Shiva Puja

Sawan Somwar 2026 Bel Patra remedies for Lord Shiva worship, prosperity, peace, health and spiritual blessings
Sawan Somwar 2026: सावन सोमवार पर बेलपत्र के ये उपाय कर सकते हैं शुभ, जानें सुख-समृद्धि और आरोग्य के लिए क्या करें

Sawan Somwar Bel Patra Ke Upay: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दौरान पड़ने वाले सोमवार का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। शिवभक्त इस दिन व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में बेलपत्र को भगवान शिव का प्रिय माना गया है। इस बार सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं, जिनमें पहला सोमवार 3 अगस्त 2026 को है। मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन शिव पूजा के साथ बेलपत्र से जुड़े कुछ पारंपरिक उपाय करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता, सुख-शांति एवं समृद्धि के संयोग बन सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र से जुड़े कुछ उपाय अलग-अलग मनोकामनाओं के लिए किए जाते हैं। आइए जानते हैं सावन सोमवार पर बेलपत्र के कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं। सुख-शांति और कालसर्प दोष के लिए बेलपत्र का उपाय सावन सोमवार के दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर 108 बेलपत्र लें। इन पर सफेद चंदन से ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘श्रीराम’ लिखकर भगवान शिव को अर्पित करने की परंपरा बताई गई है। मान्यता के अनुसार, इस उपाय को सांसारिक सुख, मानसिक शांति और भगवान शिव की कृपा से जोड़कर देखा जाता है। कुंडली में कालसर्प दोष की स्थिति में भी इस उपाय को शुभ माना जाता है। हालांकि, कालसर्प दोष और उसके प्रभाव से जुड़ी मान्यताएं ज्योतिष पर आधारित हैं और इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार नहीं माना जाता। परिवार के आरोग्य के लिए करें यह उपाय यदि परिवार में कोई व्यक्ति लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहा है, तो सावन सोमवार पर बेलपत्र से जुड़ी यह पारंपरिक पूजा की जा सकती है। इसके लिए तांबे के पात्र में पीला चंदन मिला हुआ जल लें और उसमें 108 बेलपत्र डालें। इसके बाद शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करते हुए भगवान शिव का ध्यान करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पूजा के माध्यम से भगवान शिव से परिवार के सदस्य के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है। ध्यान रखें: बीमारी की स्थिति में यह धार्मिक उपाय चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर योग्य डॉक्टर की सलाह और उपचार जरूरी है। मंदिर न जा पाएं तो बेलपत्र के पेड़ के पास करें पूजा किसी कारण से यदि आप मंदिर नहीं जा सकते या आसपास शिवलिंग उपलब्ध नहीं है, तो बेलपत्र के पौधे या वृक्ष के पास भी पूजा करने की परंपरा बताई गई है। धार्मिक मान्यता है कि बेलपत्र के मूल स्थान में भगवान शिव का वास माना जाता है। ऐसे में बेलपत्र के वृक्ष के मूल में जल अर्पित करें। इसके बाद धूप, पुष्प आदि चढ़ाएं और दीपक जलाकर भगवान शिव का स्मरण करें। मान्यता के अनुसार, श्रद्धापूर्वक की गई इस पूजा से मन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक शांति का भाव बढ़ सकता है। आर्थिक तंगी के लिए करें दान सावन में बेलपत्र को भगवान शिव से जुड़ा महत्वपूर्ण पूजन सामग्री माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा है तो सावन सोमवार के दिन बेलपत्र के मूल स्थान के पास किसी जरूरतमंद या शिवभक्त को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दूध, घी और अन्न का दान किया जा सकता है। मान्यता है कि जरूरतमंद की सहायता और दान-पुण्य से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का वातावरण बनता है। सावन सोमवार पर बेलपत्र चढ़ाते समय रखें इन बातों का ध्यान भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा प्राचीन धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है। पूजा करते समय श्रद्धा और स्वच्छता का ध्यान रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। बेलपत्र अर्पित करते समय भगवान शिव का ध्यान करें और अपनी मनोकामना के साथ-साथ परिवार के सुख, शांति और कल्याण की प्रार्थना करें। धार्मिक अनुष्ठानों में स्थानीय परंपरा और अपने परिवार की पूजा-पद्धति का भी सम्मान करें। सावन सोमवार 2026: आस्था के साथ सेवा का भी संदेश सावन सोमवार केवल पूजा और व्रत तक सीमित नहीं है। इस अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता, अन्नदान और सेवा को भी धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व दिया गया है। इसलिए यदि आप बेलपत्र से जुड़े उपाय कर रहे हैं, तो अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद की मदद करना भी इस दिन को सार्थक बना सकता है।  

