhumi Pednekar faces social media backlash after objecting to abusive language against PM Modi
भूमि पेडनेकर के बयान पर विवाद: पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा पर जताई आपत्ति, सोशल मीडिया पर यूजर्स ने पूछे तीखे सवाल

नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर इन दिनों अपने एक सोशल मीडिया वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। जंतर-मंतर पर NEET-UG 2026 से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर भूमि ने आपत्ति जताई। उन्होंने युवाओं से अपील की कि असहमति और विरोध दर्ज कराते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। हालांकि, उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर ही उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। पीएम मोदी के खिलाफ भाषा पर भूमि ने जताई आपत्ति भूमि पेडनेकर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए विरोध-प्रदर्शनों से सामने आए कुछ वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा पर चिंता जताई। उनका कहना था कि देश के युवाओं को अपनी नाराजगी और असहमति व्यक्त करते समय अपमानजनक या गाली-गलौज वाली भाषा से बचना चाहिए। भूमि ने देश की संस्कृति और सार्वजनिक संवाद में सम्मानजनक भाषा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जिस तरह हम अपने परिवार के बड़ों से बात करते हैं, क्या सार्वजनिक जीवन में भी संवाद की एक मर्यादा नहीं होनी चाहिए। अभिनेत्री ने युवाओं से शिक्षा और लैंगिक हिंसा जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने तथा एकता के साथ आगे बढ़ने की अपील की। बयान के बाद सोशल मीडिया पर घिरीं अभिनेत्री भूमि के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ यूजर्स ने उनके इस विचार का समर्थन किया कि राजनीतिक असहमति के बावजूद अपशब्दों से बचना चाहिए, लेकिन कई अन्य लोगों ने सवाल उठाया कि क्या विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और छात्रों के साथ हुई घटनाओं पर भी समान रूप से आवाज उठाई गई थी। आलोचकों ने आरोप लगाया कि भूमि ने प्रदर्शनकारियों की भाषा पर तो टिप्पणी की, लेकिन प्रदर्शन से जुड़े दूसरे विवादित पहलुओं पर उनकी प्रतिक्रिया दिखाई नहीं दी। कुछ यूजर्स ने उनके बयान को 'चुनिंदा' बताया और कहा कि किसी भी मुद्दे को केवल एक पक्ष से देखने के बजाय पूरे घटनाक्रम पर बात होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर कुछ टिप्पणियां बेहद तीखी भी रहीं। कुछ लोगों ने अभिनेत्री पर 'जमीनी हकीकत से दूर' होने का आरोप लगाया, जबकि कुछ यूजर्स ने यह सवाल किया कि क्या सम्मान की अपील करने से पहले सत्ता और प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। विवाद के बीच असली सवाल क्या है? इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग मुद्दे सामने आते हैं। पहला, किसी भी लोकतांत्रिक विरोध में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ भाषा की मर्यादा का सवाल। दूसरा, प्रदर्शनकारियों के साथ प्रशासन और पुलिस के व्यवहार को लेकर उठाए जा रहे सवाल। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की आलोचना और विरोध प्रदर्शन नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार है। वहीं, किसी व्यक्ति या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ हिंसक या अपमानजनक भाषा को लेकर सवाल उठाना भी अलग मुद्दा है। दोनों विषयों पर एक साथ चर्चा की जा सकती है। यही वजह है कि भूमि पेडनेकर के बयान ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक और सामाजिक बहस को और तेज कर दिया है। जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा विवाद यह विवाद उस समय सामने आया है जब NEET-UG 2026 से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बहस जारी है। प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं। प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल ने भी अलग बहस को जन्म दिया। भूमि पेडनेकर ने इसी पहलू पर प्रतिक्रिया देते हुए युवाओं से संयमित और सम्मानजनक भाषा अपनाने की अपील की। हालांकि, सोशल मीडिया पर उनकी प्रतिक्रिया के बाद सवाल यह भी उठ रहा है कि सार्वजनिक हस्तियों को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी करते समय पूरे घटनाक्रम के सभी पक्षों पर बात करनी चाहिए या नहीं। सोशल मीडिया की बहस ने बढ़ाई चर्चा भूमि पेडनेकर के बयान के बाद सामने आई प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि NEET-UG 2026 से जुड़ा विवाद केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। अब इसमें विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक भाषा, पुलिस कार्रवाई, सार्वजनिक संवाद और सेलिब्रिटी की भूमिका जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए हैं। फिलहाल इस विवाद का सबसे बड़ा संदेश यही है कि लोकतांत्रिक असहमति में सवाल पूछना जरूरी है, लेकिन भाषा और संवाद की मर्यादा को लेकर बहस भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। साथ ही, किसी भी विवाद को समझने के लिए आरोपों, प्रतिक्रियाओं और उपलब्ध तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।  

surbhi अगस्त 3, 2026 0
Bhumi Pednekar Pushkar visit
पुष्कर की भक्ति में रंगीं भूमि पेडनेकर, मंदिरों-घाटों से साझा की आध्यात्मिक झलक

