Organic Farming

Rare Noorjahan mango weighing 3.30 kilograms displayed by farmers in Madhya Pradesh's Alirajpur district.
3.30 किलो का नूरजहां आम 3,800 रुपये में बिका, जानिए क्यों कहा जाता है इसे 'आमों की मलिका'

  अलीराजपुर: मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में उगने वाला दुर्लभ और विशालकाय नूरजहां आम एक बार फिर चर्चा में है। 'आमों की मलिका' के नाम से मशहूर इस खास किस्म का 3.30 किलोग्राम वजन वाला एक आम इस सीजन में 3,800 रुपये में बिका है। आम उत्पादकों का दावा है कि मौसम अनुकूल रहा तो कुछ फलों का वजन जून के अंत तक 4 किलोग्राम तक पहुंच सकता है। 3.30 किलो का आम बना लोगों के आकर्षण का केंद्र कट्ठीवाड़ा क्षेत्र के आम उत्पादक भरतराज सिंह जादव ने बताया कि इस साल नूरजहां आम की पैदावार अच्छी रही है। उनके बगीचे में इस सीजन का सबसे बड़ा नूरजहां आम 3.30 किलोग्राम वजन का रहा, जिसे 3,800 रुपये में बेचा गया। उन्होंने बताया कि पेड़ों पर अभी भी कई बड़े आकार के फल लगे हुए हैं, जिनका अंतिम वजन आम तोड़ने के बाद ही पता चल सकेगा। देश-विदेश में बढ़ रही है मांग नूरजहां आम की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। वर्तमान में मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात से इसकी अच्छी मांग आ रही है। हाल ही में तमिलनाडु से भी इस दुर्लभ आम के लिए पूछताछ की गई है। भरतराज सिंह जादव के मुताबिक, इस सीजन में उनके बगीचे के नूरजहां आम संयुक्त अरब अमीरात (UAE), अमेरिका और स्पेन तक पहुंचे हैं। इनका औपचारिक निर्यात नहीं हुआ, बल्कि लोग अपने परिचितों और रिश्तेदारों के माध्यम से इन्हें विदेश ले गए। क्या है नूरजहां आम की खासियत? नूरजहां आम अपनी विशालकाय आकार, बेहतरीन स्वाद और सीमित उत्पादन के कारण देश की सबसे दुर्लभ और महंगी आम की किस्मों में गिना जाता है। इसकी प्रमुख विशेषताएं: एक आम का वजन 3 से 4 किलोग्राम तक हो सकता है। यह मुख्य रूप से मध्यप्रदेश के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में उगाया जाता है। स्वाद, आकार और दुर्लभता के कारण इसकी कीमत सामान्य आमों से कई गुना अधिक होती है। देश के साथ-साथ विदेशों में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। जैविक तरीके से उगाए जाने के कारण इसकी गुणवत्ता विशेष मानी जाती है। 4 किलो तक पहुंच सकता है वजन कट्ठीवाड़ा के एक अन्य आम उत्पादक शिवराज जादव ने बताया कि उनके बगीचे में नूरजहां आम के छह पेड़ हैं, जिन पर फिलहाल करीब 3 किलोग्राम वजन के कई फल लगे हुए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जून के अंत तक कुछ फलों का वजन 4 किलोग्राम तक पहुंच सकता है, जो इस सीजन का नया रिकॉर्ड भी बन सकता है। जलवायु परिवर्तन का दिख रहा असर आम उत्पादकों के अनुसार, कुछ दशक पहले नूरजहां आम का अधिकतम वजन 4.50 किलोग्राम तक पहुंच जाता था। बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के कारण अब इसका सामान्य वजन 3.50 से 3.80 किलोग्राम के बीच रह गया है। इसके बावजूद अपने विशाल आकार, सीमित उत्पादन और बेहतरीन स्वाद की वजह से नूरजहां आम आज भी देश की सबसे खास और महंगी आम प्रजातियों में शुमार है। जनवरी से शुरू होता है सफर, जून में बाजार तक पहुंचता है फल उत्पादकों के मुताबिक, नूरजहां आम के पेड़ों पर जनवरी में बौर आना शुरू हो जाता है। इसके बाद जून तक फल पूरी तरह पककर तैयार हो जाते हैं और बाजार में बिक्री के लिए पहुंचते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नूरजहां आम केवल एक फल नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की बागवानी विरासत और जैविक खेती की पहचान बन चुका है।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Uttarakhand Chief Minister Pushkar Singh Dhami operates a tiller and spreads organic manure in his farm with his mother.
सीएम धामी ने खेत में खुद चलाया टिलर, जैविक और पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने का दिया संदेश

  देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को अपने आवास नगला तराई स्थित खेत में स्वयं टिलर चलाकर खेती की जुताई की। इस दौरान उन्होंने खेत में गोबर की खाद भी डाली और किसानों को जैविक एवं पारंपरिक खेती अपनाने का संदेश दिया। उनके साथ उनकी मां बिशना देवी भी मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री धामी की खेत में काम करते हुए तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। 'खेती भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आत्मा' खेत में जुताई करने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आत्मा है। उन्होंने कहा, "आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक और प्राकृतिक खेती को अपनाकर कृषि को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है।" गोबर खाद और प्राकृतिक खेती पर दिया जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबर की खाद जैसी प्राकृतिक पद्धतियां न केवल भूमि की उर्वरता बढ़ाती हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और जैविक तथा प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाने की अपील की। धामी ने कहा, "प्राकृतिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है, उत्पादन अधिक सुरक्षित बनता है और किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलता है।" किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और जैविक उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। कृषि और प्रकृति से जुड़ी है उत्तराखंड की पहचान सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान कृषि, ग्रामीण संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी हुई है। राज्य सरकार पारंपरिक खेती, बागवानी, प्राकृतिक कृषि और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। युवाओं को खेती से जोड़ने की जरूरत मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज के समय में युवा पीढ़ी को खेती और ग्रामीण विकास से जोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और नवाचार के जरिए कृषि क्षेत्र को रोजगार और उद्यमिता का मजबूत माध्यम बनाया जा सकता है। उन्होंने किसानों और युवाओं से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाकर उत्तराखंड को कृषि के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का आह्वान किया।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Rajesh Kumar, known as Rosesh from Sarabhai vs Sarabhai, working in organic farming fields in Bihar
कर्ज में डूबे एक्टर से किसान तक का सफर: Rajesh Kumar की प्रेरणादायक कहानी

टीवी शो Sarabhai vs Sarabhai में ‘रोशेश’ के किरदार से पहचान बनाने वाले एक्टर Rajesh Kumar की जिंदगी का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। करोड़ों के कर्ज से जूझते हुए सब्जी बेचने तक का उनका संघर्ष अब लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन रहा है। एक्टिंग छोड़ी, गांव लौटकर शुरू की खेती कुछ साल पहले राजेश कुमार ने ग्लैमर की दुनिया को छोड़कर अपने गांव Bihar लौटने का फैसला किया। उन्होंने जैविक खेती की शुरुआत की और एक ऐप लॉन्च कर अपनी उपज बेचने की कोशिश की। हालात इतने मुश्किल हो गए कि उन्हें अपने बेटे के स्कूल के बाहर सब्जी का ठेला लगाकर सब्जियां बेचनी पड़ीं। 2 करोड़ का कर्ज, लेकिन नहीं मानी हार राजेश कुमार ने खुलासा किया था कि खेती के बिजनेस में उन्हें 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ। बैंक की किश्तें बाउंस होने लगीं क्रेडिट कार्ड एजेंट घर आने लगे बैंक खाते में सिर्फ ₹2,500 तक बच गए हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार संघर्ष करते रहे। बहनों ने छोड़ी विदेश की नौकरी हाल ही में उन्होंने बताया कि उनकी बहनें, जो पिछले 25 साल से अमेरिका और फिनलैंड में रह रही थीं, उन्होंने भी अपनी नौकरी छोड़ दी और अब बिहार में उनके साथ खेती कर रही हैं। उनकी बड़ी बहन ने अपने भाई के 50वें जन्मदिन पर नौकरी छोड़कर भारत आना ही सबसे बड़ा तोहफा बताया और खेती की जिम्मेदारी संभालने का फैसला किया। चुनौतियां अब भी बरकरार गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी भी 2G पर निर्भर 5G आने में अभी समय लगेगा इसके बावजूद परिवार खेती को आगे बढ़ाने में जुटा है। बाढ़ ने तोड़ी मेहनत, फिर भी जारी संघर्ष 2019 में पालघर में 20 एकड़ जमीन पर शुरू की गई खेती को बड़ा झटका लगा, जब अचानक आई बाढ़ में 15,000 से ज्यादा पौधे नष्ट हो गए। इसके बाद कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अब भी बाकी है थोड़ा कर्ज राजेश कुमार के मुताबिक, अब वह अपने आर्थिक संकट से काफी हद तक उबर चुके हैं। अभी केवल 10-15% कर्ज बाकी है जल्द ही खेती से जुड़ा एक नया और अलग प्रोजेक्ट लाने की तैयारी में हैं क्यों खास है यह कहानी? यह कहानी सिर्फ एक एक्टर की नहीं, बल्कि उस जज्बे की है जो मुश्किल हालात में भी हार नहीं मानता। यह बताती है कि संघर्ष के बाद सफलता जरूर मिलती है।  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Abhishek Banerjee addressing media as he writes to Lok Sabha Speaker seeking recognition of TMC as a unified party.
राजनीति

टीएमसी के बागियों को रोकने की आखिरी कोशिश! अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को लिखा पत्र, कहा- सदन में TMC को एकल पार्टी माना जाए

Deepshikha जून 15, 2026 0