Mobile Recharge

Vi annual recharge plan offers 365-day validity, unlimited calls, 4G and 5G data benefits
Vi का 3,749 रुपये वाला सालाना प्लान: 28 दिन का खर्च सिर्फ 288 रुपये, 4G-5G डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग का फायदा

मोबाइल रिचार्ज के बढ़ते खर्च के बीच ऐसे प्लान की तलाश हमेशा रहती है, जिसमें लंबे समय तक कॉलिंग और इंटरनेट की सुविधा मिले और बार-बार रिचार्ज कराने की जरूरत न पड़े। इसी तरह के यूजर्स के लिए Vodafone Idea यानी Vi का 3,749 रुपये वाला सालाना प्लान खास हो सकता है। यह प्लान 365 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है और इसमें अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ 4G और 5G डेटा का लाभ मिलता है। इस प्लान की सबसे खास बात इसकी 28 दिनों वाली डेटा व्यवस्था है। कंपनी के अनुसार, हर 28 दिन के लिए 300GB डेटा की सीमा मिलती है और यह सीमा अगली 28-दिन की अवधि शुरू होने पर फिर से रीसेट हो जाती है। पूरे साल की कीमत को 28-दिन की अवधि के हिसाब से देखें तो इसका खर्च करीब 288 रुपये प्रति 28 दिन बैठता है। 3,749 रुपये में 365 दिनों की वैलिडिटी Vi का यह प्लान उन ग्राहकों के लिए बनाया गया है जो बार-बार रिचार्ज कराने के झंझट से बचना चाहते हैं। 3,749 रुपये का एक बार रिचार्ज कराने पर प्लान की वैलिडिटी 365 दिनों तक रहती है। इस दौरान यूजर को अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा मिलती है। डेटा की बात करें तो 4G और 5G नेटवर्क पर इस्तेमाल के लिए हर 28 दिन की अवधि में 300GB तक डेटा उपलब्ध है। यानी इसमें सामान्य डेली डेटा लिमिट जैसी व्यवस्था नहीं है। यूजर अपनी जरूरत के हिसाब से डेटा इस्तेमाल कर सकता है, हालांकि 28 दिनों के भीतर 300GB की सीमा को ध्यान में रखना होगा। 28 दिन के हिसाब से करीब 288 रुपये का खर्च इस प्लान की कीमत को अगर पूरे साल की अवधि और 28-दिन के चक्र के हिसाब से समझें तो यह करीब 288 रुपये प्रति 28 दिन बैठता है। यही वजह है कि ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए यह प्लान आकर्षक नजर आता है। खासकर ऐसे लोगों के लिए यह विकल्प उपयोगी हो सकता है जिन्हें रोजाना ज्यादा डेटा की जरूरत पड़ती है और वे छोटे-छोटे रिचार्ज के बजाय सालभर के लिए एक लंबी अवधि वाला प्लान लेना चाहते हैं। 4G और 5G दोनों यूजर्स के लिए विकल्प इस प्लान का फायदा 4G और 5G दोनों तरह के यूजर्स उठा सकते हैं। जहां Vi का 5G नेटवर्क उपलब्ध होगा, वहां योग्य डिवाइस और नेटवर्क परिस्थितियों के अनुसार 5G सेवा का इस्तेमाल किया जा सकेगा। वहीं 5G उपलब्ध नहीं होने वाले क्षेत्रों में यूजर 4G नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि, 5G की उपलब्धता हर जगह समान नहीं है। इसलिए रिचार्ज कराने से पहले अपने इलाके में Vi की नेटवर्क उपलब्धता और 5G कवरेज की जांच करना बेहतर रहेगा। अनलिमिटेड कॉलिंग भी शामिल इंटरनेट के साथ इस प्लान में पूरे 365 दिनों के लिए अनलिमिटेड कॉलिंग भी दी जाती है। ऐसे यूजर्स जिन्हें फोन कॉल का ज्यादा इस्तेमाल करना पड़ता है, उनके लिए यह सुविधा प्लान की उपयोगिता बढ़ाती है। इस तरह एक ही रिचार्ज के जरिए सालभर कॉलिंग और डेटा की जरूरत पूरी करने का विकल्प मिलता है। SMS और OTT को लेकर क्या मिलेगा? इस प्लान में कॉलिंग और डेटा के अलावा SMS से जुड़ी सुविधाएं भी शामिल बताई गई हैं। हालांकि, इसका एक बड़ा अंतर यह है कि इसमें कोई OTT सब्सक्रिप्शन शामिल नहीं है। आजकल कई मासिक या अन्य रिचार्ज प्लान के साथ कुछ OTT सेवाओं का सब्सक्रिप्शन मिलता है। लेकिन Vi के इस सालाना प्लान में ऐसा लाभ नहीं दिया गया है। अगर किसी ग्राहक को OTT कंटेंट की सुविधा चाहिए, तो उसे अलग से ऐड-ऑन या OTT वाले किसी दूसरे प्लान का विकल्प चुनना पड़ सकता है। किन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है यह प्लान? Vi का यह सालाना प्लान खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें: सालभर के लिए एक लंबी वैलिडिटी वाला रिचार्ज चाहिए। अनलिमिटेड कॉलिंग की जरूरत रहती है। इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। रोजाना डेटा की तय सीमा वाला प्लान नहीं चाहते। 4G या 5G नेटवर्क पर ज्यादा डेटा इस्तेमाल करना चाहते हैं। बार-बार रिचार्ज कराने से बचना चाहते हैं। OTT सब्सक्रिप्शन की जरूरत नहीं है। हालांकि, जिन ग्राहकों के लिए OTT सब्सक्रिप्शन जरूरी है या जिनका डेटा इस्तेमाल बहुत कम है, उनके लिए दूसरे प्लान अधिक उपयुक्त हो सकते हैं। रिचार्ज कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान सालाना प्लान लेने से पहले अपने डेटा इस्तेमाल का अंदाजा लगाना जरूरी है। 300GB की 28-दिन की सीमा काफी ज्यादा है, लेकिन इसे वास्तव में अनलिमिटेड डेटा समझना सही नहीं होगा। 28 दिनों के भीतर 300GB की सीमा लागू है और इसके बाद अगली अवधि में लिमिट रीसेट होती है। साथ ही 5G का लाभ लेने के लिए आपके क्षेत्र में Vi की 5G सेवा, 5G सपोर्ट वाला स्मार्टफोन और अन्य जरूरी नेटवर्क परिस्थितियां उपलब्ध होना जरूरी है।  

