MEA India

Cargo ship MV Golden Leo after the missile attack near Ukraine's Odesa port
यूक्रेन में कार्गो जहाज पर मिसाइल हमला, 4 भारतीयों की मौत; भारत ने जताया कड़ा विरोध

Ukraine Ship Attack: यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए कार्गो जहाज MV Golden Leo पर हुए मिसाइल हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई, जबकि एक भारतीय गंभीर रूप से घायल है। इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए रूस के राजदूत को तलब किया और कहा कि व्यापारिक जहाजों तथा निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह हमला 19 जुलाई की शाम उस समय हुआ जब गिनी-बिसाऊ के झंडे वाला यह मालवाहक जहाज ओडेसा पोर्ट से मक्का लेकर रवाना हुआ था। जहाज पर कुल 17 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें पांच भारतीय नागरिक शामिल थे। हमले में चार भारतीयों की मौत हो गई, जबकि एक घायल भारतीय का अस्पताल में इलाज चल रहा है। यूक्रेन का दावा- रूसी क्रूज मिसाइलों से किया गया हमला यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, जहाज बंदरगाह से निकलने के कुछ ही समय बाद उस पर तीन रूसी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। यूक्रेन की नौसेना ने बताया कि मिसाइल लगने के बाद जहाज में भीषण आग लग गई। पूरी रात सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इस हमले में कुल 10 लोगों की मौत हुई है। भारत सरकार ने जताया कड़ा विरोध भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि व्यापारिक जहाजों, निर्दोष नागरिकों और समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय दूतावास यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित भारतीयों तथा उनके परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। भारत ने स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर इस तरह के हमले वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं और ऐसे हमलों से बचा जाना चाहिए। ब्लैक सी में लगातार बढ़ रहा है खतरा रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते ब्लैक सी और सी ऑफ एजोव क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। हाल के महीनों में रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों और कार्गो जहाजों पर हमले बढ़ाए हैं, जबकि यूक्रेन भी रूस के ऊर्जा ढांचे और तेल टैंकरों को निशाना बना रहा है। वैश्विक अनाज कारोबार पर भी असर यूक्रेन दुनिया के प्रमुख कृषि निर्यातकों में शामिल है और वैश्विक गेहूं तथा मक्का आपूर्ति में उसकी बड़ी हिस्सेदारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लैक सी में बढ़ते सैन्य हमलों से अनाज निर्यात प्रभावित हो सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजार और समुद्री व्यापार पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है। वहीं रूस को भी सी ऑफ एजोव के जरिए होने वाले अपने अनाज निर्यात में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
Indian Foreign Secretary Vikram Misri meeting US officials in Washington DC during diplomatic visit
विदेश सचिव विक्रम मिसरी का US दौरा: 8–10 अप्रैल तक अहम बैठकों का दौर

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी 8 से 10 अप्रैल 2026 तक वॉशिंगटन DC की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वे अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत-अमेरिका संबंधों की व्यापक समीक्षा व्यापार और रक्षा सहयोग को मजबूत करना पश्चिम एशिया (Middle East) के मौजूदा संकट पर चर्चा किन-किन मुद्दों पर होगी बात? विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इस यात्रा में कई अहम क्षेत्रों पर बातचीत होगी: द्विपक्षीय व्यापार और संभावित ट्रेड एग्रीमेंट रक्षा सहयोग विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा हालात खास तौर पर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है। उच्च-स्तरीय संवाद की कड़ी यह दौरा विदेश मंत्री एस. जयशंकर की फरवरी में हुई US यात्रा के बाद हो रहा है दोनों देशों के बीच लगातार उच्च-स्तरीय बातचीत हो रही है पृष्ठभूमि: संबंधों में आई थी खटास हाल के समय में कुछ मुद्दों पर तनाव भी देखा गया: अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ (शुल्क) लगाना पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत-पाक तनाव पर विवादित बयान अब दोनों देश संबंधों को स्थिर और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। क्यों अहम है यह दौरा? बदलते वैश्विक हालात (खासकर पश्चिम एशिया) भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका आर्थिक और रक्षा साझेदारी की जरूरत ऐसे में यह यात्रा भारत-अमेरिका रिश्तों को नई दिशा दे सकती है।  

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Dhanbad Mumbai train
धनबाद-मुंबई स्पेशल ट्रेन हुई नियमित, सप्ताह में 1 दिन चलेगी

