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RSP’s Historic Win in Nepal Elections

नेपाल चुनाव 2026: बालेन शाह की RSP की ऐतिहासिक जीत, PM मोदी ने फोन कर दी बधाई

surbhi मार्च 10, 2026 0
Balen Shah celebrating victory as RSP wins majority seats in Nepal parliamentary elections 2026
Balen Shah RSP Historic Victory Nepal Elections 2026

 

नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। संसदीय चुनावों में नई राजनीतिक ताकत बनकर उभरी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रतिनिधि सभा की अधिकांश सीटों पर जीत दर्ज की है। पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार Balen Shah के नेतृत्व में RSP की इस जीत को नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक माना जा रहा है।

चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोमवार को टेलीफोन पर Balen Shah और RSP अध्यक्ष Rabi Lamichhane से बातचीत कर उन्हें जीत की बधाई दी।

 

165 में से 125 सीटों पर जीत

नेपाल के संसदीय चुनावों में फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली के तहत 165 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ। सोमवार शाम तक 163 सीटों के नतीजे सामने आ चुके थे, जिनमें RSP ने 125 सीटें जीतकर करीब 76 प्रतिशत सीटों पर कब्जा जमा लिया। करीब साढ़े तीन साल पुरानी इस पार्टी ने देशभर में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए पारंपरिक राजनीतिक दलों के कई दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़ दिया।

 

ओली का गढ़ भी ढहा

Balen Shah ने पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli को झापा-5 सीट से 68,348 मतों के बड़े अंतर से हराया। यह अंतर नेपाल के संसदीय इतिहास में किसी भी उम्मीदवार की सबसे बड़ी जीतों में से एक माना जा रहा है। झापा-5 को लंबे समय से ओली का मजबूत गढ़ माना जाता रहा था।

 

दो-तिहाई बहुमत की ओर RSP

आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत भी RSP करीब 48 प्रतिशत वोट शेयर के साथ आगे चल रही है। अगर यह रुझान कायम रहता है, तो 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में पार्टी को लगभग 184 सीटें मिल सकती हैं, जो दो-तिहाई बहुमत के करीब होगा। 1991 के बाद पहली बार किसी एक पार्टी को इतना बड़ा जनादेश मिलने की संभावना बन रही है।

 

मोदी ने जताई सहयोग की प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने Balen Shah और Rabi Lamichhane को चुनावी जीत की बधाई दी और भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के साझा प्रयासों से आने वाले वर्षों में भारत और नेपाल के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं।

वहीं RSP अध्यक्ष Rabi Lamichhane ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी पार्टी आपसी सम्मान और साझा समृद्धि पर आधारित संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कनेक्टिविटी, सांस्कृतिक पर्यटन, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा भी जताई।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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न्यू मैक्सिको कोर्ट का मेटा पर फैसला
न्यू मैक्सिको कोर्ट का मेटा पर बड़ा फैसला, बच्चों की मानसिक सेहत से जुड़े मामले में 567 मिलियन डॉलर देने का आदेश

