NDRF

Bailey bridge washed away in Chamoli, Uttarakhand, amid heavy rain as rescue teams search for a missing person and vehicle.
उत्तराखंड के चमोली में बड़ा हादसा: तेज बहाव में बहा बेली ब्रिज, एक व्यक्ति और वाहन के लापता होने की आशंका

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच मंगलवार को बड़ा हादसा सामने आया। ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमक नाला में अचानक पानी का बहाव तेज होने से बेली ब्रिज बह गया। घटना के दौरान एक व्यक्ति और एक वाहन के भी तेज बहाव में बहने की आशंका जताई जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र सक्रिय हो गया। राहत एवं बचाव अभियान के लिए NDRF और SDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं और लापता व्यक्ति तथा वाहन की तलाश शुरू कर दी गई है। अचानक बढ़ा नाले का जलस्तर लगातार बारिश के कारण तमक नाला का जलस्तर और बहाव अचानक बढ़ गया। तेज पानी के दबाव में बेली ब्रिज टिक नहीं सका और देखते ही देखते बह गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रशासन फिलहाल यह पता लगाने में जुटा है कि पुल के बहने के समय वहां कितने लोग और वाहन मौजूद थे। एक व्यक्ति और एक वाहन के बह जाने की आशंका के बाद खोज अभियान को प्राथमिकता दी जा रही है। NDRF और SDRF ने संभाला मोर्चा घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। इसके बाद NDRF और SDRF की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। बचाव दल तेज बहाव और प्रतिकूल मौसम के बीच संभावित स्थानों पर तलाश अभियान चला रहे हैं। प्रशासन की ओर से स्थानीय परिस्थितियों और जलस्तर पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। मलारी मार्ग पर आवाजाही पूरी तरह रोकी गई बेली ब्रिज के बह जाने के बाद ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर मलारी की ओर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक इस मार्ग पर यात्रा करने से बचें। पुल के क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्र के कुछ गांवों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है। प्रशासन को ऐसे क्षेत्रों में राशन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। नदियों और नालों के जलस्तर पर निगरानी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चमोली सहित संवेदनशील इलाकों में नदियों और नालों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने को कहा है। जरूरत पड़ने पर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र चमोली सहित संवेदनशील क्षेत्रों की 24 घंटे निगरानी कर रहा है। जिला प्रशासन को नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। बारिश के बीच बढ़ी चुनौती चमोली और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण नदी-नालों के जलस्तर में तेजी से बदलाव हो सकता है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों को संवेदनशील मार्गों और जलस्रोतों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता व्यक्ति और वाहन की तलाश, प्रभावित मार्ग को सुरक्षित करना तथा संपर्क प्रभावित गांवों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाना है। बचाव अभियान और प्रशासन की अगली कार्रवाई के बाद ही घटना से जुड़े नुकसान की पूरी तस्वीर सामने आएगी।  

surbhi अगस्त 11, 2026 0
Rescue teams evacuate residents after heavy rain and landslides in Kerala as IMD issues a red alert.
केरल में फिर बारिश बनी मौत की वजह! भारी बारिश और भूस्खलन से 6 की मौत, कई जिलों में रेड अलर्ट