surbhi अगस्त 5, 2026 0
BSNL ₹299 prepaid recharge plan highlighting 3GB daily data, unlimited calls, 100 SMS, and 30-day validity.
BSNL का ₹299 प्लान बना डेटा यूजर्स की पहली पसंद! रोज 3GB डेटा और 30 दिन की वैधता, Jio-Airtel से कैसे है अलग?

नई दिल्ली: सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL अपने किफायती प्रीपेड प्लान्स के जरिए निजी कंपनियों को कड़ी टक्कर दे रही है। अगर आप कम कीमत में ज्यादा इंटरनेट डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग वाला प्लान तलाश रहे हैं, तो BSNL का 299 रुपये का प्रीपेड प्लान आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। इस प्लान में ग्राहकों को प्रतिदिन 3GB हाई-स्पीड डेटा, अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग, रोजाना 100 फ्री SMS और 30 दिनों की वैधता मिलती है। दिलचस्प बात यह है कि इसी कीमत के आसपास उपलब्ध Jio और Airtel के प्लान्स में दैनिक डेटा लाभ BSNL की तुलना में कम मिलता है। BSNL के ₹299 प्लान में क्या-क्या मिलता है? BSNL का यह प्रीपेड प्लान ज्यादा डेटा इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। रोजाना 3GB हाई-स्पीड डेटा इस प्लान में यूजर्स को प्रतिदिन 3GB हाई-स्पीड डेटा मिलता है। यह उन लोगों के लिए उपयोगी है जो ऑनलाइन पढ़ाई, वर्क फ्रॉम होम, वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया और गेमिंग का अधिक इस्तेमाल करते हैं। अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग प्लान के साथ पूरे भारत में किसी भी नेटवर्क पर लोकल और STD अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग की सुविधा मिलती है। इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता। रोज 100 फ्री SMS डेटा और कॉलिंग के अलावा ग्राहकों को प्रतिदिन 100 मुफ्त SMS भी दिए जाते हैं, जिससे यह प्लान एक संपूर्ण प्रीपेड पैक बन जाता है। 30 दिनों की वैधता जहां अधिकांश निजी टेलीकॉम कंपनियां समान कीमत वाले प्लान में 28 दिनों की वैधता देती हैं, वहीं BSNL इस प्लान में पूरे 30 दिनों की वैधता देता है। इससे ग्राहकों को हर महीने अपेक्षाकृत कम बार रिचार्ज कराने की जरूरत पड़ती है। Jio और Airtel के ₹299 प्लान से तुलना Airtel ₹299 प्लान 28 दिनों की वैधता प्रतिदिन 1GB डेटा अनलिमिटेड कॉलिंग रोज 100 SMS अतिरिक्त ऐप बेनिफिट्स Jio ₹299 प्लान 28 दिनों की वैधता प्रतिदिन 1.5GB डेटा अनलिमिटेड कॉलिंग रोज 100 SMS चुनिंदा Jio सेवाओं का एक्सेस BSNL ₹299 प्लान 30 दिनों की वैधता प्रतिदिन 3GB डेटा अनलिमिटेड कॉलिंग रोज 100 SMS किसके लिए सबसे बेहतर है यह प्लान? यदि आपकी प्राथमिकता ज्यादा मोबाइल डेटा और कम कीमत में लंबी वैधता है, तो BSNL का ₹299 प्लान आकर्षक विकल्प हो सकता है। हालांकि, प्लान चुनने से पहले अपने क्षेत्र में BSNL की 4G/नेटवर्क उपलब्धता और कवरेज जरूर जांच लें, क्योंकि वास्तविक अनुभव स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
A person switching mobile networks on a smartphone as mobile number portability requests rise across India.
TRAI Report: 31 दिन में 1.44 करोड़ लोगों ने बदला अपना SIM, यूपी और बिहार में सबसे ज्यादा नंबर पोर्ट; क्या महंगे प्लान और खराब नेटवर्क हैं वजह?

