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Madhya Pradesh Chief Minister Mohan Yadav reacts to the Datia by-election result
दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत, CM मोहन यादव ने स्वीकारा जनादेश; बोले- और मजबूती से करेंगे वापसी

Datia By-Election Result: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज करते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बड़ा झटका दिया है। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने बीजेपी प्रत्याशी अशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों के अंतर से हराया। परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जनता के फैसले को विनम्रता से स्वीकार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनादेश सर्वोपरि होता है और बीजेपी भविष्य में और अधिक मजबूती के साथ जनता के बीच जाएगी। CM मोहन यादव बोले- जनता का फैसला सर्वोपरि एएनआई के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि चुनाव में हार-जीत लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है और बीजेपी जनता के फैसले का पूरा सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस परिणाम से सीख लेकर आगे और अधिक मजबूती के साथ काम करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार बीजेपी को लगभग 1,700 अधिक वोट मिले हैं, जो कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के समर्थन को दर्शाता है। लोकसभा और राज्यसभा चुनावों का भी किया जिक्र मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने मध्य प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके अलावा राज्यसभा की तीनों सीटें भी पार्टी के खाते में आईं। उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति में हार और जीत दोनों होती हैं, लेकिन जनता का निर्णय हमेशा सर्वोपरि रहता है। हार के बाद अशुतोष तिवारी ने जताया आभार बीजेपी उम्मीदवार अशुतोष तिवारी ने चुनाव परिणाम स्वीकार करते हुए मतदाताओं, पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ चुनाव अभियान चलाया। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी जनता के बीच लगातार काम करती रहेगी और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस ने बताया बदलाव का संकेत मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दतिया उपचुनाव में मिली जीत को राज्य की राजनीति में बदलाव का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि यह परिणाम बीजेपी सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता की नाराजगी को दर्शाता है। उनके मुताबिक, कांग्रेस ने यह सीट दोबारा जीतकर यह साबित किया है कि जनता का भरोसा पार्टी के साथ बना हुआ है। क्यों हुआ था दतिया में उपचुनाव? दतिया विधानसभा सीट पर यह उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद कराया गया था। इस सीट पर कांग्रेस ने एक बार फिर जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ बरकरार रखी है। वहीं, इस नतीजे ने मध्य प्रदेश की राजनीति में आगामी चुनावों से पहले नई सियासी चर्चाओं को भी जन्म दे दिया है।  

kalpana अगस्त 4, 2026 0
Farmers protest in Bhopal demanding 100% government procurement of moong and an end to the token system for fertilizer distribution
Bhopal Farmers Protest: भोपाल में Gen-Z किसानों का बड़ा आंदोलन, CM हाउस मार्च की तैयारी; मूंग खरीदी और खाद वितरण पर अड़े किसान

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बुधवार को किसानों का आंदोलन तेज हो गया। किसान क्रांति पैदल यात्रा के तहत बड़ी संख्या में किसान मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने की तैयारी में हैं। प्रदर्शनकारी किसानों की दो प्रमुख मांगें हैं—मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण में लागू टोकन सिस्टम को समाप्त करना। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कृषि मंत्री से बातचीत बेनतीजा मंगलवार देर रात कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने किसानों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर आंदोलन खत्म कराने की कोशिश की, लेकिन वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। इसके बाद किसानों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया। प्रदर्शनकारी पूरी रात धरने पर बैठे रहे और बुधवार सुबह भी अपने आंदोलन पर डटे रहे। सरकार पर मूंग खरीदी से पीछे हटने का आरोप किसानों का आरोप है कि सरकार ने पहले मूंग की खेती बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया, लेकिन अब खरीद से पीछे हट रही है। उनका कहना है कि इससे किसानों को प्रति एकड़ 10 से 12 हजार रुपये तक का नुकसान हो रहा है। किसानों ने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं, जबकि नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। आंदोलन की कमान युवा किसानों के हाथ प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना है कि इस बार आंदोलन की अगुवाई Gen-Z और युवा किसान कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह पारंपरिक किसान आंदोलन नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी के किसान अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो भोपाल में भी बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। 25 दिनों से जारी है आंदोलन किसानों के मुताबिक, राजधानी पहुंचने से पहले वे पिछले 25 दिनों से अलग-अलग जिला मुख्यालयों पर धरना दे रहे थे, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद नर्मदापुरम सहित आसपास के 12 जिलों से किसान भोपाल पहुंचे हैं। आठ मांगें, दो सबसे अहम किसान संगठनों ने सरकार के सामने कुल आठ मांगें रखी हैं, लेकिन बातचीत के लिए दो प्रमुख मांगों को प्राथमिकता दी गई है— मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी सुनिश्चित की जाए। खाद वितरण में टोकन प्रणाली समाप्त कर किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराई जाए। कई स्कूलों में छुट्टी, भारी पुलिस बल तैनात किसान आंदोलन को देखते हुए भोपाल के कई स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। मंगलवार को करीब 500 किसान पुलिस बैरिकेड पार कर भोपाल पहुंचे और होशंगाबाद रोड पर धरने पर बैठ गए। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात किया है और किसानों से लगातार बातचीत की कोशिश की जा रही है। सड़क पर बनाया खाना, आंदोलन जारी रखने का ऐलान धरने पर बैठे किसानों ने सड़क किनारे ही आग जलाकर दाल-बाटी बनाई और वहीं भोजन किया। किसानों का कहना है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे लंबे समय तक आंदोलन जारी रखने के लिए तैयार हैं। उनका दावा है कि जरूरत पड़ने पर वे एक महीने तक के राशन का इंतजाम भी कर लेंगे। ट्रैफिक एडवाइजरी जारी किसान आंदोलन के कारण भोपाल के कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है। नर्मदापुरम रोड, एमपी नगर, एम्स और मिसरोद क्षेत्र की ओर जाने वाले वाहनों के लिए रूट डायवर्जन लागू किया गया है ताकि शहर में यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
Passengers standing near railway tracks after panic in Khajuraho-Udaipur Intercity Express led to a fatal train accident in Morena.
MP: मुरैना में अफवाह ने ली 4 यात्रियों की जान, ट्रेन से उतरते ही दूसरी गाड़ी ने कुचला; तीन महिलाएं और एक बच्चे की मौत