surbhi अगस्त 3, 2026 0
Sawan Vrat Katha Chapter 4 explaining Dharan Paran Vrat, Masopavas, Rudravarti Vrat and Shiva worship
सावन व्रत कथा अध्याय-4: धारण-पारण व्रत से लेकर रुद्रवर्ती व्रत तक, जानें भगवान शिव की आराधना का महत्व

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूरे महीने शिव पूजा, व्रत, अभिषेक, दान और कथा श्रवण का विशेष महत्व है। सावन सोमवार के साथ-साथ अलग-अलग व्रतों और उनकी विधियों का वर्णन भी धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। सावन व्रत कथा के चौथे अध्याय में भगवान शिव सनत्कुमार को धारण-पारण व्रत, मासोपवास और रुद्रवर्ती व्रत का महत्व बताते हैं। कथा में इन व्रतों की विधि, उद्यापन और उनसे जुड़े धार्मिक फलों का विस्तार से वर्णन किया गया है। क्या है धारण-पारण व्रत? भगवान शिव के अनुसार धारण-पारण व्रत की शुरुआत सावन की प्रतिपदा तिथि से की जाती है। सबसे पहले पुण्याहवाचन कराने के बाद भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस व्रत में एक दिन उपवास किया जाता है, जबकि अगले दिन पारण यानी भोजन किया जाता है। इसी क्रम को व्रत की निर्धारित अवधि तक जारी रखा जाता है। सावन मास समाप्त होने के बाद इस व्रत का उद्यापन करने का भी विधान बताया गया है। धारण-पारण व्रत के उद्यापन की विधि व्रत की समाप्ति पर सबसे पहले पुण्याहवाचन कराया जाता है। इसके बाद आचार्य और अन्य ब्राह्मणों का वरण किया जाता है। कथा के अनुसार पार्वती और भगवान शिव की स्वर्ण प्रतिमाओं को जल से भरे कलश पर स्थापित करके रात्रि में श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है। इसके बाद पुराण श्रवण आदि के साथ रात्रि जागरण किया जाता है। अगले दिन स्नान और पूजा के बाद विधिपूर्वक हवन किया जाता है। अलग-अलग मंत्रों के साथ तिल मिश्रित भात, घी मिश्रित भात और खीर की आहुति देने का उल्लेख मिलता है। इसके बाद पूर्णाहुति की जाती है। अंत में ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है और आचार्य की पूजा की जाती है। कथा में इस प्रकार उद्यापन करने को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। सावन में मासोपवास का क्या है महत्व? अध्याय-4 में भगवान शिव सावन में किए जाने वाले मासोपवास की विधि भी बताते हैं। प्रतिपदा के दिन प्रातःकाल इस व्रत का संकल्प लेने की बात कही गई है। स्त्री या पुरुष, दोनों को मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए व्रत करने का संदेश दिया गया है। व्रत के अंत में अमावस्या तिथि पर भगवान शिव की षोडशोपचार विधि से पूजा करने का उल्लेख है। इसके बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, आभूषण आदि से ब्राह्मणों का पूजन, भोजन और सम्मान करने की परंपरा बताई गई है। रुद्रवर्ती व्रत क्या है? सावन व्रत कथा के इस अध्याय में रुद्रवर्ती व्रत को भी विशेष महत्व दिया गया है। कथा के अनुसार यह भगवान शिव को प्रसन्न करने वाला और अनेक धार्मिक फलों से जुड़ा व्रत माना गया है। इसके लिए कपास के 11 तंतुओं से विशेष बत्तियां बनाने का विधान बताया गया है। सावन के पहले दिन संकल्प लेकर पूरे महीने प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा के बाद इन बत्तियों से नीराजन यानी आरती करने की बात कही गई है। कथा में अलग-अलग तरीके से एक लाख बत्तियों का नीराजन पूरा करने के विकल्पों का भी वर्णन मिलता है। घी में भिगोई हुई बत्तियों को भगवान शिव को प्रिय बताया गया है। पूजा के बाद कथा श्रवण करने का भी महत्व बताया गया है। रुद्रवर्ती व्रत से जुड़ी है सुगंधा की कथा रुद्रवर्ती व्रत के प्रभाव को समझाने के लिए कथा में उज्जयिनी नगरी की सुगंधा नामक एक स्त्री का प्रसंग आता है। कथा के अनुसार सुगंधा अपने जीवन में अनेक गलत कार्य कर चुकी थी। एक दिन क्षिप्रा नदी के तट पर पहुंचने पर उसने वहां तपस्या और पूजा में लीन ऋषियों को देखा। इसी दौरान उसकी नजर मुनि वसिष्ठ पर पड़ी। मुनि वसिष्ठ के दर्शन से उसके मन में वैराग्य और धर्म के प्रति रुचि जागी। उसने अपने किए कर्मों के लिए प्रायश्चित का मार्ग पूछा और अपने पापों से मुक्ति का उपाय जानना चाहा। मुनि वसिष्ठ ने उसे काशी जाकर भगवान शिव को प्रिय रुद्रवर्ती व्रत करने की सलाह दी। सुगंधा ने काशी में किया रुद्रवर्ती व्रत कथा के अनुसार सुगंधा अपने धन और साथियों के साथ काशी पहुंची और मुनि वसिष्ठ द्वारा बताए गए विधान के अनुसार रुद्रवर्ती व्रत किया। धार्मिक कथा में बताया गया है कि व्रत के प्रभाव से उसे परम गति प्राप्त हुई और वह भगवान शिव में विलीन हो गई। इस प्रसंग के माध्यम से कथा में यह संदेश दिया गया है कि श्रद्धा, प्रायश्चित और भक्ति के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ सकता है। माणिक्य वर्तियों का भी बताया गया है महत्व इसके बाद कथा में माणिक्य वर्तियों के माहात्म्य का वर्णन आता है। इसमें भगवान शिव की विशेष कृपा और आध्यात्मिक फल प्राप्त होने की मान्यता बताई गई है। व्रत की पूर्णता के लिए उद्यापन की विधि भी बताई गई है। चांदी से बनी नंदी की प्रतिमा पर विराजमान भगवान शिव और माता पार्वती की स्वर्ण प्रतिमा को कलश पर स्थापित करके विधिपूर्वक पूजा करने का उल्लेख है। इसके बाद रात्रि जागरण किया जाता है। रुद्रवर्ती व्रत के उद्यापन में क्या करें? अगले दिन स्नान करके आचार्य और 11 ब्राह्मणों का वरण करने की बात कही गई है। इसके बाद रुद्रसूक्त, गायत्री मंत्र या मूल मंत्र के माध्यम से घी, खीर और बेलपत्रों से हवन करने का विधान बताया गया है। पूर्णाहुति के बाद आचार्य और अन्य ब्राह्मणों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। इसके बाद 11 ब्राह्मणों को सपत्नीक भोजन कराने का उल्लेख मिलता है। अंत में व्रत से जुड़ी स्थापित सामग्री ब्राह्मण को दान करने की बात कही गई है। कथा में इसे अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। सावन व्रत कथा अध्याय-4 का संदेश सावन व्रत कथा का चौथा अध्याय व्रत, संयम, पूजा, दान और प्रायश्चित के महत्व पर जोर देता है। धारण-पारण व्रत में उपवास और पारण की परंपरा, मासोपवास में आत्मसंयम और रुद्रवर्ती व्रत में भगवान शिव की आराधना को विशेष स्थान दिया गया है। सुगंधा की कथा के माध्यम से यह भी संदेश मिलता है कि मनुष्य अपने जीवन में गलतियों को स्वीकार करके सही मार्ग की ओर बढ़ सकता है। सावन का समय भक्ति के साथ-साथ आत्मचिंतन, संयम और सेवा का अवसर भी माना जाता है।  