धनबाद। धनबाद से लोकमान्य तिलक टर्मिनस, मुंबई के बीच नई साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन का नियमित परिचालन शुरू हो गया है। सोमवार देर रात 11 बजे धनबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 7 से सांसद ढुल्लू महतो ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्पेशल के रूप में चल रही थी अब तक यह ट्रेन स्पेशल सेवा के रूप में चलाई जा रही थी, जिसे रेल मंत्रालय ने स्थायी और नियमित सेवा का दर्जा दे दिया है। ट्रेन के नियमित होने से धनबाद और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को मुंबई के लिए सीधी और बेहतर रेल सुविधा उपलब्ध हो गई है, जिससे लंबे समय से चली आ रही मांग भी पूरी हुई है।   स्टेशन पर हुआ जोरदार स्वागत इस ट्रेन के नियमित परिचालन को लेकर धनबाद में उत्साह का माहौल देखा गया। रात्रि करीब 10:40 बजे जब यह ट्रेन धनबाद स्टेशन पहुंची, तो स्थानीय लोगों, यात्रियों और जनप्रतिनिधियों ने इसका गर्मजोशी से स्वागत किया। सांसद ढुल्लू महतो ने दिखाई हरी झंडी इस मौके पर सांसद ढुल्लू महतो और मंडल रेल प्रबंधक अखिलेश कुमार भी उपस्थित रहे। यात्रा के दौरान अन्य प्रमुख स्टेशनों पर भी ट्रेन का स्वागत किया गया। सांसद ने कहा कि यह सेवा भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर शुरू की गई है। यह क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाएगी। 39 धंटे में 1848 किमी की दूरी तय करेगी यह साप्ताहिक ट्रेन कुल 1848 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 28 स्टेशनों पर रुकेगी। निर्धारित समय के अनुसार यह बुधवार दोपहर 1:40 बजे मुंबई पहुंचेगी, जबकि वापसी में बुधवार शाम 4:55 बजे मुंबई से रवाना होकर शुक्रवार सुबह 8 बजे धनबाद पहुंचेगी। यात्रियों तो राहत इस सेवा के शुरू होने से रोजगार, इलाज और शिक्षा के लिए मुंबई जाने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। स्थानीय लोगों में इसे लेकर खुशी की लहर है। उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में इस ट्रेन को दैनिक सेवा के रूप में भी शुरू किया जा सकता है।

Unknown अप्रैल 7, 2026 0
India sends humanitarian aid supplies including relief kits to Afghanistan after earthquake and floods crisis
अफ़ग़ानिस्तान की मदद के लिए आगे आया भारत, भेजी बड़ी राहत सामग्री

प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे अफ़ग़ानिस्तान के लिए भारत ने एक बार फिर मानवता का परिचय दिया है। बाढ़ और भूकंप के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने वहां के लोगों की सहायता के लिए मानवीय मदद और आपदा राहत (HADR) सामग्री भेजी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि हाल ही में आई बाढ़ और भूकंप की वजह से अफ़ग़ानिस्तान के लोग भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस कठिन समय में भारत ने तुरंत सहायता पहुंचाने का फैसला लिया और राहत सामग्री भेजी। भारत द्वारा भेजी गई इस सहायता में रोज़मर्रा के इस्तेमाल की कई जरूरी चीजें शामिल हैं। इनमें किचन सेट, सफ़ाई का सामान, प्लास्टिक शीट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। ये सभी सामान खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हैं, जिनके घर या बुनियादी सुविधाएं आपदा में प्रभावित हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी राहत सामग्री न केवल प्रभावित लोगों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करती है, बल्कि उन्हें सुरक्षित रहने और सामान्य जीवन की ओर लौटने में भी मदद करती है। तिरपाल और प्लास्टिक शीट जैसे सामान अस्थायी आश्रय बनाने में मददगार होते हैं, वहीं स्लीपिंग बैग और किचन सेट रोजमर्रा के जीवन को सुगम बनाते हैं। भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच लंबे समय से दोस्ताना संबंध रहे हैं और भारत समय-समय पर वहां के लोगों की मदद करता रहा है। इससे पहले भी भारत ने खाद्यान्न, दवाइयां और अन्य आवश्यक सहायता भेजी है। रणधीर जायसवाल ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि भारत अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा है और इस चुनौतीपूर्ण समय में हर संभव मानवीय सहायता और सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर भारत आगे भी मदद जारी रख सकता है। इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि भारत क्षेत्रीय स्थिरता और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देता है।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 17, 2026 0