  मुरैना: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में शनिवार को एक दर्दनाक रेल हादसे में चार लोगों की जान चली गई। खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में आग लगने की अफवाह फैलने के बाद घबराए यात्री ट्रेन से नीचे उतर गए। इसी दौरान बगल की पटरी से तेज रफ्तार में गुजर रही पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में आने से तीन महिलाओं और एक बच्चे की मौत हो गई। उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज सिंह ने बताया कि इंटरसिटी एक्सप्रेस में आग लगने की अफवाह फैलने के बाद कुछ यात्रियों ने चेन पुलिंग कर ट्रेन रुकवा दी। घबराहट में कई यात्री ट्रेन से उतरकर रेलवे ट्रैक पर आ गए। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि दूसरी पटरी पर एक अन्य ट्रेन गुजरने वाली है। शाम 4:30 बजे हुआ हादसा रेलवे अधिकारियों के अनुसार, शाम करीब 4:30 बजे पातालकोट एक्सप्रेस दूसरी लाइन से गुजर रही थी। इसी दौरान ट्रैक पर खड़े कुछ यात्री उसकी चपेट में आ गए। हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शी ने सुनाई दर्दनाक आपबीती हादसे में अपनी पत्नी और बच्चे को खोने वाले एक यात्री ने बताया कि किसी ने ट्रेन में आग लगने की बात कह दी, जिसके बाद लोग घबराकर नीचे कूदने लगे। उन्होंने कहा, "हम भी ट्रेन से उतर गए थे। मेरी पत्नी एक बच्चे के साथ बाहर खड़ी थी, जबकि मेरा दूसरा बच्चा ट्रेन के अंदर था। मैं उसे देखने के लिए वापस डिब्बे में गया। तभी दूसरी तरफ से आ रही ट्रेन लोगों के ऊपर से गुजर गई। मेरी पत्नी और बच्चे की मौत हो गई।" चिंगारी और धुएं के बाद फैली अफवाह मुरैना के जिलाधिकारी लोकेश कुमार जांगिड़ ने बताया कि हादसा जिले के हेतमपुर स्टेशन के पास हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इंजन से जुड़ी एक बोगी में अचानक चिंगारी और धुआं दिखाई दिया, जिसके बाद कुछ यात्रियों ने चेन पुलिंग कर ट्रेन रोक दी। इसके बाद ट्रेन में आग लगने की अफवाह फैल गई और कई यात्री जान बचाने के लिए बिना स्थिति समझे ट्रेन से नीचे उतर गए। कुछ लोग दूसरी रेल लाइन पर खड़े हो गए, जहां से दिल्ली की ओर जा रही पातालकोट एक्सप्रेस तेज गति से गुजर रही थी। आगरा और बीकानेर के यात्रियों की मौत प्रशासन के मुताबिक, हादसे में मारे गए चार लोगों में तीन महिलाएं और एक बच्चा शामिल हैं। मृतकों में दो महिलाएं और बच्चा आगरा के निवासी बताए गए हैं, जबकि एक अन्य महिला राजस्थान के बीकानेर की रहने वाली थी। रेलवे और स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।  