Kerala Rain Alert: केरल में मानसून एक बार फिर जानलेवा साबित हो रहा है। राज्य में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण भूस्खलन (लैंडस्लाइड), बाढ़ और मलबा खिसकने की घटनाओं में अब तक कम से कम छह लोगों की मौत हो चुकी है। कई इलाकों में लोगों के लापता होने की आशंका है, जबकि राहत एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। कई इलाके जलमग्न, राहत अभियान जारी भारी बारिश के कारण कन्नूर जिले के चेंगलाई समेत कई निचले इलाके पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है और कई गांवों का संपर्क टूट गया है। प्रशासन ने एनडीआरएफ, फायर एंड रेस्क्यू और स्थानीय एजेंसियों को राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। इन जिलों में IMD का रेड अलर्ट भारतीय मौसम विभाग ने इडुक्की, कोट्टायम, पथानमथिट्टा, त्रिशूर, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग ने अगले कुछ घंटों में बेहद भारी बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है। मौसम विभाग ने लोगों से पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है। आखिर हर मानसून में क्यों बढ़ जाता है लैंडस्लाइड का खतरा? विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार केवल एक दिन की तेज बारिश नहीं, बल्कि लगातार कई दिनों तक हुई वर्षा ने मिट्टी को पूरी तरह पानी से संतृप्त कर दिया था। इसके बाद अचानक हुई भारी बारिश ने पहाड़ियों की ढलानों को कमजोर कर दिया, जिससे कई स्थानों पर भूस्खलन हो गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब मिट्टी अपनी पानी सोखने की क्षमता से अधिक पानी जमा कर लेती है, तो उसका भार बढ़ जाता है और वह ढलानों पर टिक नहीं पाती। ऐसे में पूरी पहाड़ी का हिस्सा अचानक नीचे खिसक जाता है। पश्चिमी घाट की भौगोलिक बनावट भी बड़ी वजह केरल का अधिकांश पहाड़ी इलाका पश्चिमी घाट में स्थित है, जिसे भूस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। यहां कठोर चट्टानों के ऊपर ढीली मिट्टी की परत होती है। लगातार बारिश का पानी मिट्टी के भीतर जाकर चट्टानों तक पहुंचता है, जिससे दोनों परतों के बीच पकड़ कमजोर पड़ जाती है और पूरी ढलान खिसक जाती है। इसके अलावा अनियोजित निर्माण, वनों की कटाई, सड़क परियोजनाएं, खनन गतिविधियां और पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ता शहरीकरण भी लैंडस्लाइड के खतरे को बढ़ा रहे हैं। वायनाड त्रासदी के बाद भी बरकरार खतरा साल 2024 में वायनाड में हुए विनाशकारी भूस्खलन ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस घटना के बाद संवेदनशील इलाकों की पहचान और सुरक्षा उपायों को लेकर कई सिफारिशें की गई थीं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अभी भी जोखिम वाले क्षेत्रों में वैज्ञानिक योजना, निर्माण पर सख्त नियंत्रण, वनों का संरक्षण और आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम को पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। विशेषज्ञों की चेतावनी भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में अनियंत्रित निर्माण और पर्यावरणीय नुकसान पर रोक नहीं लगाई गई, तो हर मानसून के दौरान केरल में इस तरह की त्रासदियां दोहराने का खतरा बना रहेगा। इसलिए मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन, समय पर निकासी और आपदा प्रबंधन की बेहतर तैयारी ही जान-माल के नुकसान को कम कर सकती है।  

kalpana अगस्त 3, 2026 0
Odisha Flood
ओडिशा में महानदी का जलस्तर बढ़ा, निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा; कई जिलों में हाई अलर्ट

हीराकुंड बांध के दो गेट खोले गए, हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए; स्कूल भी बंद   भुवनेश्वर, एजेंसियां। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण ओडिशा में महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है, जिससे राज्य के कई निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा गहरा गया है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने कटक, खुर्दा, पुरी, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा समेत कई जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है।   हीराकुंड बांध के गेट खोले गए   बढ़ते जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए हीराकुंड बांध के दो गेट खोल दिए गए हैं। वहीं कटक के मुंडाली बैराज पर पानी का बहाव लगातार बढ़ रहा है। जल संसाधन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त गेट खोलने की तैयारी भी की गई है।   लाखों लोग प्रभावित, राहत अभियान तेज   बाढ़ से राज्य के कई जिले प्रभावित हुए हैं। निचले इलाकों में पानी भरने के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) की टीमों को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया है। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि कई गांवों का सड़क संपर्क भी टूट गया है।   स्कूल बंद, लोगों से सतर्क रहने की अपील   एहतियात के तौर पर जगतसिंहपुर, खुर्दा, भद्रक और जाजपुर सहित कई जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे जाने से बचने और केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

abhishek singh जुलाई 31, 2026 0
Rescue teams search through the debris after a four-storey residential building collapsed in Bhiwandi, Maharashtra
Bhiwandi Building Collapse: भिवंडी में चार मंजिला इमारत गिरी, 6 की मौत; कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका

Bhiwandi Building Collapse: महाराष्ट्र के भिवंडी में गुरुवार देर रात बड़ा हादसा हो गया, जब एक चार मंजिला रिहायशी इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. इस हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है. एनडीआरएफ, ठाणे डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (TDRF), फायर ब्रिगेड, पुलिस और नगर निगम की टीमें युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं. रात 11:30 बजे अचानक ढही इमारत अधिकारियों के अनुसार, 48 कमरों वाली यह इमारत रात करीब 11:30 बजे ढह गई. स्थानीय लोगों ने बताया कि रात करीब 9 बजे से ही इमारत में दरारें पड़ने लगी थीं और तेज आवाजें सुनाई दे रही थीं. सूचना मिलने पर नगर निगम और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और कई परिवारों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. हालांकि, इसी दौरान इमारत का बी-विंग अचानक गिर गया. बताया जा रहा है कि कुछ लोग बाहर निकल रहे थे, जबकि मरम्मत कार्य में लगे मजदूर अंदर ही फंस गए. पहले ही खतरनाक घोषित हो चुकी थी इमारत भिवंडी-निजामपुर नगर निगम के सहायक आयुक्त अरविंद घोगरे ने बताया कि इस इमारत को पहले ही जर्जर और खतरनाक घोषित किया जा चुका था. इसके बावजूद यहां मरम्मत का कार्य जारी था. शुरुआती जांच में सामने आया है कि मरम्मत का काम आवश्यक अनुमति के बिना कराया जा रहा था. आशंका है कि हादसे में जान गंवाने वाले अधिकांश लोग मरम्मत कार्य से जुड़े मजदूर हैं. मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है. NDRF और फायर ब्रिगेड का रेस्क्यू अभियान जारी हादसे के बाद एनडीआरएफ, टीडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीमें मौके पर पहुंचीं. बचाव अभियान में डॉग स्क्वॉड, चार फायर इंजन, दो एम्बुलेंस और भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. प्रशासन का कहना है कि मलबे में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित निकालने तक राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी रहेगा.  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
Flood-hit areas in Assam as over three lakh people remain affected across seven districts
Assam Flood: असम में बाढ़ से अब तक 78 मौतें, 3 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित; 7 जिलों में हालात गंभीर

Assam Flood News: असम में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। राज्य में बुधवार को शिवसागर और गोलाघाट में तीन और लोगों की मौत के बाद बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, राज्य के सात जिलों में 3 लाख से अधिक लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। इस बीच मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। 7 जिलों में बाढ़ का कहर सरकारी बुलेटिन के मुताबिक, शिवसागर, चराईदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, विश्वनाथ और कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ का पानी 21 राजस्व सर्किल और 551 गांवों तक पहुंच चुका है। राज्यभर में 3,00,031 लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हैं। सबसे अधिक असर चराईदेव जिले में देखा गया है, जहां 1,37,561 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इसके बाद शिवसागर में 84,600 और जोरहाट में 49,911 लोग प्रभावित बताए गए हैं। हालांकि, मंगलवार के मुकाबले प्रभावित लोगों की संख्या में कुछ कमी आई है। एक दिन पहले यह आंकड़ा 3.32 लाख था। हजारों हेक्टेयर फसल जलमग्न बाढ़ का असर कृषि पर भी गंभीर रूप से पड़ा है। ASDMA के अनुसार, 21,523.08 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है। वहीं अन्य सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कई इलाकों में कुल 45 हजार हेक्टेयर से अधिक फसल क्षेत्र भी पानी में डूबा हुआ है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। राहत शिविरों में हजारों लोग बाढ़ प्रभावित जिलों में प्रशासन ने 81 राहत शिविर और 34 राहत वितरण केंद्र संचालित किए हैं। इन राहत शिविरों में 32,477 से अधिक विस्थापित लोगों ने शरण ली है। सेना, वायुसेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), अग्निशमन विभाग और स्थानीय स्वयंसेवक लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। अमित शाह ने हिमंत सरमा से की बात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बातचीत कर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। बच्चों की पढ़ाई पर भी सरकार का फोकस मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राहत शिविरों में रह रहे बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर राहत शिविरों में पढ़ाई कर रहे बच्चों की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि बच्चों के लिए पढ़ाई और खेलने की अलग व्यवस्था की गई है, ताकि बाढ़ का असर उनके बचपन और शिक्षा पर कम से कम पड़े। मोबाइल नेटवर्क बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित शिवसागर जिले में लोगों को संचार सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इंट्रा-सर्किल रोमिंग (ICR) सेवा को 30 जुलाई रात 11:59 बजे तक या अगले आदेश तक बढ़ा दिया है, ताकि आपदा के दौरान लोगों का संपर्क बना रहे। भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, निचले इलाकों से दूर रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।  

kalpana जुलाई 30, 2026 0
NDRF personnel and rescue teams search through the rubble of a collapsed three-storey building in Pune's Moshi area as efforts continue to rescue those trapped.
पुणे बिल्डिंग हादसा: 30 घंटे से जारी रेस्क्यू, एक की मौत, कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका

पुणे: महाराष्ट्र के पुणे जिले के मोशी इलाके में तीन मंजिला इमारत गिरने के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। हादसे के करीब 30 घंटे बाद भी एनडीआरएफ, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटी हैं। अब तक नौ लोगों को सुरक्षित बचाया गया है, जबकि एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है। अब भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका एनडीआरएफ अधिकारियों के अनुसार, मलबे में अभी भी तीन से चार लोगों के दबे होने की आशंका है। बचाव दल हर संभावित स्थान पर सावधानीपूर्वक तलाशी अभियान चला रहा है। अस्थिर इमारत बनी सबसे बड़ी चुनौती एनडीआरएफ के सेकंड-इन-कमांड (ऑपरेशन्स) दीपक तिवारी ने बताया कि इमारत का ढांचा आगे की ओर झुक गया है और कैंटिलीवर जैसी स्थिति में है। इससे पूरी संरचना बेहद अस्थिर हो गई है, जिसके कारण राहत कार्य जोखिम भरा हो गया है। उन्होंने बताया कि मलबे के बीच जमा भारी मलबा और कचरा भी बचाव अभियान को मुश्किल बना रहा है। फिलहाल भारी मशीनों और मैन्युअल तरीके से मलबा हटाया जा रहा है। डॉग स्क्वॉड और तकनीक की मदद से चल रहा सर्च ऑपरेशन बचाव अभियान में आधुनिक तकनीकी उपकरणों के साथ डॉग स्क्वॉड की भी मदद ली जा रही है। एनडीआरएफ ने पूरी इमारत का तकनीकी सर्वे किया है और अब मलबा हटाकर अंदर तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान पूरी सावधानी के साथ चलाया जा रहा है ताकि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। भवन सुरक्षा पर फिर उठे सवाल मोशी की यह घटना महाराष्ट्र में पहले हो चुके घाटकोपर, ठाणे, भिवंडी और पुणे के अन्य इमारत हादसों की याद दिलाती है। इन मामलों में भी कमजोर निर्माण, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही को प्रमुख कारण माना गया था। हर बड़े हादसे के बाद जांच और कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाएं भवन निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। जांच के साथ जारी है राहत कार्य फिलहाल घटनास्थल पर राहत एवं बचाव अभियान जारी है। प्रशासन ने पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया है और इमारत गिरने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की है, जबकि हादसे के कारणों की विस्तृत जांच बाद में की जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 10, 2026 0
Bihar Kosi River
कोसी नदी में नाव हादसा: मूंग तोड़ने जा रहे लोगों से भरी नाव पलटी, कई लोग नदी में बहे

सुपौल, एजेंसियां। बिहार के सुपौल जिले में मंगलवार को कोसी नदी में एक दर्दनाक नाव हादसा हो गया। सरायगढ़ पंचायत के चिकनी गांव के समीप महिला, पुरुष और बच्चों से भरी एक नाव नदी के बीचोंबीच पलट गई। नाव पर सवार लोग नदी पार कर खेतों में मूंग तोड़ने जा रहे थे। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और नदी किनारे चीख-पुकार सुनाई देने लगी। कई लोग नदी की तेज धारा में बह गए, जबकि कुछ को ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए सुरक्षित बाहर निकाल लिया। खेत जाने के दौरान बिगड़ा संतुलन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाव सुरक्षा गाइड बांध के पश्चिम दिशा स्थित खेतों की ओर जा रही थी। इसी दौरान अचानक नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गई। नाव पलटते ही उसमें सवार सभी लोग नदी में गिर पड़े। घटना के बाद आसपास के लोगों ने तत्काल बचाव कार्य शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने बचाईं कई जानें स्थानीय ग्रामीणों ने बिना देर किए नदी में छलांग लगाकर डूब रहे लोगों को बचाने का प्रयास किया। उनकी तत्परता से कई लोगों की जान बच गई। अब तक पांच महिला और पुरुषों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भपटियाही पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चार गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। प्रशासन और एनडीआरएफ अलर्ट पर घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को सूचना दे दी है और लापता लोगों की तलाश के लिए विशेष सर्च ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी गई है। नदी किनारे पसरा मातम हादसे की खबर मिलते ही चिकनी गांव और आसपास के क्षेत्रों में शोक और चिंता का माहौल बन गया। परिजन नदी किनारे पहुंचकर अपने परिजनों की तलाश में जुट गए। प्रशासनिक टीम राहत और बचाव कार्य की निगरानी कर रही है। एनडीआरएफ के पहुंचने के बाद खोज अभियान को और तेज किए जाने की संभावना है। कोसी नदी का यह हादसा एक बार फिर नदी पार करने के दौरान सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर रहा है।