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने हाल ही में राजस्थान के पवित्र तीर्थ पुष्कर की आध्यात्मिक यात्रा की, जिसकी झलक उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की। तस्वीरों और वीडियो के जरिए भूमि ने बताया कि यह यात्रा उनके लिए केवल घूमने-फिरने का अनुभव नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ने का अवसर रही।   ब्रह्मा नगरी में मिला आध्यात्मिक सुकून भूमि ने अपनी पोस्ट में लिखा कि पुष्कर ऐसा शहर है, जहां इतिहास, आस्था और प्राचीन कथाएं एक साथ जीवंत नजर आती हैं। उन्होंने भगवान ब्रह्मा के प्रसिद्ध मंदिर और पवित्र घाटों के दर्शन किए। अभिनेत्री ने लिखा, "हम सभी भगवान ब्रह्मा की सुंदर रचना हैं। पुष्कर की गलियों और मंदिरों में घूमते हुए यही भावना मन में बार-बार आती रही। यहां 1100 से अधिक मंदिर हैं और हर कहानी अपने भीतर गहरी आध्यात्मिकता समेटे हुए है।"   पशु आश्रय गृह में बिताया समय मंदिरों के दर्शन के अलावा भूमि ने पुष्कर के एक पशु आश्रय गृह का भी दौरा किया। यहां घायल, बेसहारा और दिव्यांग पशुओं की सेवा की जाती है। लकवाग्रस्त गायों, पक्षियों, बंदरों और अन्य जानवरों की देखभाल देखकर भूमि भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि इन बेजुबानों की सेवा ने उन्हें यह महसूस कराया कि "सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है।" संस्था के कार्यों की उन्होंने खुले दिल से सराहना की।   संस्कृति और स्वाद ने भी किया प्रभावित भूमि पेडनेकर ने पुष्कर की समृद्ध संस्कृति और स्थानीय खानपान की भी तारीफ की। उन्होंने बताया कि यहां पारंपरिक राजस्थानी मालपुओं का स्वाद जितना खास है, उतना ही आकर्षक यहां मौजूद अंतरराष्ट्रीय संस्कृति से जुड़े इजराइली कैफे भी हैं। उनके अनुसार, पुष्कर परंपरा और आधुनिकता का ऐसा संगम है, जो हर यात्री को एक अलग अनुभव देता है।   भूमि की इस यात्रा की तस्वीरों और भावुक पोस्ट को सोशल मीडिया पर फैंस का भरपूर प्यार मिल रहा है। कई प्रशंसकों ने उनकी आध्यात्मिक सोच और पशु सेवा के प्रति संवेदनशीलता की सराहना की।

anjali kumari जून 30, 2026 0
Bhumi Pednekar stuns in a silver Kanjivaram saree paired with a golden brocade corset.
Bhumi Pednekar ने कांजीवरम साड़ी को दिया मॉडर्न ट्विस्ट, ब्रोकेड कॉर्सेट के साथ जीता फैशन प्रेमियों का दिल

बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर एक बार फिर अपने अनोखे फैशन सेंस को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में आयोजित एक अवॉर्ड समारोह में अभिनेत्री ने पारंपरिक रेड कार्पेट गाउन की बजाय भारतीय विरासत की खूबसूरती को चुनते हुए एक शानदार सिल्वर कांजीवरम साड़ी पहनकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अपनी चर्चित वेब सीरीज 'दलदल' में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए ट्रॉफी लेने पहुंचीं भूमि ने Ekaya Banaras की सिल्वर मेटैलिक कांजीवरम साड़ी को एक मॉडर्न अंदाज में स्टाइल किया। उनके इस लुक ने साबित कर दिया कि पारंपरिक भारतीय बुनाई आज भी समकालीन फैशन में उतनी ही प्रासंगिक और स्टाइलिश है। सिल्वर कांजीवरम साड़ी के साथ पहना गोल्डन ब्रोकेड कॉर्सेट भूमि की हैंडवोवन कांजीवरम साड़ी सिल्क-टिश्यू फैब्रिक से तैयार की गई थी, जिसकी चमकदार फिनिश ने पूरे लुक को बेहद रॉयल टच दिया। तमिलनाडु की प्रसिद्ध कांजीवरम बुनाई अपनी शानदार कारीगरी, मजबूती और सदाबहार आकर्षण के लिए जानी जाती है। पारंपरिक ब्लाउज की जगह अभिनेत्री ने हल्के गोल्डन रंग का ब्रोकेड कॉर्सेट चुना, जिसमें स्वीटहार्ट नेकलाइन और स्ट्रक्चर्ड बोनिंग डिटेल्स थीं। इस कॉम्बिनेशन ने उनके ट्रेडिशनल आउटफिट को ग्लैमरस और आधुनिक रूप दिया। पल्लू स्टाइलिंग ने बढ़ाई पूरे लुक की खूबसूरती भूमि ने साड़ी को पारंपरिक तरीके से ड्रेप करने के बजाय पल्लू को दोनों कंधों पर केप की तरह स्टाइल किया। इस यूनिक स्टाइलिंग ने उनके लुक को रेड कार्पेट के लिए और भी आकर्षक बना दिया। डायमंड और पोल्की ज्वेलरी ने लुक में जोड़ी शाही चमक अभिनेत्री ने अपने लुक को शानदार ज्वेलरी के साथ पूरा किया। उन्होंने अनकट डायमंड, रूबी और पर्ल पेंडेंट वाला चोकर पहना। इसके अलावा पोल्की जड़ी ईयर कफ, हेयर ब्रोच और कई खूबसूरत रिंग्स ने उनके पूरे लुक में रॉयल फिनिश दी। ग्लैमरस मेकअप और स्लीक हेयरस्टाइल ने बनाया लुक परफेक्ट भूमि ने अपने बालों को स्लीक अपडू में बांधा और कॉपर टोन आईशैडो, रेड लिपस्टिक और ग्लोइंग हाईलाइटर के साथ क्लासिक इवनिंग मेकअप चुना। पारंपरिक साड़ी का मॉडर्न फैशन स्टेटमेंट भूमि पेडनेकर का यह लुक इस बात का शानदार उदाहरण है कि भारतीय विरासत की पारंपरिक साड़ियां सही स्टाइलिंग के साथ कॉकटेल पार्टी से लेकर वेडिंग फंक्शन तक हर अवसर पर बेहद स्टाइलिश दिखाई दे सकती हैं।  

surbhi जून 22, 2026 0
Bhumi Pednekar in a Banarasi jamawar coat and harem pants showcasing androgynous fashion.
भूमि पेडनेकर का अनोखा फैशन स्टेटमेंट, बनारसी जामावर फैब्रिक के कोट में दिखा एंड्रोजिनस अंदाज

बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर एक बार फिर अपने फैशन सेंस को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने पारंपरिक भारतीय बुनाई और आधुनिक सिल्हूट का शानदार मेल पेश करते हुए ऐसा लुक अपनाया, जिसने फैशन प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। भूमि ने हाल ही में पाकिस्तानी डिजाइनर हुसैन रेहर के लेटेस्ट ब्राइडल कलेक्शन 'नर्गिस' से लिया गया एक खास आउटफिट पहना। यह लुक एंड्रोजिनस फैशन और दक्षिण एशियाई हस्तकला का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है। बनारसी जामावर फैब्रिक से बना खास कोट भूमि के इस आउटफिट का मुख्य आकर्षण एक फुल-स्लीव बटन-डाउन कोट था, जिसे हाथ से बुने गए बनारसी जामावर फैब्रिक से तैयार किया गया था। कोट पर हरे और रस्ट रंगों के पैस्ले और फ्लोरल मोटिफ्स बेहद खूबसूरती से उकेरे गए थे। प्रिंसेस सीम डिटेलिंग के कारण कोट को एक आकर्षक आवरग्लास शेप मिली, जिससे पारंपरिक कपड़े में आधुनिक टेलरिंग का खूबसूरत संतुलन देखने को मिला। हरेम पैंट्स ने बढ़ाई आउटफिट की खूबसूरती कोट के साथ भूमि ने वॉल्यूमिनस हरेम पैंट्स पहने, जो टखनों पर टेपर डिजाइन के साथ खत्म होते हैं। इन पैंट्स की बॉर्डर पर मुकेश और रेशम की बारीक कढ़ाई की गई थी, जिसने पूरे लुक को और शाही बना दिया। स्टाइलिंग और एक्सेसरीज़ ने खींचा ध्यान स्टाइलिस्ट निधि जेसवानी ने इस लुक को स्टेटमेंट ईयररिंग्स और हाई हील्स के साथ पूरा किया। भूमि ने ब्रॉन्जी मेकअप, मेटैलिक आईशैडो और साइड पार्टिंग के साथ स्लीक बन हेयरस्टाइल चुना, जिसने उनके पूरे लुक में एलिगेंस जोड़ दिया। वैश्विक मंच पर दक्षिण एशियाई कला का प्रदर्शन डिजाइनर हुसैन रेहर हाल ही में पेरिस फैशन वीक में भी अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं, जहां उन्होंने दक्षिण एशियाई शिल्प और फैशन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया था। भूमि पेडनेकर का यह लुक पारंपरिक भारतीय बुनाई, आधुनिक डिजाइन और जेंडर-न्यूट्रल फैशन का एक शानदार उदाहरण बनकर सामने आया है।  