Deepshikha जून 15, 2026 0
TMC MP Sayoni Ghosh amid political speculation over party strategy and Delhi meeting discussions.
सायोनी घोष के बागी खेमे में शामिल होने की चर्चा, दिल्ली बैठक ने बढ़ाई सियासी हलचल

  नई दिल्ली/कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में कथित अंदरूनी असंतोष और नेताओं के रुख को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। इसी बीच जादवपुर से सांसद सायोनी घोष का नाम भी उन नेताओं में शामिल किया जा रहा है, जिनके बारे में विभिन्न राजनीतिक दावे किए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई एक बैठक के बाद राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है। बैठक में क्या चर्चा हुई और उसमें शामिल नेताओं ने किस तरह का फैसला लिया, इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। दिल्ली बैठक पर बढ़ी चर्चा राजनीतिक सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि बैठक में पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और कुछ सांसदों की भावी रणनीति पर चर्चा हुई। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित नेताओं की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सायोनी घोष का नाम सामने आने के बाद बंगाल की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वह लंबे समय से टीएमसी की प्रमुख युवा चेहरों में गिनी जाती रही हैं और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं। सांसदों को लेकर अलग-अलग दावे राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कुछ सांसदों के एक अलग समूह के रूप में सामने आने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में न तो किसी संसदीय प्राधिकरण की ओर से कोई पुष्टि हुई है और न ही संबंधित सांसदों ने सार्वजनिक रूप से कोई औपचारिक घोषणा की है। टीएमसी की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान इन सभी दावों और अटकलों के बीच तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और सांसदों के रुख से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल दिल्ली में हुई कथित बैठक और उससे जुड़ी चर्चाओं ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
TMC MP Shatabdi Roy amid speculation over internal party differences and political developments in West Bengal.
शताब्दी रॉय के बागी खेमे में शामिल होने के दावों से बंगाल की राजनीति में हलचल, टीएमसी और विपक्ष आमने-सामने

  नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की वरिष्ठ सांसद शताब्दी रॉय के पार्टी नेतृत्व से नाराज होने और बागी खेमे के साथ खड़े होने के दावे सामने आए। इन दावों के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में कुछ सांसदों और नेताओं की बैठकों के बाद यह अटकलें तेज हुईं कि टीएमसी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। इन दावों पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। शताब्दी रॉय को लेकर क्या हैं दावे? राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शताब्दी रॉय ने पार्टी के कामकाज और नेतृत्व शैली को लेकर नाराजगी जताई है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्होंने पार्टी के भीतर संवाद की कमी और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस संबंध में कोई औपचारिक बयान सार्वजनिक रूप से जारी किया गया है। दिल्ली की बैठकों पर टिकी नजर सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में दिल्ली में कई राजनीतिक बैठकें हुई हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल के राजनीतिक भविष्य और संसदीय रणनीति पर चर्चा की गई। इन बैठकों के बाद विपक्षी दलों और टीएमसी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सही साबित होती हैं, तो इसका असर भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर पड़ सकता है। टीएमसी का पलटवार टीएमसी नेताओं ने पार्टी छोड़ने या बड़े पैमाने पर टूट की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि विपक्ष जानबूझकर भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस एकजुट है और नेतृत्व के प्रति कार्यकर्ताओं का विश्वास कायम है। वहीं विपक्ष का दावा है कि राज्य की राजनीति में बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं और आने वाले दिनों में और भी राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। आगे क्या? फिलहाल सभी की नजर शताब्दी रॉय और टीएमसी नेतृत्व की ओर से आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि जब तक संबंधित पक्षों की ओर से स्पष्ट बयान नहीं आता, तब तक इन दावों को पुष्टि के बजाय राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी इस घटनाक्रम पर आने वाले दिनों में और तस्वीर साफ होने की संभावना है।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
BJP leader Kailash Vijayvargiya speaks on Meenakshi Natarajan nomination controversy before Rajya Sabha polls.
कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा बयान: “हमें कांग्रेस के लोगों ने ही दी जानकारी”, मीनाक्षी नटराजन नामांकन रद्द पर बढ़ा सियासी विवाद

  मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। इस बीच भाजपा नेता और राज्य सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। उन्होंने संकेत दिया कि नामांकन में कथित खामियों की जानकारी भाजपा को कांग्रेस के ही भीतर से मिली हो सकती है। “जानकारी हमें तेलंगाना से मिली”—कैलाश विजयवर्गीय कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नामांकन से जुड़ी अहम जानकारियां तेलंगाना से सामने आईं, जहां कांग्रेस की सरकार है। उन्होंने कहा, “हमें तेलंगाना से पेपर्स मिले। वहीं से जानकारी मिली कि नामांकन पत्र में कुछ त्रुटियां हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस के लोग ही यह जानकारी साझा कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति और आपसी मतभेद भी सामने आते हैं। कांग्रेस का पलटवार: लोकतंत्र पर हमला कांग्रेस ने इस फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि नामांकन रद्द करना राजनीतिक दबाव का परिणाम है और यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर इस फैसले पर आपत्ति दर्ज कराई और निष्पक्ष जांच की मांग की है। मीनाक्षी नटराजन का आरोप: “लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है” मीनाक्षी नटराजन ने भी इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारा, तभी से राजनीतिक दबाव बढ़ने लगा था। भाजपा का दावा: प्रक्रिया के तहत हुआ फैसला भाजपा का कहना है कि नामांकन रद्द होना पूरी तरह चुनावी प्रक्रिया और नियमों के अनुसार हुआ है। पार्टी नेताओं ने कहा कि दस्तावेजों में कथित त्रुटियों को लेकर आपत्ति दर्ज की गई थी, जिसके बाद जांच में नामांकन रद्द किया गया। चुनाव आयोग पहुंचा विवाद इस मामले को लेकर कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग भी पहुंचा और फैसले पर आपत्ति जताई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया। 18 जून को वोटिंग मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 18 जून को होना है। उससे पहले यह विवाद राज्य की सियासत में बड़ा मुद्दा बन गया है और आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Rescue teams search Bargi Dam after cruise capsized in storm, Madhya Pradesh
मध्यप्रदेश: बरगी डैम क्रूज हादसे के बाद सख्त कार्रवाई, जांच के आदेश, संचालन पर रोक

बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद मध्यप्रदेश सरकार एक्शन मोड में आ गई है। नर्मदा नदी पर बने इस बांध में गुरुवार (30 अप्रैल) शाम अचानक आई तेज आंधी की चपेट में आकर एक क्रूज पलट गया। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। सीएम मोहन यादव ने दिए जांच के आदेश मोहन यादव ने घटना पर गहरा शोक जताते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस हादसे की जांच पर्यटन विभाग द्वारा की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। सीएम ने बताया कि राहत और बचाव कार्य में प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। इस दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, स्थानीय प्रशासन और सेना की टीमों ने मिलकर अभियान चलाया। क्रूज संचालन पर फिलहाल रोक हादसे के बाद सरकार ने राज्य में सभी क्रूज संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि जांच पूरी होने तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा। सेना के गोताखोर भी अभियान में शामिल घटना के बाद जिला प्रशासन के अनुरोध पर सेना की गोताखोर टीमों को मौके पर बुलाया गया। इन टीमों ने राहत कार्य में अहम भूमिका निभाई और कई शवों को बरामद किया। बहादुर स्थानीय लोगों को मिलेगा सम्मान सीएम मोहन यादव ने कहा कि हादसे के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों को बचाने वाले स्थानीय लोगों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।  

surbhi मई 2, 2026 0
Rescue teams recover mother and child after tragic Jabalpur boat accident
जबलपुर नाव हादसा: 4 साल के बेटे को सीने से लगाए मिली मां, मंजर देख रो पड़े लोग

जबलपुर में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे के बाद सामने आई एक तस्वीर ने हर किसी को भावुक कर दिया। रेस्क्यू टीम को एक मां और उसके 4 साल के बेटे के शव मिले, जो आखिरी पल तक एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। दिल दहला देने वाला दृश्य शुक्रवार (1 मई) को चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जब मां-बेटे के शव पानी से बाहर निकाले गए, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। दोनों के शरीर पर लाइफ जैकेट बंधी हुई थी, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और माहौल गमगीन हो गया। बरगी डैम में हुआ हादसा यह हादसा बरगी डैम के जलाशय में गुरुवार (30 अप्रैल) को हुआ। करीब 29 लोगों को लेकर जा रही एक क्रूज नाव अचानक आए तेज तूफान और हवाओं की वजह से पलट गई। हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन और रेस्क्यू ऑपरेशन घटना के बाद SDRF, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। बचाव अभियान लगातार जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है। मौके पर पहुंचे राज्य के कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह भी इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम करीब 6 बजे अचानक तेज हवाएं चलने लगीं और जलाशय का पानी उफान पर आ गया। यात्रियों ने खतरा भांपते हुए नाव को किनारे ले जाने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। कुछ ही देर में नाव असंतुलित होकर पलट गई। स्थानीय लोगों ने बचाई कई जानें हादसे के बाद आसपास मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद के लिए हाथ बढ़ाया। रस्सियों की मदद से कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, खासकर वे लोग जिन्होंने लाइफ जैकेट पहन रखी थी। हालांकि, कई लोगों को बचाया नहीं जा सका। जांच और सवाल इस हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों और नाव संचालन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर किन लापरवाहियों की वजह से यह हादसा हुआ।  

surbhi मई 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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