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Ukraine’s Drone Diplomacy Expands to Middle East

मिडिल ईस्ट में यूक्रेन की ‘ड्रोन डिप्लोमेसी’: रूस से जंग के बीच 200+ मिलिट्री एक्सपर्ट क्यों तैनात?

surbhi मार्च 18, 2026 0
Ukrainian military experts training Middle East forces on anti-drone systems amid rising Iran drone threat
Ukraine Drone Diplomacy Middle East

रूस के साथ जारी युद्ध के बीच एक सवाल वैश्विक रणनीतिक हलकों में तेजी से उभरा है-जब यूक्रेन खुद मोर्चे पर है, तो उसके 200 से अधिक सैन्य विशेषज्ञ मिडिल ईस्ट में क्या कर रहे हैं?

इस सवाल का जवाब खुद वोलोडिमीर ज़ेलेंस्की ने ब्रिटेन की संसद में दिया, और इसके साथ ही एक नई भू-राजनीतिक तस्वीर सामने आई।

यूक्रेन की ‘नई भूमिका’: युद्ध से सहयोग तक

ज़ेलेंस्की के मुताबिक, यूक्रेन के 200 से ज्यादा एंटी-ड्रोन मिलिट्री एक्सपर्ट इस समय खाड़ी और मिडिल ईस्ट के कई देशों में तैनात हैं।

ये सैनिक पारंपरिक युद्ध नहीं लड़ रहे, बल्कि:

  • ईरानी ड्रोन हमलों से बचाव की ट्रेनिंग दे रहे हैं
     
  • स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं
     
  • एंटी-ड्रोन सिस्टम को मजबूत करने में मदद कर रहे हैं
     

यह यूक्रेन की रणनीति में बड़ा बदलाव दर्शाता है- ‘सिर्फ युद्ध लड़ने वाला देश’ से ‘सुरक्षा समाधान देने वाला साझेदार’।

किन देशों में है तैनाती?

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उनकी टीमें:

  • संयुक्त अरब अमीरात
     
  • कतर
     
  • सऊदी अरब
     

में पहले से मौजूद हैं, जबकि अगला पड़ाव कुवैत है।
इसके अलावा, कई अन्य देशों के साथ भी समझौते हो चुके हैं।

ईरान के ड्रोन: असली खतरा क्या है?

मिडिल ईस्ट में तनाव की जड़ है ईरान के ‘शाहेद’ ड्रोन, जिन्हें कम लागत और आत्मघाती हमले की क्षमता के कारण बेहद घातक माना जाता है।

ज़ेलेंस्की ने कहा:

  • यही ड्रोन रूस 2022 से यूक्रेन के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है
     
  • ईरान ने न सिर्फ रूस को ये ड्रोन दिए, बल्कि इनके इस्तेमाल और निर्माण की तकनीक भी साझा की
     

यानी यूक्रेन अब उसी खतरे से दूसरों को बचाने की कोशिश कर रहा है, जिससे वह खुद जूझ चुका है।

‘रूस-ईरान गठजोड़’ पर सीधा हमला

अपने भाषण में ज़ेलेंस्की ने साफ कहा:
“रूस और ईरान नफरत के साझेदार हैं, और हथियारों में भी सहयोगी।”

उनका संदेश स्पष्ट था-

  • यह केवल यूक्रेन की जंग नहीं है
     
  • बल्कि वैश्विक सुरक्षा का मुद्दा है
     

ड्रोन टेक्नोलॉजी: यूक्रेन की असली ताकत

यूक्रेन ने पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन युद्ध में असाधारण प्रगति की है।

ज़ेलेंस्की के अनुसार:

  • रूस को होने वाले 90% नुकसान ड्रोन के जरिए हो रहे हैं
     
  • यूक्रेन अब रोजाना 2000 तक इंटरसेप्टर ड्रोन बना सकता है
     

इनमें शामिल हैं:

  • FPV इंटरसेप्टर ड्रोन
     
  • समुद्री ड्रोन
     
  • एंटी-एयर डिफेंस ड्रोन
     

यह तकनीक अब यूक्रेन की ‘एक्सपोर्टेबल सिक्योरिटी स्ट्रेंथ’ बन चुकी है।

अमेरिका क्यों अलग खड़ा है?

दिलचस्प बात यह है कि जहां खाड़ी देश यूक्रेन की मदद ले रहे हैं, वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका को इस मामले में यूक्रेन की मदद की जरूरत नहीं है।

अमेरिका ने अपने स्तर पर ‘लुकास’ ड्रोन सिस्टम विकसित किया है, जो ईरानी ड्रोन का मुकाबला करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

असली कहानी: रणनीति या मजबूरी?

