Shahbaz Sharif

US President Donald Trump speaks to reporters aboard Air Force One, reiterating his claim that he helped prevent a nuclear conflict between India and Pakistan.
ट्रंप ने फिर दोहराया भारत-पाकिस्तान युद्ध रोकने का दावा, बोले- 'परमाणु युद्ध टाल दिया, नोबेल शांति पुरस्कार का हूं हकदार'

Donald Trump on India-Pakistan Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध को रोकने में अहम भूमिका निभाई थी। ब्रिटेन दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया जाता तो दोनों देशों के बीच संघर्ष परमाणु युद्ध में बदल सकता था। भारत-पाकिस्तान तनाव पर दोहराया पुराना दावा ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहॉल एयरबेस पर एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष बेहद गंभीर हो चुका था। उन्होंने कहा, "भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध चल रहा था। कई विमान मार गिराए गए थे और स्थिति परमाणु युद्ध की ओर बढ़ रही थी। हमने समय रहते इसे रोकने का काम किया।" शहबाज शरीफ का किया जिक्र ट्रंप ने दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी उनकी भूमिका की सराहना की थी। उनके अनुसार, संघर्ष रुकने से लाखों लोगों की जान बची। हालांकि, ट्रंप के इस दावे पर भारत की ओर से पहले भी अलग रुख सामने आ चुका है। 'मैंने आठ युद्ध रुकवाए' ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान दुनिया के कई संघर्षों को समाप्त कराने में भूमिका निभाई। उन्होंने अजरबैजान-आर्मेनिया और कांगो-रवांडा जैसे विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक वह आठ युद्धों को रुकवाने में सफल रहे हैं। नोबेल शांति पुरस्कार पर जताई दावेदारी ट्रंप ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी अन्य व्यक्ति की तुलना में उन्होंने अधिक शांति स्थापित करने का काम किया है और इसी कारण वह इस सम्मान के वास्तविक हकदार हैं। टैरिफ की धमकी का भी किया जिक्र अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने के लिए उन्होंने दोनों देशों को व्यापारिक टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी थी। उनके अनुसार, उन्होंने दोनों पक्षों से कहा था कि यदि संघर्ष जारी रहा तो अमेरिका कड़े आर्थिक कदम उठाएगा। भारत पहले ही कर चुका है दावे का खंडन भारत सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम होने में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं हुई थी। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। इसके बाद ट्रंप ने कई बार संघर्ष रोकने का श्रेय लिया, लेकिन नई दिल्ली ने अमेरिकी मध्यस्थता के दावों को लगातार खारिज किया है। फिलहाल ट्रंप के ताजा बयान पर भारत सरकार की ओर से कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Pakistan Army Chief Asim Munir attends a diplomatic event amid reports of an alleged Mossad threat during Switzerland visit.
आसिम मुनीर की हत्या की साजिश का दावा, पाकिस्तान ने बताया 'काल्पनिक कहानी'; मोसाद पर लगे आरोपों से मचा हड़कंप