surbhi जून 17, 2026 0
Illustration of Garden Vareli saree at D2C and AI-powered digital platform launch event.
Garden Vareli का डिजिटल अवतार: विरासत से आगे बढ़कर D2C और AI के साथ नई शुरुआत

भारतीय साड़ी फैशन में दशकों तक अपनी अलग पहचान बनाने वाला ब्रांड Garden Vareli अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। 80 और 90 के दशक में अपनी हल्की शिफॉन, जॉर्जेट और सिग्नेचर प्रिंट्स के लिए मशहूर रहा यह ब्रांड अब डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के जरिए खुद को फिर से स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। D2C प्लेटफॉर्म के साथ नई शुरुआत ब्रांड की यह नई पारी तब शुरू हुई जब The Chatterjee Group (TCG) ने Garden Vareli को लाइफस्टाइल सेगमेंट में आगे बढ़ाने की रणनीति के तहत इसका डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। मुंबई में आयोजित एक बड़े इवेंट में इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का अनावरण किया गया, जहां ब्रांड के नए कलेक्शन की भी झलक देखने को मिली। यह लॉन्च सिर्फ एक ऑनलाइन स्टोर की शुरुआत नहीं है, बल्कि ब्रांड के डिजिटल-फर्स्ट विजन का संकेत है, जिसमें टेक्नोलॉजी, रिटेल और कस्टमर एक्सपीरियंस को एक साथ जोड़ा गया है। शोस्टॉपर बनीं भूमि पेडनेकर इस खास मौके पर एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर शोस्टॉपर के रूप में नजर आईं। उन्होंने आधुनिक भारतीय महिला की छवि को बखूबी पेश किया जो परंपरा से जुड़ी होने के साथ-साथ अपनी अलग पहचान भी रखती है। उनकी मौजूदगी ने ब्रांड के इस ट्रांजिशन को और मजबूत किया, खासकर युवा और फैशन-फॉरवर्ड ऑडियंस से जुड़ने के लिहाज से। AI और टेक्नोलॉजी पर फोकस Garden Vareli का नया D2C प्लेटफॉर्म AI-पावर्ड है, जो इसे पारंपरिक रिटेल ब्रांड से एक डिजिटल-फर्स्ट कंपनी में बदलने की दिशा में बड़ा कदम बनाता है। इस प्लेटफॉर्म की खासियतें: रिटेल, इन्वेंट्री और कस्टमर एंगेजमेंट का इंटीग्रेशन ऑनलाइन और ऑफलाइन का seamless अनुभव स्केलेबल और डेटा-ड्रिवन सिस्टम ओमनीचैनल रणनीति पर जोर MCPI प्राइवेट लिमिटेड के MD & CEO देबी प्रसाद पात्रा के अनुसार, कंपनी अब ओमनीचैनल मॉडल पर काम कर रही है, जिसमें फिजिकल स्टोर्स को फुलफिलमेंट हब के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे ग्राहक ऑफलाइन ब्राउजिंग और ऑनलाइन खरीदारी के बीच आसानी से स्विच कर पाएंगे। नई पीढ़ी को ध्यान में रखकर बदलाव Garden Silk Fashions के CEO डॉ. महेंद्र सिंह भदौरिया ने कहा कि आज के डिजिटल-सेवी कंज्यूमर्स तक पहुंचने के लिए यह बदलाव जरूरी है। D2C प्लेटफॉर्म ब्रांड और ग्राहकों के बीच सीधा कनेक्शन बनाने का काम करेगा। विरासत के साथ भविष्य की ओर कदम Garden Vareli का यह ट्रांसफॉर्मेशन इस बात का संकेत है कि ब्रांड सिर्फ अपनी पुरानी पहचान पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि नई तकनीक, डिजाइन और रणनीति के साथ खुद को फिर से गढ़ रहा है। यह बदलाव न सिर्फ समय के हिसाब से जरूरी है, बल्कि भारतीय फैशन इंडस्ट्री में इसकी नई भूमिका को भी परिभाषित करेगा।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 30, 2026 0