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Trump Proposes Record $1.5T Defense Budget

ट्रंप का बड़ा दांव: 1.5 ट्रिलियन डॉलर रक्षा बजट की मांग, क्या है प्लान?

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
US President Donald Trump proposes $1.5 trillion defense budget with focus on Golden Dome missile system and new battleships
Trump $1.5 Trillion Defense Budget Plan

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2027 वित्तीय वर्ष के लिए 1.5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 139 लाख करोड़ रुपये) के विशाल रक्षा बजट का प्रस्ताव रखा है। अगर इसे कांग्रेस मंजूरी देती है, तो यह अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा बजट होगा।

42% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

  • यह बजट पिछले साल के मुकाबले करीब 42% ज्यादा है
  • रक्षा खर्च में इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी गई

‘गोल्डन डोम’ डिफेंस सिस्टम पर फोकस

  • इस बजट में ट्रंप के प्रस्तावित ‘Golden Dome’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए फंड शामिल है
  • इसका उद्देश्य अमेरिका को आधुनिक और अगली पीढ़ी के हवाई खतरों से बचाना है

नए ‘Trump-Class’ बैटलशिप

  • बजट में दर्जनों सैन्य जहाजों के निर्माण का प्रावधान
  • अमेरिकी नौसेना के लिए नई ‘Trump-Class’ बैटलशिप सीरीज भी शामिल

घरेलू उत्पादन पर जोर

  • यह प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन के घरेलू रक्षा उत्पादन और बड़े प्रोजेक्ट्स पर फोकस को दर्शाता है
  • इसका मकसद अमेरिका की मिलिट्री ताकत को और मजबूत करना है

ईरान युद्ध से अलग बजट

  • यह रक्षा बजट प्रस्ताव ईरान के साथ चल रहे संघर्ष से अलग है
  • पेंटागन ने ‘Operation Epic Fury’ के लिए अलग से
    200 अरब डॉलर (करीब 18.5 लाख करोड़ रुपये) की मांग की है

क्या है इसका मतलब?

  • अमेरिका अपनी सैन्य ताकत को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ाने की तैयारी में है
  • बढ़ते वैश्विक तनाव और तकनीकी युद्ध को देखते हुए यह कदम रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Benjamin Netanyahu on India: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि अमेरिका के अलावा भारत भी इजरायल का एक मजबूत और भरोसेमंद सहयोगी है। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब आबादी वाले भारत से उन्हें व्यापक समर्थन मिल रहा है। नेतन्याहू का यह ब
अमेरिका ही नहीं, भारत भी हमारे साथ; इजरायली पीएम नेतन्याहू का दावा, भारत से मिल रहा जबरदस्त समर्थन

