फैशन डेस्क: डेनिम की दुनिया में वाइड-लेग जींस ने अपनी मजबूत जगह बना ली है। स्ट्रेट-लेग और फ्लेयर्ड जींस की तरह ही वाइड-लेग डेनिम भी अब रोजमर्रा की अलमारी का ऐसा हिस्सा बन चुकी है, जिसे अलग-अलग मौकों पर आसानी से पहना जा सकता है। वाइड-लेग जींस की सबसे बड़ी खासियत इसका आरामदायक और खुला सिल्हूट है। यह कैजुअल लुक से लेकर थोड़ा ज्यादा सलीकेदार आउटफिट तक, कई तरह के स्टाइल के साथ आसानी से मेल खा जाती है। फैशन ट्रेंड्स में जहां स्किनी जींस की वापसी देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ वाइड-लेग जींस की लोकप्रियता भी कम नहीं हुई है। यही वजह है कि 2026 में डेनिम कलेक्शन में वाइड-लेग की कई नई शैलियां देखने को मिल रही हैं। हर पसंद के लिए मौजूद हैं वाइड-लेग जींस अगर आपको 70 के दशक से प्रेरित फ्लेयर पसंद है, तो रॉ हेम वाली विंटेज स्टाइल जींस आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। वहीं, बैरल-लेग सिल्हूट चाहने वालों के लिए थोड़ा टेपर्ड आकार वाली वाइड जींस एक आधुनिक विकल्प है। इसके अलावा क्रॉप्ड वाइड-लेग जींस कैजुअल और रोजमर्रा के लुक के लिए अच्छी पसंद हो सकती है। सबसे अच्छी बात यह है कि अलग-अलग हाइट और बॉडी फ्रेम के हिसाब से भी वाइड-लेग जींस उपलब्ध हैं। पेटाइट हाइट वाली महिलाओं के लिए छोटे इनसीम वाली जींस हैं, जबकि लंबी महिलाओं के लिए लंबे इनसीम वाले विकल्प मौजूद हैं। पेटाइट हाइट के लिए वाइड-लेग जींस अक्सर माना जाता है कि कम हाइट वाली महिलाओं को वाइड-लेग जींस नहीं पहननी चाहिए। लेकिन सही लंबाई और अनुपात के साथ यह धारणा सही नहीं है। अगर आपकी लंबाई 5 फीट 4 इंच से कम है, तो ऐसी वाइड-लेग जींस चुनें जिसकी लंबाई आपके फ्रेम के हिसाब से हो। बहुत ज्यादा लंबी या जरूरत से ज्यादा ढीली जींस शरीर के अनुपात को भारी दिखा सकती है। पेटाइट फ्रेम पर क्रॉप्ड वाइड-लेग, बैरल-लेग या हाई-वेस्टेड विकल्प अच्छे लग सकते हैं। इन्हें अपेक्षाकृत फिट टॉप या छोटा जैकेट पहनकर संतुलित किया जा सकता है। लंबी हाइट वालों के लिए वाइड-लेग जींस लंबी महिलाओं के लिए वाइड-लेग जींस का लंबा और फ्लोइंग सिल्हूट काफी आकर्षक नजर आ सकता है। लेकिन जींस की लंबाई सही होना बेहद जरूरी है। अगर जींस टखने के ऊपर अजीब तरीके से रुक जाए तो पूरा लुक असंतुलित लग सकता है। इसलिए लंबी हाइट वाली महिलाओं के लिए लंबे इनसीम वाले फुल-लेंथ विकल्प बेहतर हो सकते हैं। इन्हें हील्स, बूट्स या स्लीक फुटवियर के साथ स्टाइल करके पैरों को और लंबा दिखाया जा सकता है। मिड-राइज वाइड-लेग जींस मिड-राइज जींस न तो बहुत हाई-वेस्ट होती है और न ही बहुत लो-राइज। यही वजह है कि यह कई महिलाओं के लिए संतुलित और आरामदायक विकल्प बन सकती है। इसे टी-शर्ट, शर्ट, टॉप या ब्लेजर के साथ आसानी से पहना जा सकता है। ऑफिस से लेकर कैजुअल आउटिंग तक, सही टॉप और फुटवियर के साथ मिड-राइज वाइड-लेग जींस को कई तरह से स्टाइल किया जा सकता है। प्लीटेड वाइड-लेग जींस प्लीटेड वाइड-लेग जींस में ट्राउजर और डेनिम का मिश्रण दिखाई देता है। कमर के पास प्लीट्स होने के कारण इसका लुक थोड़ा ज्यादा सलीकेदार और ड्रेस्ड-अप लगता है। अगर आप जींस को सिर्फ कैजुअल कपड़े की तरह नहीं बल्कि थोड़ा परिष्कृत अंदाज में पहनना चाहती हैं, तो प्लीटेड वाइड-लेग एक दिलचस्प विकल्प हो सकता है। इसे शर्ट, फिटेड टॉप या ब्लेजर के साथ पहनकर स्मार्ट-कैजुअल लुक बनाया जा सकता है। बैरल-लेग वाइड जींस बैरल-लेग जींस में पैरों के ऊपरी हिस्से पर वॉल्यूम होता है, जबकि नीचे की ओर सिल्हूट थोड़ा संकरा हो जाता है। यह स्टाइल वाइड-लेग जींस का आराम और स्ट्रेट-लेग जींस की