पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत से सिंधु जल संधि बहाल करने की अपील की है। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन में पाकिस्तान ने कहा कि इस संधि को रोकना दुनिया के कई देशों के लिए चिंता का कारण बन सकता है।
सम्मेलन में पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री Musadik Malik ने भारत पर साझा जल संसाधनों को राजनीति से जोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सीमा पार नदियों पर एकतरफा फैसले कई देशों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकते हैं।
पाकिस्तान ने भारत से सिंधु जल संधि का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने की अपील की।
भारत ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए थे। इन्हीं में सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला भी शामिल था।
भारत का कहना था कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। इसके बाद से दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर तनाव बना हुआ है।
Indus Waters Treaty भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई थी। विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुए इस समझौते के तहत सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर नियम तय किए गए थे।
यह संधि लंबे समय तक दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे का आधार रही है।
पाकिस्तान ने कहा कि अगर उसके हिस्से का पानी रोका गया तो इसे गंभीर कदम माना जाएगा। पाकिस्तान का दावा है कि उसकी खेती और पानी की जरूरतें काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर हैं।
सम्मेलन में पाकिस्तान ने जलवायु परिवर्तन का मुद्दा भी उठाया। पाकिस्तान का कहना है कि वह उन देशों में शामिल है जो ग्लोबल वार्मिंग और पानी की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है और आने वाले समय में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और चर्चा में रह सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच तेहरान ने स्पष्ट किया है कि अभी किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बनी है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है और जल्द ही उस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ईरान बोला- समझौते की खबरें अटकलों पर आधारित ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए से बातचीत में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी अंतिम समझौते को लेकर सामने आ रही खबरें केवल अटकलें हैं। उन्होंने कहा कि वार्ता के कई पहलुओं पर प्रगति हुई है और मसौदे का बड़ा हिस्सा पहले ही तैयार किया जा चुका है, लेकिन अभी तक किसी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। बघाई के अनुसार, कतर और पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिकी रुख पर जताई नाराजगी बघाई ने आरोप लगाया कि वार्ता के दौरान अमेरिकी पक्ष लगातार अपना रुख बदलता रहा है, जिससे बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी निर्धारित "रेड लाइन्स" से पीछे नहीं हटेगा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा। उनका कहना था कि वार्ता जारी है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी शेष है। होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चिंता ईरानी प्रवक्ता ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियों के कारण इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा स्थिति प्रभावित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, जहां किसी भी तनाव का असर वैश्विक तेल बाजारों पर पड़ सकता है। ट्रंप ने किया था समझौते का दावा इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता लगभग तैयार है। ट्रंप ने कहा था कि अब केवल दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है और आने वाले दिनों में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि हस्ताक्षर समारोह यूरोप में आयोजित किया जा सकता है और इसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिका का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। ट्रंप ने दावा किया था कि प्रस्तावित समझौते का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न कर सके। भारतीय जहाज पर हमले को लेकर अमेरिका पर आरोप इस बीच ओमान के तट के निकट एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले और उसमें भारतीय नागरिकों की मौत के मुद्दे पर भी ईरान ने अमेरिका की आलोचना की है। इस्माइल बघाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में अमेरिकी कार्रवाई को "राज्य प्रायोजित समुद्री डकैती" और "सशस्त्र लूट" करार दिया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आगे क्या? अमेरिका और ईरान के बयानों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। जहां वॉशिंगटन समझौते को अंतिम चरण में बता रहा है, वहीं तेहरान का कहना है कि बातचीत जारी है और अभी किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचना बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों की कूटनीतिक गतिविधियां यह तय करेंगी कि दोनों देश वास्तव में किसी व्यापक समझौते के करीब हैं या नहीं।
मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बुधवार को पाकिस्तानी सेना का एक MI-17 हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हादसे में हेलिकॉप्टर में सवार 21 सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की आशंका है। पाकिस्तानी सेना ने अभी तक मृतकों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की है। उड़ान भरने के कुछ देर बाद हुआ हादसा जानकारी के मुताबिक, हेलिकॉप्टर ने मुजफ्फराबाद से उड़ान भरी थी और वह नीलम घाटी क्षेत्र की ओर जा रहा था। उड़ान के कुछ ही समय बाद हेलिकॉप्टर में तकनीकी खराबी आने की सूचना मिली। पायलट ने आपातकालीन लैंडिंग का प्रयास किया, लेकिन विमान सुरक्षित नहीं उतर सका और दुर्घटनाग्रस्त हो गया। नीलम घाटी में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती थी प्रस्तावित स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नीलम घाटी क्षेत्र में विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर चल रहे विवाद और विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे जा रहे थे। बताया जा रहा है कि हेलिकॉप्टर में सवार सुरक्षाकर्मी इसी मिशन का हिस्सा थे। हादसे की जांच के आदेश पाकिस्तानी सेना ने दुर्घटना की वजहों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि तकनीकी और परिचालन संबंधी सभी पहलुओं की जांच की जाएगी, ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने जताया शोक पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतक सैनिकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए दुर्घटना की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने व्यक्त की संवेदना पाकिस्तान के राष्ट्रपति Asif Ali Zardari और प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने भी हादसे पर शोक व्यक्त किया है। दोनों नेताओं ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि देश सुरक्षा बलों के योगदान और बलिदान को हमेशा याद रखेगा। क्षेत्र में राहत और बचाव अभियान जारी हादसे के बाद सेना और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है और दुर्घटनास्थल से मलबा हटाने का काम जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद हादसे से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
बीजिंग: भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और पेपर लीक को लेकर चल रही बहस के बीच चीन ने दुनिया की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा ‘गाओकाओ’ (Gaokao) का आयोजन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस वर्ष करीब 1.3 करोड़ छात्रों ने परीक्षा में हिस्सा लिया और पूरे आयोजन के दौरान किसी बड़ी गड़बड़ी या सुरक्षा उल्लंघन की खबर सामने नहीं आई। चीन सरकार ने परीक्षा के दौरान छात्रों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराने के लिए देशभर में विशेष इंतजाम किए। परीक्षा केंद्रों के आसपास शोर कम करने के लिए कई क्षेत्रों में फैक्ट्रियों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया, जबकि ट्रैफिक प्रतिबंध लागू कर छात्रों की आवाजाही को आसान बनाया गया। छात्रों की सुविधा के लिए पूरे देश ने दिखाई एकजुटता चीन में गाओकाओ केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का आयोजन माना जाता है। परीक्षा के दौरान प्रशासन, स्थानीय निकायों और आम नागरिकों ने मिलकर ऐसा वातावरण तैयार किया, जिससे छात्र बिना किसी व्यवधान के परीक्षा दे सकें। परीक्षा केंद्रों के आसपास विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई। कई शहरों में वाहनों की आवाजाही सीमित रखी गई और छात्रों के लिए विशेष परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। चीनी दूतावास ने JEE और NEET से की तुलना भारत स्थित चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गाओकाओ परीक्षा की तुलना भारत की जेईई (JEE) और नीट (NEET) परीक्षाओं से की। उन्होंने कहा कि गाओकाओ दुनिया की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा है, जिसे भारत की JEE और NEET के संयुक्त स्वरूप के समान माना जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि केवल दो दिनों में 1.3 करोड़ छात्रों के लिए परीक्षा का सफल आयोजन चीन की प्रशासनिक क्षमता और समन्वय को दर्शाता है। क्या है गाओकाओ परीक्षा? गाओकाओ चीन की राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा है, जिसका आयोजन चीन का शिक्षा मंत्रालय करता है। देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए यह परीक्षा अनिवार्य मानी जाती है। हर वर्ष करोड़ों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं और इसके परिणाम छात्रों के शैक्षणिक एवं पेशेवर भविष्य को काफी हद तक निर्धारित करते हैं। यही वजह है कि इसे चीन के सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजनों में गिना जाता है। भारत में NEET विवाद के बीच चर्चा में आया चीन का मॉडल चीन की परीक्षा व्यवस्था उस समय चर्चा में आई है, जब भारत में NEET-UG परीक्षा को लेकर पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में संसदीय समिति की बैठक में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और अन्य संबंधित संस्थाओं के अधिकारियों से परीक्षा सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर जवाब मांगा गया। समिति के कुछ सदस्यों ने अमेरिका और चीन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि भारत को भी बड़े पैमाने की परीक्षाओं के आयोजन में वैश्विक सर्वोत्तम प्रक्रियाओं (Best Practices) को अपनाने पर विचार करना चाहिए। परीक्षा प्रबंधन का वैश्विक उदाहरण बना गाओकाओ विशेषज्ञों का मानना है कि करोड़ों छात्रों वाली परीक्षा को सीमित समय में व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराना किसी भी देश के लिए बड़ी चुनौती होती है। चीन का गाओकाओ मॉडल एक बार फिर यह दिखाता है कि व्यापक प्रशासनिक समन्वय, तकनीकी निगरानी और सामाजिक सहयोग के माध्यम से बड़े स्तर की परीक्षाओं का सफल आयोजन संभव है।