न्यू मैक्सिको। अमेरिका के न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा (Meta) को बड़ा झटका देते हुए इंस्टाग्राम और फेसबुक के जरिए युवाओं को होने वाले कथित नुकसान की भरपाई के लिए 567 मिलियन डॉलर (करीब 56.7 करोड़ डॉलर) का भुगतान करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि इस राशि का बड़ा हिस्सा बच्चों और किशोरों के उपचार, जागरूकता कार्यक्रमों और रोकथाम संबंधी उपायों पर खर्च किया जाएगा।   420 मिलियन डॉलर इलाज और जागरूकता पर होंगे खर्च     जज ब्रायन बिडशेड ने अपने फैसले में कहा कि 567 मिलियन डॉलर में से 420 मिलियन डॉलर युवाओं के इलाज और मानसिक स्वास्थ्य सहायता पर खर्च किए जाएंगे। शेष राशि अगले पांच वर्षों में जागरूकता अभियान, स्क्रीनिंग सेवाओं और अन्य सुधारात्मक कार्यक्रमों पर खर्च होगी.   यह आदेश मार्च 2026 में जूरी द्वारा मेटा पर लगाए गए 375 मिलियन डॉलर के सिविल जुर्माने के अतिरिक्त है। उस समय जूरी ने माना था कि कंपनी ने कथित रूप से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले प्लेटफॉर्म फीचर्स और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े जोखिमों के संबंध में पर्याप्त कदम नहीं उठाए।   कोर्ट ने प्लेटफॉर्म में सुधार के दिए निर्देश     अदालत ने मेटा को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ऐसे सूचना बैनर और स्क्रीन विकसित करने का निर्देश दिया है, जिनमें सुरक्षा फीचर्स, प्राइवेसी सेटिंग्स, रिपोर्टिंग टूल और सुरक्षित उपयोग से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से दिखाई जाए। इन सुधारों और राज्य में चलाए जाने वाले जागरूकता अभियान की समीक्षा न्यू मैक्सिको प्रशासन करेगा।     एज वेरिफिकेशन सिस्टम होगा और मजबूत     कोर्ट ने कहा कि संघीय कानूनों के कारण 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए कुछ सीमाएं लागू हैं, लेकिन मेटा को अपने एज एश्योरेंस (Age Assurance) सिस्टम को और प्रभावी बनाना होगा। इसके तहत कंपनी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से संभावित कम उम्र के उपयोगकर्ताओं की पहचान करने, संदिग्ध खातों से आयु सत्यापन (Age Verification) कराने और आवश्यक होने पर बच्चों की व्यक्तिगत जानकारी हटाने के लिए कहा गया है।   साथ ही, स्कूलों और बाल सुरक्षा संस्थाओं के साथ मिलकर एक रिपोर्टिंग पोर्टल विकसित करने और अदालत को नियमित प्रगति रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया गया है।   मेटा ने फैसले को दी चुनौती     मेटा ने अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है। कंपनी का कहना है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए लगातार काम कर रही है और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर उसके प्रयास प्रभावी हैं। कंपनी ने आरोपों से असहमति जताते हुए कहा कि वह तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष अदालत में रखेगी।     कई अन्य मुकदमों का भी सामना कर रही है मेटा     मेटा इस समय अमेरिका में कई अन्य कानूनी मामलों का भी सामना कर रही है। कैलिफ़ोर्निया सहित कई राज्यों में कंपनी पर आरोप है कि उसने ऐसे फीचर्स विकसित किए, जो युवाओं को सोशल मीडिया का आदी बनाते हैं और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा कुछ परिवारों ने भी कंपनी के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं, जिनमें सोशल मीडिया के कथित दुष्प्रभावों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
थाईलैंड के स्कूल में गोलीबारी की घटना

थाईलैंड के स्कूल में छात्र की अंधाधुंध फायरिंग, 6 की मौत; कई घायल, हमलावर ने खुद को भी मारी गोली

US President Donald Trump speaks on Iran tensions as Tehran warns of a strong response amid Strait of Hormuz negotiations.

Iran-US Tension: ट्रंप का दावा- ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएगा ईरान, होर्मुज समझौते के भी दिए संकेत; तेहरान ने दी कड़े जवाब की चेतावनी

Rescue teams recover the body of renowned Nepali mountaineer Nirmal Purja after the Broad Peak avalanche in Pakistan.

ब्रॉड पीक हिमस्खलन: नेपाली पर्वतारोही निर्मल पुर्जा का शव बरामद, पाकिस्तानी सेना ने हेलिकॉप्टर से स्कार्दू पहुंचाया

International Space Station
ISS पर अनिल मेनन और जेसिका मीर की सफल स्पेसवॉक, नए सोलर सिस्टम की तैयारी पूरी

