तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह की शुरुआत से पहले जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचीं। उन्होंने अन्य प्रतिनिधियों के साथ खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके लिए आयोजित सलात-अल-जनाज़ा (अंतिम संस्कार की नमाज़) में हिस्सा लिया।
महबूबा मुफ्ती के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी के विदेश मामलों के प्रमुख सलमान खुर्शीद सहित कई भारतीय शिया समुदाय के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए दुआ की।
अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े छह दिवसीय कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू हो गए हैं। ईरानी सरकार के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 9 जुलाई तक जारी रहेंगे। इसके बाद खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम विदाई समारोह में शामिल होने के लिए तेहरान में करोड़ों लोगों के पहुंचने की संभावना है। राजधानी समेत पूरे ईरान में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और जगह-जगह खामेनेई के पोस्टर व बैनर लगाए गए हैं।
खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंच रहे हैं। भारत की ओर से भी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल समारोह में हिस्सा ले रहा है।
सूत्रों के मुताबिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा था। हालांकि, पूर्व निर्धारित विदेशी दौरों और आधिकारिक कार्यक्रमों के कारण प्रधानमंत्री इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं बन सके। उनकी जगह भारत सरकार ने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल को ईरान भेजा है।
अयातुल्लाह अली खामेनेई ने लगभग 36 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में देश का नेतृत्व किया। उनकी मृत्यु 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों में हुई थी। इसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ा और क्षेत्र में सैन्य संघर्ष छिड़ गया। इस संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा और कई देशों में कच्चे तेल व एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
ईरानी प्रशासन के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े विशेष धार्मिक कार्यक्रम 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद अंतिम यात्रा मशहद पहुंचेगी, जहां 9 जुलाई को खामेनेई को दफनाया जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि छह दिनों तक चलने वाले शोक कार्यक्रमों में देशभर से करोड़ों लोग शामिल हो सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। शिपिंग डेटा के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में होर्मुज से गुजरने वाले 80 फीसदी से अधिक जहाजों ने ईरान की आपत्ति के बावजूद ओमान की ओर वाले समुद्री रास्ते का इस्तेमाल किया है। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर ईरान का प्रभाव पहले की तुलना में कमजोर हुआ है। हालांकि, इसे ईरान के नियंत्रण के पूरी तरह खत्म होने के तौर पर देखना अभी जल्दबाजी होगी। ओमान वाले रास्ते का बढ़ता इस्तेमाल सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, केप्लर के शिपिंग डेटा में पिछले दो सप्ताह के दौरान ओमान की तरफ से गुजरने वाले समुद्री मार्ग के इस्तेमाल में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। एक महीने पहले इस वैकल्पिक मार्ग पर लगभग कोई जहाज नहीं चल रहा था। अब बड़ी संख्या में जहाज इसी रास्ते से गुजर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ जहाज अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा पर भरोसा करते हुए इस मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं। केप्लर के कच्चे तेल विश्लेषण प्रमुख होमायून फलाकशाही के अनुसार, मौजूदा गतिविधियों से ऐसा प्रतीत होता है कि ईरान ने होर्मुज जलमार्ग पर कम से कम कुछ हद तक अपना नियंत्रण खोया है। आखिर होर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण क्यों है? होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के तेल और ऊर्जा व्यापार के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा है। इस मार्ग पर तनाव बढ़ने का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहता। तेल की कीमतों, वैश्विक शिपिंग लागत और एशियाई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से यहां जहाजों की आवाजाही में कोई भी बड़ा बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। ईरान की आपत्ति के बावजूद क्यों बढ़ी आवाजाही? रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान के उत्तरी तट के पास से गुजरने वाले समुद्री मार्ग को लेकर ईरान की आपत्ति रही है। इसके बावजूद अब बड़ी संख्या में जहाज इसी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे सुरक्षा सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा करते हुए जहाज संचालक ईरान की पसंद वाले मार्ग से बचने की कोशिश कर रहे हैं। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या समुद्री मार्ग पर ईरान के प्रभाव को चुनौती मिल रही है। ईरान की कमाई पर भी असर जहाजों के वैकल्पिक रास्ते अपनाने का आर्थिक असर भी ईरान पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पहले ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट शुल्क वसूलने की कोशिश करता था। लेकिन यदि अधिक संख्या में जहाज ईरान की पसंद वाले रास्ते से बचते हैं, तो उसके लिए शुल्क वसूलना और अपने नियमों को प्रभावी ढंग से लागू कराना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, ईरान के वास्तविक राजस्व पर इसका कितना असर पड़ा है, इसका आकलन विस्तृत वित्तीय और शिपिंग आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकेगा। क्या बदल रहा है होर्मुज का शक्ति संतुलन? मौजूदा शिपिंग पैटर्न निश्चित तौर पर एक महत्वपूर्ण संकेत है। 80 फीसदी से ज्यादा जहाजों का ओमान की ओर वाले रास्ते का इस्तेमाल करना बताता है कि समुद्री कंपनियां जोखिम कम करने के लिए वैकल्पिक मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दे रही हैं। लेकिन होर्मुज पर ईरान का प्रभाव पूरी तरह खत्म हो गया है, ऐसा निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं होगा। आने वाले दिनों में जहाजों की आवाजाही, अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा और ईरान की प्रतिक्रिया से तस्वीर ज्यादा साफ होगी।
सियोल, एजेंसियां। चीन के विदेश मंत्री वांग यी 19 से 20 अगस्त तक दक्षिण कोरिया के आधिकारिक दौरे पर हैं। करीब पांच साल बाद हो रही उनकी यह पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा है। इस दौरान वांग यी दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों, कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत करेंगे। दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री से होगी अहम मुलाकात दक्षिण कोरिया पहुंचने के बाद वांग यी की विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ बातचीत और रात्रिभोज का कार्यक्रम है। दोनों नेता चीन-दक्षिण कोरिया संबंधों की प्रगति की समीक्षा करने के साथ आपसी हित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा पर रहेगा फोकस वांग यी की बातचीत में उत्तर कोरिया से जुड़े घटनाक्रम और कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा प्रमुख मुद्दों में शामिल रहने की उम्मीद है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास के स्वरूप में बदलाव तथा अमेरिका-उत्तर कोरिया के बीच संभावित बातचीत को लेकर क्षेत्र में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। राष्ट्रपति ली जे-म्यंग से भी मुलाकात वांग यी 20 अगस्त को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यंग से मुलाकात करेंगे। बैठक में दोनों देशों के संबंधों की आगे की दिशा और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर चर्चा होगी। इसके अलावा वांग यी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वी सुंग-लाक के साथ भी बैठक और दोपहर के भोजन में शामिल होंगे। APEC शिखर सम्मेलन की तैयारियों पर भी चर्चा वांग यी का यह दौरा नवंबर में चीन के शेनझेन में होने वाले APEC शिखर सम्मेलन से पहले हो रहा है। दोनों देश उच्चस्तरीय संपर्क और आगामी कूटनीतिक बैठकों की तैयारियों पर भी चर्चा कर सकते हैं।
काबुल, एजेंसियां। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के दश्त-ए-बरची इलाके में एक स्कूल परिसर के पास हुए ग्रेनेड विस्फोट में कम से कम 42 बच्चे घायल हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार घायल बच्चों की उम्र 9 से 14 वर्ष के बीच है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और जांच शुरू कर दी गई है। स्कूल के पास हुआ धमाका विस्फोट सोमवार को काबुल के पश्चिमी हिस्से में स्थित दश्त-ए-बरची इलाके में हुआ। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, धमाके में कई बच्चे घायल हुए और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। शुरुआती जानकारी में इसे हैंड ग्रेनेड से हुआ विस्फोट बताया गया है। 42 बच्चों के घायल होने की पुष्टि संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन (UNAMA) ने कम से कम 42 बच्चों के घायल होने की पुष्टि की है। स्थानीय मीडिया में घायलों की संख्या करीब 50 तक बताए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक घटना में किसी की मौत की पुष्टि नहीं की है। ISIS से जुड़े समूह पर शक तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि प्रारंभिक जांच में इस्लामिक स्टेट (ISIS) या उससे जुड़े किसी समूह की भूमिका की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी आधिकारिक रूप से नहीं ली है। सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने की कड़ी निंदा बच्चों को निशाना बनाने वाली इस घटना पर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है और स्वतंत्र एवं पूरी जांच की मांग की है। यह इलाका मुख्य रूप से हजारा समुदाय की आबादी वाला क्षेत्र है और अतीत में भी यहां हिंसक हमले हो चुके हैं। ताजा घटना ने काबुल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता फिर बढ़ा दी है।