अपेक्षाकृत साफ संरचना, दोनों का एहसास देती है। यही कारण है कि बैरल-लेग डेनिम पिछले कुछ समय से काफी लोकप्रिय हुई है। अगर आप पारंपरिक वाइड-लेग से थोड़ा अलग सिल्हूट चाहती हैं, तो यह विकल्प आजमाया जा सकता है। क्रॉप्ड वाइड-लेग जींस क्रॉप्ड वाइड-लेग जींस कैजुअल दिनों के लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है। इसकी छोटी लंबाई और खुला सिल्हूट इसे स्नीकर्स, लोफर्स और एंकल बूट्स के साथ पहनने के लिए उपयुक्त बनाता है। इसे निटेड टॉप, टर्टलनेक, साधारण टी-शर्ट या हल्के जैकेट के साथ पहना जा सकता है। लो-राइज वाइड-लेग जींस लो-राइज और बैगी जींस में ढीला, आरामदायक और थोड़ा बेफिक्र अंदाज देखने को मिलता है। यह स्टाइल 2000 के दशक से जुड़े डेनिम ट्रेंड की याद दिलाता है और अब नए तरीके से फैशन में वापस दिखाई दे रहा है। अगर आप रिलैक्स्ड और थोड़ा बोल्ड लुक चाहती हैं, तो लो-राइज वाइड-लेग जींस को फिटेड टॉप या क्रॉप्ड जैकेट के साथ संतुलित किया जा सकता है। ब्लैक वाइड-लेग जींस काले रंग की डेनिम लगभग हर अलमारी में उपयोगी साबित हो सकती है। वाइड-लेग सिल्हूट के साथ ब्लैक जींस को स्किनी डेनिम के विकल्प के तौर पर पहना जा सकता है। इसे सफेद शर्ट, फिटेड टॉप, ब्लेजर या लेदर जैकेट के साथ स्टाइल करके स्मार्ट लुक तैयार किया जा सकता है। हाई-राइज वाइड-लेग जींस हाई-राइज वाइड-लेग जींस कमर को उभारने और पैरों को लंबा दिखाने में मदद कर सकती है। इसे बेल्ट के साथ पहनना या टी-शर्ट और शर्ट को अंदर की ओर टक करना एक अच्छा स्टाइलिंग तरीका है। मीडियम-ब्लू डेनिम एक ऐसा रंग है जिसे अलग-अलग टॉप और फुटवियर के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है। सफेद वाइड-लेग जींस सफेद या ऑफ-व्हाइट वाइड-लेग जींस गर्मियों से लेकर पूरे साल के स्टाइल के लिए उपयोगी हो सकती है। सफेद जींस को ऑफ-व्हाइट या आइवरी स्वेटर के साथ पहनकर मोनोक्रोम लुक तैयार किया जा सकता है। वहीं, रंगीन टॉप या प्रिंटेड शर्ट के साथ यह ज्यादा आकर्षक कैजुअल लुक दे सकती है। एक्स्ट्रा-वाइड जींस अगर आपको सामान्य वाइड-लेग से भी ज्यादा बोल्ड सिल्हूट पसंद है, तो एक्स्ट्रा-वाइड जींस एक स्टेटमेंट पीस हो सकती है। इस तरह की जींस में पैरों के आसपास काफी वॉल्यूम होता है। इसलिए इसके साथ ऊपर की ओर अपेक्षाकृत फिटेड टॉप, बॉडी-फिट शर्ट या छोटा जैकेट पहनना लुक को संतुलित कर सकता है। कफ्ड वाइड-लेग जींस कफ्ड वाइड-लेग जींस में नीचे की ओर मोड़ा हुआ हेम पूरे आउटफिट को अलग अंदाज देता है। गहरे डेनिम वॉश के साथ यह स्टाइल कॉलेजिएट और प्रीपी लुक दे सकती है। इसे साधारण टी-शर्ट या शर्ट के साथ पहनकर भी स्टाइलिश लुक हासिल किया जा सकता है। नीचे स्लीक बूट पहनने से इसका फैशन इफेक्ट और बेहतर नजर आ सकता है। वाइड-लेग जींस को स्टाइल करने के आसान तरीके वाइड-लेग जींस खरीदते समय सिर्फ ट्रेंड पर ध्यान देने के बजाय अपनी हाइट, कमर और पसंदीदा फिट को भी ध्यान में रखें। पेटाइट हाइट के लिए क्रॉप्ड या सही इनसीम वाली जींस चुनें। लंबी हाइट के लिए फुल-लेंथ और लंबे इनसीम वाले विकल्प बेहतर हो सकते हैं। हाई-राइज जींस के साथ टक-इन शर्ट या टी-शर्ट पहनें। एक्स्ट्रा-वाइड जींस के साथ फिटेड टॉप पहनकर अनुपात संतुलित करें। क्रॉप्ड जींस को लोफर्स, स्नीकर्स या एंकल बूट्स के साथ स्टाइल करें। ऑफिस लुक के लिए डार्क-वॉश वाइड-लेग जींस और ब्लेजर का संयोजन आजमाएं। कैजुअल लुक के लिए मिड-ब्लू डेनिम के साथ साधारण टी-शर्ट और स्नीकर्स चुनें। सफेद वाइड-लेग जींस के साथ मोनोक्रोम लुक एक साफ और सलीकेदार विकल्प हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।