दुनिया

यूरोप में भीषण गर्मी का कहर जारी, कई देशों में हीट अलर्ट और जंगल की आग से जनजीवन प्रभावित

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
यूरोप में भीषण गर्मी और जंगलों में लगी आग से प्रभावित इलाके
Severe Heatwave And Wildfires Impact Life Across Europe

ब्रसेल्स, एजेंसियां। यूरोप के कई देश इन दिनों भीषण गर्मी और जंगलों में लगी आग की दोहरी मार झेल रहे हैं। फ्रांस, स्पेन, ग्रीस, इटली और पुर्तगाल समेत कई देशों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है। हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने कई इलाकों में हीट अलर्ट जारी किया है और लोगों से अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की अपील की है।

 

जंगल की आग पर काबू पाने में जुटीं राहत एजेंसियां

 

भीषण गर्मी और तेज हवाओं के कारण कई क्षेत्रों में जंगलों में आग तेजी से फैल रही है। फ्रांस और ग्रीस में हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की चपेट में आ चुके हैं। आग पर काबू पाने के लिए दमकलकर्मी, हेलीकॉप्टर और विशेष बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। कई गांवों और रिहायशी इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

 

स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन पर भी पड़ा असर

 

अत्यधिक तापमान का असर आम जनजीवन पर भी दिखाई दे रहा है। कई शहरों में अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। वहीं रेल और सड़क परिवहन भी प्रभावित हुआ है। मौसम विशेषज्ञों ने आने वाले दिनों में भी गर्मी का प्रकोप जारी रहने की आशंका जताई है और लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है। जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में लगातार बढ़ रही चरम मौसमी घटनाओं को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) मुख्यालय और अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड, जिन्होंने ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया है
यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने ब्याज दरें यथावत रखीं, अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले फैसले पर

फ्रैंकफर्ट, एजेंसियां। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। बैंक ने कहा कि यूरोजोन में महंगाई धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है, लेकिन वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए फिलहाल सतर्क रुख अपनाना जरूरी है। ECB के इस फैसले के बाद अब वैश्विक वित्तीय बाजारों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति बैठक पर टिक गई है।   महंगाई और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बनाने की चुनौती   ईसीबी अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड ने कहा कि बैंक आगे भी आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर ही ब्याज दरों को लेकर निर्णय लेगा। उन्होंने माना कि यूरोप में महंगाई पहले की तुलना में कम हुई है, लेकिन वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और व्यापारिक अनिश्चितताएं अभी भी जोखिम बनी हुई हैं। इसलिए जल्दबाजी में किसी नीति बदलाव की संभावना नहीं है।   फेड के फैसले का वैश्विक बाजारों पर रहेगा असर   विश्लेषकों का मानना है कि अब निवेशकों का पूरा ध्यान अगले सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर है। यदि फेड ब्याज दरों में बदलाव करता है या भविष्य की नीति को लेकर कोई बड़ा संकेत देता है, तो उसका असर वैश्विक शेयर बाजारों, बॉन्ड यील्ड, डॉलर और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में ईसीबी के स्थिर रुख के बाद वित्तीय बाजार फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में हैं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
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कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार, वैश्विक महंगाई और बाजारों पर बढ़ा दबाव

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यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में तेल टैंकरों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमले

हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में नए हमलों का दावा किया, वैश्विक समुद्री व्यापार पर बढ़ी चिंता

Indus Waters Treaty
संयुक्त राष्ट्र में सिंधु जल संधि पर भारत का दोटूक रुख, कहा- आतंकवाद खत्म होने तक नहीं बदलेगा फैसला

न्यूयॉर्क, एजेंसियां। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में पाकिस्तान द्वारा सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने कड़ा जवाब दिया। भारत ने स्पष्ट कहा कि सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) फिलहाल स्थगित रहेगी और जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक इस फैसले में कोई बदलाव नहीं होगा।   आतंकवाद और जल संधि को अलग नहीं देखा जा सकता   संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाना भ्रामक और निराधार है। भारत ने दोहराया कि सीमा पार आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते। भारतीय पक्ष के अनुसार पाकिस्तान लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है, इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में संधि को पहले की तरह लागू रखना संभव नहीं है।   पाकिस्तान के आरोपों को भारत ने किया खारिज   भारत ने पाकिस्तान के उन आरोपों को भी सिरे से खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि भारत सिंधु जल संधि का उल्लंघन कर रहा है। भारतीय प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि संधि को स्थगित रखने का फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और मौजूदा हालात को ध्यान में रखकर लिया गया है। भारत ने यह भी कहा कि यदि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय और ठोस कदम उठाता है, तभी भविष्य में द्विपक्षीय मुद्दों पर सकारात्मक माहौल बन सकता है।

anjali kumari जुलाई 24, 2026 0
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने भारत और 60 अन्य देशों पर नया आयात शुल्क लगाया है
अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों पर लगाया नया आयात शुल्क, भारतीय उत्पादों पर 10% टैरिफ लागू

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत सहित 60 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लागू करने का ऐलान किया है। नए आदेश के तहत भारत से अमेरिका जाने वाले अधिकांश उत्पादों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। यह फैसला अमेरिकी व्यापार कानून के Section 301 के तहत लिया गया है और शुक्रवार से प्रभावी हो गया।   भारत को 12.5% के बजाय 10% टैरिफ, नीति बदलाव का मिला लाभ   अमेरिका ने शुरुआत में भारत पर 12.5% शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन भारत द्वारा फोर्स्ड लेबर (जबरन श्रम) से बने उत्पादों के आयात पर रोक संबंधी नीति में बदलाव करने के बाद टैरिफ दर घटाकर 10% कर दी गई। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जिन देशों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं, उन्हें कम दर पर शुल्क लगाया गया है।   व्यापार संबंधों पर पड़ सकता है असर   विशेषज्ञों का मानना है कि नए टैरिफ का असर भारत के कुछ निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है, हालांकि 10% की दर अन्य कई देशों की तुलना में कम है। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी अब दोनों देशों की बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस फैसले के बाद वैश्विक व्यापार जगत की नजर दोनों देशों के अगले कदमों पर टिकी हुई है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
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आतंकवाद पर जयशंकर का दुनिया को सख्त संदेश, बोले— 'जीरो टॉलरेंस ही वैश्विक नीति होनी चाहिए'

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