Benjamin Netanyahu on India: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि अमेरिका के अलावा भारत भी इजरायल का एक मजबूत और भरोसेमंद सहयोगी है। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब आबादी वाले भारत से उन्हें व्यापक समर्थन मिल रहा है। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि अमेरिका ही इजरायल का एकमात्र ताकतवर सहयोगी है। 'भारत से मिल रहा है जबरदस्त समर्थन' फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल के कई मित्र देश हैं और भारत उनमें प्रमुख है। उन्होंने कहा, "अमेरिका के अलावा हमारे और भी दोस्त हैं। भारत भी उनमें से एक है। 1.4 अरब आबादी वाले इस देश से हमें जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।" नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि उन्हें सोशल मीडिया, विशेष रूप से फेसबुक पर भारतीयों का व्यापक समर्थन मिलता है। उन्होंने कहा कि उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत से बड़ी संख्या में समर्थक जुड़े हुए हैं। भारत-इजरायल संबंधों का किया जिक्र इजरायली प्रधानमंत्री ने भारत और इजरायल के बीच मजबूत होते संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच वर्षों से रणनीतिक और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने रिश्तों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी अच्छे संबंध हैं। इसी वर्ष नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना "पर्सनल फ्रेंड" बताया था और भारत को एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति (Global Power) कहा था। जेडी वेंस ने क्या कहा था? नेतन्याहू की यह टिप्पणी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही इस समय ऐसे नेता हैं, जो पूरी मजबूती से इजरायल के साथ खड़े हैं। वेंस ने कहा था कि यदि वह इजरायल की सरकार में होते, तो अपने सबसे बड़े और ताकतवर सहयोगी अमेरिका की सार्वजनिक आलोचना नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों में इजरायल की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अधिकांश हथियार अमेरिका में बने हैं और उनका खर्च अमेरिकी करदाताओं के पैसे से उठाया गया है। पीएम मोदी के इजरायल दौरे का भी किया जिक्र रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2025 में इजरायल का दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत पूरी मजबूती और विश्वास के साथ इजरायल के साथ खड़ा है। यह बयान ऐसे समय आया था, जब कुछ दिनों बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी, जिसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था। रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा, तकनीक, नवाचार और व्यापार समेत कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देश आतंकवाद विरोधी सहयोग और सामरिक साझेदारी को भी मजबूत करने पर लगातार काम कर रहे हैं। नेतन्याहू का ताजा बयान दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों की एक और पुष्टि के तौर पर देखा जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Super Typhoon Bavi approaches Guam and the Northern Mariana Islands with destructive winds, as residents prepare for severe weather and possible power outages.

सुपर टाइफून 'बावी' का कहर! 280 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रहीं हवाएं, गुआम और उत्तरी मारियाना में हाई अलर्ट

Large crowds gather in Tehran during the second day of funeral ceremonies for former Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei.

दुश्मनों से प्रतिशोध और ‘खून का बदला’ के नारों से गूंजा तेहरान, अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ी लाखों की भीड़

Mourners gather in Tehran during the funeral ceremonies of former Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei as tensions rise over US President Donald Trump's remarks.

'ना सभ्यता, ना इतिहास...', ट्रंप के बयान पर ईरान का पलटवार; कहा- इंसान मर सकता है, आदर्श नहीं

A cargo ship sails through the Red Sea after coming under attack near Yemen's coast as maritime security agencies investigate the incident.
लाल सागर में कार्गो शिप पर हमला, यमन तट के पास हथियारबंद हमलावरों ने बनाया निशाना; ब्रिटिश सेना ने की पुष्टि

नई दिल्ली: लाल सागर (Red Sea) में यमन के तट के पास रविवार को एक मालवाहक जहाज (Cargo Ship) पर अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने हमला कर दिया। इस घटना की पुष्टि ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने की है। फिलहाल हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। यमन के होदेइदा तट के पास हुआ हमला ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, हमला यमन के तटीय शहर होदेइदा से लगभग 30 समुद्री मील (करीब 55 किलोमीटर) दक्षिण-पश्चिम में हुआ। होदेइदा पर वर्तमान में ईरान समर्थित हूती (Houthi) विद्रोहियों का नियंत्रण है। समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज के चालक दल ने अज्ञात हथियारबंद हमलावरों द्वारा निशाना बनाए जाने की सूचना सुरक्षा एजेंसियों को दी। जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, हाल के महीनों में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर दोबारा हमले करने की चेतावनी दी थी। फिलहाल इस घटना को लेकर हूती संगठन की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पहले भी निशाने पर रहे हैं जहाज गाजा युद्ध के दौरान हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले कई वाणिज्यिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। इन हमलों के चलते कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने स्वेज नहर का रास्ता छोड़कर अफ्रीका के दक्षिणी छोर केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबी दूरी तय करनी शुरू कर दी थी, जिससे वैश्विक व्यापार और शिपिंग लागत पर असर पड़ा। सोमाली समुद्री डाकुओं की गतिविधियां भी बढ़ीं लाल सागर और अदन की खाड़ी में हाल के दिनों में सोमाली समुद्री डाकुओं की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। 1 जुलाई को यमन के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह बलहाफ से करीब 76 समुद्री मील (140 किलोमीटर) दक्षिण में एक संदिग्ध समुद्री डकैती की घटना सामने आई थी। उस दौरान चार हथियारबंद हमलावरों ने एक छोटी नाव के जरिए एक जहाज के ब्रिज पर हमला किया था, जिससे मामूली नुकसान हुआ था। जांच जारी यूकेएमटीओ और अन्य समुद्री सुरक्षा एजेंसियां घटना की जांच कर रही हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ताजा हमले के पीछे कौन-सा संगठन या समूह शामिल था। लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Mourners gather during the funeral ceremonies of former Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei in Tehran as speeches and political slogans draw attention.