नई दिल्ली: देश में मोबाइल यूजर्स तेजी से अपने टेलीकॉम ऑपरेटर बदल रहे हैं। TRAI (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की ताजा टेलीकॉम सब्सक्रिप्शन रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2026 में देशभर में करीब 1.44 करोड़ (14.46 मिलियन) मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) रिक्वेस्ट दर्ज की गईं। यानी लाखों लोगों ने अपना मोबाइल नंबर बदले बिना टेलीकॉम कंपनी बदलने का फैसला किया। हालांकि यह आंकड़ा अप्रैल 2026 के 14.74 मिलियन MNP रिक्वेस्ट की तुलना में थोड़ा कम है, लेकिन यह अब भी बेहद बड़ा आंकड़ा है। क्या है मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP)? मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) ऐसी सुविधा है, जिसके जरिए ग्राहक अपना पुराना मोबाइल नंबर बनाए रखते हुए किसी दूसरी टेलीकॉम कंपनी की सेवा ले सकते हैं। भारत में यह सुविधा 25 नवंबर 2010 को हरियाणा में शुरू हुई थी। इसके बाद 20 जनवरी 2011 से इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया। वहीं, 3 जुलाई 2015 से इंटर-LSA MNP की सुविधा भी शुरू हुई, जिससे ग्राहक राज्य या लाइसेंस क्षेत्र बदलने पर भी अपना नंबर जारी रख सकते हैं। मई 2026 में कितनी हुईं MNP रिक्वेस्ट? TRAI के आंकड़ों के अनुसार: मई 2026: 14.46 मिलियन MNP रिक्वेस्ट अप्रैल 2026: 14.74 मिलियन MNP रिक्वेस्ट TRAI देश को दो MNP जोन में बांटता है। जोन-I (उत्तर और पश्चिम भारत): 7.79 मिलियन रिक्वेस्ट जोन-II (दक्षिण और पूर्वी भारत): 6.67 मिलियन रिक्वेस्ट किन राज्यों से आईं सबसे ज्यादा रिक्वेस्ट? मई 2026 में सबसे ज्यादा नंबर पोर्ट कराने की रिक्वेस्ट उत्तर प्रदेश ईस्ट से आई। टॉप टेलीकॉम सर्किल: राज्य/सर्किल MNP रिक्वेस्ट उत्तर प्रदेश ईस्ट 2.06 मिलियन उत्तर प्रदेश वेस्ट 1.49 मिलियन बिहार 1.41 मिलियन मध्य प्रदेश 1.37 मिलियन पश्चिम बंगाल 1.35 मिलियन इसके अलावा: गुजरात – 0.90 मिलियन महाराष्ट्र – 0.87 मिलियन राजस्थान – 0.76 मिलियन दिल्ली – 0.60 मिलियन आंध्र प्रदेश – 0.59 मिलियन कर्नाटक – 0.57 मिलियन तमिलनाडु – 0.51 मिलियन आखिर लोग क्यों बदल रहे हैं टेलीकॉम कंपनी? TRAI की रिपोर्ट में MNP के पीछे की वजहों का उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि, टेलीकॉम सेक्टर के जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं: बेहतर नेटवर्क कवरेज की तलाश 5G सेवाओं का विस्तार महंगे मोबाइल रिचार्ज प्लान बेहतर डेटा और कॉलिंग अनुभव की चाह अलग-अलग कंपनियों के आकर्षक ऑफर्स विशेषज्ञों का कहना है कि Jio और Airtel लगातार अपने 5G नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं। वहीं, Vodafone Idea (Vi) के 5G रोलआउट में देरी और कुछ क्षेत्रों में नेटवर्क संबंधी चुनौतियों के कारण उसके कई ग्राहक दूसरी कंपनियों की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि TRAI ने अपनी रिपोर्ट में इन कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ये बाजार विश्लेषकों और उद्योग विशेषज्ञों के आकलन पर आधारित हैं। क्या कहती है रिपोर्ट? TRAI के ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारतीय मोबाइल उपभोक्ता अब बेहतर नेटवर्क, तेज इंटरनेट और किफायती प्लान्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही वजह है कि हर महीने लाखों लोग अपना मोबाइल नंबर बदले बिना नई टेलीकॉम कंपनी का विकल्प चुन रहे हैं।  

