पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए बड़ी पहल की तैयारी है। राज्य के 43 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में लाइब्रेरी विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही जहां जरूरत होगी, वहां लाइब्रेरियन के खाली पदों पर नियुक्ति भी की जाएगी। सरकार ने इस योजना के लिए 134 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।
योजना के तहत मिडिल स्कूलों में लाइब्रेरी के संचालन और किताबों की देखरेख के लिए लाइब्रेरियन की बहाली की जाएगी। फिलहाल राज्य के सरकारी स्कूलों में करीब दो हजार लाइब्रेरियन कार्यरत हैं और कई स्कूलों में पद खाली हैं।
वहीं, प्राइमरी स्कूलों में अलग से लाइब्रेरियन नियुक्त करने के बजाय हेडमास्टर और शिक्षकों को लाइब्रेरी की जिम्मेदारी दी जाएगी। बच्चों को कक्षा के स्तर के अनुसार किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी।
स्कूलों में लाइब्रेरी की सुविधा विकसित करने के लिए सरकार ने 134 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। यह योजना केंद्र सरकार के समग्र शिक्षा अभियान के तहत लागू की जाएगी।
जिन स्कूलों में पहले से लाइब्रेरी मौजूद है, वहां सुविधाओं को बेहतर और आधुनिक बनाया जाएगा। जरूरत वाले स्कूलों में नए लाइब्रेरी भवन भी तैयार किए जाएंगे। इसके लिए बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना निर्माण निगम की ओर से निर्माण कार्य कराया जाएगा।
नई लाइब्रेरी को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे मैनुअल के साथ डिजिटल रूप में भी विकसित करने की तैयारी है। इससे विद्यार्थियों को ऑनलाइन किताबें और अध्ययन सामग्री पढ़ने का अवसर मिलेगा।
स्कूल लाइब्रेरी में पाठ्यक्रम से जुड़ी किताबों के साथ साहित्य, बाल साहित्य और मनोरंजन से संबंधित पुस्तकें भी रखी जाएंगी। विद्यार्थियों को हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास और राजनीति शास्त्र जैसे विषयों की किताबें उपलब्ध होंगी।
इसके अलावा मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, फणीश्वरनाथ रेणु, राहुल सांकृत्यायन, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और अमृतलाल नागर जैसे प्रमुख साहित्यकारों की रचनाएं भी बच्चों को पढ़ने के लिए मिलेंगी।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई के साथ बच्चों के बीच किताब पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना है। कहानी, बाल साहित्य और ज्ञानवर्धक पुस्तकों के जरिए विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से बाहर की दुनिया से भी परिचित कराया जाएगा।
43 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में लाइब्रेरी और डिजिटल संसाधनों के विस्तार से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी बेहतर पठन सामग्री उपलब्ध होने की उम्मीद है। अब इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और लाइब्रेरियन नियुक्ति प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए बड़ी पहल की तैयारी है। राज्य के 43 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में लाइब्रेरी विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही जहां जरूरत होगी, वहां लाइब्रेरियन के खाली पदों पर नियुक्ति भी की जाएगी। सरकार ने इस योजना के लिए 134 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। मिडिल स्कूलों में होगी लाइब्रेरियन की नियुक्ति योजना के तहत मिडिल स्कूलों में लाइब्रेरी के संचालन और किताबों की देखरेख के लिए लाइब्रेरियन की बहाली की जाएगी। फिलहाल राज्य के सरकारी स्कूलों में करीब दो हजार लाइब्रेरियन कार्यरत हैं और कई स्कूलों में पद खाली हैं। वहीं, प्राइमरी स्कूलों में अलग से लाइब्रेरियन नियुक्त करने के बजाय हेडमास्टर और शिक्षकों को लाइब्रेरी की जिम्मेदारी दी जाएगी। बच्चों को कक्षा के स्तर के अनुसार किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। 