surbhi जुलाई 31, 2026 0
Sawan Vrat Katha Chapter 1 explaining why Shravan month is most beloved to Lord Shiva
Sawan Vrat Katha: सावन व्रत कथा अध्याय-1, जानें क्यों भगवान शिव को सबसे प्रिय है श्रावण मास

Sawan Vrat Katha Chapter 1: हिंदू धर्म में सावन मास को भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष और पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में व्रत, जप, तप, पूजा और भगवान शिव का ध्यान करने से भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त होती है। सावन में सोमवार व्रत का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन धार्मिक ग्रंथों में इस पूरे महीने को ही व्रत और धर्म-कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। सावन व्रत कथा के प्रथम अध्याय में ऋषि शौनक और सूतजी के संवाद से कथा की शुरुआत होती है। ऋषि शौनक सूतजी से ऐसे मास के बारे में जानना चाहते हैं जो सभी महीनों में श्रेष्ठ हो और जिसमें किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता हो। शौनक ऋषियों ने सूतजी से पूछा प्रश्न ऋषि शौनक ने सूतजी से कहा कि उन्होंने उनसे अनेक पवित्र महीनों और उनसे जुड़े धर्म-कर्म का महत्व सुना है। अब उनकी इच्छा ऐसे महीने के बारे में जानने की है जो सभी महीनों में सबसे श्रेष्ठ हो और भगवान को अत्यंत प्रिय हो। ऋषियों ने आग्रह किया कि यदि ऐसा कोई महीना है जिसमें किए गए व्रत, पूजा और धार्मिक कर्मों का फल अन्य समय की तुलना में अधिक माना जाता है, तो उसके बारे में विस्तार से बताया जाए। सूतजी ऋषियों की श्रद्धा और जिज्ञासा से प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा कि सच्चे श्रोता में श्रद्धा, विनम्रता, पवित्रता, स्थिर मन, भक्ति, ज्ञान सुनने की इच्छा और अहंकार से दूर रहने जैसे गुण होने चाहिए। उन्होंने ऋषियों में इन सभी गुणों को देखकर उन्हें सावन मास की महिमा सुनाने का निर्णय लिया। सनत्कुमार ने भगवान शिव से पूछा सावन का महत्व कथा में आगे बताया गया है कि एक समय सनत्कुमार ने भगवान शिव से धर्म और व्रतों के विषय में जानने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने भगवान शिव से पूछा कि बारह महीनों में ऐसा कौन-सा महीना है जो उन्हें सबसे अधिक प्रिय है और जिसमें किए गए धार्मिक कर्मों का विशेष फल प्राप्त होता है। सनत्कुमार ने भगवान शिव से यह भी जानना चाहा कि उस महीने में कौन-कौन से व्रत करने चाहिए, उनकी विधि क्या है, कौन व्यक्ति उन्हें कर सकता है और उनसे क्या फल प्राप्त होता है। उन्होंने व्रत के पूजन, जागरण, उद्यापन और संबंधित देवताओं की पूजा के बारे में भी विस्तार से बताने का आग्रह किया। भगवान शिव ने बताया श्रावण मास का महत्व सनत्कुमार के प्रश्न पर भगवान शिव ने कहा कि बारह महीनों में श्रावण मास उन्हें अत्यंत प्रिय है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने की महिमा सुनना और इसका स्मरण करना भी पुण्यकारी माना गया है। श्रावण मास का नाम इसके धार्मिक और नक्षत्र संबंधी महत्व से भी जोड़ा जाता है। इस महीने की पूर्णिमा श्रवण नक्षत्र से संबंधित मानी जाती है। इसी कारण इसे श्रावण कहा गया है। इसकी पवित्रता और निर्मलता के कारण इसे 'नभा' नाम से भी संबोधित किया गया है। सभी व्रतों और धर्म-कर्म के लिए विशेष माना गया है सावन भगवान शिव ने सावन की महिमा बताते हुए कहा कि इस महीने में अनेक प्रकार के व्रत और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में सावन को ऐसा महीना माना गया है जिसमें लगभग हर तिथि किसी न किसी व्रत या धार्मिक कर्म से जुड़ी हो सकती है। मान्यता के अनुसार, जो लोग अपनी मनोकामना, धन, ज्ञान, भक्ति या मोक्ष की इच्छा रखते हैं, वे इस महीने में अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं। सावन को केवल किसी एक वर्ग के लिए सीमित नहीं माना गया है। ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम से जुड़े लोग भी अपनी परंपरा और क्षमता के अनुसार इस महीने में धार्मिक साधना कर सकते हैं। सनत्कुमार ने मांगी सावन के व्रतों की पूरी जानकारी भगवान शिव की बात सुनकर सनत्कुमार ने उनसे सावन मास में किए जाने वाले सभी व्रतों की विस्तृत जानकारी देने का अनुरोध किया। उन्होंने पूछा कि किस तिथि और किस दिन कौन-सा व्रत करना चाहिए, व्रत का अधिकारी कौन है, उसकी पूजा विधि क्या है और उससे क्या फल प्राप्त होता है। उन्होंने व्रत के उद्यापन, पूजन स्थान, जागरण, देवता, पूजा सामग्री और उचित समय के बारे में भी विस्तार से बताने की प्रार्थना की। सनत्कुमार ने भगवान शिव से यह भी पूछा कि सावन मास उन्हें इतना प्रिय क्यों है, इस महीने की पवित्रता का कारण क्या है, इस महीने में भगवान का कौन-सा अवतार हुआ और इसे अन्य महीनों से श्रेष्ठ क्यों माना जाता है। भगवान शिव की महिमा का किया वर्णन सनत्कुमार ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए उन्हें कल्याणकारी और पापों का नाश करने वाला बताया। उन्होंने भगवान शिव को 'शिव' और 'हर' जैसे नामों से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की महिमा इतनी व्यापक है कि एक सामान्य मनुष्य अनेक जन्मों में भी उनके प्रभाव और स्वरूप का पूर्ण वर्णन नहीं कर सकता। सनत्कुमार ने भगवान शिव के स्वरूप और उनके विभिन्न धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके स्वरूप में अन्य देव शक्तियों का भी समावेश माना गया है। उन्होंने भगवान शिव की सर्वोच्चता, वैराग्य और त्याग के प्रतीक रूप में उनके श्मशान और पर्वत पर निवास का भी वर्णन किया। समुद्र मंथन और भगवान शिव का त्याग सनत्कुमार ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष का भी उल्लेख किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब विष के कारण सृष्टि पर संकट आया, तब भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया। इसी त्याग और लोककल्याण की भावना के कारण भगवान शिव को नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है। कथा में भगवान शिव के उस स्वरूप को याद किया गया है जो संसार की रक्षा के लिए विष तक को अपने भीतर धारण करने में समर्थ रहा। सनत्कुमार अंत में भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं कि वे सावन मास के सभी व्रत, उनके नियम, पूजा विधि, फल और धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से बताएं, ताकि इससे लोगों का कल्याण हो सके। सावन व्रत कथा अध्याय-1 का मुख्य संदेश: सावन मास को भगवान शिव की भक्ति, साधना, व्रत, जप और धार्मिक अनुशासन के लिए विशेष माना गया है। इस महीने की धार्मिक परंपराएं श्रद्धा, संयम, सेवा और आत्मिक साधना पर जोर देती हैं।  

surbhi जुलाई 30, 2026 0
Devotees offering milk and donations during Masik Shivratri 2026 worship of Lord Shiva
मासिक शिवरात्रि 2026: इस दिन करें इन चीजों का दान, भगवान शिव बरसाएंगे कृपा

