Fever

Coconut water and electrolyte drinks compared for hydration after fever, diarrhea, vomiting, exercise and heavy sweating
बुखार, दस्त या एक्सरसाइज के बाद क्या पिएं? नारियल पानी या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक, जानिए किस स्थिति में कौन बेहतर

नई दिल्ली: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना जरूरी है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में सिर्फ पानी शरीर की जरूरत पूरी नहीं कर पाता। तेज पसीना, लंबे समय तक एक्सरसाइज, दस्त, उल्टी या बुखार के दौरान शरीर से पानी के साथ सोडियम, पोटैशियम और दूसरे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम हो सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि नारियल पानी बेहतर है या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक? इसका जवाब हर व्यक्ति और हर स्थिति के लिए एक जैसा नहीं है। सामान्य हाइड्रेशन के लिए नारियल पानी अच्छा विकल्प हो सकता है, जबकि लंबे समय तक भारी एक्सरसाइज या अत्यधिक पसीने के बाद सोडियम युक्त इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक ज्यादा उपयोगी हो सकती है। वहीं दस्त और उल्टी की स्थिति में ORS को प्राथमिकता देना ज्यादा उचित है। शरीर के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स क्यों जरूरी हैं? इलेक्ट्रोलाइट्स ऐसे मिनरल्स हैं जो शरीर में विद्युत आवेश के साथ काम करते हैं। इनमें सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड, मैग्नीशियम और कैल्शियम प्रमुख हैं। ये शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने के साथ मांसपेशियों के संकुचन, तंत्रिका तंत्र के सामान्य कामकाज और हृदय की सामान्य धड़कन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब शरीर से बहुत ज्यादा पसीना निकलता है या दस्त, उल्टी और बुखार के दौरान तरल पदार्थ कम होते हैं, तो इलेक्ट्रोलाइट्स की भी कमी हो सकती है। ऐसी स्थिति में केवल पानी पीना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। नारियल पानी में क्या मिलता है? नारियल पानी एक प्राकृतिक पेय है, जिसमें पानी के साथ पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, थोड़ी मात्रा में सोडियम और प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं। ताजा नारियल पानी का फायदा यह है कि इसमें आमतौर पर अतिरिक्त चीनी और कृत्रिम फ्लेवर नहीं होते। इसलिए सामान्य हाइड्रेशन के लिए यह एक पौष्टिक विकल्प हो सकता है। हालांकि, इसमें सोडियम की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। इसलिए जब शरीर ने बहुत अधिक सोडियम खोया हो, तब नारियल पानी अकेले पर्याप्त इलेक्ट्रोलाइट रिप्लेसमेंट नहीं कर सकता। इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक कब ज्यादा उपयोगी? इलेक्ट्रोलाइट या स्पोर्ट्स ड्रिंक में पानी के साथ सोडियम, पोटैशियम और अक्सर ग्लूकोज या कार्बोहाइड्रेट मौजूद होते हैं। इनका उद्देश्य पसीने के दौरान खोए हुए तरल और इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करना होता है। लंबे समय तक भारी एक्सरसाइज, गर्म मौसम में ज्यादा पसीना आने या लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि के बाद सोडियम युक्त इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक उपयोगी हो सकती है। लेकिन बाजार में मिलने वाली हर इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक एक जैसी नहीं होती। कुछ में अतिरिक्त चीनी और कैलोरी काफी ज्यादा हो सकती है। इसलिए खरीदने से पहले लेबल पर सोडियम, शुगर और कैलोरी की मात्रा देखना जरूरी है। नारियल पानी बनाम इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक विशेषता नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट/स्पोर्ट्स ड्रिंक पानी अधिक अधिक पोटैशियम