  इस्लामाबाद/ल्यूसर्न: पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर को लेकर एक सनसनीखेज दावा सामने आया है। ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने आरोप लगाया है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने स्विट्जरलैंड दौरे के दौरान आसिम मुनीर और पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्यों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। पाकिस्तान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार और काल्पनिक बताया है। पत्रकार का दावा- मुनीर को निशाना बनाने की तैयारी कर रही थी मोसाद पेपे एस्कोबार ने राजनीतिक विश्लेषक मारियो नवफल के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान दावा किया कि पाकिस्तान की सेना को ऐसी विश्वसनीय जानकारी मिली थी, जिसके अनुसार मोसाद कथित रूप से आसिम मुनीर और पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही थी। एस्कोबार के अनुसार, यह कथित योजना उस समय बनाई गई जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर स्विट्जरलैंड के ल्यूसर्न में महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठकों में भाग लेने पहुंचे थे। 'अगर प्रतिनिधिमंडल को नुकसान पहुंचाया तो...' पाकिस्तान की कथित चेतावनी ब्राजीलियाई पत्रकार ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान ने कथित तौर पर इजरायल को कड़ा संदेश भेजा था। उनके अनुसार, यह संदेश संभवतः ओमान के माध्यम से पहुंचाया गया था। एस्कोबार के मुताबिक, पाकिस्तान ने चेतावनी दी थी कि यदि उसके प्रतिनिधिमंडल को कोई नुकसान पहुंचाया गया तो इसका गंभीर परिणाम होगा। हालांकि इस कथित संदेश की किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान ने दावों को बताया पूरी तरह झूठा इन दावों के सार्वजनिक होने के बाद पाकिस्तान की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया सामने आई। पाकिस्तानी मीडिया संस्थान ARY News के चेयरमैन कामरान खान ने एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह खबर "पूरी तरह बकवास और वास्तविकता से परे" है। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की स्विट्जरलैंड यात्रा पूरी तरह सामान्य रही और कार्यक्रम पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार संपन्न हुआ। यात्रा के दौरान किसी प्रकार का सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। स्विस दौरे में नहीं मिला कोई सुरक्षा खतरा पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, न तो स्विस सुरक्षा एजेंसियों और न ही अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने यात्रा के दौरान किसी संभावित खतरे की जानकारी दी। सुरक्षा व्यवस्था सामान्य प्रोटोकॉल के तहत संचालित होती रही और पूरे दौरे में कोई असामान्य स्थिति दर्ज नहीं की गई। अधिकारियों ने कहा कि मोसाद से जुड़ी साजिश की कहानी का वास्तविक घटनाओं से कोई संबंध नहीं है। ईरान-अमेरिका वार्ता के दौरान स्विट्जरलैंड में मौजूद था पाकिस्तान गौरतलब है कि पाकिस्तान का यह दौरा ऐसे समय हुआ था जब अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने के लिए बातचीत चल रही थी। स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में आयोजित बैठकों के दौरान पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद थे। आसिम मुनीर की कथित हत्या की साजिश संबंधी दावों की अब तक किसी आधिकारिक एजेंसी या स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे अफवाह और अटकलों पर आधारित बताया है।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Women T20 World Cup
सेमीफाइनल की राह में भारत-बांग्लादेश आमने-सामने, जीत दोनों टीमों के लिए बेहद अहम

मैनचेस्टर, एजेंसियां। विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप में गुरुवार को ग्रुप-ए के समीकरण बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गए हैं। भारतीय महिला टीम का सामना बांग्लादेश से होगा, जबकि दूसरे मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका की टीम नीदरलैंड से भिड़ेगी। सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए भारत, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका तीनों टीमों के लिए जीत जरूरी है। तीन मैचों के बाद इन तीनों टीमों के चार-चार अंक हैं, जबकि नीदरलैंड पहले ही शीर्ष-4 की दौड़ से बाहर हो चुकी है।   बांग्लादेश के खिलाफ भारत का शानदार रिकॉर्ड विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के इतिहास में बांग्लादेश की टीम भारत को अब तक एक भी बार नहीं हरा सकी है। दोनों टीमें टूर्नामेंट में तीन बार आमने-सामने आई हैं और हर बार भारतीय टीम ने जीत दर्ज की है। वहीं कुल टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की बात करें तो दोनों देशों के बीच 23 मैच खेले गए हैं, जिनमें भारत ने 20 और बांग्लादेश ने केवल तीन मुकाबले जीते हैं।   स्मृति मंधाना और श्री चरणी पर रहेंगी निगाहें भारतीय टीम की ओपनर स्मृति मंधाना शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने टूर्नामेंट के तीन मैचों में 159 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 154 से अधिक रहा है। गेंदबाजी में एन. श्री चरणी टूर्नामेंट की सबसे सफल गेंदबाज बनी हुई हैं। उन्होंने तीन मुकाबलों में 10 विकेट झटके हैं। इसके अलावा जेमिमा रोड्रिग्स से भी बड़ी पारी की उम्मीद रहेगी। दूसरी ओर बांग्लादेश के लिए जुआरिया फिरदौस और संजीदा अख्तर मेघला प्रमुख खिलाड़ी होंगी। जुआरिया टीम की सबसे सफल बल्लेबाज रही हैं, जबकि संजीदा ने गेंद से प्रभावशाली प्रदर्शन किया है।   दक्षिण अफ्रीका को बड़ी जीत की तलाश दिन के दूसरे मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका का सामना नीदरलैंड से होगा। दक्षिण अफ्रीका न केवल जीत बल्कि बेहतर नेट रन रेट के लिए बड़ी जीत दर्ज करना चाहेगा। मारिजान काप और कप्तान लौरा वोल्वार्ट टीम की प्रमुख उम्मीदें होंगी, जबकि नीदरलैंड की कप्तान बेबेट डी लीडे एक बार फिर टीम की सबसे बड़ी ताकत रहेंगी।