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अंतरिक्ष यात्रियों अनिल मेनन और जेसिका मीर ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के बाहर लगभग 6 घंटे 27 मिनट की सफल स्पेसवॉक पूरी की। इस मिशन का उद्देश्य स्टेशन के पावर सिस्टम को अपग्रेड करने की दिशा में अहम हार्डवेयर स्थापित करना था, जिससे भविष्य में नए रोल-आउट सोलर एरे (iROSA) लगाए जा सकें।   पहली स्पेसवॉक पर रहे अनिल मेनन   भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन के लिए यह पहली स्पेसवॉक थी, जबकि जेसिका मीर अपने करियर की छठी स्पेसवॉक पर थीं। दोनों अंतरिक्ष यात्री क्वेस्ट एयरलॉक से बाहर निकलकर स्टेशन के बाहरी हिस्से में निर्धारित तकनीकी कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर वापस लौटे।   स्टेशन को मिलेगी अधिक सौर ऊर्जा   स्पेसवॉक के दौरान दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने स्टेशन के 3B पावर चैनल पर मॉडिफिकेशन किट स्थापित की। इसके अलावा नए iROSA सोलर पैनलों के लिए जरूरी केबल बिछाई गई और अन्य तकनीकी उपकरण लगाए गए। इन सोलर एरे के स्थापित होने के बाद ISS को पहले से अधिक सौर ऊर्जा मिलेगी, जिससे उसके वैज्ञानिक उपकरणों और अन्य प्रणालियों को बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।   भविष्य के मिशनों के लिए भी अहम तैयारी   नासा के अनुसार, अतिरिक्त सौर ऊर्जा स्टेशन के नियमित संचालन के साथ-साथ भविष्य में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को सुरक्षित रूप से डी-ऑर्बिट करने की योजना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वर्ष 2021 से अब तक छह iROSA सोलर एरे लगाए जा चुके हैं, जबकि दो और इस वर्ष स्थापित किए जाने हैं।   अगस्त में होंगी दो और स्पेसवॉक   यह अगस्त महीने में प्रस्तावित तीन स्पेसवॉक में पहली थी। अगली स्पेसवॉक 13 अगस्त को होगी, जिसमें स्पेस-टू-ग्राउंड संचार एंटीना को बदला जाएगा। इसके बाद 25 अगस्त को तीसरी स्पेसवॉक के दौरान पावर चैनल केबल, डेटा रिले सिस्टम और डॉकिंग नेविगेशन सिस्टम से जुड़े महत्वपूर्ण रखरखाव कार्य किए जाएंगे।

anjali kumari अगस्त 7, 2026 0
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अमेरिका-ईरान युद्ध पर ट्रंप का बयान
US-ईरान युद्ध पर ट्रंप ने दिए शांति के संकेत, कहा- जल्द ही हो सकता है संघर्ष खत्म

‘जल्द ही होगा खत्म’, US-ईरान युद्ध पर ट्रंप ने दिए शांति के संकेत वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर शांति की उम्मीद जताई है। ट्रंप के ताजा बयानों से संकेत मिला है कि दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए संघर्ष खत्म करने की कोशिशें आगे बढ़ रही हैं। हालांकि, ईरान की ओर से अमेरिकी दावों पर अब तक स्पष्ट सहमति नहीं जताई गई है।   ट्रंप ने बातचीत को लेकर क्या कहा?     डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत में प्रगति का दावा करते हुए संकेत दिया है कि युद्ध को जल्द समाप्त करने की दिशा में रास्ता निकल सकता है। इससे पहले भी ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ बातचीत शुरू होने वाली है और कूटनीतिक समाधान को एक और मौका दिया जा रहा है।   ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य केवल अस्थायी युद्धविराम नहीं, बल्कि ऐसा समझौता है जिससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जा सके।   ईरान की ओर से अलग रुख     ट्रंप के बयानों के बावजूद ईरान ने अमेरिका के साथ सीधे बातचीत की पुष्टि नहीं की है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, तेहरान ओमान और अन्य क्षेत्रीय देशों के माध्यम से तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।   होर्मुज जलडमरूमध्य भी बातचीत का अहम मुद्दा बना हुआ है। ईरान की ओर से इसके जरिए सुरक्षित समुद्री आवाजाही बहाल करने को लेकर ओमान के साथ चर्चा की जा रही है।   होर्मुज पर भी बनी हुई है नजर     अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है। यह दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है और यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।   ट्रंप ने पहले साफ कहा था कि होर्मुज में स्वतंत्र नौवहन बहाल होना किसी भी समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। वहीं ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिकी सैन्य दबाव और समुद्री नाकाबंदी जारी रहती है, तब तक जलडमरूमध्य की स्थिति में बड़ा बदलाव मुश्किल है।   क्या जल्द खत्म होगा युद्ध?     फिलहाल ट्रंप के बयानों से कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन युद्ध जल्द खत्म होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है। दोनों पक्षों के बीच कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।   इसलिए फिलहाल इसे शांति वार्ता की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, न कि युद्ध की समाप्ति का अंतिम ऐलान। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर होने वाली प्रगति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
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