Unknown जून 9, 2026 0
Tourists stranded in Gulmarg Gondola ropeway cabins during rescue operation by Army and disaster response teams
गुलमर्ग में मौत को मात: रोपवे में खराबी से हवा में फंसे 300 पर्यटक, सेना ने बचाई जान

Gulmarg में सोमवार को बड़ा हादसा टल गया। गुलमर्ग गंडोला रोपवे में तकनीकी खराबी आने के बाद करीब 300 पर्यटक हवा में फंस गए। रोपवे के 65 केबिन घंटों तक आसमान में रुके रहे, जिससे पर्यटकों में दहशत फैल गई। सेना, पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की संयुक्त टीम ने सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। 500 फुट ऊंचाई पर अटके थे केबिन जानकारी के मुताबिक, कुछ केबिन जमीन से करीब 500 फुट की ऊंचाई पर फंसे हुए थे। खराब मौसम और बारिश के बीच बचाव अभियान चलाना काफी चुनौतीपूर्ण था। तकनीकी खराबी सामने आते ही Gulmarg Gondola सेवा को तुरंत रोक दिया गया। पांच घंटे में 179 लोगों को निकाला गया दोपहर के आसपास खराबी आने के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ। शुरुआती पांच घंटों में 179 पर्यटकों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया था। इसके बाद देर रात तक चले अभियान में बाकी लोगों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया। बचाव अभियान में State Disaster Response Force, National Disaster Response Force, सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान शामिल रहे। उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने की निगरानी जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल Manoj Sinha ने पुलिस महानिदेशक Nalin Prabhat को मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान की निगरानी करने के निर्देश दिए थे। वहीं मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने कहा कि सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि सभी केबिन सुरक्षित हैं और प्रशिक्षित टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी हुई हैं। बड़ा हादसा टला समय रहते रोपवे सेवा रोक दिए जाने और तेज रेस्क्यू ऑपरेशन की वजह से बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन अब तकनीकी खराबी की वजह की जांच कर रहा है। घटना के बाद पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने राहत टीमों और सेना के जवानों की तेजी और साहस की सराहना की है।    

surbhi मई 26, 2026 0
Rescue teams clearing debris after under-construction bridge collapse in Jammu's Bantalab area
जम्मू में निर्माणाधीन पुल गिरा: मलबे में दबे कई मजदूर, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

बंतलाब इलाके में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा सामने आया, जब एक निर्माणाधीन पुल का हिस्सा अचानक ढह गया। इस घटना में कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। 6 मजदूर फंसे, 2 को सुरक्षित निकाला गया स्थानीय जानकारी के अनुसार, हादसे के वक्त कुल 6 मजदूर मौके पर काम कर रहे थे। इनमें से 2 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि 4 मजदूर अब भी मलबे में फंसे हुए हैं। बचाव कार्य तेजी से जारी है और समय के साथ रेस्क्यू टीमों की चुनौती बढ़ती जा रही है। राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर घटना के तुरंत बाद प्रशासन हरकत में आया और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। मौके पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी राहत कार्य में जुटी हुई हैं। मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए सावधानीपूर्वक ऑपरेशन चलाया जा रहा है। पुराने पुल की कमजोर नींव बनी वजह? घटनास्थल पर पहुंचे विधायक श्यामलाल शर्मा ने बताया कि यह पुल पहले से ही जर्जर हालत में था और उसकी नींव कमजोर हो चुकी थी। इसी कारण इसका पुनर्निर्माण किया जा रहा था। उन्होंने आशंका जताई कि खुदाई के दौरान उत्पन्न कंपन या ऊपर से गुजर रहे किसी भारी वाहन के दबाव के कारण पुल का हिस्सा अचानक ढह गया। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। जांच के आदेश की संभावना प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि इस घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निर्माण कार्य में किसी तरह की लापरवाही तो नहीं हुई। लोगों में दहशत, प्रशासन पर सवाल इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश का माहौल है। निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।  

surbhi मई 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0