गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड में सात वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म का मामला सामने आया है। मामले में बच्ची के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी पंचायत सचिव को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले की जांच जारी है। परिजनों की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई पुलिस के अनुसार, घटना की जानकारी मिलते ही बगोदर ब्लॉक परिसर से आरोपी पंचायत सचिव को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। मेडिकल जांच और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया बगोदर के एसडीपीओ धनंजय कुमार राम ने बताया कि बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। पुलिस घटना से जुड़े सभी साक्ष्य एकत्र कर रही है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। पहले भी अश्लील हरकत के आरोप प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि आरोपी पर पहले भी नाबालिग बच्चियों के साथ अश्लील हरकत करने के आरोप लग चुके हैं। पुलिस अब उसके आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके खिलाफ पहले कोई मामला दर्ज हुआ था या नहीं। पीड़िता की मां के विरोध के बाद खुला मामला पुलिस के मुताबिक, घटना के दौरान बच्ची की मां मौके पर पहुंच गई और शोर मचाया, जिसके बाद मामला सामने आया। पीड़ित बच्ची के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच जारी पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट और अन्य जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली और स्पेशल एरिया कमिटी (SAC) सदस्य अजय महतो उर्फ टाइगर की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी बबीता संथाली ने भी पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। गिरिडीह पुलिस ने बबीता के सरेंडर की पुष्टि करते हुए इसे माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका बताया है। जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, अजय महतो को गिरिडीह पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस उसकी निशानदेही पर संभावित ठिकानों पर छापेमारी भी कर रही है, ताकि संगठन के अन्य सदस्यों और हथियारों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। इसी कार्रवाई के बीच बबीता संथाली ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का फैसला लिया। पुलिस के मुताबिक पुलिस के मुताबिक, बबीता संथाली माओवादी संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रही है और एरिया कमांडर के पद पर भी कार्य कर चुकी है। वह कई वर्षों तक अजय महतो के दस्ते का हिस्सा रही और विभिन्न नक्सली घटनाओं में उसकी भूमिका सामने आई है। उसके खिलाफ झारखंड के कई जिलों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। बबीता मूल रूप से बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड स्थित लुगु जलगा ढोढ़ी गांव की निवासी है। अजय महतो झारखंड के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के नावाडीह गांव का रहने वाला है और उसे क्षेत्र के सबसे खतरनाक नक्सली कमांडरों में गिना जाता रहा है। पारसनाथ, सारंडा, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित कई इलाकों में नक्सली गतिविधियों और पुलिस मुठभेड़ों में उसका नाम सामने आ चुका है। उसके खिलाफ हत्या, उग्रवादी गतिविधियों और अन्य गंभीर मामलों में कई राज्यों में मुकदमे दर्ज हैं। बबीता संथाली का आत्मसमर्पण और अजय महतो की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण सफलता मान रही हैं। हालांकि, पुलिस ने अजय महतो की गिरफ्तारी और उससे जुड़ी जांच के संबंध में फिलहाल विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
गिरिडीह। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) अभियान के तहत मंगलवार को गिरिडीह जिले के सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट-2 (BLA-2) की दूसरी बैठक आयोजित की गई। इसके साथ ही चुनाव पाठशाला के दूसरे चरण का भी सफल आयोजन हुआ। इस अभियान का उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन, त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाना है, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सूची में शामिल हो और अपात्र नामों को हटाया जा सके। जिला निर्वाचन पदाधिकारी जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त रामनिवास यादव के निर्देश पर जिले के सभी वरीय पदाधिकारियों, निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों (ERO) और सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों (AERO) ने अपने-अपने क्षेत्रों के मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बैठकों की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए बीएलओ को गणना प्रपत्रों का शत-प्रतिशत सत्यापन, त्रुटिरहित संधारण और निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान बैठक के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत एवं डुप्लीकेट (ASDD) श्रेणी के मतदाताओं के सत्यापन पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने और मतदाता सूची में आवश्यक संशोधन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बीएलओ और बीएलए-2 के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल देते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के सहयोग से मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाया जा सकता है। उपायुक्त रामनिवास यादव ने कहा उपायुक्त रामनिवास यादव ने अधिकारियों को नियमित रूप से मतदान केंद्रों का निरीक्षण करने और पूरे अभियान की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए शुद्ध मतदाता सूची सबसे महत्वपूर्ण आधार है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि SIR-2026 के तहत सभी प्रखंडों में अभियान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरी पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ संचालित किया जा रहा है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
गिरिडीह। गिरिडीह के रजिस्ट्रार ऑफिस में जमीन विवाद को लेकर खूब लात-घूंसे चले। पूरा ऑफिस परिसर रणक्षत्र में तब्दील हो गया। जमीन की खरीद-बिक्री और मालिकाना हक को लेकर दो पक्षों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते मारपीट और धक्का-मुक्की में बदल गया। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमला करते और हंगामा करते नजर आ रहे हैं। विवाद ने लिया हिंसक रूप जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच जमीन को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। जब दोनों पक्ष रजिस्ट्रेशन कार्यालय पहुंचे, तो कहासुनी शुरू हो गई। कुछ ही देर में विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के लोग आपस में भिड़ गए और जमकर मारपीट होने लगी। घटना के दौरान कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मारपीट और हंगामे के बीच मौके पर मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया। काफी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया जा सका। घटना के कारण कुछ समय के लिए कार्यालय का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा और वहां मौजूद लोग दहशत में इधर-उधर भागते नजर आए।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक पिता ने अपनी ही तीन मासूम बेटियों की बेरहमी से धारदार हथियार से हत्या कर दी। घटना मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के तुरुकडीहा गांव की है, जहां सोमवार सुबह इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। पूरे इलाके में सनसनी जानकारी के अनुसार, आरोपी पिता नंदू यादव ने धारदार हथियार से अपनी तीनों बेटियों पर हमला कर दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। हत्या के कारणों का खुलासा बाकी मामले की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ जीतबाहन उरांव और मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता नंदू यादव को गिरफ्तार कर लिया है। एसडीपीओ जीतबाहन उरांव ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। हत्या के पीछे के कारणों का अभी स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।