134 करोड़ रुपये की मंजूरी स्कूलों में लाइब्रेरी की सुविधा विकसित करने के लिए सरकार ने 134 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। यह योजना केंद्र सरकार के समग्र शिक्षा अभियान के तहत लागू की जाएगी। जिन स्कूलों में पहले से लाइब्रेरी मौजूद है, वहां सुविधाओं को बेहतर और आधुनिक बनाया जाएगा। जरूरत वाले स्कूलों में नए लाइब्रेरी भवन भी तैयार किए जाएंगे। इसके लिए बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना निर्माण निगम की ओर से निर्माण कार्य कराया जाएगा। डिजिटल लाइब्रेरी की भी होगी सुविधा नई लाइब्रेरी को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे मैनुअल के साथ डिजिटल रूप में भी विकसित करने की तैयारी है। इससे विद्यार्थियों को ऑनलाइन किताबें और अध्ययन सामग्री पढ़ने का अवसर मिलेगा। लाइब्रेरी में 100 तरह की किताबें स्कूल लाइब्रेरी में पाठ्यक्रम से जुड़ी किताबों के साथ साहित्य, बाल साहित्य और मनोरंजन से संबंधित पुस्तकें भी रखी जाएंगी। विद्यार्थियों को हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास और राजनीति शास्त्र जैसे विषयों की किताबें उपलब्ध होंगी। इसके अलावा मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, फणीश्वरनाथ रेणु, राहुल सांकृत्यायन, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और अमृतलाल नागर जैसे प्रमुख साहित्यकारों की रचनाएं भी बच्चों को पढ़ने के लिए मिलेंगी। बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने पर जोर सरकार की इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई के साथ बच्चों के बीच किताब पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना है। कहानी, बाल साहित्य और ज्ञानवर्धक पुस्तकों के जरिए विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से बाहर की दुनिया से भी परिचित कराया जाएगा। 43 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में लाइब्रेरी और डिजिटल संसाधनों के विस्तार से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी बेहतर पठन सामग्री उपलब्ध होने की उम्मीद है। अब इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और लाइब्रेरियन नियुक्ति प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
पटना, एजेंसियां। बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4.0 को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार चर्चा में है। लंबे इंतजार और विरोध-प्रदर्शन के बीच बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने आखिरकार 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया है। आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर 2026 से शुरू होगी। आंदोलन के बीच जारी हुआ भर्ती विज्ञापन TRE-4.0 का विज्ञापन जारी होने से पहले अभ्यर्थियों ने पटना के गर्दनीबाग में अनिश्चितकालीन अनशन और धरना शुरू किया था। अभ्यर्थी लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और पदों की संख्या स्पष्ट करने की मांग कर रहे थे। BPSC की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक इस चरण में कुल 32,388 रिक्त शिक्षक पद भरे जाएंगे। आवेदन के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया 1 सितंबर से शुरू होगी। विज्ञापन आने के बाद भी अभ्यर्थी नाराज भर्ती विज्ञापन जारी होने के बावजूद आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक अभ्यर्थियों का एक समूह एकल परीक्षा और नो निगेटिव मार्किंग जैसी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखे हुए है। उनका कहना है कि केवल भर्ती का विज्ञापन जारी होना उनकी सभी मांगों का समाधान नहीं है। अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अन्य लंबित प्रतियोगी परीक्षाओं को समय पर कराने की मांग भी उठाई है। दो साल से इंतजार का दावा TRE-4.0 को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लंबे समय से चल रहा था। विज्ञापन में देरी के कारण पटना में पहले भी प्रदर्शन हुए और पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं। हालिया आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी थी। अब 32,388 पदों का विज्ञापन जारी होने के बाद अभ्यर्थियों के एक वर्ग की नजर आवेदन प्रक्रिया, परीक्षा की तारीख और चयन प्रक्रिया की अगली जानकारी पर है। BPSC के इस भर्ती अभियान से बिहार में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हजारों उम्मीदवारों को बड़ा अवसर मिलने वाला है।
