दुनिया

Iran’s Hormuz Toll Plan Sparks Global Debate

ईरान का बड़ा आर्थिक वार, होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर लगेगा टोल

surbhi मई 9, 2026 0
Cargo ships passing through Strait of Hormuz amid Iran’s reported plan to impose toll charges in yuan
Iran Strait of Hormuz Toll Plan

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने के लिए एक नया प्राधिकरण बनाने का दावा किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कदम सिर्फ समुद्री नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ा आर्थिक और भू-राजनीतिक संदेश छिपा है. सबसे बड़ा झटका अमेरिका को इसलिए माना जा रहा है क्योंकि ईरान कथित तौर पर यह टोल अमेरिकी डॉलर की जगह चीन की मुद्रा युआन में लेना चाहता है.

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने “फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण” नाम की एजेंसी बनाई है. यह एजेंसी होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को ट्रांजिट अनुमति देगी और उनसे शुल्क वसूलेगी. जहाजों को पहले से अपना रूट, बीमा, चालक दल और स्वामित्व की जानकारी देनी होगी.

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है. इसलिए यहां किसी भी तरह का शुल्क या नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है.

अमेरिका को क्यों लग सकता है झटका?

सबसे बड़ा कारण “पेट्रोडॉलर” व्यवस्था है. दशकों से वैश्विक तेल व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता आया है. इससे डॉलर दुनिया की सबसे मजबूत रिजर्व मुद्रा बना रहा.

लेकिन अगर ईरान युआन में टोल लेना शुरू करता है, तो:

  • तेल व्यापार में डॉलर की पकड़ कमजोर हो सकती है
  • चीन की मुद्रा युआन को अंतरराष्ट्रीय बढ़त मिल सकती है
  • अमेरिका के आर्थिक प्रभाव को चुनौती मिल सकती है
  • प्रतिबंधों के बावजूद ईरान को नया वित्तीय रास्ता मिल सकता है

ईरान पहले से अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा है. ऐसे में डॉलर से हटकर युआन और क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान लेने की रणनीति उसे प्रतिबंधों के असर से कुछ राहत दे सकती है.

चीन को क्या फायदा?

चीन दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक है और ईरान के साथ उसके संबंध लगातार मजबूत हुए हैं. यदि व्यापार युआन में होता है, तो:

  • चीन की मुद्रा का वैश्विक उपयोग बढ़ेगा
  • एशिया-केंद्रित ऊर्जा व्यापार मॉडल मजबूत होगा
  • चीन को अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम पर कम निर्भर रहना पड़ेगा

किन देशों पर असर पड़ सकता है?

जापान, दक्षिण कोरिया, भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस जैसे देश खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं. यदि टोल बढ़ता है या भुगतान व्यवस्था बदलती है, तो:

  • तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं
  • शिपिंग लागत महंगी हो सकती है
  • आयात करने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है

क्या सच में खत्म हो जाएगा डॉलर का दबदबा?

विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी तुरंत ऐसा होना मुश्किल है, क्योंकि वैश्विक व्यापार और बैंकिंग सिस्टम अब भी बड़े पैमाने पर डॉलर पर आधारित है. लेकिन:

  • BRICS देशों में डी-डॉलराइजेशन की चर्चा बढ़ रही है
  • कई देश सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं
  • चीन और कुछ अन्य देश वैकल्पिक भुगतान सिस्टम विकसित कर रहे हैं

ऐसे में ईरान का यह कदम वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत माना जा रहा है.

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

दुनिया

View more
यूक्रेन में लक्ष्मी मित्तल के आर्सेलरमित्तल स्टील प्लांट पर रूसी हमला
लक्ष्मी मित्तल के यूक्रेन स्थित स्टील प्लांट पर रूसी हमला, दो की मौत; 13 घायल