Masik Shivratri हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और फलदायी पर्व माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली यह शिवरात्रि भगवान Shiva की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि भगवान शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है। यही कारण है कि इस दिन श्रद्धा और सच्चे मन से की गई पूजा और दान का विशेष महत्व बताया गया है। मई 2026 में कब है मासिक शिवरात्रि? पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 मई 2026 को सुबह 8 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और 16 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। निशिता काल को ध्यान में रखते हुए मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजा 15 मई, शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन शिव भक्त उपवास रखकर भगवान शिव का अभिषेक और रात्रि पूजा करते हैं। दूध और सफेद वस्तुओं का दान मासिक शिवरात्रि पर दूध, दही, चावल, मिश्री और सफेद वस्त्रों का दान बेहद शुभ माना जाता है। सफेद रंग को शांति, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन वस्तुओं का दान करने से मानसिक तनाव कम होता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अन्न और भोजन का दान इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन, फल और अन्न दान करना पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि भूखे लोगों को भोजन कराने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कहा जाता है कि भगवान शिव ऐसे दान से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। तिल और घी का दान काले तिल और घी का दान भी मासिक शिवरात्रि पर विशेष महत्व रखता है। शिव मंदिर में घी का दीपक जलाना और तिल का दान करना जीवन की नकारात्मकता और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इससे जीवन में शांति और स्थिरता आती है। वस्त्र और जरूरत की चीजों का दान जरूरतमंद लोगों को कपड़े, कंबल और दैनिक उपयोग की वस्तुएं दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सकारात्मकता, सुख और संतोष बढ़ता है। धार्मिक दृष्टि से दान को केवल पुण्य का माध्यम नहीं बल्कि मानव सेवा का भी प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यता मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि पर श्रद्धा और सच्चे मन से किया गया दान भगवान शिव को प्रसन्न करता है। इससे व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। इस दिन शिव पूजा के साथ दान-पुण्य करने को विशेष फलदायी माना गया है।  

surbhi मई 14, 2026 0
Devotees offering prayers to Lord Shiva during Pradosh Vrat in May 2026
May 2026 Pradosh Vrat Calendar: मई में कब-कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत? नोट करें सही तिथियां और मुहूर्त

हिंदू धर्म में Shiva की आराधना के लिए प्रदोष व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करते हैं। मई 2026 का महीना शिव भक्तों के लिए खास है, क्योंकि इस बार दोनों प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहे हैं, जिससे Guru Pradosh Vrat का शुभ संयोग बन रहा है। यह संयोग विशेष रूप से ज्ञान, सौभाग्य और सफलता देने वाला माना जाता है। मई 2026 प्रदोष व्रत की तिथियां पहला प्रदोष व्रत – 14 मई 2026 (गुरु प्रदोष) पक्ष: ज्येष्ठ माह, कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 14 मई, सुबह 11:20 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 मई, सुबह 08:31 बजे इस दिन शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करना सबसे फलदायी रहेगा। दूसरा प्रदोष व्रत – 28 मई 2026 (गुरु प्रदोष) पक्ष: ज्येष्ठ माह, शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 मई, सुबह 07:56 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 29 मई, सुबह 09:50 बजे इस दिन भी सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत का महत्व शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन Shiva कैलाश पर्वत पर आनंदित होकर नृत्य करते हैं। इस समय की गई पूजा और उपासना कई गुना अधिक फल देती है। गुरु प्रदोष व्रत के लाभ: शत्रुओं पर विजय जीवन में सुख-शांति ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि करियर और कार्यों में सफलता पूजा विधि (सरल तरीके से) अगर आप प्रदोष व्रत रख रहे हैं, तो इस विधि से पूजा कर सकते हैं: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें दिनभर फलाहार या व्रत रखें शाम को प्रदोष काल में शिव मंदिर जाएं या घर पर पूजा करें शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और सफेद फूल अर्पित करें शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें अंत में आरती करें

surbhi मई 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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