anjali kumari जून 25, 2026 0
Iranian President Masoud Pezeshkian receives ceremonial honors during his official visit to Pakistan.
पाकिस्तान ने ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान को दिया विशेष सम्मान, क्या कूटनीतिक रिश्तों को नई मजबूती देने की कोशिश?

  ईरान और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का पाकिस्तान दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान पाकिस्तान ने ईरानी राष्ट्रपति का विशेष स्वागत किया और उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। इसके बाद क्षेत्रीय राजनीति और दोनों देशों के संबंधों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश करते ही मिला विशेष सैन्य सम्मान राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के विशेष विमान के पाकिस्तान की वायुसीमा में प्रवेश करते ही पाकिस्तानी वायुसेना के JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों ने उसे एस्कॉर्ट किया। इस्लामाबाद पहुंचने पर उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई और औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रदान किया गया। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्वागत दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों का संकेत माना जा सकता है। पाकिस्तान ने प्रदान की मानद डॉक्टरेट की उपाधि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। कराची स्थित कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स पाकिस्तान (CPSP) की ओर से यह सम्मान दिया गया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्वयं उन्हें यह उपाधि प्रदान की। पेजेश्कियान पेशे से हृदय रोग विशेषज्ञ और कार्डियक सर्जन रहे हैं तथा राजनीति में आने से पहले चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। पहले भी ईरानी राष्ट्रपति को मिल चुका है सम्मान यह पहला अवसर नहीं है जब पाकिस्तान ने किसी ईरानी राष्ट्रपति को इस प्रकार का सम्मान दिया हो। इससे पहले दिवंगत ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को भी पाकिस्तान की ओर से मानद उपाधि प्रदान की गई थी। इससे संकेत मिलता है कि इस्लामाबाद और तेहरान के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतीकात्मक और कूटनीतिक कदम लगातार उठाए जाते रहे हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, सीमा सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा सहयोग तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया की स्थिति, ईरान-अमेरिका वार्ता और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े विषय भी बातचीत का हिस्सा रहे। अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच बढ़ा दौरे का महत्व यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियां तेज हुई हैं। स्विट्जरलैंड में हुई वार्ताओं के बाद दोनों देशों के बीच संभावित समझौते को लेकर कई दौर की चर्चाएं जारी हैं। ऐसे में पाकिस्तान की भूमिका और ईरान के साथ उसके बढ़ते संपर्कों को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति पेजेश्कियान को दिया गया सम्मान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास और सहयोग को मजबूत करने का संदेश भी है। ऊर्जा, व्यापार, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान और ईरान लंबे समय से सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में यह दौरा भविष्य में दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
Donald Trump and Iranian officials amid reports of a potential US-Iran peace deal and reopening of the Strait of Hormuz.
अमेरिका-ईरान शांति समझौते का दावा, 19 जून को स्विट्जरलैंड में हो सकते हैं हस्ताक्षर; होर्मुज स्ट्रेट खोलने का ऐलान

  वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों में हलचल बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है। वहीं, ईरान की ओर से भी इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने का किया ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरा हो चुका है। उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को फिर से खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की घोषणा की। ट्रंप ने लिखा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है। सभी को बधाई। दुनिया के जहाज अब अपने इंजन शुरू करें, तेल का प्रवाह जारी रहने दें।" ईरान ने रखी अपनी शर्तें ईरान के कानूनी एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि तेहरान प्रस्तावित 60 दिन की वार्ता प्रक्रिया में तभी शामिल होगा, जब अमेरिका युद्ध समाप्त करने, नाकेबंदी हटाने और ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने जैसे अपने वादों को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि समझौते का अर्थ यह नहीं है कि ईरान अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा कर रहा है। तेहरान अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन की लगातार निगरानी करेगा। शहबाज शरीफ ने भी किया समझौते का दावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि लंबी बातचीत और गहन वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान शांति समझौते पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने लेबनान समेत विभिन्न मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने का निर्णय लिया है। शरीफ के अनुसार, समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में किए जा सकते हैं। कतर, सऊदी अरब और तुर्किये की भूमिका अहम शहबाज शरीफ ने इस मध्यस्थता प्रक्रिया में कतर, सऊदी अरब और तुर्किये की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन देशों के कूटनीतिक प्रयासों ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परमाणु कार्यक्रम पर भी रहेगा फोकस डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी को और मजबूत किया जाएगा। इसमें निरीक्षण व्यवस्था को सख्त करने तथा परमाणु सामग्री के प्रबंधन से जुड़े प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजरें समझौते पर यदि 19 जून को प्रस्तावित हस्ताक्षर होते हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुलता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में भी राहत देखने को मिल सकती है। अमेरिका, ईरान और अन्य संबंधित पक्षों की ओर से समझौते के अंतिम दस्तावेज और आधिकारिक विवरण सार्वजनिक होने का इंतजार किया जा रहा है।  

Deepshikha जून 15, 2026 0
Saudi Arabia and Pakistan officials shaking hands after announcing $3 billion financial support to boost reserves.
सऊदी अरब से पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की मदद, सही समय पर मिला बड़ा सहारा

  इस्लामाबाद: पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान को अतिरिक्त 3 अरब डॉलर के डिपॉजिट देने का ऐलान किया है। यह रकम अगले सप्ताह तक मिलने की उम्मीद है और इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी। वित्त मंत्री ने की पुष्टि पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगज़ेब ने वॉशिंगटन डीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मदद की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि: सऊदी अरब 3 अरब डॉलर का नया डिपॉजिट देगा पहले से मौजूद 5 अरब डॉलर की राशि को भी 2028 तक बढ़ाया जाएगा इससे देश की आर्थिक स्थिति को स्थिर करने में मदद मिलेगी UAE के पैसे लौटाने के बाद आई राहत हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात ने अपने डिपॉजिट वापस ले लिए थे। इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा सरकार ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया लेकिन बाजार में चिंता बढ़ गई थी ऐसे में सऊदी अरब की मदद को “टाइमली सपोर्ट” माना जा रहा है। कूटनीतिक हलचल के बीच फैसला यह आर्थिक सहायता ऐसे समय पर आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में: शहबाज शरीफ ने सऊदी नेतृत्व से मुलाकात की शांति वार्ता से पहले दोनों देशों में बातचीत हुई इसके तुरंत बाद आर्थिक सहायता का ऐलान हुआ सैन्य सहयोग भी बढ़ा सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग भी मजबूत होता दिख रहा है। पाकिस्तान का सैन्य दस्ता सऊदी अरब पहुंचा शाह अब्दुलअज़ीज़ एयर बेस पर तैनाती वायुसेना के लड़ाकू और सपोर्ट विमान शामिल पाकिस्तान के लिए क्यों अहम? पाकिस्तान इस समय आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार सीमित आयात पर दबाव कर्ज का बोझ ऐसे में 3 अरब डॉलर की यह मदद: रुपये को स्थिर करने में मदद करेगी बाजार में भरोसा बढ़ाएगी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रेडिबिलिटी मजबूत करेगी आगे क्या? यह कदम सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। फिलहाल, सऊदी अरब की यह मदद पाकिस्तान के लिए बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है, लेकिन लंबे समय तक स्थिरता के लिए उसे आर्थिक सुधारों पर भी जोर देना होगा।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Pakistan Army Chief Asim Munir meeting Iranian officials in Tehran for US-Iran peace talks.
US-Iran तनाव के बीच पाकिस्तान एक्टिव: तेहरान पहुंचे आर्मी चीफ आसिम मुनीर, ‘शांति वार्ता 2.0’ की उम्मीद