रूस-यूक्रेन। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन में भारतीय अरबपति लक्ष्मी मित्तल की कंपनी आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह के स्टील प्लांट पर रूसी हमला हुआ है। हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 13 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हमले के बाद प्लांट का संचालन आंशिक रूप से रोक दिया गया है।   ऊर्जा और ब्लास्ट फर्नेस सुविधाओं को नुकसान     मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने रविवार को यूक्रेन के क्रिवी रिह स्थित स्टील प्लांट को निशाना बनाया। हमले में प्लांट की महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति और ब्लास्ट फर्नेस से जुड़ी उत्पादन सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। इसके चलते कंपनी को कुछ हिस्सों में कामकाज रोकना पड़ा।   कंपनी के अनुसार, घटनास्थल पर खोज और बचाव अभियान जारी है। दमकलकर्मियों, बचाव दल और मेडिकल टीम को मौके पर तैनात किया गया है।   यूक्रेन की बड़ी औद्योगिक इकाइयों में शामिल है प्लांट     आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह यूक्रेन की सबसे बड़ी स्टील उत्पादक कंपनियों में से एक है। यह प्लांट देश के रणनीतिक आर्थिक और औद्योगिक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। क्रिवी रिह यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का गृहनगर भी है।   इससे पहले 2022 में हुए एक मिसाइल हमले में प्लांट की एक रोलिंग मिल को भारी नुकसान पहुंचा था। उस हमले में एक कर्मचारी की मौत हुई थी।   यूक्रेन ने भी रूस पर किया बड़ा ड्रोन हमला     रूस के हमले से पहले यूक्रेन ने रूस के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए थे। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, यह हाल के समय में किए गए सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक था। हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत की खबर है।   रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रातभर में देश के अलग-अलग हिस्सों में 822 यूक्रेनी ड्रोन को रोका गया। मॉस्को क्षेत्र में एक निजी मकान पर ड्रोन गिरने से 83 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। इसके अलावा पोडोलस्क शहर में एक ड्रोन हमले के बाद ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज के गोदाम में आग लगने की भी सूचना मिली। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने कहा कि राजधानी की ओर बढ़ रहे करीब 600 ड्रोन का पता लगाया गया, जिनमें से बड़ी संख्या को मॉस्को क्षेत्र के ऊपर ही नष्ट कर दिया गया।   युद्ध में लगातार बढ़ रहा औद्योगिक नुकसान     रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ ऊर्जा संयंत्रों, औद्योगिक इकाइयों और कारोबारी संपत्तियों को भी लगातार नुकसान पहुंच रहा है। लक्ष्मी मित्तल के स्टील प्लांट पर ताजा हमला इसी बढ़ते औद्योगिक नुकसान की एक और कड़ी माना जा रहा है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध

फ्रांस में अंडर-15 सोशल मीडिया बैन पर रोक, अदालत ने बताया अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के संभावित भारत दौरे और शेख हसीना प्रत्यर्पण का मुद्दा

बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान के भारत दौरे पर सस्पेंस, शेख हसीना के प्रत्यर्पण से रिश्तों में खिंचाव

रूस-यूक्रेन युद्ध में लक्ष्मी मित्तल की आर्सेलरमित्तल स्टील फैक्ट्री पर हमला

रूस-यूक्रेन युद्ध: लक्ष्मी मित्तल की स्टील फैक्ट्री पर मिसाइल हमला, 2 की मौत; उत्पादन प्रभावित

ईरान द्वारा अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने पर इनाम की कथित घोषणा
ईरान का बड़ा एलान: अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने पर 30 हजार डॉलर इनाम, महिलाओं के लिए दोगुनी रकम

तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरान की ओर से एक विवादित इनाम योजना का दावा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सेना प्रमुख अमीर हातिमी ने अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने वाले व्यक्ति को 30 हजार डॉलर (करीब 28.6 लाख रुपये) इनाम देने की बात कही है। वहीं, अगर यह कार्रवाई कोई ईरानी महिला करती है तो इनाम की राशि दोगुनी यानी 60 हजार डॉलर (करीब 57.2 लाख रुपये) होगी।   महिलाओं के लिए दोगुना इनाम     रिपोर्ट के अनुसार, अमीर हातिमी ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों से मिले अनुरोध और समर्थन के बाद यह घोषणा की गई है। हालांकि, इस कथित इनाम योजना को कब और कहां लागू किया जाएगा, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।   रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के भीतर अमेरिकी जमीनी सैनिकों की कोई बड़ी तैनाती नहीं है। ऐसे में इस घोषणा के व्यावहारिक प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।   अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आया बयान     यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव का असर पश्चिम एशिया के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है।   ईरानी सैन्य नेतृत्व की ओर से अमेरिका की मध्य पूर्व में मौजूदगी को लेकर पहले भी कड़े बयान दिए जाते रहे हैं। ईरान ने फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर भी आपत्ति जताई है।   युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार     रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संघर्ष के बाद अस्थायी युद्धविराम और आगे बातचीत की कोशिशें हुई थीं। हालांकि, तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ और दोनों पक्षों के बीच समय-समय पर हमले जारी रहने की बात सामने आई है।   अमेरिकी सैन्यकर्मियों के हताहत होने और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के बीच ईरान की यह कथित इनाम घोषणा दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ाने वाली मानी जा रही है। नोट: अमेरिकी सैनिकों को नुकसान पहुंचाने या पकड़ने के लिए इनाम की यह जानकारी आपके दिए गए स्रोत के अनुसार है; ऐसी संवेदनशील युद्ध-संबंधी घोषणाओं की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि के बिना इसे निश्चित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
Rescue teams respond after a 5.9 magnitude earthquake strikes Indonesia’s Flores following a deadly 7.7 quake

53 मौतों के बाद फिर कांपी इंडोनेशिया की धरती, फ्लोरेस में 5.9 तीव्रता का भूकंप; आफ्टरशॉक्स से दहशत

Diamer Bhasha Dam project on the Indus River raises concerns over ancient Buddhist heritage in Gilgit-Baltistan

PoK में सिंधु नदी पर डायमर-भाशा बांध से बौद्ध विरासत पर संकट, पाकिस्तान-चीन परियोजना को लेकर बढ़ी चिंता

ट्रंप और सऊदी तुर्की पाकिस्तान रक्षा समझौता

ईरान तनाव के बीच ट्रंप ने सऊदी-तुर्की-पाकिस्तान रक्षा समझौते का किया स्वागत, बोले- बड़ा और साहसी कदम

Marco Rubio Narendra Modi
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को दी स्वतंत्रता दिवस की बधाई, कहा- US-India संबंध पहले से ज्यादा मजबूत

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीयों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और इस समय पहले से ज्यादा मजबूत हैं। रुबियो ने दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को आने वाले समय के लिए महत्वपूर्ण बताया।   रक्षा से लेकर AI और अंतरिक्ष तक सहयोग   मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका साझेदारी के कई प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया। इनमें रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अंतरिक्ष सहयोग और व्यापार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के साथ-साथ व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र को भी अधिक सुरक्षित और समृद्ध बनाने में मदद कर रहा है।   ट्रंप-मोदी के व्यक्तिगत संबंधों को बताया अहम   रुबियो ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच व्यक्तिगत संबंधों को भी द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच संबंधों से भारत-अमेरिका साझेदारी को आगे बढ़ाने में मदद मिली है।   लोगों के बीच संबंधों पर भी जोर   अमेरिकी विदेश मंत्री ने दोनों देशों के नागरिकों के बीच दोस्ती और पारिवारिक रिश्तों को साझेदारी की मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका आने वाले समय में भारत के साथ मिलकर ऐसा भविष्य बनाने की दिशा में काम करना चाहता है, जिससे दोनों देशों को लाभ मिले।

abhishek singh अगस्त 16, 2026 0
Indonesia Earthquake

इंडोनेशिया में 7.7 तीव्रता का भीषण भूकंप, 51 लोगों की मौत; हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे

Qatar

कतर ने ईरान के तीन पायलटों को हिरासत में लेने के दावे को बताया भ्रामक

Lebanon

इजरायल के लेबनान हमलों में 11 लोगों की मौत, युद्धविराम पर बढ़ा दबाव

0 Comments

Top week

Prashant Kishor addresses Bankipur voters and promises private sector jobs for 10,000 educated unemployed youths.
बिहार

MLA बनते ही प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान, बांकीपुर के 10 हजार पढ़े-लिखे युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने का दावा

surbhi अगस्त 12, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?