भागलपुर और मुंगेर के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना अब आगे बढ़ रही है। सुलतानगंज से मुंगेर तक करीब 42 किलोमीटर लंबा फोरलेन मरीन ड्राइव बनाया जाना प्रस्तावित है। करीब ₹5,119 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना के पूरा होने से यातायात, पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित सड़क 44 गांवों और विभिन्न आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। ₹5,119 करोड़ की लागत से बनेगा फोरलेन सुलतानगंज से मुंगेर के सफियाबाद, बरियारपुर और घोरघट होते हुए प्रस्तावित गंगापथ करीब 42 किलोमीटर लंबा होगा। इसका निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर किया जाना है। बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड को परियोजना की जिम्मेदारी दी गई है। निर्माण शुरू होने से पहले पर्यावरण और वन से जुड़े पहलुओं का आकलन किया जा रहा है। 726 पेड़ों पर पड़ेगा असर परियोजना की राह में आने वाले 726 पेड़ों को लेकर भी योजना तैयार की गई है। इनमें 517 पेड़ों को हटाने और 209 पेड़ों को ट्रांसलोकेट करने का प्रस्ताव है। यानी जिन पेड़ों को तकनीकी रूप से सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह लगाया जा सकता है, उन्हें काटने के बजाय स्थानांतरित करने की योजना है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए वन एवं पर्यावरण संबंधी मंजूरी अहम होगी। श्रीकृष्ण सेतु से जुड़ेगा मरीन ड्राइव प्रस्तावित मरीन ड्राइव को श्रीकृष्ण सेतु से इंटरचेंज के माध्यम से जोड़ने की योजना है। इससे मुंगेर और उत्तरी बिहार के बीच आवागमन के लिए एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो सकता है। इसके साथ ही मरीन ड्राइव को मुंगेर शहर के लिए बाइपास के तौर पर विकसित करने की योजना है। इससे शहर के भीतर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। कांवरियों और स्थानीय लोगों को भी फायदा सुलतानगंज से गंगाजल लेकर बाबाधाम जाने वाले कांवरियों के लिए भी बेहतर सड़क संपर्क उपयोगी साबित हो सकता है। सुलतानगंज और मुंगेर के बीच वैकल्पिक मार्ग मिलने से यात्रा व्यवस्था आसान होने की उम्मीद है। इसका लाभ केवल धार्मिक यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। स्थानीय लोगों के आवागमन और क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था में भी सुधार की संभावना है। पर्यटन को मिलेगा नया रास्ता परियोजना को पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी से मुंगेर किला, चंडिका स्थान, कष्टहरणी घाट, योगाश्रम, खड़गपुर झील, भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य और पीरशाह नूफा का मकबरा जैसे स्थलों तक पहुंच आसान हो सकती है। गंगा किनारे घाटों के विकास और नए घाटों के निर्माण की योजनाएं भी परियोजना से जुड़ी बताई गई हैं। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। 44 गांवों और इलाकों से होकर गुजरेगा मार्ग परियोजना रिपोर्ट में मार्ग से प्रभावित होने वाले कई गांवों और क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। इनमें हंडियो, मोहिउद्दीनपुर, संग्रामपुर, हिरोदरिया, मोकबिरा, शंकरपुर, सिकंदरपुर, सितालपुर, अजोध्या, चक इब्राहिमपुर, मिर्जापुर बराडा, नौगढ़ी, तारापुर दियारा, बिनदियारा, निरपुर और कटगोला समेत कई क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों में बेहतर सड़क संपर्क से बाजार, परिवहन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। पर्यावरण मंजूरी के बाद बढ़ेगा निर्माण का काम फिलहाल परियोजना पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया में है। तकनीकी टीम और वन विभाग के अधिकारियों की ओर से स्थल निरीक्षण किया जा चुका है और वृक्ष संरक्षण योजना भी तैयार की गई है। अब मंजूरी मिलने के बाद निर्माण से जुड़े अगले चरण आगे बढ़ेंगे। अगर परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार पूरी होती है, तो भागलपुर-सुलतानगंज-मुंगेर कॉरिडोर की कनेक्टिविटी, यातायात और पर्यटन की तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।