  तेहरान/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर बुधवार को एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे। शांति मिशन पर मुनीर की ईरान यात्रा पाकिस्तान की सेना की मीडिया विंग ISPR के अनुसार, यह दौरा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिशों का हिस्सा है। मुनीर के साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी मौजूद हैं। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संभावित दूसरे दौर की वार्ता को आगे बढ़ाना और कूटनीतिक गतिरोध खत्म करना है। शहबाज शरीफ के ताबड़तोड़ विदेश दौरे दूसरी ओर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे हैं। वह एक साथ कई अहम देशों के दौरे पर हैं: सऊदी अरब कतर तुर्की इन बैठकों में क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और अमेरिका-ईरान तनाव पर चर्चा की जा रही है। ‘शांति वार्ता 2.0’ की तैयारी सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत हो सकती है। पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद है: दोनों देशों के बीच तनाव कम करना स्थायी समाधान की दिशा में बढ़ना मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति टालना पहला दौर रहा बेनतीजा इससे पहले इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी। इसके बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए। डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़े तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया। आगे क्या? अब पूरी दुनिया की नजर संभावित “शांति वार्ता 2.0” पर टिकी है। अगर यह बातचीत सफल रहती है, तो क्षेत्र में स्थिरता लौट सकती है। वार्ता विफल होने की स्थिति में अमेरिका-ईरान तनाव और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर भी असर देखने को मिल सकता है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
US Iran ceasefire
अमेरिका-ईरान में 2 हफ्ते का सीजफायर, 40वें दिन जंग रुकी

तेहरान/वॉशिंगटन डीसी, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिन से जारी जंग के बाद आखिरकार 2 हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ की अपील के बाद लिया गया। साथ ही, उन्होंने कहा कि इसके लिए चीन ने ईरान को मनाया।  ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी सीजफायर से पहले ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिला तो वह उसकी पूरी सभ्यता खत्म कर देंगे। उन्होंने अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की भी धमकी दी थी। पाकिस्तान और चीन ने की मध्यस्थता न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह डील पाकिस्तान की मध्यस्थता और आखिरी समय में चीन के दखल के बाद संभव हो पाई। पाकिस्तान ने 2 हफ्ते के सीजफायर का प्रस्ताव रखा था, जिसे ईरान ने स्वीकार कर लिया। ये हुए समझौते समझौते के तहत अमेरिका और इजराइल अपने हमले रोकेंगे। ईरान भी हमले बंद करेगा। इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट से तेल, गैस और अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही ईरानी सेना की मदद से सुनिश्चित की जाएगी। यह सीजफायर लेबनान समेत अन्य क्षेत्रों पर भी लागू होगा। इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच 10 अप्रैल को औपचारिक बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू होगी। ईरान का दावा-अमेरिका ने उसकी 10 शर्तें मानी ट्रम्प ने बताया कि ईरान ने अमेरिका को 10 पाइंट का प्लान भेजा है। उन्होंने कहा कि इस पर आगे बातचीत की जा सकती है। वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने दावा किया है कि अमेरिका ने उसका 10 पॉइंट प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। काउंसिल के मुताबिक यह समझौता ईरान की शर्तों पर हुआ है और इसे देश की जीत बताया है।   ईरान की 10 शर्ते 1. हमले पूरी तरह बंद हों ईरान ने अमेरिका और इजराइल से सभी सैन्य हमले खत्म करने की मांग रखी। 2. सभी सैंक्शन हटाए जाएं ईरान ने सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने की शर्त रखी गई। 3. फ्रीज किए गए एसेट्स वापस मिलें ईरान ने अपने सभी फ्रीज फंड और संपत्तियां वापस देने की मांग की। 4. जंग का स्थायी अंत सिर्फ सीजफायर नहीं, बल्कि युद्ध पूरी तरह खत्म करने की शर्त रखी गई। 5. अमेरिकी सेना की वापसी ईरान ने मिडिल-ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों से सेना हटाने की मांग की। 6. नुकसान की भरपाई जंग में हुए नुकसान के लिए आर्थिक मुआवजा या पुनर्निर्माण की व्यवस्था मांगी गई। 7. हॉर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की शर्त रखी। 8. सुरक्षित आवाजाही, लेकिन शर्तों के साथ जहाजों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति होगी, लेकिन यह ईरानी सेना के समन्वय में होगी। 9. प्रति जहाज फीस का प्रस्ताव ईरान ने प्रस्ताव रखा कि हर जहाज से करीब 20 लाख डॉलर फीस ली जाएगी, जिसे ओमान के साथ साझा किया जाएगा। 10. क्षेत्रीय संघर्ष भी खत्म हों लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमले समेत क्षेत्रीय तनाव खत्म करने की मांग भी शामिल है।

Unknown अप्रैल 8, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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