खामेनेई के अंतिम संस्कार में ट्रंप के खिलाफ भड़काऊ नारे, कवि के बयान से मचा विवाद

PoK Protest

PoK संकट गहराया: मुनीर सेना के खिलाफ विरोध, लोगों ने भारत से लगाई मदद की गुहार

Kango Boat

कांगो में छात्रों से भरी नाव नदी में पलटी, कम से कम 20 की मौत; राहत-बचाव अभियान जारी

Saint Petersburg
यूक्रेन का रूस पर बड़ा ड्रोन हमला, सेंट पीटर्सबर्ग के तेल टर्मिनल को बनाया निशाना

मॉस्को, एजेंसियां। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने रूस की ऊर्जा अवसंरचना पर एक और बड़ा हमला किया है। शनिवार देर रात यूक्रेनी ड्रोन ने रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग के प्रमुख तेल टर्मिनल और आसपास के बंदरगाह क्षेत्र को निशाना बनाया। हमले के बाद तेल टर्मिनल में आग लग गई और इलाके में धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया। रूसी अधिकारियों ने इसे हाल के महीनों का सबसे बड़ा ड्रोन हमला बताया।   72 ड्रोन मार गिराने का रूस का दावा   रूस के लेनिनग्राद क्षेत्र के गवर्नर के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम ने हमले के दौरान 72 यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया। इसके बावजूद सेंट पीटर्सबर्ग ऑयल टर्मिनल और वायसोत्स्क बंदरगाह क्षेत्र में नुकसान हुआ। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।   रूस की ऊर्जा आपूर्ति को निशाना बना रहा यूक्रेन   विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन लगातार रूस की तेल और ईंधन आपूर्ति से जुड़ी परियोजनाओं को निशाना बना रहा है, ताकि युद्ध के लिए जरूरी लॉजिस्टिक्स और आर्थिक संसाधनों पर दबाव बनाया जा सके। हाल के महीनों में रूस के कई तेल डिपो, रिफाइनरी और बंदरगाहों पर ऐसे हमले हो चुके हैं।   युद्ध के बीच बढ़ा तनाव   यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच हवाई हमलों और ड्रोन हमलों की तीव्रता लगातार बढ़ रही है। रूस ने भी यूक्रेन के कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऊर्जा अवसंरचना पर बढ़ते हमले आने वाले दिनों में संघर्ष को और अधिक तीखा बना सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
US Independence Day

अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस के जश्न में डूबीं प्रियंका चोपड़ा, शेयर किया आतिशबाजी का वीडियो

Mehbooba Mufti and members of the Indian delegation pay tribute to former Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei during funeral ceremonies in Tehran.

ईरान पहुंचीं महबूबा मुफ्ती, भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अयातुल्लाह अली खामेनेई को दी श्रद्धांजलि

Iranian Parliament Speaker Mohammad Bagher Ghalibaf and Foreign Minister Seyed Abbas Araghchi pay emotional tribute to former Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei at Tehran's Grand Mosalla.

खामेनेई को अंतिम विदाई: गालिबाफ और अराघची हुए भावुक, लाखों लोगों के जुटने की उम्मीद

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0

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