surbhi जून 29, 2026 0
Airtel prepaid recharge plan offering daily data, unlimited calling and Netflix subscription benefits.
डेटा, कॉलिंग और Netflix सब एक साथ, Airtel के इस प्रीपेड प्लान ने खींचा यूजर्स का ध्यान

अगर आप ऐसा मोबाइल रिचार्ज प्लान तलाश रहे हैं जिसमें डेटा, कॉलिंग और OTT मनोरंजन का पूरा पैकेज एक साथ मिले, तो Airtel का ₹1,729 वाला प्रीपेड प्लान आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है। यह प्लान लंबी वैलिडिटी के साथ आता है और इसमें Netflix समेत कई लोकप्रिय OTT प्लेटफॉर्म्स का एक्सेस भी शामिल है। ऐसे यूजर्स जो अलग-अलग सब्सक्रिप्शन पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना चाहते, उनके लिए यह प्लान ऑल-इन-वन पैकेज की तरह काम कर सकता है। 84 दिनों तक मिलेगा रोजाना 2GB डेटा Airtel के ₹1,729 वाले प्रीपेड प्लान में 84 दिनों की वैलिडिटी मिलती है। इस दौरान यूजर्स को प्रतिदिन 2GB हाई-स्पीड डेटा दिया जाता है। कुल वैलिडिटी: 84 दिन प्रतिदिन डेटा: 2GB कुल डेटा: 168GB यह प्लान वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया और ऑनलाइन काम करने वाले यूजर्स के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। अनलिमिटेड कॉलिंग और 100 SMS प्रतिदिन इस प्लान में सभी नेटवर्क पर अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग की सुविधा मिलती है। साथ ही रोमिंग के दौरान भी कॉलिंग का लाभ जारी रहता है। इसके अलावा यूजर्स को रोजाना 100 SMS भी मिलते हैं, जो बैंकिंग, OTP और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए उपयोगी हैं। मुफ्त मिलेगा Netflix सब्सक्रिप्शन इस प्लान का सबसे बड़ा आकर्षण Netflix Basic सब्सक्रिप्शन है। इसके जरिए यूजर्स बिना अलग से भुगतान किए Netflix की वेब सीरीज, फिल्में और ओरिजिनल कंटेंट का आनंद ले सकते हैं। OTT सब्सक्रिप्शन की बढ़ती कीमतों के बीच यह सुविधा यूजर्स के लिए अतिरिक्त बचत का मौका देती है। सिर्फ Netflix ही नहीं, कई और OTT प्लेटफॉर्म्स का फायदा Airtel ने इस प्लान में कई अन्य मनोरंजन सुविधाएं भी शामिल की हैं। यूजर्स को मिलता है: Netflix Basic JioHotstar Super ZEE5 Premium Airtel Xstream Play Premium यानी एक ही रिचार्ज में कई OTT प्लेटफॉर्म्स का कंटेंट देखने का विकल्प मिलता है। किन यूजर्स के लिए है सबसे फायदेमंद? यह प्लान खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है जो: रोजाना ज्यादा डेटा इस्तेमाल करते हैं। वेब सीरीज और फिल्में देखना पसंद करते हैं। अलग-अलग OTT सब्सक्रिप्शन पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना चाहते। लंबी वैलिडिटी वाला रिचार्ज चाहते हैं। हालांकि, टेलीकॉम कंपनियां समय-समय पर अपने प्लान और बेनेफिट्स में बदलाव करती रहती हैं। इसलिए रिचार्ज करने से पहले Airtel की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर उपलब्ध जानकारी जरूर जांच लें।  

surbhi जून 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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