पेरिस: दक्षिणी फ्रांस में भीषण गर्मी और लंबे समय से पड़े सूखे के बीच जंगलों में लगी आग ने व्यापक तबाही मचाई है। औडे (Aude) और हेराल्ट (Hérault) क्षेत्रों में भड़की आग अब तक करीब 900 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुकी है। आग पर काबू पाने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, आग बुझाने के लिए 800 से अधिक दमकलकर्मी, 150 दमकल वाहन और चार वाटर बॉम्बर विमान तैनात किए गए हैं। हवाई और जमीनी स्तर पर लगातार अभियान चलाया जा रहा है ताकि आग को आबादी वाले इलाकों तक पहुंचने से रोका जा सके।
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने बताया कि इस वर्ष गर्मियों की शुरुआत के बाद से देशभर में 7,000 से अधिक जंगलों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में अब तक 8,700 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र जलकर खाक हो चुका है।
उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ता तापमान, सूखा और तेज हवाएं आग के खतरे को और गंभीर बना रही हैं।
औडे क्षेत्र के प्रीफेक्ट एलेन बुकेट ने बताया कि दमकल विभाग आग पर जल्द से जल्द नियंत्रण पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। हालांकि, भूमध्यसागरीय क्षेत्र में चलने वाली तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैलने का खतरा बना हुआ है।
पड़ोसी क्षेत्रों में दो अन्य स्थानों पर लगी आग पर नियंत्रण पा लिया गया है, लेकिन प्रभावित इलाकों में कई जगह अब भी धधकती आग चिंता का कारण बनी हुई है।
दक्षिणी फ्रांस में टेट नदी के आसपास जंगल में आग फैलने के बाद एक रिजॉर्ट के निकट स्थित शिविरों को एहतियातन खाली कराया गया। प्रशासन ने क्षेत्र के सभी लाइफगार्ड स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और लोगों से नदी में तैराकी से बचने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में लगी आग केवल पेड़-पौधों को ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। आग के कारण बड़ी संख्या में पशु-पक्षियों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है और जैव विविधता प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
फ्रांस के मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना बेहद कम है, जबकि तापमान ऊंचा बना रहेगा। ऐसे में भूमध्यसागरीय क्षेत्र की तेज हवाएं जंगल की आग को और अधिक भड़का सकती हैं, जिससे हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डॉ. हेइडी ओवरटन को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) का नया प्रमुख बनाने के लिए नामित किया है। उनके नामांकन को अब अमेरिकी सीनेट की मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना होगा। ओवरटन फिलहाल व्हाइट हाउस की डोमेस्टिक पॉलिसी काउंसिल की डिप्टी डायरेक्टर हैं। सीनेट की मंजूरी के बाद संभालेंगी जिम्मेदारी ओवरटन का नामांकन अभी अंतिम नहीं हुआ है। FDA आयुक्त के पद पर नियुक्ति के लिए सीनेट की पुष्टि जरूरी है। राजनीतिक रूप से विभाजित सीनेट में उनके नामांकन पर सवाल-जवाब और विरोध की संभावना भी जताई जा रही है। मार्टी माकरी के इस्तीफे के बाद खाली था पद यह नियुक्ति डॉ. मार्टी माकरी के मई 2026 में पद छोड़ने के बाद हो रही है। फिलहाल FDA का कामकाज कार्यवाहक आयुक्त काइल डायमंटास संभाल रहे हैं। FDA की आधिकारिक सूची में माकरी का कार्यकाल 25 मार्च 2025 से 13 मई 2026 तक दर्ज है। वैक्सीन और दवा नीति पर रहेगी नजर ओवरटन ट्रंप प्रशासन की स्वास्थ्य नीतियों में सक्रिय रही हैं। हाल में वह बचपन के टीकाकरण कार्यक्रम में बदलाव से जुड़े प्रशासनिक प्रयासों में भी शामिल थीं। उनके नामांकन को लेकर समर्थकों ने प्रशासनिक क्षमता की उम्मीद जताई है, जबकि आलोचकों ने उनके वैक्सीन और अन्य स्वास्थ्य नीतियों से जुड़े रुख पर सवाल उठाए हैं। अगर सीनेट उनकी नियुक्ति की पुष्टि कर देती है, तो ओवरटन ऐसे समय FDA की कमान संभालेंगी जब एजेंसी को कर्मचारियों की कमी, दवा मंजूरी की प्रक्रिया और सार्वजनिक भरोसे जैसी कई चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है।
नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में फ्लाइट रद्द होने के बाद होटल में ठहरने को लेकर पाकिस्तान के एक सांसद ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पाकिस्तान के पूर्व नेशनल असेंबली स्पीकर और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) नेता असद कैसर ने संसद में दावा किया कि फ्लाइट कैंसिल होने के बाद होटल में केवल भारतीय और अमेरिकी पासपोर्ट धारकों को ठहरने की अनुमति दी गई, जबकि पाकिस्तानी यात्रियों के साथ अलग व्यवहार किया गया। कैसर ने इस मामले को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में उठाते हुए सरकार से UAE के अधिकारियों के सामने यह मुद्दा रखने की मांग की है। हालांकि, उनके इस दावे पर UAE की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है। फ्लाइट कैंसिल होने के बाद सामने आया विवाद असद कैसर ने संसद में बताया कि वह खुद UAE में यात्रा कर रहे थे, तभी उनकी फ्लाइट रद्द हो गई। इसके बाद यात्रियों को ठहराने के लिए होटल की व्यवस्था की जा रही थी। कैसर के मुताबिक, इसी दौरान कथित तौर पर कहा गया कि भारतीय और अमेरिकी पासपोर्ट धारकों को होटल में जगह दी जाएगी, जबकि पाकिस्तानी यात्रियों को accommodation देने से इनकार किया गया। उन्होंने इस व्यवहार को अनुचित बताते हुए कहा कि इस घटना से पाकिस्तानी यात्रियों में नाराजगी पैदा हुई। कैसर ने दावा किया कि कुछ अन्य पाकिस्तानी यात्रियों ने भी इसी तरह की शिकायतें उनके सामने रखीं। पाकिस्तान सरकार से कूटनीतिक स्तर पर मामला उठाने की मांग कैसर ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री से UAE के साथ कूटनीतिक माध्यमों से इस मामले को उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच करीबी संबंध हैं और इस तरह की घटनाओं को द्विपक्षीय रिश्तों पर असर नहीं डालने देना चाहिए। पाकिस्तान के पूर्व नेशनल असेंबली स्पीकर ने UAE को एक करीबी इस्लामिक देश बताते हुए कहा कि पाकिस्तान के लोग वहां के नेतृत्व और जनता के प्रति सम्मान रखते हैं। उनका कहना था कि दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत किया जाना चाहिए। UAE में बड़ी संख्या में रहते हैं पाकिस्तानी UAE में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी प्रवासी रहते हैं। उपलब्ध अनुमानों के अनुसार, देश में 15 लाख से अधिक पाकिस्तानी नागरिक रह रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तानी सांसद ने कहा कि UAE में रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय ने देश के विकास में भी योगदान दिया है। कैसर ने यह भी कहा कि पाकिस्तान और UAE के बीच मजबूत राजनयिक और आर्थिक संबंध हैं। इसलिए यदि किसी पाकिस्तानी यात्री के साथ भेदभाव हुआ है तो सरकार को संबंधित अधिकारियों से इस पर स्पष्टीकरण मांगना चाहिए। दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं फिलहाल, होटल या UAE सरकार की ओर से इस कथित घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए सांसद द्वारा लगाए गए आरोपों को फिलहाल दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। मामले में UAE अधिकारियों की प्रतिक्रिया आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
नैरोबी, एजेंसियां। केन्या के सांबुरु काउंटी में बुधवार को पर्यटकों को लेकर जा रहा एक पर्यटक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार सभी 7 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 6 यात्री और एक पायलट शामिल हैं। हादसा माउंट ओलोलोक्वे के पास हुआ। सफारी यात्रा के दौरान हुआ हादसा केन्या सिविल एविएशन अथॉरिटी के अनुसार हेलीकॉप्टर लोइसाबा कंजर्वेंसी से इवासो न्यीरो क्षेत्र की ओर जा रहा था। यह इलाका अपने वन्यजीवों और सफारी पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है। हेलीकॉप्टर सुबह करीब 9:13 बजे दुर्घटनाग्रस्त हुआ। पांच अमेरिकी नागरिकों की भी मौत अमेरिकी विदेश विभाग ने पुष्टि की है कि मृतकों में पांच अमेरिकी नागरिक शामिल थे। मृतकों में इक्वाडोर की राष्ट्रीय खुफिया सेवा के प्रमुख मिशेल सेंसी-कॉन्टुगी और उनकी पत्नी स्टेफनी होलिहान भी शामिल थीं। दोनों छुट्टियां मनाने के लिए केन्या आए थे। हादसे की जांच शुरू हेलीकॉप्टर Lady Lori Helicopters द्वारा संचालित किया जा रहा था और यह सफारी कंपनी &Beyond के मेहमानों को लेकर उड़ान भर रहा था। दुर्घटना के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। केन्या की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी ने मामले की जांच शुरू कर दी है। दुर्गम इलाका और दुर्घटनास्थल पर लगी आग के कारण बचाव एवं शव बरामद करने के अभियान में भी मुश्किलें आईं।