यूक्रेन का यह कदम केवल सहयोग नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है:

  • वैश्विक मंच पर अपनी उपयोगिता साबित करना
     
  • सहयोगी देशों के साथ सैन्य रिश्ते मजबूत करना
     
  • रूस-ईरान गठजोड़ के खिलाफ व्यापक मोर्चा तैयार करना
     

क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

मिडिल ईस्ट में यूक्रेन की यह सक्रियता कई बड़े संकेत देती है:

  • युद्ध अब सीमाओं तक सीमित नहीं रहा
     
  • ड्रोन टेक्नोलॉजी आधुनिक युद्ध का केंद्र बन चुकी है
     
  • छोटे लेकिन तकनीकी रूप से सक्षम देश भी वैश्विक समीकरण बदल सकते हैं

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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पीएम मोदी से मिले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, रणनीतिक साझेदारी और सुरक्षा मुद्दों पर हुई अहम चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने शनिवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने, वैश्विक सुरक्षा, व्यापार, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में विदेश मंत्री S. Jaishankar और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।   व्हाइट हाउस आने का दिया निमंत्रण बैठक के दौरान मार्को रूबियो ने प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका आने और व्हाइट हाउस का दौरा करने का निमंत्रण भी दिया। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, व्यापार और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।   पीएम मोदी ने जताई खुशी मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री का स्वागत कर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में हो रही प्रगति और क्षेत्रीय व वैश्विक शांति एवं सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका वैश्विक भलाई के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।   व्यापार, AI और रक्षा सहयोग पर फोकस भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने भी बैठक को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। उन्होंने भारत को अमेरिका का अहम रणनीतिक साझेदार बताया।   चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं रूबियो मार्को रूबियो चार दिवसीय भारत दौरे पर आए हैं। अपने दौरे के दौरान वह विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा वह अमेरिकी दूतावास में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगा।

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Tulsi Gabbard resigns as US Director of National Intelligence after husband cancer diagnosis announcement
ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका, तुलसी गबार्ड ने छोड़ा DNI पद, पति की बीमारी बनी वजह

Tulsi Gabbard ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। गबार्ड ने कहा कि उनके पति Abraham Williams को हड्डियों के कैंसर की बेहद दुर्लभ बीमारी का पता चला है, जिसके बाद उन्होंने परिवार को प्राथमिकता देने का फैसला लिया। वह 30 जून तक डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) के पद पर बनी रहेंगी। ओवल ऑफिस में ट्रंप को दी जानकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक Tulsi Gabbard ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति Donald Trump से मुलाकात कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि इस कठिन समय में वह अपने पति के साथ रहना चाहती हैं और सार्वजनिक जीवन से कुछ समय के लिए पीछे हटना जरूरी है। पति को बताया सबसे बड़ा सहारा गबार्ड ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में उनके पति हर कठिन दौर में उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने कहा कि सैन्य सेवा, चुनावी राजनीति और अमेरिकी खुफिया तंत्र की जिम्मेदारी संभालने तक हर चुनौती में Abraham Williams उनका सबसे बड़ा सहारा रहे। इसी वजह से वह उन्हें इस मुश्किल दौर में अकेला नहीं छोड़ सकतीं। ट्रंप ने की पुष्टि, नए कार्यवाहक DNI का ऐलान Donald Trump ने भी उनके इस्तीफे की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि गबार्ड अपने पति के इलाज और देखभाल के लिए पद छोड़ रही हैं। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि अब्राहम जल्द स्वस्थ होंगे। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि Aaron Lucas को कार्यवाहक DNI बनाया जाएगा। अमेरिकी नेताओं ने जताई संवेदना अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने गबार्ड को “सच्ची देशभक्त” बताते हुए कहा कि परिवार हमेशा पहले आता है। वहीं Lindsey Graham समेत कई नेताओं ने उनके परिवार के लिए प्रार्थना की। ईरान की प्रतिक्रिया ने खींचा ध्यान इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा ईरान की प्रतिक्रिया को लेकर हुई। Embassy of Iran in Armenia ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि तुलसी गबार्ड कई बार ईरान को लेकर ऐसी बातें कहती थीं जो ट्रंप प्रशासन को पसंद नहीं आती थीं। पोस्ट में उनके पति के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की गई। साथ ही दावा किया गया कि गबार्ड “कभी-कभी अमेरिका के हित में बोलती थीं, न कि इजरायल के प्रभाव में।” कौन हैं तुलसी गबार्ड? 43 वर्षीय Tulsi Gabbard अमेरिकी राजनीति की चर्चित हस्तियों में गिनी जाती हैं। वह अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचने वाली पहली हिंदू नेता रही हैं। उनका जन्म अमेरिकन समोआ में हुआ था, लेकिन उनकी मां हिंदू धर्म से प्रभावित थीं और उन्होंने अपने बच्चों के नाम भारतीय परंपराओं से प्रेरित रखे। इसी वजह से भारत और भारतीय समुदाय के बीच तुलसी गबार्ड की खास पहचान रही है। कार्यकाल में लिए कई बड़े फैसले DNI रहते हुए गबार्ड ने अमेरिकी खुफिया तंत्र में कई बड़े बदलाव किए। उन्होंने: एजेंसी का आकार कम किया कई आंतरिक ढांचागत सुधार किए DEI (डाइवर्सिटी, इक्विटी और इंक्लूजन) कार्यक्रमों को खत्म किया लाखों सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक करवाए इन दस्तावेजों में 2016 अमेरिकी चुनाव में रूस हस्तक्षेप जांच और Assassination of John F. Kennedy से जुड़ी फाइलें भी शामिल थीं। ट्रंप प्रशासन में लगातार इस्तीफे गबार्ड का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन में लगातार बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हाल के महीनों में कई वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे और बर्खास्तगी के बाद अब तुलसी गबार्ड का जाना भी अमेरिकी राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।  

surbhi मई 23, 2026 0
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