अधिक सामान्य से मध्यम सोडियम कम आमतौर पर अधिक अतिरिक्त चीनी ताजा नारियल पानी में नहीं कुछ उत्पादों में अधिक प्रोसेसिंग प्राकृतिक अधिकांश पैक्ड उत्पाद प्रोसेस्ड सामान्य हाइड्रेशन अच्छा विकल्प अच्छा विकल्प अत्यधिक पसीना अकेले पर्याप्त नहीं हो सकता ज्यादा उपयोगी हो सकता है दस्त या उल्टी में क्या पिएं? दस्त और उल्टी में शरीर से पानी के साथ सोडियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से निकल सकते हैं। ऐसी स्थिति में ORS यानी ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन ज्यादा उपयुक्त विकल्प है। नारियल पानी हल्के डिहाइड्रेशन में कुछ मदद कर सकता है, लेकिन गंभीर दस्त, बार-बार उल्टी या स्पष्ट डिहाइड्रेशन में इसे ORS का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यहां एक जरूरी अंतर समझना भी महत्वपूर्ण है: ORS और सामान्य स्पोर्ट्स ड्रिंक एक ही चीज नहीं हैं। ORS को शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करने के उद्देश्य से विशेष अनुपात में तैयार किया जाता है। बुखार में नारियल पानी या इलेक्ट्रोलाइट? हल्के बुखार में पर्याप्त तरल लेना महत्वपूर्ण है। पानी और दूसरे तरल पदार्थ लिए जा सकते हैं। अगर बुखार के साथ ज्यादा पसीना, उल्टी या दस्त भी हो रहे हैं, तो इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में ORS उपयोगी हो सकता है। केवल नारियल पानी पर निर्भर रहना सही विकल्प नहीं होगा, खासकर अगर डिहाइड्रेशन के लक्षण मौजूद हों। एक्सरसाइज के बाद क्या बेहतर है? अगर आपने हल्की या सामान्य एक्सरसाइज की है और बहुत ज्यादा पसीना नहीं निकला, तो सादा पानी पर्याप्त हो सकता है। नारियल पानी भी एक अच्छा विकल्प है। लेकिन लंबे समय तक तेज एक्सरसाइज करने या बहुत ज्यादा पसीना निकलने पर शरीर से सोडियम की अधिक मात्रा कम हो सकती है। ऐसे में पर्याप्त सोडियम वाला इलेक्ट्रोलाइट पेय नारियल पानी से ज्यादा उपयोगी हो सकता है। यानी हर एक्सरसाइज के बाद इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक पीना जरूरी नहीं है। इसकी जरूरत एक्सरसाइज की अवधि, तीव्रता, मौसम और पसीने की मात्रा पर निर्भर करती है। किस स्थिति में क्या चुनें? सामान्य हाइड्रेशन: नारियल पानी अच्छा विकल्प हो सकता है। हल्की एक्सरसाइज: पानी या नारियल पानी पर्याप्त हो सकता है। लंबी और भारी एक्सरसाइज: सोडियम वाला इलेक्ट्रोलाइट पेय अधिक उपयोगी हो सकता है। बहुत ज्यादा पसीना: सोडियम और तरल दोनों की भरपाई पर ध्यान दें। दस्त या उल्टी: ORS को प्राथमिकता दें। गंभीर डिहाइड्रेशन: चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। सबसे जरूरी बात नारियल पानी और इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक में से किसी एक को हर परिस्थिति में बेहतर बताना सही नहीं होगा। सही विकल्प इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर ने कितना पानी और कौन से इलेक्ट्रोलाइट खोए हैं। सामान्य हाइड्रेशन के लिए नारियल पानी एक प्राकृतिक विकल्प हो सकता है। अत्यधिक पसीने और लंबे समय तक भारी व्यायाम के बाद सोडियम युक्त इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक उपयोगी हो सकती है। लेकिन दस्त, उल्टी या गंभीर डिहाइड्रेशन में ORS को प्राथमिकता देना चाहिए। अगर बहुत कम पेशाब आ रहा हो, लगातार उल्टी-दस्त हो रहे हों, तेज चक्कर, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम या बेहोशी जैसी समस्या हो, तो केवल घर पर हाइड्रेशन पर निर्भर न रहें और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।  

surbhi अगस्त 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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JPSC-JSSC विवाद पर सरकार और अभ्यर्थियों में डेढ़ घंटे चली वार्ता, 10 अगस्त के विधानसभा घेराव पर सस्पेंस

kalpana अगस्त 8, 2026 0